राजधानी

क्या फेसबुक लाइव करके कोई परेशानी बताना अब अपराध हो गया है ?

क्या फेसबुक लाइव करके कोई परेशानी बताना अब अपराध हो गया है ?

गजेंद्ररथ वर्मा 'गर्व'

छत्तीसगढ़ में एक घटना ने लोगों को आहत किया हुआ है, बात बहुत पुरानी नही है, अभी कुछ सप्ताह पहले की ही बात है, एक युवक ने फेसबुक लाइव करके लोगों की परेशानी प्रशासन को दिखाई, जिस पर कुछेक भाऊक लोगों ने अनैतिक बाते कमेंट कर दिया फिर हुआ यूं कि उक्त युवक के खिलाफ समाज विशेष ने पुलिस में कंप्लेन किया और अभी तारिख तक वह युवक जेल में बंद है लेकिन फिर भी प्रदेश की मीडिया उस पर मौन है, क्या वो ये बताना चाहते हैं कि तुमको हक नही है, किसी बात पर अपना विचार रखने की, क्या आप बुद्धिजीवियों को ही हक है अपनी बातें थोपने का, यहां लोग बड़ी बड़ी बातें करते हैं, मानवाधिकार की, सामाजिक समरसता की पर क्या उस युवक के बारे में कोई सोंच रहा है, नही तो क्यों नही, उसका अपराध क्या अक्षम्य है, क्या वह देशद्रोही करार दे दिया गया है, पर क्यों? उसने ऐसा क्या किया है? प्रदेश की सुधी मीडिया पुछे सवाल और बताएं जनमानस को की क्या किसी परेशानी को फेसबुक लाइव करना इतना बड़ा अपराध है और फिर क्या उस पर कमेंट करने वालों की जवाबदारी भी उसकी खुद की है क्या?

लेकिन आप निश्चिंत रहिए मीडिया ऐसा कुछ भी नही करने वाली, क्यों पता है, क्योंकि ये मीडिया आपके प्रदेश, आपके लोगों, आपके आत्मस्वाभिमान को जीवित नही रहने देना चाहती, क्यों देगी भईया, आप लोग जाग जाएंगे तो इनका घर कैसे चलेगा!

ये कॉर्पोरेट मीडिया है भाई इनका हर कदम फायदे के कायदे सोंच कर ही होते हैं, पैसा कहां से आयेगा, व्यापारी खुश रहेगा तो एड देगा, गरीब छत्तीसगढ़िया के पास क्या है जो दे देगा हां नुकसान जरुर होगा कहीं इन्हें गलती से कोई खबर किसी आलेख ने जगा दिया तो कॉर्पोरेट कैसे चलेगा! इन गरीबों को ज्यादा पैसे मिल जाए तो हमारी छाती पर चढ़ जायेंगे, इनमें कोई अधिकार, स्वाभिमान की बात कर रहा है तो उसे पहले ठीकाना लगाओ, क्योंकि ये बीमारी औरों में फैल गई तो उद्योग धंधों की दिवार पर दरार दिखने लगेंगी।

अरे यार यही तो इनकी सबसे बड़ी कमी है, हमें क्या, ये शब्द आपने भी इस्तेमाल किया होगा, हां बस यही तो है हथियार इनके लिए, भीड़ में से एक को उठाकर डाल दो जेल में सब अपने अपने घर चले जायेंगे, उन्हें पता है और ऐसा हो भी रहा है। पता नही क्या होने वाला है पर जो होने वाला है कुछ ठीक नही होने वाला है, मुझ जैसे बहुत लोगों के मन में चिंगारी सुलग रही है, कहीं व्यवस्था नें इस चिंगारी को शांत नही किया तो शायद...

हां की, बचा रखिए दामन को दाग से...
जब घर जल पड़ेगा तब पानी खोजना !

( इस लेख में प्रस्तुत विचार लेखक के निजी विचार हैं इसे बिना कोई एडिटिंग के प्रकाशित किया गया है )

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