विशेष रिपोर्ट

25 सितम्बर त्रयोदशी पर विशेष... जब स्वयं सेवक सेनानी पं. गंगा प्रसाद बाजपेयी ने त्रिपुरी अधिवेशन में हिस्सा लिया

25 सितम्बर त्रयोदशी पर विशेष... जब स्वयं सेवक सेनानी पं. गंगा प्रसाद बाजपेयी ने त्रिपुरी अधिवेशन में हिस्सा लिया

ब्रिटिश शासन ने वर्ष 1931 से 1940 तक देश के एकमात्र संगठन कांग्रेस सेवादल को गैर-कानूनी घोषित करते हुए प्रतिबंधित कर दिया था । वर्ष 1939 में कांग्रेस का 52वाँ अधिवेशन मध्य प्रांत जबलपुर के निकट त्रिपुरी में संपन्‍न हुआ । ठाकुर छेदीलाल बैरिस्टर अ.भा. कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य एवं मध्य प्रांत कांग्रेस के प्रांतीय अध्यक्ष थे । कांग्रेस पार्टी ने अ.भा. कांग्रेस अधिवेशन की संपूर्ण जिम्मेदारी सौंपते हुए जी.ओ.सी. (जनरल ऑफिसर कमाण्डर) बनाया । बैरिस्टर साहब का बंगला बिलासपुर (छत्तीसगढ़ ) नगर स्थिति गबर्नमेंट हाई-स्कूल से लगा हुआ था । जिम्मेदारी मिलते ही बैरिस्टर साहब अपने साथियों को बुलाकर अधिवेशन की तैयारी में जुट गये । उनकी सबसे बड़ी चुनौती स्वयं सेवकों के भागीदारी को लेकर थी । कांग्रेस सेवादल को गैर-कानूनी प्रतिबंधित करने के कारण सीधे स्वयं सेवक भाग नहीं ले सकते थे ।

बिलासपुर के दो विद्यालय रेलबे स्कूल एवं गवर्नमेंट स्कूल में भारत स्कॉउट एवं गाईंड संस्था का दल गठित था । उनके टीचर थे भ्रमण गुप्ता, ठाकुर छेदीलाल बैरिस्टर साहब से उनकी निकटता थी । उन्होंने स्थानीय 300 स्वयं-सेवकों को त्रिपुरी अधिवेशन में प्रशिक्षण देकर सहयोग हेतु उनसे कहा । टीचर भ्रमण कुमार गुप्ता स्वयं महान देशभक्त सेनानी थे । उनकी पल्ली श्रीमती पूर्णा गुप्ता महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान की बेटी के साथ पढ़ती थी । उनमें देशभक्ति कूट-कूटकर भरी थी । वे बिलासपुर में स्वतंत्रता आंदोलन का अलख भी जगाती थीं । आगे जाकर उन्हें दो बार जेल की यातनाएं भी सहनी पड़ीं । उनके घर से राष्ट्रीय आंदोलन का आधा ट्रक साहित्य पुलिस ने जब्त किया था ।

पंडित गंगाप्रसाद बाजपेयी रेलवे स्कूल में भारत स्काउट एवं गाईड के सदस्य थे । भ्रमण कुमार गुप्ता उनके टीचर थे । उनके ही नेतृत्व में स्वयंसेवक टुकड़ी के साथ बिलासपुर ट्रेन से त्रिपुरी जबलपुर के लिए प्रस्थान की । लंबे समय तक प्रशिक्षण कार्यक्रम चला, अधिवेशन की व्यवस्था बनाने कई टुकड़ियों का निर्माण हुआ, जिसमें चिकित्सा टुकड़ी, भोजन परोसन टुकड़ी, आवास टुकड़ी, राष्ट्रीय गीत टुकड़ी, ध्वज वंदन टुकड़ी, मा्चिंग टुकड़ी, सुरक्षा टुकड़ी, देश भर से लगभग दो-तीन हजार स्वयं सेवकों ने (अंडर ग्राउण्ड कांग्रेस सेवादल के साथी) ने भागीदारी की । गंगाप्रसाद बाजपेयी ध्वज टुकड़ी एवं मार्चिंग टीम में शामिल हुए, वे लेझिंग ड्रील में निपुण थे । टीचर भ्रमण गुप्ता रेलवे स्कूल के एक दल को लेकर अधिवेशन में भाग लेकर अप्रशिक्षित स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण दिया, उनके स्वयंसेवकों की इकाई मार्च-पॉस्ट, लेझिंग ड्रील, बैण्ड टुकड़ी में निपुण एवं आकर्षक थी । उसी अधिवेशन में नेताजी सुभाषचंद्र बोस कांग्रेस अध्यक्ष चुने गये । अत्यधिक बीमार पड़ जाने के कारण ठाकुर छेदीलाल बैरिस्टर ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस की विशाल फोटो हाथी के हौंदा में रख दी । आकर्षक झांकी में 52 हाथी, ऊँट, घोड़े एवं मार्च-पास्ट बैण्ड की टुकड़ी ने सलामी दी ।

मार्च 1942 में नगर स्थित कोनी गाँव में कांग्रेस सेवादल का एक शिविर जिला प्रमुख चित्रकांत जायसवाल जी के नेतृत्व में लगाया गया । सेवादल के संरक्षक मुकुंद केशव चितले कांग्रेस अध्यक्ष भी थे, उस शिविर में अपने वरिष्ठ साथी डॉ. वासुदेव देवरस, दयाशंकर दुबे, देवदत्त भट्ट, साधुलाल, क्रांतिकुमार भारती, पी. जनार्दन नायडु, हरसेवक सिंह परिहार, बशीर अहमद, लक्ष्मी नारायण दुआ, श्रीकांत वर्मा, रामगोपाल श्रीवास्तल, मंगल भाई, बी.आर. यादव, एम.सी. ओत्तलवार, फागुराम ताग्रकार (तखतपुर ), सुरेशचंद्र तिवारी आदि साथियों के साथ शामिल होकर प्रशिक्षण लिया । महात्मा गाँधी जी के बिलासपुर नगर आगमन पर भारी भीड़ के बावजूद बच्चे होते हुए भी उनके निकट पहुँचकर ऑटोग्राफ मांगा । बापू ने कहा - “मैं देश की आजादी हेतु निकला हूँ, देश-सेवा के लिए कुछ सहयेग लेकर हस्ताक्षर देता हूँ ।'” गंगाप्रसाद बाजपेयी ने बापू से आग्रह कर कहा - “बापू, मैं बच्चा हूँ । मेरे पास आपको देने हेतु कोई पैसे नहीं है, मैं दिल से देश-सेवा को तत्पर हूँ । मेरे गले में एक गमछा रखा है, मैं उसे ही भेंट कर आपका हस्ताक्षर चाहता हूँ ।' राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने छोटे बच्चे के सिर पर हाथ रख आशीष देते हुए उन्हें अपना ऑटेग्राफ दे दिया | 9 अगस्त वर्ष 1942 में महात्मा गाँधी के आह्ान “अंग्रेजों भारत छोड़ो" आंदोलन में अपने दलनायक स्व. चित्रकांत जायसवाल जी के निर्देश पर शासकीय बहुउद्देशीय उच्चतर माध्यमिक शाला बिलासपुर में अपने दल साथियों के साथ तिरंगा झंडा फहरा दिया । प्राचार्य द्वारा विरोध करने पर दल के साथ सड़क से ही मिट्टी, पत्थर, धूल उठाकर मार दिया, जिससे उन्हें चोंट पहुँची । पुलिस ने गिरफ्तार कर दिया । उम्र कम होने के कारण स्कूल के 12-13 साथियों को सिविल लाईन पुलिस ने शाम छोड़ दिया । गंगाप्रसाद बाजपेयी ने खादी धारण कर ताउम्र गाँधीवादी एवं विनोबा भावे की जीवन-पद्धति को जीवन-पर्यंत निभाया। स्व. बिसाहू दास महंत, स्व. ठाकुर राजेन्द्र संह जी उनके निकटतम वरिष्ठ साथी थे । उन्हें मानस-मर्मज्ञ महाकवि एवं प्रख्यात साहित्यकार डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र नानाजी से साहित्य, संस्कृति एवं समाजसेवा की प्रेरणा मिली तथा चाचाश्री इंद्रदत्त बाजपेयी व छोटेलाल बाजपेयी से देशप्रेम व राष्ट्रीयता से अनुप्राणित रहे ।

More Photo

    Record Not Found!


More Video

    Record Not Found!


Related Post

Leave a Comments

Name

Contact No.

Email