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    राज्यपाल ने पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी की जयंती पर किया नमन

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बस्तर

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छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस के रजत जयंती वर्ष में दंडामी लक्जरी रिसोर्ट चित्रकोट बस्तर में हुई पारंपरिक छत्तीसगढ़ी-जनजातीय व्यंजन प्रतियोगिता

Posted on :10-Dec-2025
छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस के रजत जयंती वर्ष में दंडामी लक्जरी रिसोर्ट चित्रकोट बस्तर में हुई पारंपरिक छत्तीसगढ़ी-जनजातीय व्यंजन प्रतियोगिता

द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार

बस्तर : छत्तीसगढ़ स्थापना के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड ने राज्य के सांस्कृतिक एवं पर्यटन संवर्धन के लिए विशेष कार्यक्रमों की श्रृंखला की शुरूआत की है। इसी कड़ी में 09 दिसंबर को दंडामी लक्जरी रिसॉर्ट, चित्रकोट बस्तर में एक अनूठी पारंपरिक छत्तीसगढ़ी एवं जनजातीय व्यंजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस के रजत जयंती वर्ष में दंडामी लक्जरी रिसोर्ट चित्रकोट बस्तर में हुई पारंपरिक छत्तीसगढ़ी-जनजातीय व्यंजन प्रतियोगिता

इस प्रतियोगिता में बस्तर के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिभागी शामिल हुए, जिन्होंने छत्तीसगढ़ के समृद्ध खानपान परंपरा को जीवंत करते हुए मुठिया, फरा, बफौरी, अंगाकर रोटी, चीला, चौसेल, ठेठरी, खुरमी, दूध फरा, चांवल भजिया, उड़द दाल बड़ा, अरसा, नमकीन फरा, विभिन्न प्रकार की भाजी, कोदो व चापड़ा से संबंधित पारंपरिक व्यंजन जैसे चापड़ा चटनी, चांउर भारजा, आमट, मीठा बोबो आदि बनाए।

प्रतियोगिता में मेन्द्रीघूमड़ के चन्दकी ग्रुप ने प्रथम स्थान हासिल कर 7000 रुपए का पुरस्कार जीता। द्धितीय स्थान पर उसड़ीबेड़ा के गीता कश्यप ग्रुप को 5000 रुपये तथा तृतीय स्थान पर घुरागांव के जागृति ग्रुप को 3000 रुपए की राशि प्रदान की गई। निर्णायक मंडल ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्रों से सम्मानित भी किया।

छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस के रजत जयंती वर्ष में दंडामी लक्जरी रिसोर्ट चित्रकोट बस्तर में हुई पारंपरिक छत्तीसगढ़ी-जनजातीय व्यंजन प्रतियोगिता

प्रतियोगिता के निर्णायक लोहण्डीगुड़ा थाना प्रभारी श्री रवि बैगा, तहसीलदार श्री कैलाश पोयाम एवं नायाब तहसीलदार सुश्री खुशबु नेताम थे। इस अवसर पर दंडामी लक्जरी रिसॉर्ट के प्रबंधक श्री निमेष साहू सहित कर्मचारी गण श्री तरुण प्रकाश राव एवं चंदूलाल साहू उपस्थित 
छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड का यह आयोजन छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय परंपराओं को संरक्षित कर राज्य पर्यटन को प्रोत्साहित करने में सहायक सिद्ध

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वर्षों बाद खेल मैदान में लौटीं महिलाएं, बस्तर ओलंपिक बना जड़ों से जोड़ने का माध्यम

Posted on :05-Dec-2025
वर्षों बाद खेल मैदान में लौटीं महिलाएं, बस्तर ओलंपिक बना जड़ों से जोड़ने का माध्यम

द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार

विवाह और जिम्मेदारियों के बाद फिर मिला खेल का अवसर

हम पूरी मेहनत करेंगे और यकीन है कि हमें मिलेगी जीत--श्रीमती सरोज पोडियाम

बस्तर :  बस्तर ओलम्पिक 2025  का आयोजन इस वर्ष कई महिलाओं को अपनी जड़ों से दोबारा जुड़ने का अवसर मिला है, ऐसी ही महिलाओं में शामिल हैं श्रीमती सरोज पोडियाम, जो विवाह और पारीवारिक जिम्मेदारियों के चलते वर्षों से खेल से दूर थीं। तीन वर्ष की बच्ची की मां होने के बावजूद उन्होंने खेल मैदान में वापसी कर सभी को प्रेरित किया।

वर्षों बाद खेल मैदान में लौटीं महिलाएं, बस्तर ओलंपिक बना जड़ों से जोड़ने का माध्यम

रस्साकसी में संभाग स्तर का मिला टिकट, महिलाओं ने दिखाया जोरदार प्रदर्शन

सरोज पोडियाम कोंटा विकासखंड के दूरस्थ मुरलीगुड़ा ग्राम की निवासी हैं। वह बताती हैं कि बस्तर ओलम्पिक शुरू होने से उन्हें स्कूल के दिनों की खो-खो और कबड्डी जैसे खेलों की यादें ताजा हो गईं। सरोज बताती हैं हम महिलाओं का अधिकतर समय परिवार, बच्चे और गृहकार्य में बीत जाता है। लेकिन बस्तर ओलम्पिक ने हमें फिर से अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका दिया। इस बार संभाग स्तर तक पहुंचना हम सभी के लिए बड़ी खुशी की बात है।

बस्तर ओलम्पिक में सरोज पोडियाम और उनकी टीम ने रस्साकसी में दमदार प्रदर्शन करते हुए संभाग स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयन हासिल किया है। टीम की इस उपलब्धि से पूरे परिवार और गांव में खुशी का माहौल है। सरोज कहती हैं कि हम सभी महिला साथी बहुत खुश हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी का धन्यवाद, जिन्होंने हमें अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया। इस बार पूरा प्रयास रहेगा कि हम संभाग में अपने जिले को जीत दिलाएं। बस्तर ओलम्पिक ने हमें दोबारा खेलने का मौका दिया और आस-पास की सभी महिला साथी भी शामिल हुईं।

वर्षों बाद खेल मैदान में लौटीं महिलाएं, बस्तर ओलंपिक बना जड़ों से जोड़ने का माध्यम

माओवादी हिंसा से प्रभावित परिवार, संघर्ष से उपलब्धि तक की यात्रा

सरोज पोडियाम का परिवार माओवादी हिंसा से प्रभावित रहा है। वर्ष 2009 में नक्सलियों द्वारा उनके ससुर की हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद परिवार गहरे संकट में आ गया। घटना के बाद शासन ने नवा बिहान योजना के तहत सुकमा में उन्हें आवास उपलब्ध कराया तथा उनके पति श्री राकेश को नगर सैनिक के रूप में पदस्थ कर परिवार को संबल दिया। आज वही परिवार संघर्ष की राह से निकलकर बस्तर ओलम्पिक में उपलब्धि की नई कहानी लिख रही है।

वर्षों बाद खेल मैदान में लौटीं महिलाएं, बस्तर ओलंपिक बना जड़ों से जोड़ने का माध्यम

टीम का दम, महिलाओं की एकजुटता बनी ताकत

सरोज पोडियाम ने बताया कि उनकी टीम में नंदिता सोढ़ी, सरिता पोडियामी, लिपिका डे, मुन्नी नाग, ललिता यादव, पुनम भेखर, जसवंती वेट्टी, बण्डी बारसे शामिल हैं। सब महिलाओं ने मिलकर बेहतरीन तालमेल से प्रदर्शन किया और संभाग स्तर तक पहुंचने का गौरव पाया।

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बस्तर में शांति का नया अध्याय, नक्सल मुक्त इलाकों में वानिकी बन रहा रोजगार का प्रमुख जरिया

Posted on :05-Dec-2025
बस्तर में शांति का नया अध्याय, नक्सल मुक्त इलाकों में वानिकी बन रहा रोजगार का प्रमुख जरिया

द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार

बस्तर : बस्तर जिले के सुदूर वनांचल में बसे क्षेत्र चांदामेटा, मुण्डागढ़, छिन्दगुर और तुलसी डोंगरी जो कभी नक्सल गतिविधियों के गढ़ माने जाते थे, अब विकास और शांति का नया अध्याय लिख रहे हैं। जिन पहाड़ियों और जंगलों में कभी नक्सलियों की ट्रेनिंग हुआ करती थी, वहीं आज वन विभाग स्थानीय युवाओं को वानिकी कार्यों का प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार उपलब्ध करा रहा है।

नक्सल मुक्त इलाकों में वानिकी बन रहा रोजगार का प्रमुख जरिया

इन इलाकों में लंबे समय तक नक्सलियों के प्रभाव तथा उनसे जुड़े लोगों द्वारा कानूनों की गलत व्याख्या ने ग्रामीणों को विकास की मुख्यधारा से दूर रखा। शासन के प्रति अविश्वास का वातावरण बना दिया गया। लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। ग्रामीणों ने इन तत्वों की वास्तविक मंशा को समझ लिया है और अब वे दूसरों की लड़ाई में अपना समय और भविष्य गंवाने को तैयार नहीं हैं। वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा लगातार किए जा रहे संवाद, जागरूकता और विश्वास निर्माण ने ग्रामीणों का नजरिया बदला है। स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों को उनके ही गांव के आसपास वानिकी कार्यों में रोजगार देकर न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत की जा रही है, बल्कि उन्हें सामाजिक रूप से भी सशक्त बनाया जा रहा है।

नक्सल मुक्त इलाकों में वानिकी बन रहा रोजगार का प्रमुख जरिया

बांस वन प्रबंधन से बड़ा आर्थिक लाभ

ग्राम मुण्डागढ़ के समीप स्थित बांस वनों का इस वर्ष वैज्ञानिक तरीके से वन-उपचार किया गया है। ग्रामीणों द्वारा किए जा रहे इस कार्य से लगभग 20 लाख रुपये का तत्काल रोजगार सीधे उनके बैंक खातों में पहुँचेगा। आने वाले तीन वर्षों में लगभग 01 करोड़ 37 लाख रुपये के अतिरिक्त रोजगार की संभावना है। इस क्षेत्र से प्राप्त 566 नोशनल टन बांस के उत्पादन का शत-प्रतिशत लाभांश वन प्रबंधन समिति के माध्यम से ग्रामीण विकास में ही खर्च किया जाएगा।

नक्सल मुक्त इलाकों में वानिकी बन रहा रोजगार का प्रमुख जरिया

क्षेत्रीय वानिकी उपचार से बढ़ेगा रोजगार

छिन्दगुर और चांदामेटा के पहाड़ी क्षेत्रों में इस वर्ष प्रवरण सह सुधार कार्य के तहत बीमार, वृद्ध और मृत वृक्षों को हटाकर जंगल का उपचार किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों को 32 लाख रुपये का तत्काल रोजगार मिल रहा है। काष्ठ उत्पादन से प्राप्त आय का 20 प्रतिशत लाभांश भी गांव की समिति को मिलेगा। अगले 6 वर्षों में लगभग 43 लाख रुपये का अतिरिक्त रोजगार वन उपचार के माध्यम से उपलब्ध होगा। इसके अलावा वन विभाग ग्रामीणों से सतत संपर्क में रहते हुए उनकी आवश्यकताओं का समाधान भी कर रहा है। ठंड से बचाव के लिए कंबल वितरण, समिति सदस्यों को टी-शर्ट उपलब्ध कराना जैसी जरूरतें तुरंत पूरी की जा रही हैं।

नक्सल मुक्त इलाकों में वानिकी बन रहा रोजगार का प्रमुख जरिया

वन मंडलाधिकारी श्री उत्तम गुप्ता ने कहा कि एक समय भय और हिंसा की पहचान रहे ये इलाके आज शांति, आजीविका और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। वानिकी कार्यों के माध्यम से जल, जंगल एवं जमीन का संरक्षण करते हुए ग्रामीणों को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराई जा रही है। बस्तर के नक्सल मुक्त गांव अब साबित कर रहे हैं कि जब विश्वास और विकास साथ आते हैं, तो परिस्थितियाँ बदलना केवल समय की बात होगी।

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बस्तर ओलंपिक के संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन 11 से 13 दिसम्बर तक उप मुख्यमंत्रीद्वय श्री अरुण साव और श्री विजय शर्मा ने तैयारियों की समीक्षा की

Posted on :01-Dec-2025
बस्तर ओलंपिक के संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन 11 से 13 दिसम्बर तक  उप मुख्यमंत्रीद्वय श्री अरुण साव और श्री विजय शर्मा ने तैयारियों की समीक्षा की

द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार

आयोजन से जुड़े सभी विभागों को उत्कृष्ट और पुख्ता तैयारियों के निर्देश, स्थानीय लोगों के साथ ही ज्यादा से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय खिलाड़ियों को बस्तर ओलंपिक से जोड़ने कहा

संभाग स्तरीय स्पर्धाओं में 3500 खिलाड़ी दिखाएंगे अपना कौशल और दमखम, नक्सल पीड़ित और पुनर्वासित नक्सली भी करेंगे भागीदारी

बस्तर  : उप मुख्यमंत्रीद्वय श्री अरुण साव और श्री विजय शर्मा ने बस्तर ओलंपिक-2025 के संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं के आयोजन की तैयारियों की समीक्षा की। संभागीय मुख्यालय जगदलपुर में 11 दिसम्बर से 13 दिसम्बर तक इसका आयोजन किया जाएगा। बस्तर ओलंपिक के जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं के तीन हजार विजेता खिलाड़ी संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे। करीब 500 नक्सल पीड़ित और पुनर्वासित नक्सली भी इन स्पर्धाओं में हिस्सेदारी करेंगे। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के रायपुर के सिविल लाइन स्थित निवास कार्यालय में हुई बैठक में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार भी शामिल हुए। संभागायुक्त श्री डोमन सिंह और पुलिस महानिरीक्षक श्री सुंदरराज पी. के साथ बस्तर संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के सीईओ तथा खेल अधिकारी बैठक में वर्चुअली शामिल हुए।

उप मुख्यमंत्रीद्वय श्री अरुण साव और श्री विजय शर्मा ने तैयारियों की समीक्षा की

उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने बैठक में कहा कि बस्तर ओलंपिक केवल खेलों का आयोजन नहीं है, बल्कि विकास और खेल का संगम है। यह बस्तर के युवाओं के सशक्तीकरण और उनमें नेतृत्व के विकास की पहल है। राज्य सरकार बस्तर के युवाओं को खेल, संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना चाहती है। उन्होंने संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं के सफल और उत्कृष्ट आयोजन के लिए सभी विभागों को परस्पर समन्वय के साथ पुख्ता तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रतिभागियों के लिए की जा रही व्यवस्थाओं में किसी भी तरह की कमी या खामी नहीं छोड़ते हुए आयोजन स्थलों, खेल प्रबंधन, आवास, साफ-सफाई, भोजन, परिवहन, सुरक्षा, सांस्कृतिक कार्यक्रमों इत्यादि के लिए उत्कृष्ट व्यवस्थाएं बनाने को कहा। श्री साव ने कहा कि बस्तरवासियों के साथ ही देश और दुनिया में बस्तर ओलंपिक का बहुत अच्छा और सकारात्मक संदेश जाना चाहिए।

उप मुख्यमंत्री तथा गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने बस्तर ओलंपिक के आयोजन से जुड़े सभी विभागों और अधिकारियों को इसे यादगार बनाने अपनी-अपनी भूमिका और कार्यों के अनुरूप दायित्वों का गंभीरता व सक्रियता से वहन करने के निर्देश दिए। उन्होंने बस्तर के युवाओं को खेलों से जोड़ने तथा उनकी ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों में लगाने के लिए प्रेरित करने स्थानीय लोगों के साथ ही ज्यादा से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय खिलाड़ियों को बस्तर ओलंपिक के संभाग स्तरीय आयोजन से जोड़ने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को पिछले बस्तर ओलंपिक के विजेताओं और इस बार के विजेताओं को यूथ-आइकॉन बनाकर ज्यादा से ज्यादा गतिविधियों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा जिससे अन्य लोग भी प्रेरित हों। 

उप मुख्यमंत्रीद्वय श्री अरुण साव और श्री विजय शर्मा ने तैयारियों की समीक्षा की

बस्तर जिले के प्रभारी खेल अधिकारी श्री ऋषिकेश तिवारी ने बैठक में बताया कि बस्तर ओलंपिक में भाग लेने के लिए संभाग के सभी 32 विकासखंडों के कुल तीन लाख 91 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने अपना पंजीयन कराया था। विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिताओं के दस हजार से अधिक विजेता खिलाड़ियों ने जिला स्तरीय स्पर्धाओं में भागीदारी की। जिला स्तरीय आयोजनों के करीब तीन हजार विजेता संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे। संभाग स्तरीय स्पर्धाओं में लगभग 500 नक्सल पीड़ित और पुनर्वासित नक्सली भी हिस्सेदारी करेंगे। 11 खेलों एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, कराटे, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल और रस्साखींच में ये अपना खेल कौशल दिखाएंगे। 

श्री तिवारी ने बताया कि बस्तर ओलंपिक के संभाग स्तरीय आयोजन के दौरान जगदलपुर के सिटी ग्राउंड में फुटबॉल, व्हॉलीबॉल, कराटे, वेटलिफ्टिंग एवं बैडमिंटन स्पर्धाएं होगी। पंडरीपानी स्थित खेलो इंडिया सेंटर में हॉकी के मैच होंगे। वहीं धरमपुरा स्थित क्रीड़ा परिसर में कबड्डी, खो-खो, आर्चरी, एथलेटिक्स और रस्साकसी की प्रतियोगिताएं होंगी। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक श्रीमती तनूजा सलाम, उप संचालक श्रीमती रश्मि ठाकुर एवं अन्य विभागीय अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।

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बस्तर में विद्युत क्रांति : 25 वर्षों में हर गांव तक पहुंची बिजली की रोशनी

Posted on :03-Nov-2025
बस्तर में विद्युत क्रांति : 25 वर्षों में हर गांव तक पहुंची बिजली की रोशनी

द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार

दूरस्थ ग्रामीण इलाकों तक हो रहा उजियारा

बस्तर : बस्तर की पावन धरा अब सिर्फ जंगलों और आदिवासी संस्कृति की गवाह नहीं रह गई, बल्कि बिजली की रोशनी हर गांवों में पहुंची है। पिछले पच्चीस वर्षों में जगदलपुर ग्रामीण संभाग ने विद्युतीकरण के क्षेत्र में जो छलांग लगाई है, वह किसी क्रांति से कम नहीं है। वर्ष 2000 में जहां एक गांव तक बिजली पहुंचाना चुनौती थी, वहीं 2025 में हर मजरा-टोला, हर घर रोशनी से जगमगा रहा है। अब बस्तर जिले में विद्युतीकरण का स्तर सौ फीसदी हो चुका है। आदिवासी बहुल इस इलाके के लिए यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। गांव-गांव में फैले विद्युत सुविधा ने जनजीवन को आसान किया। खेती-बाड़ी के लिए सिंचाई में भी किसानों को बड़ी सहूलियत हो रही है।

 बस्तर में विद्युत क्रांति

कार्यपालन अभियंता जगदलपुर ग्रामीण संभाग श्री पीके अग्रवानी ने बताया कि जगदलपुर ग्रामीण संभाग के 577 गांव और शहर क्षेत्र का एक गांव मिलाकर कुल 578 गांव अब पूरी तरह बिजली से जुड़ चुके हैं। मजरा-टोलों की संख्या जहां बस्तर में राज्य निर्माण के समय 3989 थी अब बढ़कर 5107 हो गई है, और इनमें से हर एक तक विद्युत की लाइनें पहुंच चुकी हैं।

यह बदलाव सिर्फ तारों और खंभों की कहानी नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे की लंबी कल्याणकारी क्रांति का परिणाम है। 33/11 केवी सब स्टेशनों की संख्या महज छह से बढ़कर 27 हो गई, जिनकी क्षमता 24 मेगावोल्ट एम्पीयर से छलांग लगाकर 138.70 मेगावोल्ट एम्पीयर तक जा पहुंच चुकी है। वहीं 11 केवी लाइनों का जाल 1390 किलोमीटर से बढ़कर 4850 किलोमीटर तक विस्तृत हो चुका है, जबकि कम वोल्टेज की लाइनें 2257 किलोमीटर से बढ़कर 6017 किलोमीटर तक पहुंच गई हैं। 

दूरस्थ ग्रामीण इलाकों तक हो रहा उजियारा

इस सफर में चुनौतियां भी कम नहीं रहीं। इस दौरान झारा घाटी में माओवादियों ने बिजली के टावर को गिरा दिया था, जिसके कारण 20 दिनों से अधिक समय तक आधे से अधिक बस्तर संभाग में बिजली गुल की भयावह समस्या उत्पन्न हुई थी। उसके बाद फिर ब्लैक आउट हुआ था। इन विद्युत अवरोध की स्थिति को देखते हुए बस्तर के समीप परचनपाल में लगभग 450 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित 400 केवी सब स्टेशन का निर्माण किया गया, जो क्षेत्रीय ग्रिड को मजबूत बनाते हुए बिजली की स्थिरता और गुणवत्ता सुनिश्चित कर रहा है। इसी क्रम में 132 केवी क्षमता का एक सब स्टेशन भी स्थापित की गई है, साथ ही 132 केवी लाइनें 180 किलोमीटर से 254 किलोमीटर तक विस्तारित हुई हैं। इन उच्च वोल्टेज सब स्टेशनों के साथ ट्रांसफॉर्मरों में नई क्षमताएं जुड़ीं है और दो गुणा तीन सौ पंद्रह, दो गुणा एक सौ साठ और पांच गुणा चालीस मेगावोल्ट एम्पीयर-जो वोल्टेज ड्रॉप को कम कर बिजली की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार ला रही हैं। 

इसके अतिरिक्त, 220 केवी और 33 केवी स्तर पर भी आधारभूत कार्य पूरे हो चुके हैं, जो दूरस्थ क्षेत्रों में भी निर्बाध और उच्च गुणवत्ता वाली विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं। इन आंकड़ों के पीछे की वास्तविक स्थिति उपभोक्ताओं की बढ़ती संख्या है। वर्ष 2000 में जहां कुल उपभोक्ता 5380 थे, वहीं आज दो लाख 19450 घरों तक बिजली का मीटर लग चुका है। सामान्य उपभोक्ता 59000 से बढ़कर एक लाख 68 हजार हो गए हैं। विद्युत पंप उपभोक्ता 900 से 9083 हो गए हैं और बीपीएल उपभोक्ताओं की संख्या 30 हजार से बढ़कर एक लाख 14 हजार तक जा पहुंची है। 

दूरस्थ ग्रामीण इलाकों तक हो रहा उजियारा

कार्यपालन अभियंता जगदलपुर ग्रामीण संभाग श्री प्रदीप अग्रवानी के अनुसार यह चमत्कार केंद्र की सौभाग्य योजना और दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना सहित मुख्यमंत्री मजरा-टोला विद्युतीकरण योजना का नतीजा है। अब बस्तर में बिजली की कमी से न ही उद्योगों के विकास रुकेंगे और न ही सिंचाई रुकेगी और न ही गांव अंधियारे में रहेंगे। 

यह विकास बस्तर को आत्मनिर्भर बनाने के साथ पूरे छत्तीसगढ़ के लिए मिसाल बन रहा है। आने वाले वर्षों में नवीकरण ऊर्जा पर जोर के साथ यह रोशनी और दूर तक चमकेगी। बस्तर अब अंधेरे का पर्याय नहीं, उजाले का नया ठौर बन गया है।

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वनमंत्री ने 48 लाख रुपए से अधिक के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन

Posted on :13-Oct-2025
वनमंत्री ने 48 लाख रुपए से अधिक के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन

द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार

हर गांव में दिखेगा विकास का नया रूप: मंत्री श्री केदार कश्यप

बस्तर : वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने आज बस्तर विकासखंड के ग्राम चमिया में 48 लाख रुपए से अधिक की लागत वाले विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। यह कार्य ग्रामीण इलाकों में सुविधाओं के विस्तार और अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए किए जा रहे हैं। वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार हर गाँव तक विकास पहुँचाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सुशासन की सरकार में मातृशक्ति को विशेष सम्मान मिला है। 

हर गांव में दिखेगा विकास का नया रूप: मंत्री श्री केदार कश्यप

मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि ग्राम पंचायत चमिया में 30 लाख रुपए की लागत से ‘महतारी सदन’ का निर्माण किया जाएगा। यह भवन महिलाओं के लिए सशक्तिकरण का केंद्र बनेगा, जहाँ स्व-सहायता समूहों की महिलाएँ प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी और रोजगार के नए अवसर पाएंगी। इसके अलावा, ग्राम बड़े अलनार में 6.10 लाख रुपए की लागत से पुलिया निर्माण और छोटे अलनार में 12.40 लाख रुपए की लागत से उचित मूल्य दुकान भवन का निर्माण किया जाएगा।

वनमंत्री ने 48 लाख रुपए से अधिक के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन

मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि महतारी सदन केवल एक भवन नहीं, बल्कि महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रतीक है। उन्होंने ग्रामीणों से आग्रह किया कि वे इन कार्यों की गुणवत्ता और समय पर पूर्णता सुनिश्चित करने में सहयोग दें। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य श्री निर्देश दिवान, अन्य जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

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'बस्तर राइजिंग' अभियान 8 अक्टूबर से होगा प्रारंभ: बस्तर की प्रतिभा, संस्कृति और संभावनाओं को मिलेगा राष्ट्रीय मंच

Posted on :08-Oct-2025
'बस्तर राइजिंग' अभियान 8 अक्टूबर से होगा प्रारंभ: बस्तर की प्रतिभा, संस्कृति और संभावनाओं को मिलेगा राष्ट्रीय मंच

द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार

बस्तर :  छत्तीसगढ़ शासन  के जनसंपर्क विभाग और बस्तर संभाग के सभी जिलों के जिला प्रशासन  के संयुक्त प्रयास से “बस्तर राइजिंग” नामक विशेष अभियान 8 अक्टूबर से शुरू होने जा रहा है। दो सप्ताह तक चलने वाला यह अभियान बस्तर संभाग के सातों जिलों में आयोजित किया जाएगा।

बस्तर राइजिंग अभियान 8 अक्टूबर से होगा प्रारंभ:बस्तर की प्रतिभा, संस्कृति  और संभावनाओं को मिलेगा राष्ट्रीय मंच – Hindinews

इस अभियान का उद्देश्य बस्तर की सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और उद्यमशील क्षमताओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करना है। अभियान के दौरान विशेषज्ञों, युवाओं, शिल्पकारों और स्थानीय समुदायों के बीच संवाद, कार्यशालाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन किए जाएंगे।

“बस्तर राइजिंग” का कारवां केशकाल, नारायणपुर, कोण्डागांव, सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, चित्रकोट, बारसूर और जगदलपुर का भ्रमण करेगा। इस दौरान बस्तर की कला, हस्तशिल्प, कृषि, पर्यटन, खेल और शिक्षा से जुड़ी संभावनाओं पर विशेष फोकस किया जाएगा।  अभियान का समापन रायपुर में “हार्मोनी फेस्ट 2025” के रूप में होगा, जिसमें बस्तर की प्रेरक कहानियाँ, नवाचार और सांस्कृतिक विरासत प्रदर्शित की जाएंगी। यह आयोजन “दिल मेला - दिल में ला” थीम पर आधारित होगा।

   

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मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से जुड़ेगा ग्रामीण अंचल

Posted on :07-Oct-2025
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से जुड़ेगा ग्रामीण अंचल

द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार

आमजन को मिलेगी सुलभ यातायात सुविधा

बस्तर : बस्तर अंचल के सुदूर वनांचलों में रहने वाले लोगों के आवागमन के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना शुरू की गई है। इसी कड़ी में कोण्डागांव जिले के ग्रामीण अंचल को जिला मुख्यालय से जोड़ने और आम नागरिकों को सुलभ यातायात सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का शुभारंभ पुराने बस स्टैंड से बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष और स्थानीय विधायक सुश्री लता उसेंडी ने हरी झंडी दिखाकर किया।

 मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना

राज्यव्यापी इस योजना की शुरुआत शनिवार को जगदलपुर से केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बसों को हरी झंडी दिखाकर की थी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के विजन में ग्रामीण परिवहन व्यवस्था सुदृढ़ हो ताकि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए गांवों से शहर तक आमजन को आने-जाने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

कोण्डागांव जिले में योजना के तहत पहली बस सेवा सुंदर ट्रेवल्स द्वारा प्रारंभ की गई है। शुरुआती चरण में बस का संचालन कोण्डागांव से विश्रामपुरी मार्ग पर किया जा रहा है। तय समयानुसार यह बस सुबह 7 बजे विश्रामपुरी से कोण्डागांव के लिए रवाना होगी और वापसी में सुबह 10 बजे कोण्डागांव से विश्रामपुरी जाएगी। इस प्रकार प्रतिदिन दो फेरे लगाए जाएंगे, जिससे उन ग्रामीण क्षेत्रों को सीधे बस सुविधा उपलब्ध होगी जहां पहले परिवहन सेवाएँ सीमित थीं। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने बताया कि अगले चरण में विकासखंड माकड़ी के क्षमतापुर से कोण्डागांव तक भी मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के अंतर्गत बस सेवा प्रारंभ करने की तैयारी की जा रही है। इससे दूरस्थ अंचलों के हजारों ग्रामीणों को सीधी परिवहन सुविधा मिलेगी और जिला मुख्यालय तक उनकी पहुंच आसान होगी।

इस अवसर पर विधायक सुश्री लता उसेंडी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में विकास को नई गति मिल रही है। ग्रामीण बस योजना इसका जीवंत उदाहरण है, जिससे गांव और शहर के बीच की दूरी कम होगी और लोगों का जीवन आसान बनेगा। कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष श्री नरपति पटेल, उपाध्यक्ष श्री जसकेतु उसेंडी, पार्षद श्री मनोज जैन, श्री हर्षवीर सिंह ढिल्लन, सुश्री सोनामणि पोयाम बस संचालक श्री दिनेश कुमार जैन और बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे।

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डेढ़ दशक बाद जगरगुंडा में लौटी रौनक

Posted on :06-Oct-2025
डेढ़ दशक बाद जगरगुंडा में लौटी रौनक

द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार

जहाँ कभी गूंजती थी बंदूकों की आवाज़, अब सुनाई देती है ढोल-नगाड़ों और आरती की गूँज

रामलीला के साथ पहली बार हुआ रास गरबा का भव्य आयोजन

बस्तर  : कभी नक्सल प्रभाव के कारण वीरान पड़ा जगरगुंडा अब फिर से जीवन और उल्लास से भर उठा है। डेढ़ दशक पहले यहां शाम ढलते ही सन्नाटा छा जाता था वहीं अब जगरगुंडा में बदलाव की बयार दिखने लगी है। जहां गोली बारूद की भयानक आवाज से लोग दहशत में आ जाते थे अब नवरात्रि में रास-गरबा की गूंज सुनाई दे रही है।

रामलीला के साथ पहली बार हुआ रास गरबा का भव्य आयोजन

2006 के बाद सलवा जुडूम अभियान के चलते यहां का सामाजिक जीवन लगभग ठहर सा गया था। न तो सड़कें थीं, न बिजली, न स्वास्थ्य सेवाएँ। चारों ओर सुरक्षा घेरे और कंटीले तारों से घिरा यह इलाका एक समय “प्रवेश वर्जित क्षेत्र” माना जाता था। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। शासन-प्रशासन की निरंतर कोशिशों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रियता से जगरगुंडा में फिर से रौनक लौट आई है। सड़के, पुल-पुलिया और अन्य बुनियादी सुविधाएँ अब इस क्षेत्र को तीन जिलों से जोड़ रही हैं।

नवरात्र पर्व बना पुनर्जागरण का प्रतीक

इस वर्ष जगरगुंडा में डेढ़ दशक बाद नवरात्र का भव्य आयोजन किया गया। पूरे ग्राम ने मिलकर माता की प्रतिमा स्थापित की, पूजा-अर्चना और भंडारे का आयोजन हुआ। ग्राम पंचायत की युवा सरपंच नित्या कोसमा ने पूरे आयोजन का नेतृत्व किया और ग्रामीणों के साथ प्रत्येक कार्यक्रम में भाग लिया। पूरे नवरात्र के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों, भक्ति गीतों और सामाजिक मेलजोल का माहौल रहा। ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों बाद जगरगुंडा में ऐसा उल्लास देखा है मानो भय के अंधेरे को उजाले की रोशनी ने मिटा दिया हो।

पहली बार जगरगुंडा में रास-गरबा का आयोजन

इतिहास में पहली बार जगरगुंडा में रास गरबा का आयोजन किया गया यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम था बल्कि जगरगुंडा के सामाजिक पुनर्जागरण का प्रतीक बना। सरपंच नित्या कोसमा ने स्वयं महिलाओं और छात्राओं को गरबा का प्रशिक्षण दिया और देर रात तक चले इस आयोजन में सबको शामिल किया।

अब जगरगुंडा में डर नहीं, विकास की गूंज है

 आज जगरगुंडा में नई सड़कें, पुल-पुलिया और सरकारी योजनाओं की पहुंच से विकास की नई सुबह हो चुकी है। अब यह क्षेत्र तीन जिलों को जोड़ने वाला महत्त्वपूर्ण संपर्क बिंदु बन रही है। स्कूलों में बच्चों की आवाज़ें गूंजती हैं, बिजली की रौशनी से घर जगमगाते हैं, और लोग फिर से तीज-त्योहार मनाने लगे हैं।


जगरगुंडा पंचायत की महिलाओं ने बताया कि पहले जहां शाम होते ही घरों के दरवाजे बंद हो जाते थे, वहीं अब रात में संगीत और ताल की गूंज सुनाई देती है। ग्रामीणों ने सरपंच नित्या कोसमा का आभार जताते हुए अगले वर्ष इसे और भी भव्य रूप में मनाने की बात कही।

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बस्तर दशहरा लोकोत्सव के पहले दिन अयोध्या की राम लीला ने बांधा समां

Posted on :06-Oct-2025
बस्तर दशहरा लोकोत्सव के पहले दिन अयोध्या की राम लीला ने बांधा समां

द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार

बस्तर : बस्तर दशहरा लोकोत्सव 2025 के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ प्रथम दिन का आगाज हुआ। इस अवसर पर अयोध्या से आई रामलीला मंडली ने भगवान श्रीराम की जीवन लीला पर आधारित मनमोहक मंचन प्रस्तुत किया, जिसने दर्शकों का दिल जीत लिया। इसके अलावा कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों और स्कूली बच्चों ने भी पारंपरिक नृत्य और लोकगीतों की सुंदर प्रस्तुति दी। बस्तर की सांस्कृतिक झलकियों से सजी इस संध्या ने दशहरा लोकोत्सव के पहले दिन को यादगार बना दिया।

बस्तर दशहरा लोकोत्सव के पहले दिन अयोध्या की राम लीला ने बांधा समां

समारोह में बड़ी संख्या में नागरिक, पर्यटक और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।  कार्यक्रम के दूसरे दिन स्थानीय कलाकारों और स्कूली बच्चों के कार्यक्रम के अलावा अयोध्या वाली रामलीला और रूपाली जग्गा का कार्यक्रम की प्रस्तुति होगी।

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बस्तर दशहरा : ‘कुटुंब जात्रा’ रस्म के साथ हुई देवी-देवताओं का ससम्मान विदाई

Posted on :06-Oct-2025
बस्तर दशहरा : ‘कुटुंब जात्रा’ रस्म के साथ हुई देवी-देवताओं का ससम्मान विदाई

द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार

बस्तर : अपनी अनूठी परंपराओं और रस्मों के लिए विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व की एक और महत्वपूर्ण रस्म, ‘कुटुंब जात्रा’, रविवार को स्थानीय महात्मा गांधी स्कूल परिसर के गुड़ी में संपन्न हुई। इस रस्म के तहत पूरे बस्तर संभाग एवं पड़ोसी राज्य ओडिशा व महाराष्ट्र के समीपवर्ती गांव से पर्व में शामिल हुए हजारों देवी-देवताओं के छत्र और डोली को बस्तर राजपरिवार के सदस्य श्री कमलचंद भंजदेव ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर ससम्मान विदा किया। यह रस्म 75 दिनों तक चलने वाले बस्तर दशहरा पर्व की समाप्ति की ओर इशारा करती है। 

बस्तर दशहरा : ‘कुटुंब जात्रा’ रस्म के साथ हुई देवी-देवताओं का ससम्मान विदाई

600 साल से अधिक पुरानी परंपरा

बस्तर दशहरा की सबसे खास बात यह है कि केवल इसी पर्व में इतनी बड़ी संख्या में एक-एक गांव के देवी-देवताओं के छत्र और डोली शामिल होते हैं। रियासत काल से चली आ रही यह परंपरा आज भी कायम है, जिसमें राजा-महाराजाओं की तरह राजपरिवार के सदस्य और दशहरा समिति गांव-गांव से आए देवी-देवताओं और उनके पुजारियों को ससम्मान विदा करते हैं।

बस्तर दशहरा : ‘कुटुंब जात्रा’ रस्म के साथ हुई देवी-देवताओं का ससम्मान विदाई

‘रूसूम’ देकर दी गई विदाई

परंपरानुसार, दशहरा पर्व में शामिल होने आए संभाग के सभी ग्राम के देवी-देवताओं को श्रूसूमश् (दक्षिणा/भेंट) भी दी गई। राजपरिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव और दशहरा समिति ने देवी-देवताओं के छत्र और डोली लेकर पहुंचे पुजारियों को कपड़े, पैसे और मिठाइयां देकर उनकी ससम्मान विदाई की।

बस्तर दशहरा : ‘कुटुंब जात्रा’ रस्म के साथ हुई देवी-देवताओं का ससम्मान विदाई

शहर के गंगामुण्डा वार्ड में स्थित देवगुड़ी में श्रद्धालुओं ने अपनी मनोकामना अनुसार देवी देवताओं को भेंट भी अर्पित किया। बस्तर राजपरिवार और दशहरा समिति की अगुवाई में संपन्न हुई इस कुंटुब जात्रा रस्म के साथ ही, 600 साल से अधिक पुरानी बस्तर दशहरा पर्व की परंपराएं विधि विधान से पूरी की गईं। इस दौरान पूरे परिसर में उपस्थित देवी-देवता का आपस में मेल मिलाप देखते ही बन रहा था। देवी देवताओं के लाठ, डोली के साथ झुमते सिरहा और विभिन्न क्षेत्रों के आंगादेव का खेल माहौल को आकर्षक एवं अचम्म्भित किया। इस अवसर पर स्थानीय एवं आस-पास के गांव से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी देवी-देवताओं का अपने परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद लिया।

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बस्तर ओलंपिक 2025: खेल, संस्कृति और जनभागीदारी का महापर्व

Posted on :04-Oct-2025
बस्तर ओलंपिक 2025: खेल, संस्कृति और जनभागीदारी का महापर्व


पंजीयन की अंतिम तिथि 20 अक्टूबर

बस्तर : बस्तर अंचल में खेल, संस्कृति और जनभागीदारी का महापर्व बस्तर ओलंपिक 2025 आगामी माह आयोजित होने जा रहा है। प्रतियोगिता में पंजीयन की अंतिम तिथि 20 अक्टूबर तय की गई है। पंजीयन प्रक्रिया 22 सितम्बर से प्रारंभ हो चुकी है, जो ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से की जा सकती है।

सुकमा कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव ने बताया कि बस्तर ओलंपिक केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि जनभागीदारी और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने जिलेवासियों से अधिक से अधिक पंजीयन कराने की अपील की।

प्रतियोगिता का आयोजन चार स्तरों पर होगा - ग्राम पंचायत, विकासखंड, जिला और संभाग। इसमें जूनियर वर्ग (14 से 17 वर्ष) और सीनियर वर्ग (आयु सीमा नहीं) के लिए एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल और रस्साकशी जैसी खेल विधाएँ शामिल की गई हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर 4 से 7 नवम्बर, विकासखंड स्तर पर 9 से 11 नवम्बर तथा जिला स्तर पर 14 से 16 नवम्बर। पंजीयन फॉर्म rymc.cg.gov.in/bastarOlympics2025 से ऑनलाइन तथा जनपद पंचायत, विकासखंड शिक्षा अधिकारी और जिला खेल अधिकारी कार्यालय से ऑफलाइन उपलब्ध हैं।

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बस्तर में औद्योगिक विकास को मिले नए अवसर

Posted on :01-Oct-2025
 बस्तर में औद्योगिक विकास को मिले नए अवसर

द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार

निवेशकों को प्रमाण पत्र वितरित 

बस्तर  : बस्तर जिले में छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के अंतर्गत उद्योग विभाग द्वारा आज जगदलपुर कलेक्टर कार्यालय स्थित आस्था हॉल में जिला निवेश प्रोत्साहन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर श्री हरिस एस ने की। इस अवसर पर औद्योगिक विकास नीति 2024-30 और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के अंतर्गत संचालित वन क्लिक पोर्टल की विस्तृत जानकारी निवेशकों को प्रदान की गई।

बस्तर में औद्योगिक विकास को मिले नए अवसर

कलेक्टर श्री हरिस ने कहा कि जिले में औद्योगिक क्षेत्रों के विकास हेतु निजी भूमि पर भी औद्योगिक पार्क स्थापित किए जा सकते हैं तथा निवेशकों को विभिन्न प्रोत्साहन और रियायतें प्रदान की जाएंगी। उन्होंने यह भी बताया कि नवीन उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए निवेशकों को इन्विटेशन टू इन्वेस्ट प्रमाण पत्र जारी किए गए।

बैठक के दौरान वन क्लिक पोर्टल की कार्यप्रणाली का प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया गया और निवेशकों को उपलब्ध सुविधाओं, उद्योग स्थापना की प्रक्रिया और उससे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स, लघु उद्योग भारती, जूनियर चेम्बर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारी एवं सदस्य, नव उद्यमी, विद्युत वितरण कंपनी, नगर एवं ग्राम निवेश, खनिज, औद्योगिक सुरक्षा विभाग और छत्तीसगढ़ पर्यावरण मंडल के अधिकारी उपस्थित थे। अंत में उद्योग विभाग के मुख्य महाप्रबंधक श्री अजीत सुन्दर बिलुंग ने सभी निवेशकों और विभागीय अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।

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बस्तर ओलंपिक के लिए पंजीयन आज से शुरू

Posted on :23-Sep-2025
बस्तर ओलंपिक के लिए पंजीयन आज से शुरू

द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने दंतेवाड़ा से की पंजीयन की शुरूआत

बस्तर ओलंपिक से बस्तर की दशा और दिशा बदली, विश्व मानचित्र पर बनेगी अलग पहचान – श्री अरुण साव

दंतेवाड़ा में विकास कार्यों के लिए 5 करोड़ देने की घोषणा की

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रायपुर : बस्तर संभाग में आगामी अक्टूबर-नवम्बर में होने वाले बस्तर ओलंपिक के लिए आज से पंजीयन प्रारंभ हो गया। उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने आज दंतेवाड़ा में आयोजित कार्यक्रम में इसकी औपचारिक शुरूआत की। बस्तर ओलंपिक के दौरान आयोजित होने वाले खेलों में भाग लेने के लिए खिलाड़ी 20 अक्टूबर तक अपना पंजीयन करा सकते हैं। बस्तर ओलंपिक का विकासखंड स्तर पर आयोजन 25 अक्टूबर से 5 नवम्बर तक, जिला स्तरीय आयोजन 5 नवम्बर से 15 नवम्बर तक तथा संभाग स्तरीय आयोजन 24 नवम्बर से 30 नवम्बर तक किया जाएगा। वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा दंतेवाड़ा जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप और विधायक श्री चैतराम अटामी भी पंजीयन के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल हुए।

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उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने बस्तर ओलंपिक के लिए पंजीयन की शुरूआत करते हुए कहा कि पिछले वर्ष आयोजित बस्तर ओलंपिक से बस्तर की दशा और दिशा बदली है। आने वाले समय में बस्तर विश्व के मानचित्र पर अपनी अलग पहचान स्थापित करेगा। यहां की प्रतिभाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी चमक बिखेरेंगे। उन्होंने बताया कि पिछले बस्तर ओलंपिक में एक लाख 62 हजार खिलाड़ियों ने अपना पंजीयन कराया था। इस वर्ष दो लाख खिलाड़ियों के पंजीयन का लक्ष्य है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भी बस्तर ओलंपिक की प्रशंसा की थी। इस आयोजन को पूरे देश में लोकप्रिय बनाना है। बस्तर के हर गांव के हर बच्चे और युवा की भागीदारी इसमें सुनिश्चित करना है। श्री साव ने कार्यक्रम में दंतेवाड़ा जिले में मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए पांच करोड़ रुपए देने की घोषणा की।

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वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा दंतेवाड़ा जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप ने अपने संबोधन में कहा कि नवरात्रि के पावन अवसर पर आज बस्तर ओलंपिक के लिए पंजीयन का शुभारंभ किया जा रहा है। बस्तर अनेक मामलों में समृद्ध है, चाहे वह खेल हो, संस्कृति हो या अन्य कोई क्षेत्र... बस्तर ने हमेशा अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। बस्तर अपनी अनूठी परंपराओं और रीति-रिवाजों के कारण विशेष महत्व रखता है, जिन्हें हमारे पूर्वज आदिकाल से निभाते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। बस्तर ओलंपिक से इन प्रतिभाओं को पहचान और प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में बस्तर ओलंपिक में भाग लेने की अपील की।

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विधायक श्री चैतराम अटामी और खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार ने भी पंजीयन के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित किया। राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती ओजस्वी मंडावी, दंतेवाड़ा जिला पंचायत के अध्यक्ष श्री नंदलाल मुड़ामी, उपाध्यक्ष श्री अरविन्द कुंजाम, दंतेवाड़ा नगर पालिका की अध्यक्ष श्रीमती पायल गुप्ता, खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक श्रीमती तनुजा सलाम, डीआईजी श्री कमलोचन कश्यप, पुलिस अधीक्षक श्री गौरव राय, जिला पंचायत के सीईओ श्री जयंत नाहटा और डीएफओ श्री सागर जाधव सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में कार्यक्रम में मौजूद थे।

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बस्तर के विकास में एक और क्रांतिकारी कदम

Posted on :14-Aug-2025
बस्तर के विकास में एक और क्रांतिकारी कदम

 द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार 

दल्लीराजहरा–रावघाट रेल परियोजना दिसंबर तक होगी पूरी

रेल परियोजना के 97 प्रतिशत कार्य पूर्ण

77.5 किमी लंबे तारोकी–रावघाट खंड का अधिकांश कार्य पूरा

रायपुर : छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल को रेलवे से सशक्त कनेक्टिविटी देने वाली दल्लीराजहरा–रावघाट रेल परियोजना का कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। 95 किलोमीटर लंबी इस परियोजना के तारोकी से रावघाट खंड की लंबाई 77.5 किलोमीटर है, जिसमें यूटिलिटी शिफ्टिंग का कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। बड़े और छोटे पुलों के साथ-साथ ट्रैक बिछाने का काम अब अंतिम चरण में है, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना के दिसंबर 2025 तक पूर्ण होने की दिशा में ठोस प्रगति हुई है।

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इस रेल परियोजना के पूरा होने से बस्तर क्षेत्र पहली बार राज्य की राजधानी से सीधे रेलवे द्वारा जुड़ जाएगा। इससे बस्तर आने-जाने वाले यात्रियों के लिए सुविधाएं बढ़ेंगी और खनिज परिवहन की दिशा में नई गति मिलेगी। बस्तर के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य में यह कनेक्टिविटी एक बड़ा बदलाव लाएगी और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने में सहायक होगी।

यह रेलवे लाइन रावघाट लौह अयस्क खदानों और सेल/भिलाई इस्पात संयंत्र के बीच सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। वर्तमान में दल्लीराजहरा की खदानों से लौह अयस्क की उपलब्धता घट रही है, ऐसे में यह परियोजना न केवल औद्योगिक जरूरतों को पूरा करेगी बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास की रीढ़ साबित होगी। रेल विकास निगम लिमिटेड के अनुसार, 17.5 किलोमीटर भूमि अधिग्रहण कार्य संपन्न हो चुका है। 21.94 लाख घन मीटर मिट्टी कार्य में से अधिकांश पूरा हो चुका है। तीन में से दो बड़े पुल तैयार हो गए हैं, जबकि 61 में से 55 छोटे-मोटे पुलों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। बैलेस्ट प्रोक्योरमेंट और भवन निर्माण कार्य भी अगस्त–सितंबर 2025 तक पूर्ण होने की संभावना है।

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उल्लेखनीय है कि कुल 95 किलोमीटर लंबे इस रेलमार्ग में 16 प्रमुख पुल, 19 रोड ओवर ब्रिज, 45 रोड अंडर ब्रिज और 176 छोटे पुलों का निर्माण शामिल है। केवल 17.5 किलोमीटर लंबे तारोकी–रावघाट खंड में ही 3 प्रमुख पुल, 5 रोड ओवर ब्रिज, 7 रोड अंडर ब्रिज और 49 छोटे पुल बनाए जा रहे हैं। इन सभी कार्यों में तकनीकी सटीकता और सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है, ताकि यह परियोजना लंबे समय तक टिकाऊ और सुरक्षित रहे।

वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित इस क्षेत्र में निर्माण कार्य एक बड़ी चुनौती रहा है। परियोजना को बाधित करने के लिए नक्सलियों द्वारा किए गए 12 हमलों में अब तक 4 मजदूरों की मौत और 2 सुरक्षाकर्मियों की शहादत हो चुकी है। इसके अलावा निर्माण कार्य में प्रयुक्त उपकरणों और मशीनों में आगजनी की घटनाएं भी हुई हैं। इसके बावजूद, एसएसबी सुरक्षा कवच मिलने के बाद परियोजना में उल्लेखनीय प्रगति हुई। परियोजना के पूरा होने के बाद बस्तर क्षेत्र में खनिज परिवहन, रोजगार, स्थानीय व्यापार और यात्री सुविधाओं में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। यह रेलवे लाइन खनिज परिवहन को नई दिशा देने के साथ-साथ पूरे क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य करेगी। इससे क्षेत्र में निवेश के अवसर बढ़ेंगे और बुनियादी ढांचे का विस्तार होगा।

दिसंबर 2025 तक तारोकी–रावघाट खंड पर ट्रेन परिचालन शुरू होने की संभावना व्यक्त की गई है। इस परियोजना के पूरा होते ही बस्तर अंचल एक नई विकास यात्रा पर अग्रसर होगा, जहां रेल पटरी पर दौड़ती गाड़ियां न केवल खनिज और सामान पहुंचाएंगी, बल्कि रोजगार, अवसर और विकास का संदेश भी लेकर आएंगी।

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स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल सहित सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल एवं महारानी अस्पताल का किया निरीक्षण

Posted on :06-Aug-2025
स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल सहित सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल एवं महारानी अस्पताल का किया निरीक्षण

द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार

सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में बस्तर के लोगों को जल्द मिलेगी बड़े शहरों की तरह विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं

महारानी अस्पताल होगा 300 शैयायुक्त हॉस्पिटल के रूप में अपग्रेड

बस्तर : प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मंगलवार को मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल सहित डिमरापाल स्थित 240 सीटर सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल एवं महारानी अस्पताल का निरीक्षण किया और सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल को प्रदेश का सबसे अच्छा अस्पताल बनाने पर बल देते हुए कहा कि यहां पर बस्तर के लोगों को जल्द ही बड़े शहरों की तरह विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में इस अस्पताल को सर्वसुविधायुक्त और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से सुसज्जित बनाया जा रहा है और इसके संचालन के लिए भी एमओयू किया जा चुका है।

 स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल सहित सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल एवं महारानी अस्पताल का किया निरीक्षण

स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में रसोईघर, औषधि कक्ष, एसएनसीयू, आईसीयू तथा फीमेल सर्जिकल वार्ड का अवलोकन किया। रसोईघर में मरीजों को दी जाने वाली पौष्टिक आहार यथा मिलेट्स लडडू एवं महुआ लडडू का स्वाद लेकर परखा। साथ ही फीमेल सर्जिकल वार्ड में मरीजों से रूबरू होकर उनकी स्वास्थ्य का हाल पूछा तथा उपचार, दवाई एवं भोजन की उपलब्धता के बारे में जानकारी ली। उन्होंने औषधि कक्ष में विभिन्न दवाइयों की उपलब्धता की जानकारी ली और एंटी वेनम एवं एंटी रेबीज इंजेक्शन की पर्याप्त सुलभता सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। वहीं सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के निरीक्षण के दौरान अस्पताल में विभिन्न चिकित्सा उपकरणों की स्थापना सम्बन्धी पूरी जानकारी ली और थर्ड फ्लोर तक भ्रमण कर विभिन्न वार्डों के निर्माण सहित एमआईआर,सिटी स्कैन तथा ऑपरेशन कक्ष इत्यादि का अवलोकन किया। 

स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल ने महारानी अस्पताल में बाह्य रोगी कक्ष में आभा ऐप के माध्यम से मरीजों के पंजीयन एवं उनके उपचार स्थिति का अद्यतन ऑनलाइन रिकॉर्ड रखने की पहल को सराहा। वहीं आपातकालीन कक्ष तथा आईसीयू में उपचाररत मरीजों से रूबरू हुए, साथ ही शिशु एवं मातृ स्वास्थ्य संस्थान का अवलोकन कर उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल में डायलिसिस सुविधा के बारे में भी जानकारी ली और  निर्धन एवं जरूरतमन्द मरीजों को संवेदनशीलता के साथ त्वरित सेवाएं देने कहा।उन्होंने महारानी हॉस्पिटल की बेहतर व्यवस्था एवं महत्ता को मद्देनजर रखते हुए इसे 300 शैयायुक्त हॉस्पिटल के रूप में अपग्रेड करने के लिए भी आवश्यक अधोसंरचना एवं सेटअप के साथ प्रस्ताव जल्द प्रस्तुत किए जाने के निर्देश दिए। जिससे जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में सीटों की वृद्धि के लिए सकारात्मक पहल किया जा सके। इस दौरान अध्यक्ष सीजीएमएससी श्री दीपक महस्के, महापौर श्री संजय पाण्डे सहित स्वास्थ्य सचिव श्री अमित कटारिया, कमिश्नर बस्तर श्री डोमन सिंह, कलेक्टर श्री हरिस एस तथा स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं जिला प्रशासन के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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मुख्यमंत्री की मंशा के अनुसार बस्तर को स्वास्थ्य क्षेत्र में बनाना है अग्रणी क्षेत्रः स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल बस्तर में मलेरिया को खत्म करने के लिए डोर टू डोर चल रहा है अभियानः स्वास्थ्य मंत्री

Posted on :06-Aug-2025
मुख्यमंत्री की मंशा के अनुसार बस्तर को स्वास्थ्य क्षेत्र में बनाना है अग्रणी क्षेत्रः स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल  बस्तर में मलेरिया को खत्म करने के लिए डोर टू डोर चल रहा है अभियानः स्वास्थ्य मंत्री

 द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार

स्वास्थ्य मंत्री तीन दिवसीय बस्तर संभाग का पहला दिन, कोंडागांव, कांकेर और बस्तर जिले का किया दौरा           

बस्तर : स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मंगलवार को बस्तर संभाग के पांच जिलों के तीन दिवसीय दौरे की शुरुआत की। दौरे की शुरुआत कोंडागांव जिले से हुई, जिसके बाद कांकेर होते हुए मंत्री श्री जायसवाल जगदलपुर पहुंचे। यहाँ उन्होंने डिमरापाल स्थित मेडिकल कॉलेज, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और जिला अस्पताल का निरीक्षण कर मरीजों, उनके परिजनों, चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों से मुलाकात की और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति की समीक्षा की।

बस्तर में मलेरिया को खत्म करने के लिए डोर टू डोर चल रहा है अभियानः स्वास्थ्य मंत्री

स्वास्थ्य मंत्री ने पूर्व में दिए गए कई निर्देशों की प्रगति की भी समीक्षा की, जिनमें मरीजों के लिए पर्दा व्यवस्था, स्क्रीन, टीवी, ऑनलाइन टोकन जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल कालेज को और अधिक सशक्त करने के लिए शासन द्वारा 50 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा रही है। इस राशि का उपयोग मेडिकल कॉलेज जगदलपुर के हॉस्टल और अस्पताल के नवीनीकरण, जिम, मरीजों के परिजनों के बैठने की सुविधा और चिकित्सा उपकरणों की खरीदी हेतु किया जाएगा।

130 संस्थानों को मिला एनकरेज सर्टिफिकेट, बस्तर के लिए गौरव का क्षण

मंत्री श्री जायसवाल ने इस अवसर पर यह भी जानकारी दी कि बस्तर संभाग के 130 स्वास्थ्य संस्थानों को भारत सरकार की एजेंसी द्वारा गुणवत्ता प्रमाणीकरण (एनक्यूएएस सर्टिफिकेट) प्रदान किया गया है। उन्होंने इसे बस्तर के लिए स्वर्णिम समय बताया। उन्होंने कहा कि यह वही बस्तर है जिसे कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, जहां विकास की कल्पना भी कठिन थी। आज इन क्षेत्रों के अस्पतालों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलना एक बड़ी उपलब्धि है और यह सब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व में संभव हो पाया है।

चिकित्सकों और स्टाफ की नियुक्ति में बड़ी प्रगति

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि जो चिकित्सक पद रिक्त थे, उन्हें भर दिया गया है। अब तक 800 चिकित्सकों की नियुक्ति की जा चुकी है। मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि छत्तीसगढ़ के किसी भी अस्पताल में अब एमबीबीएस डॉक्टर का एक भी पद खाली नहीं है। उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि वर्तमान में मेडिकल कालेजों के लिए 125 सहायक प्राध्यापक और राज्य में 610 नर्सों की भर्ती के लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार हेल्थ सेक्टर में मानव संसाधन, उपकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर के स्तर पर गंभीरता से कार्य कर रही है।

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल जल्द होगा शुरू

जगदलपुर में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया  कि बस्तर क्षेत्र के सबसे बड़े सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का कार्य पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि यह अस्पताल आने वाले कुछ महीनों के भीतर आमजन के लिए प्रारंभ कर दी जाएगी। इस अस्पताल के संचालन के लिए देश के प्रतिष्ठित कॉण्टिनेंटल ग्रुप के साथ एमओयू किया गया है। 

श्री जायसवाल ने कहा कि अस्पताल प्रारंभ होने के बाद अब बस्तर से मरीजों को एयरलिफ्ट या एम्बुलेंस के माध्यम से बाहर नहीं ले जाना पड़ेगा। सभी आवश्यक सर्जरी और इलाज की सुविधा यहीं मिलेगी। जगदलपुर के महारानी अस्पताल का हवाला देते हुए मंत्री ने कहा कि मात्र डेढ़ साल में इसमें अभूतपूर्व सुधार हुआ है और इसे और बेहतर किया जाएगा।

मलेरिया और डायरिया पर नियंत्रण को लेकर सरकार गंभीर

बस्तर में मलेरिया और डायरिया की स्थिति को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री जायसवाल ने बताया कि सरकार अब मलेरिया के पूर्ण उन्मूलन के लिए डोर-टू-डोर जांच अभियान चला रही है, जिसमें लक्षण न होने वाले लोगों की भी जांच की जा रही है। पॉजिटिव मिलने पर उन्हें पूरी दवा दी जा रही है ताकि मलेरिया के परजीवी को जड़ से समाप्त किया जा सके। डायरिया की रोकथाम के लिए भी स्वास्थ्य अमला पूरी तरह सतर्क है। जहां भी आवश्यकता महसूस हो रही है वहां स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बस्तर में मलेरिया या डायरिया से जुड़ी कोई आपात स्थिति नहीं है।   

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नई रोशनी की ओर कोंटा इलाके का मेटागुड़ा गांव

Posted on :30-Jul-2025
नई रोशनी की ओर कोंटा इलाके का  मेटागुड़ा गांव

द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार

नियद नेल्ला नार योजना से बदली माओवाद प्रभावित क्षेत्र की तस्वीर

कैम्प मेटागुड़ा में बिजली पहुंचने से जगी विकास की नई उम्मीद

बस्तर : माओवाद प्रभावित सुदूर बस्तर अंचल का वह इलाका, जहां कभी सूरज ढलने के साथ ही घुप्प अंधेरा छा जाता था—अब वहां बिजली की रौशनी ने दस्तक दे दी है। जिला सुकमा के कोंटा विकासखंड अंतर्गत स्थित मेटागुड़ा में 27 जुलाई 2025 को जब पहली बार बिजली का बल्ब जला, तो यह सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं थी, बल्कि यह उस उजाले की शुरुआत थी, जो दशकों से विकास की प्रतीक्षा में खड़े लोगों के जीवन में उम्मीद की नई किरण बनकर आई है।

कैम्प बना विकास का प्रवेश द्वार

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित नियद नेल्ला नार योजना के तहत 29 दिसंबर 2024 को मेटागुड़ा में सुरक्षा कैम्प की स्थापना हुई थी। इस सुरक्षा कैम्प ने न सिर्फ सुरक्षा का घेरा बनाया, बल्कि शासन और जनता के बीच की दूरी को भी कम किया। आज उसी कैम्प की बदौलत मेटागुड़ा और आसपास के गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पानी, संचार और अब बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचने लगी हैं।

बिजली नहीं, विश्वास पहुंचा है

बिजली आने से मेटागुड़ा और आसपास के ग्रामीणों में उत्सव जैसा माहौल है। जिन घरों में अब तक दीपक की लौ ही रोशनी का एकमात्र साधन थी, वहां अब बल्ब जल रहे हैं। बच्चों की आंखों में पढ़ाई के नए सपने हैं और बुजुर्गों के चेहरे पर सुकून की रेखाएं।

 संवेदनशील क्षेत्र में कठिन रहा कार्य, लेकिन मिला सहयोग

इस उपलब्धि के पीछे जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और सीआरपीएफ 131वीं वाहिनी की संयुक्त मेहनत रही। इस कार्य को सफल बनाने में पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज श्री सुंदरराज पी., पुलिस उप महानिरीक्षक दंतेवाड़ा श्री कमलोचन कश्यप, उप महानिरीक्षक (परि.) सीआरपीएफ श्री आनंद सिंह राजपुरोहित, कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव, पुलिस अधीक्षक श्री किरण चव्हाण, कमांडेंट सीआरपीएफ श्री दीपक कुमार साहू एवं द्वितीय कमान अधिकारी श्री मौली मोहन कुमार जैसे अधिकारियों का मार्गदर्शन और समन्वय रहा।

रोशनी के साथ आएंगे अवसर

बिजली सुविधा से अब ग्रामीणों को न केवल रोशनी मिलेगी, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, सिंचाई, मोबाइल चार्जिंग, टेलीविजन, रेडियो जैसे संचार एवं मनोरंजन के साधनों तक भी आसान पहुंच होगी। सबसे बड़ी बात यह कि यह सुविधा ग्रामीणों को यह एहसास कराएगी कि शासन उनके साथ है और उनका भविष्य उज्जवल है।

 उजाले की यह शुरुआत, विकास की लंबी यात्रा की पहली सीढ़ी

मेटागुड़ा में बिजली आना सिर्फ एक गांव का विकास नहीं है, यह प्रतीक है उस सोच का, जिसमें बस्तर के अंतिम छोर तक शासन की योजनाओं को पहुंचाने की प्रतिबद्धता है। "नियद नेल्ला नार" योजना का यह सफल उदाहरण आने वाले समय में अन्य दूरस्थ और अति संवेदनशील क्षेत्रों के लिए प्रेरणा बनेगा।

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पाट जात्रा पूजा विधान के साथ होगी विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व की गुरूवार से विधिवत शुरूआत

Posted on :24-Jul-2025
पाट जात्रा पूजा विधान के साथ होगी विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व की गुरूवार से विधिवत शुरूआत

द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार

परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है बस्तर दशहरा

बस्तर :  छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण में कल गुरुवार को हरेली अमावस्या के मौके पर पाट जात्रा पूजा विधान के साथ विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व की शुरुआत होगी। इस दौरान पारम्परिक मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी, पटेल, नाईक-पाईक, सेवादार रथ निर्माण के लिए औजार बनाने ठुरलू खोटला रस्म अदा करेंगे। इस अवसर पर बस्तर दशहरा समिति द्वारा मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी, पटेल, नाईक-पाईक, सेवादारों सहित गणमान्य नागरिकों एवं ग्रामीणों को उपस्थित होकर पाट जात्रा पूजा विधान में शामिल होने का आग्रह किया गया है।

जात्रा पूजा विधान के साथ ही बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी को समर्पित इस 75 दिवसीय ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व में शुक्रवार 05 सितम्बर को डेरी गड़ाई पूजा विधान, रविवार 21 सितम्बर को काछनगादी पूजा विधान, सोमवार 22 सितम्बर को कलश स्थापना पूजा विधान, मंगलवार 23 सितम्बर को जोगी बिठाई पूजा विधान सहित बुधवार 24 सितम्बर से सोमवार 29 सितम्बर 2025 तक प्रतिदिन नवरात्रि पूजा एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, सोमवार 29 सितम्बर को सुबह 11 बजे बेल पूजा, मंगलवार 30 सितम्बर को महाअष्टमी पूजा विधान एवं निशा जात्रा पूजा विधान, बुधवार 01 अक्टूबर को कुंवारी पूजा विधान, जोगी उठाई पूजा विधान एवं मावली परघाव, गुरुवार 02 अक्टूबर को भीतर रैनी पूजा विधान एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, शुक्रवार 03 अक्टूबर को बाहर रैनी पूजा विधान एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, शनिवार 04 अक्टूबर को सुबह काछन जात्रा पूजा विधान के पश्चात दोपहर में मुरिया दरबार का आयोजन होगा। वहीं रविवार 05 अक्टूबर को कुटुम्ब जात्रा पूजा विधान में ग्राम्य देवी-देवताओं की विदाई की जाएगी और मंगलवार 07 अक्टूबर को मावली माता की डोली की विदाई पूजा विधान के साथ ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व सम्पन्न होगी।,

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शहीद महेन्द्रकर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर जगदलपुर में श्रीमती शकुंतला हुई सम्मानित

Posted on :22-Jul-2025
शहीद महेन्द्रकर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर जगदलपुर में श्रीमती शकुंतला हुई सम्मानित

धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक

हल्बी भाषा के सुदीर्घ लेखन, संरक्षण, उन्नयन में योगदान के लिए मिला सम्मान

शकुंतला चो लेजा गीत महत्वपूर्ण संग्रह

बस्तर : कुलपति शहीद महेन्द्रकर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर जगदलपुर प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव ने ने कहा कि बस्तर संभाग की हल्बी भाषा की साहित्यकार श्रीमती शकुंतला तरार को उनके हल्बी भाषा में सुदीर्घ लेखन, संरक्षण, उन्नयन में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि शकुंतला तरार की हलबी गीत संग्रह शकुंतला चो लेजा गीत बस्तर को जानने समझने के लिए महत्वपूर्ण संग्रह है। इससे हलबी की समृद्धि बढ़ रही है। ज्ञातव्य है कि श्रीमती शकुंतला की अब तक पाँच पुस्तकें हल्बी भाषा में प्रकाशित हो चुकी है, जिसमें एक परंपरागत गीति कथा का प्रकाशन साहित्य अकादमी दिल्ली ने किया है । शहीद महेन्द्रकर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर जगदलपुर एवं शासकीय काकतीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जगदलपुर जिला-बस्तर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित एक दिवसीय कार्यक्रम जगदलपुर के शासकीय काकतीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ।

कुलपति शहीद महेन्द्रकर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर जगदलपुर प्रो. श्रीवास्तव ने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमन डेका का सन्देश सुनाते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ में जितनी भी भाषा और बोलियाँ हैं, उन सबका संरक्षण किया जाना चाहिए। श्रीमती शकुंतला तरार की पुस्तक हलबी गीत संग्रह शकुंतला चो लेजा गीत के संबंध में कहा कि हलबी बस्तर की संपर्क भाषा है। हलबी में लिखे गीत बस्तर की संस्कृति की विशेषता बताती हैं। हलबी का लोक साहित्य अत्यंत समृद्ध है। लेजा गीत बस्तर में अत्यधिक प्रचलित है। इसमें युवक युवतियों के आपसी संवाद होते हैं। सौ गीतों में इस संग्रह में सांस्कृतिक रूप प्रकट होकर आए हैं।

प्राचार्य, शास. काकतीय स्नातकोत्तर महा. जगदलपुर ने स्वागत भाषण दिया।  कार्यक्रम में नारायणपुर के पद्मश्री बैद्यराज  हेमचंद मांझी, कांकेर से पद्मश्री अजय मंडावी को भी सम्मानित किया गया। रायपुर से  साहित्यकार श्रीमती शकुंतला तरार को उनकी हल्बी की प्रकाशित पुस्तक शकुंतला चो लेजा गीद जिसमें 101 हल्बी लेजा गीत और उसका 101 हिंदी अनुवाद है, के लिए सम्मानित किया गया। शकुंतला ने हिमाचल प्रदेश के शिमला में आज़ादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत होने वाले अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव में हल्बी और छत्तीसगढ़ी में रचना पाठ किया। साहित्य अकादमी दिल्ली के द्वारा आयोजित 157 भाषाओं के साथ वर्ल्ड रिकार्ड बनाने में हल्बी लेजा गीत का गायन कर बस्तर की इस भाषा को विश्व के समक्ष रख इतिहास बनाया।

कार्यक्रम को डॉ. डी. के. श्रीवास्तव, OSD (NEP) उच्च शिक्षा विभाग, डॉ. जी. ए. घनश्याम, संयुक्त संचालक, उच्च शिक्षा विभाग ने भी संबोधित किया। प्रारंभ में माँ सरस्वती की मूर्ति पर दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण के बाद अतिथियों का स्वागत हुआ। धन्यवाद ज्ञापन - कुलसचिव, शहीद महेन्द्रकर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर जगदलपुर ने किया। इस अवसर पर बस्तर संभाग के जनप्रतिनिधि, साहित्यकार, सभी महाविद्यालयों के प्राचार्यगण, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएँ और गणमान्य नागरिक विशेष रूप से उपस्थित थे।

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विशेष लेख : नई उड़ान, नया क्षितिज - छत्तीसगढ़ में महतारियों के सशक्तिकरण की कहानी

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राज्योत्सव पर विशेष लेख : छत्तीसगढ़ में गांव-गांव बिछा सड़कों का जाल

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ज्योतिष और हेल्थ

सुबह उठते ही ये गलतियाँ पड़ सकती हैं भारी! हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाने वाली आदतों से रहें बचकर

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गैस, अपच और सूजन पर असरदार—जानें क्यों रोज़ाना भिगोई अजवाइन है फायदेमंद

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खेल

टीम इंडिया की बेटियों ने रचा इतिहास, महिला क्रिकेट टीम को मिलेंगे 50 करोड़ रुपए से ज्यादा..

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राज्य स्तरीय कूड़ो प्रतियोगिता में खिलाड़ियों को मिला स्वर्ण पदक

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व्यापार

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