कोरबा

कोरबा : नालों पर पानी रोकने के कामों में लापरवाही, कलेक्टर ने कटघोरा के एसएडीओ की वेतन वृद्धि रोकने दिये निर्देश

कोरबा : नालों पर पानी रोकने के कामों में लापरवाही, कलेक्टर ने कटघोरा के एसएडीओ की वेतन वृद्धि रोकने दिये निर्देश

कोरबा : छत्तीसगढ़ सरकार की सुराजी गांव योजना के तहत् नालों पर जल संरक्षण एवं संवर्धन के कामों में से कई को अभी तक शुरू नहीं करने और शुरू हुये कामों की धीमी प्रगति पर कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल ने अधिकारियों और मैदानी अमले पर गहरी नाराजगी जताई। श्रीमती कौशल ने आगामी एक सप्ताह में नरवा विकास के कामों में लक्ष्यानुसार इच्छित प्रगति नहीं होने पर सभी अधिकारी-कर्मचारियों को कड़ी कार्यवाही की चेतावनी भी दी है। श्रीमती कौशल ने गुरूवार को सुबह से ही जिला पंचायत के सभाकक्ष में नरवा, गरूआ, घुरवा, बाड़ी विकास कार्यक्रम के तहत् किये जा रहे कार्यों की गहन समीक्षा की और कामों की धीमीं गति पर नाराजगी व्यक्त की। इस दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एस. जयवर्धन, उपायुक्त श्रीमती वंदना गबेल सहित संबंधित विभागों के जिला स्तरीय, विकासखण्ड स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे। कलेक्टर ने गौठानो में वर्मी कम्पोष्ठ खाद बनाने के लिये वर्मी बेड निर्माण और समिति सदस्यों को तकनीकी मार्गदर्शन देने में लापरवाही बरतने पर कटघोरा विकासखण्ड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी आर.के. सोनवानी को कारण-बताओ नोटिस जारी करते हुये एक वेतन वृद्धि रोकने के निर्देश उप संचालक कृशि को दिये।

नरवा विकास के काम में प्रगति नहीं होने पर संबंधित जनपद सीईओ होंगे जिम्मेदार, होगी कड़ी कार्यवाहीः- बैठक में कलेक्टर ने सभी जनपदों में नालों पर जल संवर्धन के कामों की प्रगति के लिये जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी। उन्होंने आगामी एक सप्ताह में कामों में प्रगति नहीं आने पर जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों पर भी कार्यवाही की चेतावनी दी। श्रीमती कौशल ने नालों पर पानी रोकने के कामों को शुरू करने में देरी पर आरईएस विभाग के सब इंजीनियरों तथा तकनीकी सहायकों के प्रति भी गहरी नाराजगी जतायी और गोपनीय चरित्रावली में प्रतिकूल टीप अंकित करने की भी चेतावनी दी। उन्होंने अधिकारियों और मैदानी अमले को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए आगामी 15 दिनों में सभी गौठानों के काम पूरे कराने के निर्देश दिए। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि नरवा विकास के कामों से जुड़े सभी सब इंजीनियर और तकनीकी सहायक अपने-अपने विकासखण्ड मुख्यालयों में निवास कर वन विभाग और जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों से आपसी समन्वय कर कामों में तेजी लायें।

श्रीमती कौशल ने गौठानों में पैरादान की वर्तमान स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होने प्रथम चरण में बने सभी गौठानों में 50-50 ट्रैक्टर से अधिक पैरा इक्ट्ठा कराने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए और पैरा इकट्ठा करने के काम को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिये। कलेक्टर ने दूसरे चरण में स्वीकृत हुये सभी गौठानों में शेड, कोटना आदि आधारभूत निर्माणकार्य भी आगामी 15 दिनों में पूरा कराने के निर्देश दिए है। उन्होने गौठानों में निर्धारित संख्या में प्रतिदिन पशुओं का आना सुनिश्चित करने के लिए ग्राम सचिवों को निर्देशित किया और गौठान समितियों के सदस्यों को भी प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने गौठानों को समग्र गतिविधि केन्द्रो के रूप में विकसित करने के लिए सभी जरूरी अधोसंरचना और गौठान समितियों को प्रशिक्षण देने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

संशोधित होंगी गौठान संचालन समितियॉंः- बैठक में कलेक्टर श्रीमती कौशल ने गौठान समितियों द्वारा गौठानों के संचालन के लिये किये जा रहे कामों की समीक्षा की। उन्होंने गौठान समितियों को प्रतिमाह दी जा रही दस हजार रूपये की राशि गौठानों में छोटे-छोटे मरम्मत कामों के लिये भी खर्च करने के निर्देश दिये। श्रीमती कौशल ने राज्य शासन के निर्देशानुसार गौठान समितियों को संशोधित करने के लिये भी कहा। गौठान समितियों में ग्राम पंचायत के सरपंच पदेन सदस्य होंगे। ग्राम पंचायत सचिव समितियों के पदेन सचिव होंगे। श्रीमती कौशल ने समितियों में अध्यक्ष के लिये योग्य व्यक्ति का नाम अनुविभागीय राजस्व अधिकारी के अनुमोदन से चयनित कर जिला पंचायत भेजने के निर्देश दिये। संशोधित गौठान समितियों में कोषाध्यक्ष का पद अब नहीं रहेगा। कोषाध्यक्ष के सभी काम समिति के पदेन सचिव द्वारा संपादित किये जावेंगे।

गौठान समितियों ने एक लाख ब्यासी हजार से अधिक रूपयों का बेचा वर्मी कम्पोष्ठः- जिले के गौठानों में बढ़ रहे वर्मी कम्पोष्ठ की बिक्री वन विभाग, कृषि विभाग और उद्यानिकी विभाग में हो रही है। अब तक जिले में गौठान में स्व सहायता समूहों द्वारा 195 क्विंटल वर्मी कम्पोश्ठ का उत्पादन किया है। इस उत्पादित जैविक खाद को स्व सहायता समूहों ने बेंचकर एक लाख ब्यासी हजार रूपये से अधिक की आमदनी प्राप्त की है। कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल ने आज बैठक के दौरान वर्मी कम्पोश्ठ विक्रय करने वाले पॉंच स्व सहायता समूहों को बिक्री राशि के चेक भी प्रदान किये और इस रोजगारमूलक काम के लिये बधाई तथा शुभकामनायें दी। जिले की गौठानों में उत्पादित वर्मी कम्पोष्ठ 936 रूपये क्विंटल की दर से शासकीय एवं निजी क्षेत्रों द्वारा क्रय किया जा रहा है। वर्तमान में 26 गौठानों में वर्मी कम्पोष्ठ उत्पादन का काम स्व सहायता समूह लगातार कर रहे हैं। अन्य गौठानों में भी जैविक खाद उत्पादन के लिये सभी जरूरी व्यवस्थायें एवं प्रशिक्षण के निर्देश कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को दिये हैं।

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