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तालीमी पसमांदगी को खत्म करने के लिए सर सैयद के मिशन को अपनाना ज़रूरी: एम. डब्ल्यू. अंसारी- आई.पी.एस (रिटायर्ड डी.जी.)

Posted on :04-Apr-2026
तालीमी पसमांदगी को खत्म करने के लिए सर सैयद के मिशन को अपनाना ज़रूरी: एम. डब्ल्यू. अंसारी- आई.पी.एस (रिटायर्ड  डी.जी.)

सर सैयद अहमद ख़ान बरसगीर के उन अज़ीम मिमारों में से हैं जिन्होंने एक ज़वाल पज़ीर क़ौम को न सिर्फ जगाया बल्कि उसे इल्म, शऊर और ख़ुद एतमादी की नई राह दिखाई। वो महज़ एक मुस्लिह या मुअल्लिम नहीं थे बल्कि एक ऐसी तहरीक के बानी थे जिसने मुसलमानों की तक़दीर बदलने की बुनियाद रखी। हर साल 17 अक्टूबर को उनकी पैदाइश की तक़रीबात बड़े एहतेमाम से मनाई जाती हैं, अलीग बिरादरी अपने असलाफ पर फ़न का इज़हार करती है, सेमिनार्स और तक़ारीब का इनक़ाद होता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या हमने सर सैयद के मिशन को भी उसी संजीदगी से अपनाया है? 

ज़रूरत इस बात की है कि जिस तरह यौम-ए-पैदाइश पर अलीग बिरादरी एक प्लेटफ़ॉर्म पर जमा होती है, उसी तरह यौम-ए-वफ़ात के मौक़े पर भी इज्तिमाई तौर पर उनके लिए ईसाल - ए - सवाब किया जाए और इससे बढ़कर उनके मिशन को आगे बढ़ाने के लिए एक अमली और मोअस्सिर लायह-ए-अमल तैयार किया जाए। आज के हालात इस बात के तकाज़ी हैं कि सर सैयद को सिर्फ याद न किया जाए बल्कि उनकी तालीमी अफ़कार/ तालीमी तहरीक को ज़िंदा रखा जाए।

किसी भी मुल्क की तरक़्क़ी उस वक़्त मुमकिन होती है जब उसके तमाम तबक़ों को यकसां मौक़े फ़राहम किए जाएँ । लेकिन जब किसी मख़सूस तबके को मुसलसल नज़र अंदाज़ किया जाए तो वो समाजी, तालीमी और मआशी मैदान में पीछे रह जाता है। हमारे मुल्क में ख़ास तौर पर मुसलमानों और दूसरे पसमांदा तबक़ों को पिछले कुछ बरसों में मुख़्तलिफ़ शोबों में दरपेश चैलेंजों ने उनकी तरक़्क़ी की रफ़्तार को मुतास्सिर किया है।

मुसलमानों की पसमांदगी का सबसे बड़ा सबब तालीमी अदम मुसावात है। यह कहना कि मुसलमान तालीम हासिल नहीं करना चाहते, हक़ीक़त के बरअक्स है। असल मसला यह है कि मयारी तालीमी इदारों की कमी, सरकारी स्कूलों की अबतर हालत और मआशी दुश्वारियों के सबब उनके लिए तालीम के मौक़े महदूद हो गए हैं। रोज़गार के मैदान में भी उन्हें ख़ातिरख़्वाह मौक़े मयस्सर नहीं, जिसकी वजह से माली इस्तेहकाम एक ख़्वाब बन कर रह गया है। कारोबारी दुनिया में सरमाया और सहूलियात की कमी भी एक बड़ी रुकावट है।

सियासी मैदान में कमज़ोर नुमाइंदगी ने भी उनके मसाइल को मज़ीद पेचीदा बना दिया है। पॉलिसी साज़ी में मुनासिब हिस्सेदारी न होने के सबब उनके मसाइल अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिए जाते हैं। इसके साथ-साथ मीडिया के एक तबके की जानिब से मुसलमानों की मनफ़ी तस्वीरकशी ने समाज में ग़लतफ़हमियाँ और तअस्सुबात को जन्म दिया है, जिसका बराह-ए-रास्त असर उनके हक़ूक़ और मौक़ों पर पड़ रहा है।

अगर हम तारीख़ के दरीचों से झांकें तो मालूम होगा कि सर सैयद अहमद ख़ान ने किस तरह अपनी पूरी जिंदगी क़ौम की तालीमी और समाजी इस्लाह के लिए वक़्फ़ कर दी। अलीगढ़ तहरीक दरअसल एक ज़ेहनी इनक़लाब था, जिसने मुसलमानों को जदीद तालीम की तरफ़ राग़िब किया और उन्हें नए दौर के तक़ाज़ों से हमआहंग किया। वो एक ऐसा विज़न रखते थे जिसमें इल्म, तहक़ीक़ और वुसअत-ए-नज़र बुनियादी स्तंभ थे।

मगर अफ़सोस कि हमने सर सैयद को महज़ तक़रीबात और नारों तक महदूद कर दिया है। क्या हमने कभी उनके यौम-ए-वफ़ात (27 मार्च) को उसी अकीदत और संजीदगी से मनाने की कोशिश की जिस तरह यौम-ए-पैदाइश को मनाते हैं? यह मौक़ा महज़ ताज़ियती अल्फ़ाज़ का नहीं बल्कि एहतेसाब और अज़्म-ए-नौ का होना चाहिए। यह सोचने का कि हमने सर सैयद के मिशन के साथ कितना इंसाफ़ किया है और आइंदा क्या करना है और उनके तालीमी मिशन को कैसे आगे बढ़ाया जाए। आज भी हम तालीमी मैदान में बहुत ही पीछे हैं इसलिए उनके अफ़कार, मिशन और तहरीक को आगे बढ़ाना हमारा अव्वलीन फ़र्ज़ है।

आज जब दुनिया तेज़ी से बदल रही है, नए मसाइल जन्म ले रहे हैं, आलमी सतह पर ईरान जैसे ख़ितों में कशिदगी, मुल्क के अंदर कुछ फ़िल्मों और बयानियों के ज़रिए मख़सूस तबक़ों को निशाना बनाने की कोशिशें, और अदलिया व दूसरे इदारों के हवाले से उठते सवालात एक संजीदा फ़िक्र के मुतकाज़ी हैं। ऐसे माहौल में सर सैयद की एतदाल पसंद, इल्मी और हक़ीक़त पसंदाना सोच की अहमियत और भी बढ़ जाती है।

मज़ीद यह कि ज़बान व साक़ाफ़त के मैदान में भी चैलेंज कम नहीं हैं। उर्दू, अरबी और फ़ारसी जैसी ज़बानों के फ़रोग़ के लिए क़ायम इदारे माली बुहरान का शिकार हैं, उस्तादों की तकर्रुरियाँ न के बराबर हैं और कई इदारे बंद होने के दहाने पर हैं बल्कि बंद हो चुके हैं। यह सूरत-ए-हाल न सिर्फ तहज़ीबी नुक़सान का सबब है बल्कि तालीमी पसमांदगी को भी बढ़ा रही है।

ऐसे हालात में अलीग बिरादरी की ज़िम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। सर सैयद की तालीमी तहरीक को आगे बढ़ाना, नए तालीमी इदारे क़ायम करना, नौजवानों को जदीद उलूम और हुनर से आरास्ता करना वक़्त की सबसे बड़ी ज़रूरत है। हमें सिर्फ हुकूमतों से शिकवा करने के बजाय ख़ुद अपनी ज़िम्मेदारियों का एहसास करना होगा।

सर सैयद की ज़िंदगी का ख़ुलासा यही था कि क़ौम को तालीमयाफ़्ता, ख़ुद कफ़ील और बाक़ार बनाया जाए। आज उनके यौम-ए-वफ़ात के मौक़े पर हमें यह अहद करना चाहिए कि हम तालीम, तिजारत, हुनर और बाहमी तआवुन के मैदान में संजीदा कोशिशें करेंगे। हर सूबे में अलीगढ़ तर्ज़ के तालीमी इदारों के क़ायम करने की जद्दोजहद की जाए, ताकि इल्म का चिराग हर घर तक पहुँच सके।

आख़िर में यही कहा जा सकता है कि सर सैयद अहमद ख़ान को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करने का सबसे मोअस्सिर तरीका यही है कि हम उनके मिशन को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएं। तालीम को आम करें, शऊर को बेदार करें और एक ऐसे समाज की तश्कील करें जो इल्म, इंसाफ़ और मुसावात पर क़ायम हो और इसके लिए ज़रूरी है कि सर सैयद के अफ़कार, मिशन और तहरीक को आगे बढ़ाया जाए बल्कि पूरी कुव्वत के साथ यह काम किया जाए जिससे क़ौम का खोया हुआ वक़ार हासिल हो । यही सर सैयद के ख़्वाब की ताबीर है और यही हमारे रौशन मुस्तक़बिल की ज़मानत भी।

 

 

 

 

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पांच नाम सुर्खियों में : बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन?

Posted on :02-Apr-2026
पांच नाम सुर्खियों में : बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन?

डॉ.समरेंद्र पाठक

वरिष्ठ पत्रकार

बिहार : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार किसी भी समय अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप सकते हैं। इसके साथ ही राज्य में पहली बार भाजपा सरकार बनने का रास्ता साफ हो जाएगा।भाजपा आलाकमान ने नए मुख्यमंत्री के लिए नामों पर गंभीरता से विचार करना भी शुरू कर दिया है।

पार्टी के शीर्ष सूत्रों की माने तो मुख्यमंत्री पद के लिए पांच नेताओं के नामों पर मंथन जारी है।इनमें केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय,उपमुख्यमंत्रियों सर्वश्री सम्राट चौधरी,विजय कुमार सिन्हा,नीतीश मिश्रा एवं सैयद शाहनवाज हुसैन शामिल हैं। 

हालांकि मोदी शासनकाल में भाजपा के इतिहास को देखा जाय तो इससे इतर गुमनामी में रह रहे नेता को ही कमान मिलता रहा है। कभी सोचा भी नहीं गया होगा,कि श्री नितिन नवीन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हो सकते हैं। ऐसे कई उदाहरण है। जिन हस्तियों का नाम सुर्खियों में है,उनका परिचय इस प्रकार है:-

श्री नित्यानंद राय

श्री नित्यानंद राय का जन्म 1 जनवरी 1966 को हुआ।वह भारत सरकार में गृह राज्य मंत्री हैं और बिहार के एक प्रमुख भाजपा नेता हैं। उन्होंने 2014 और 2019 में बिहार के उजियारपुर लोकसभा सीट से जीत हासिल की। वह लंबे समय तक हाजीपुर से विधायक रहे और बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 

यादव जाति के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे श्री राय को बिहार की राजनीति में राजद सुप्रीमों लालू यादव की काट के लिए ने भाजपा ने उन्हें प्रदेश प्रमुख भी बनाया था।राज्य में यादवों की अच्छी खासी आबादी है। श्री राय ने वर्ष 1981 मेंअखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से राजनीति की शुरुआत की थी एवं वर्ष 2000 में हाजीपुर से पहली बार विधायक बने और लगातार 2000-2014 तक चार बार विधायक रहे।

श्री सम्राट चौधरी

बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को हुआ।वह राज्य के एक प्रमुख भाजपा नेता हैं। मुंगेर के रहने वाले श्री चौधरी ने राजद से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी और वर्ष 1999 में कृषि मंत्री बने। वह परबत्ता से विधायक और विधान पार्षद रह चुके हैं और राज्य में ओबीसी के एक प्रमुख चेहरा के रूप में सुमार हैं। श्री चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है।उनके पिता  शकुनी चौधरी एक दिग्गज नेता और मां पार्वती देवी तारापुर से विधायक रही हैं।

श्री चौधरी वर्ष1990 में सक्रिय राजनीति में आए और वर्ष 1999 में राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री बने।उसके बाद वह जनता दल यूनाइटेड होते हुए
भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। वह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके है।उन्हें शीर्ष नेतृत्व का पसंदीदा भी कहा जाता है।

विजय कुमार सिन्हा

सवर्ण जाति से आने वाले श्री विजय कुमार सिन्हा का जन्म 5 जून 1967 को हुआ।वह बिहार के एक प्रमुख भाजपा नेता और वर्तमान में उपमुख्यमंत्री हैं।लखीसराय से 5 बार के विधायक श्री सिन्हा पूर्व में बिहार विधानसभा के अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं,जो अपने कड़े फैसलों के लिए अलग पहचान रखते  हैं। 

श्री सिन्हा सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कोर्स किए हुए है। उन्होंने राजनीतिक की शुरुआत छात्र राजनीति से की। वर्ष 2005 में पहली बार लखीसराय से विधानसभा चुनाव जीते। इसके बाद से वे लगातार इस सीट से विधायक हैं।

श्री सिन्हा को भाजपा के तेजतर्रार नेता के रूप में देखा जाता है, जो जमीनी स्तर से जुड़े है। वह सवर्ण जाति के प्रमुख नेताओं में एक हैं।अगर राज्य में सवर्ण जाति का कोई मुख्यमंत्री बनाया जाता है,तो उन्हें प्रबल उम्मीदवार माना जाता है।

श्री नीतीश मिश्रा

बिहार के एक प्रमुख राजनीतिक घराने से आने वाले श्री नीतीश मिश्रा का जन्म 9 जुलाई 1973 को हुआ।इनके पिता डॉ. जगन्नाथ मिश्र अखंड बिहार के तीन बार मुख्यमंत्री रहे हैं।चाचा ललित नारायण मिश्र सत्तर के दशक में रेल मंत्री थे।दर्शकों तक बिहार की राजनीति पर पकड़ रखने वाले परिवार के श्री मिश्रा झंझारपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं,जो इनके पिता का पारंपरिक क्षेत्र रहा है।

मिथिला में व्यापक जनाधार वाले उच्च शिक्षित श्री नीतीश मिश्रा 13वीं, 14वीं और 15वीं बिहार विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं। वह पूर्व में बिहार सरकार में उद्योग और पर्यटन मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।श्री मिश्रा बिहार की राजनीति में एक युवा और सक्रिय नेता के रूप में पहचाने जाते हैं। मिथिला के नंबर वन नेता में सुमार हैं।

सैयद शाहनवाज हुसैन

सैयद शाहनवाज हुसैन एक प्रमुख भारतीय राजनेता और भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं।इनका जन्म 12 दिसंबर 1968 को बिहार के सुपौल में हुआ। वह 32 वर्ष की आयु में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सबसे कम उम्र के कैबिनेट मंत्री  बने थे। वे तीन बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और वर्तमान में बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं। 

श्री हुसैन ने इलेक्ट्रॉनिक्स में डिप्लोमा किया है।उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। वह वर्ष 1999, 2006 उपचुनाव और 2009 मे लोकसभा के लिए चुने गए और केंद्र में सबसे कम उम्र के मंत्री बने।वह बेहतरीन पार्टी प्रवक्ता भी हैं।

कहा जाता है, कि उन्हें खास विकल्प के रूप में बिहार की राजनीति में सक्रिय किया गया है,क्योंकि वे अल्पसंख्यक समुदाय से आते है। हाल में उन्होंने एससीएसटी कानून पर अपनी बेबाकी राय जताकर राज्य में सवर्ण मुस्लिम को पुराने ढर्रे पर करीब लाने की कोशिश की।

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दिल्ली विधानसभा : सदन का बहिष्कार एवं व्यवधान लोकतंत्र में ठीक नहीं: गुप्ता

Posted on :02-Apr-2026
दिल्ली विधानसभा : सदन का बहिष्कार एवं व्यवधान लोकतंत्र में ठीक नहीं: गुप्ता

डॉ.समरेंद्र पाठक

वरिष्ठ पत्रकार

नई दिल्ली : दिल्ली विधान सभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आज कहा कि सदन की कार्यवाही में व्यवधान एवं बहिष्कार  लोकतंत्र में ठीक नहीं है। श्री गुप्ता ने यह बात यहां पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही।उन्होंने कहा कि सत्र के दौरान विपक्ष ने पूरी तरह से नकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया। यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने बिना किसी ठोस मुद्दे के विरोध के नाम पर सदन की कार्यवाही से अनुपस्थित रहने का विकल्प चुना,जो देश के विधायी इतिहास में अभूतपूर्व है।

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विधानसभा अध्यक्ष ने आठवीं विधान सभा के चौथे सत्र के दूसरे भाग के समापन पर कहा कि 23 से 27 मार्च तक चले इस सत्र में कुल चार बैठकें हुईं। सदन में कुल 15 घंटे और 16 मिनट तक काम काज हुआ। श्री गुप्ता ने कहा कि इस सत्र के दौरान देखा गया कि आचरण संसदीय कामकाज के लिए गंभीर चिंता पैदा करता है। उन्होंने उल्लेख किया कि कार्यवाही में जानबूझकर व्यवधान डालना, सदन को चलने से रोकना, उसकी गरिमा की उपेक्षा करना और बाद में भ्रामक विमर्श बनाने का प्रयास करना अनुशासनहीनता का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष को कोई शिकायत थी, तो वे सदन में आकर अपना पक्ष रख सकते थे और उन्हें चर्चा के लिए समय दिया जाता, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने शामिल न होने का फैसला किया। विधानसभा अध्यक्ष ने निलंबन के मामले पर स्पष्ट किया कि इस बारे में 21 मार्च को विपक्ष के नेता के साथ हुई बैठक में विस्तार से बताया गया था। श्री गुप्ता ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैग की सभी 7 लंबित रिपोर्टों को सदन के पटल पर रख दिया गया है और अब कोई भी रिपोर्ट लंबित नहीं है।एल.एस.

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चाय बागान में दिखा पीएम मोदी का अलग अंदाज, श्रमिक महिलाओं के साथ किया काम

Posted on :01-Apr-2026
चाय बागान में दिखा पीएम मोदी का अलग अंदाज, श्रमिक महिलाओं के साथ किया काम

-चुनावी दौरे के बीच चाय उद्योग से जुड़े कामगारों से संवाद

डिब्रूगढ़ : असम में विधानसभा चुनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चाय बागान दौरा चर्चा का केंद्र बन गया है। डिब्रूगढ़ पहुंचने के बाद बुधवार को प्रधानमंत्री ने दिन की शुरुआत एक चाय बागान के दौरे से की, जहां उन्होंने महिला कामगारों के साथ चाय की पत्तियां तोड़ीं, उनसे बातचीत की और सेल्फी भी खिंचवाई।

चाय बागान में काम करने वाली महिलाओं से मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा, कि हमें चाय बागान के हर एक परिवार की कोशिशों पर बहुत गर्व है। उनकी कड़ी मेहनत और लगन ने असम का मान बढ़ाया है। उन्होंने इस अनुभव को यादगार बताते हुए असम की चाय को राज्य की “आत्मा” करार दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस दौरे से जुड़ी तस्वीरें और अनुभव साझा किए। उन्होंने लिखा कि असम की चाय ने पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। इस दौरान महिलाओं ने अपनी संस्कृति के बारे में भी बताया और प्रधानमंत्री के साथ आत्मीय बातचीत की। यह दौरा केवल औपचारिक नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पीएम मोदी अक्सर अपने शुरुआती जीवन का उल्लेख करते हैं, जब वे अपने पिता के साथ रेलवे स्टेशन पर चाय बेचते थे। ऐसे में चाय बागान में कामगारों के साथ उनका संवाद उनके व्यक्तिगत जीवन से जुड़ाव को भी दर्शाता है।

असम दुनिया के प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्रों में से एक है और भारत के चाय निर्यात में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। डिब्रूगढ़, तिनसुकिया और जोरहाट जैसे जिलों के चाय बागानों में लाखों लोग कार्यरत हैं, जिनमें महिलाओं की संख्या विशेष रूप से अधिक है। यह उद्योग राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।

राजनीतिक दृष्टि से भी पीएम मोदी का यह दौरा अहम माना जा रहा है। चुनावी माहौल में चाय बागान के कामगारों से सीधा संवाद स्थापित करना एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इस क्षेत्र से जुड़े मतदाता बड़ी संख्या में चुनाव परिणामों को प्रभावित करते हैं।(एजेंसी)

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बीजेपी का बड़ा दांव : ‘जमीन जिहाद’ पर सख्ती का वादा, घोषणापत्र में कई बड़े फैसले

Posted on :31-Mar-2026
 बीजेपी का बड़ा दांव : ‘जमीन जिहाद’ पर सख्ती का वादा, घोषणापत्र में कई बड़े फैसले

-वित्त मंत्री सीतारमण ने यूसीसी लागू करने, 2 लाख नौकरियां देने और बाढ़मुक्त असम बनाने का संकल्प पत्र किया विमोचित

गुवाहाटी : असम विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मंगलवार को अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुवाहाटी स्थित पार्टी कार्यालय में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया की मौजूदगी में ‘संकल्प पत्र’ का विमोचन किया।

जारी घोषणापत्र में बीजेपी ने राज्य में पुनः सत्ता में आने पर 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का वादा किया है। इसके साथ ही ‘जमीन जिहाद’ पर सख्त रोक लगाने और भूमि से जुड़े अवैध कब्जों पर कार्रवाई की बात कही गई है। पार्टी ने ‘सुरक्षित असम, विकसित असम’ के लक्ष्य को दोहराते हुए कई बड़े विकासात्मक वादे किए हैं। घोषणापत्र जारी करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में असम की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने दावा किया कि राज्य की जीडीपी करीब तीन गुना बढ़ी है और प्रति व्यक्ति आय 2020-21 के 1.03 लाख रुपये से बढ़कर 2024-25 में 1.59 लाख रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जो बदलाव पिछले दशक में हुए, वे दशकों के शासन में संभव नहीं हो पाए थे।

बीजेपी ने युवाओं को ध्यान में रखते हुए अगले पांच वर्षों में 2 लाख रोजगार देने का वादा किया है। साथ ही ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज, वन यूनिवर्सिटी और वन इंजीनियरिंग कॉलेज’ की योजना को भी प्रमुखता दी गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि सरकार युवाओं के लिए वैश्विक स्तर का इकोसिस्टम तैयार कर रही है, जिससे बाहर गए असमिया प्रतिभाएं वापस लौटें। इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी पार्टी ने बड़े दावे किए हैं। घोषणापत्र के अनुसार, ब्रह्मपुत्र नदी पर पिछले 10 वर्षों में 9 पुल बनाए गए हैं, जबकि 5 और पुल निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा, असम को बाढ़मुक्त बनाने के लिए सरकार बनने के बाद पहले दो वर्षों में 18 हजार करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है।

बीजेपी ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने का वादा भी किया है, हालांकि छठी अनुसूची और अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों को इससे बाहर रखने की बात कही गई है। साथ ही ‘लव जिहाद’ के खिलाफ सख्त कदम उठाने का भी आश्वासन दिया गया है।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह संकल्प पत्र असम की जनता के सुझावों पर आधारित है। प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया के अनुसार, करीब 2.45 लाख सुझावों को शामिल कर यह दस्तावेज तैयार किया गया है। गौरतलब है कि असम विधानसभा की 126 सीटों के लिए एक चरण में 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।(एजेंसी)

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LPG बुकिंग में बड़ा बदलाव: 45 दिन का इंतजार बना मजबूरी

Posted on :25-Mar-2026
LPG बुकिंग में बड़ा बदलाव: 45 दिन का इंतजार बना मजबूरी

Big News on LPG Booking : घरेलू गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले करोड़ों परिवारों के लिए जरूरी खबर है. इंडियन ऑयल (IndianOil) ने LPG रिफिल बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव कर दिया है. अब पूरे देश में शहर, गांव और दूरदराज के इलाकों में रिफिल बुकिंग के लिए अनिवार्य गैप तय कर दिए गए है. इनका मुख्य फोकस है कि बिना जरूरत के जल्दी-जल्दी बुकिंग न हो और गैस की सप्लाई व्यवस्था बेहतर बने.

उज्ज्वला योजना (PMUY) के ग्राहक सभी उज्ज्वला कनेक्शन वाले परिवारों के लिए अब रिफिल बुकिंग का अनिवार्य गैप 45 दिन है. यानी पिछले सिलेंडर की डिलीवरी के 45 दिन बाद ही नया सिलेंडर बुक किया जा सकेगा. आपको बता दें कि भारत सरकार ने साल 2016 में देश की महिलाओं को फ्री गैस सिलेंडर देने के लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू की थी और इस योजना के जरिए देश की करोड़ों महिलाओं को फ्री सिलेंडर की सुविधा मिल रही है. कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जून 2025 तक, पेट्रोलियम मंत्री ने 10.33 करोड़ से अधिक कनेक्शन दिए हैं.

गांव और शहर के लोगों के लिए गैस बुकिंग का नियम

सामान्य (Non-PMUY) उपभोक्ताओं के लिए अलग नियम है. इसमें SBC (Single Bottle Connection) यानी एक सिलेंडर वाला कनेक्शन वालों के लिए अनिवार्य गैप 25 दिन का है. DBC (Double Bottle Connection) यानी दो सिलेंडर वाला कनेक्शन वालों के लिए अनिवार्य गैप 35 दिन और छोटे सिलेंडर (5 KG और 10 KG) के लिए अलग नियम है.

5 KG घरेलू सिलेंडर शहर या उपनगर क्षेत्र में 9 दिन का गैप पर मिलेगा. गांव या दूरदराज क्षेत्र में 16 दिन का गैप पर मिल जाएगा. वहीं, 10 KG कंपोजिट सिलेंडरशहर या उपनगर क्षेत्र में 18 दिन का गैप पर और गांव या दूरदराज क्षेत्र में 32 दिन का गैप पर मिलेगा. ये नियम पूरे देश में एक समान लागू होंगे.
गैस बुकिंग के समय इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप समय से पहले बुकिंग करने की कोशिश करेंगे तो सिस्टम खुद बुकिंग को ब्लॉक कर देगा. नया गैप पिछले सिलेंडर की सफल डिलीवरी की तारीख से गिना जाएगा.  सभी क्षेत्रों में एक ही नियम लागू हैं. इंडियन ऑयल ने कहा है कि यह बदलाव सभी ग्राहकों के लिए ट्रांसपरेंसी और एक जैसी व्यवस्था बनाने के लिए किया गया है. इससे अनावश्यक बुकिंग रुकेगी और जरूरतमंद लोगों को समय पर सिलेंडर मिल सकेगा.

ग्राहकों को क्या करना चाहिए?

  • अपने पिछले सिलेंडर की डिलीवरी की तारीख याद रखें.
  • उसी के हिसाब से 25, 35 या 45 दिन बाद ही नया सिलेंडर बुक करें.
  • बुकिंग के लिए mLPG ऐप, MyLPG.in वेबसाइट या अपने लोकल डिस्ट्रीब्यूटर से संपर्क करें.
  • अगर कोई समस्या हो तो अपने LPG डिस्ट्रीब्यूटर या इंडियन ऑयल के आधिकारिक चैनल पर मदद लें.

ये नए नियम उन परिवारों के लिए थोड़ी असुविधा पैदा कर सकते हैं जो पहले जल्दी-जल्दी बुकिंग कर लेते थे, लेकिन लंबे समय में यह गैस की बचत और बेहतर गैस डिस्ट्रीब्यूशन के लिए फायदेमंद साबित होगा.

सरकार और इंडियन ऑयल का लक्ष्य है कि एलपीजी की सप्लाई व्यवस्था और मजबूत बने. आम उपभोक्ताओं से अपील है कि वे नए नियमों का पालन करें ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो. नए नियमों से पहले जिन लोगों ने जल्दी बुकिंग की थी, उन्हें अब नया गैप पूरा होने तक इंतजार करना होगा. इंडियन ऑयल ने सभी डिस्ट्रीब्यूटर्स को भी इन नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं. यह बदलाव घरेलू एलपीजी उपयोगकर्ताओं के लिए अनुशासन लाने वाला कदम है. अगर आप भी एलपीजी सिलेंडर इस्तेमाल करते हैं तो अपने पिछले बुकिंग की डेट चेक करें और इन नए नियम के अनुसार प्लानिंग करें.(एजेंसी)

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युद्ध का सीधा असर: किसानों पर बढ़ेगा बोझ, कीटनाशक 30% तक महंगे

Posted on :24-Mar-2026
युद्ध का सीधा असर: किसानों पर बढ़ेगा बोझ, कीटनाशक 30% तक महंगे

चीन ने बढ़ाई कीमतें और निर्यात में भी की कटौती, ग्लोबल सप्लाई चेन पर बढ़ा दबाव

नई दिल्ली : अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब सीधे भारतीय किसानों पर पड़ रहा है। एग्रोकेमिकल इंडस्ट्री के मुताबिक आने वाले दिनों में कीटनाशकों की कीमतों में 25 से 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में होने जा रही है जब खरीफ सीजन शुरू होने वाला है और किसानों को कीटनाशकों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इससे खेती की लागत में सीधा इजाफा होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक एग्रोकेमिकल कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण नए प्रोडक्ट अब महंगे दामों पर मिलेंगे। एक बड़ी कंपनी के अधिकारी के हवाले से बताया कि अप्रैल से कीमतों में बढ़ोतरी दिखनी शुरू हो जाएगी। साथ ही घरेलू बाजार में उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है और निर्यात पर भी असर पड़ने की आशंका है। युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिसका सीधा असर पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर पड़ा है। पेट्रोकेमिकल्स के दाम 25–30फीसदी तक बढ़े हैं।

पैकेजिंग लागत भी 15–30फीसदी बढ़ी है। सल्फर और पेट्रोकेमिकल्स कीटनाशक बनाने में प्रमुख कच्चा माल हैं, इसलिए कंपनियों के लिए लागत बढ़ना तय है। कीटनाशकों में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश केमिकल्स चीन से आते हैं, लेकिन चीन ने कीमतें बढ़ा दी हैं और निर्यात में भी कटौती कर दी है। इससे ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक चीन में चल रही अंतरराष्ट्रीय बैठक के बाद स्थिति और साफ हो सकती है।

भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 93 के पार पहुंच चुका है, जिससे आयात और महंगा हो गया है। इसके अलावा शिपिंग चार्ज बढ़ गए हैं। इंश्योरेंस प्रीमियम भी महंगे हो गए हैं। इन सभी कारणों से कंपनियों के पास कीमत बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। अगर युद्ध लंबा चलता है, तो सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एग्रोकेमिकल निर्यातक है और हर साल 5.5 अरब डॉलर से ज्यादा का निर्यात करता है। ऐसे में यह संकट सिर्फ घरेलू ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार पर भी असर डाल सकता है।(एजेंसी)

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संसद में गूंजा पश्चिम एशिया मुद्दा, पीएम मोदी ने देश से मांगी एकजुटता

Posted on :24-Mar-2026
संसद में गूंजा पश्चिम एशिया मुद्दा, पीएम मोदी ने देश से मांगी एकजुटता

यह केवल क्षेत्रीय नहीं वैश्विक संकट, तेल-गैस आपूर्ति, अर्थव्यवस्था और भारतीयों की सुरक्षा पर सरकार सतर्क, वैकल्पिक स्रोतों पर भी तेज प्रयास

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच आज सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में स्थिति पर विस्तृत बयान देते हुए कहा कि देश को कोरोना काल की तरह धैर्य और एकजुटता के साथ हर चुनौती का सामना करना होगा। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के वैश्विक असर को देखते हुए उनका यह संबोधन बेहद अहम माना जा रहा है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, कि मौजूदा संकट का प्रभाव केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक है और इससे अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा तथा व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि भारत सरकार हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और विभिन्न स्तरों पर तैयारियां की जा रही हैं। हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठक में तेल आयात, खाद आपूर्ति और व्यापार पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की समीक्षा की गई।

पीएम मोदी ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के लिए कच्चा तेल, गैस और उर्वरकों की बड़ी आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। मौजूदा संघर्ष के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो गई है। इसके बावजूद सरकार का प्रयास है कि देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति बाधित न हो। पीएम मोदी ने बताया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसमें एलपीजी का लगभग 60 प्रतिशत शामिल है। इस स्थिति को देखते हुए सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ वैकल्पिक सप्लायर्स से संपर्क में है, ताकि आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित न हो। साथ ही, उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों पर भी मंथन किया जा रहा है, जिससे किसानों को भविष्य में किसी तरह की कमी का सामना न करना पड़े।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस युद्ध ने भारत के सामने आर्थिक, सामरिक और मानवीय तीनों तरह की चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने प्रभावित देशों में मौजूद भारतीयों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। अब तक 3.75 लाख से अधिक भारतीयों कोसुरक्षित स्वदेश लाया जा चुका है। विदेशों में भारतीयों की मदद के लिए 24 घंटे सातों दिन कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन स्थापित की गई हैं तथा नियमित एडवाइजरी जारी की जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि उन्होंने पश्चिम एशिया के कई राष्ट्राध्यक्षों से बातचीत कर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

कोयले का पर्याप्त भंडार

पीएम मोदी ने कहा, कि गर्मी का सीजन शुरू होने से देश में बिजली की मांग बढ़ गई है। वैसे अभी देश के समस्त बिजली संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त भंडारण है। पीएम मोदी ने बताया कि लगातार दूसरे वर्ष 1 अरब टन से ज्यादा कोयले का प्रोडक्शन करके भारत ने एक रिकॉर्ड बनाया है।

सीबीएसई की परीक्षाएं खाड़ी देशों में रद्द कीं

यहां प्रधानमंत्री मोदी ने भारतियों की सुरक्षित वापसी के साथ ही सीबीएसई परीक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा, कि युद्ध शुरू होने के बाद से 3 लाख 75 हजार से ज्यादा भारतीय सुरक्षित रूप से भारत लौट चुके हैं। ईरान से अब तक लगभग एक हजार भारतीयों को सुरक्षित वापस देश लाया गया हैं, इनमें 700 से ज्यादा तो मेडिकल स्टूडेंट ही हैं। पीएम मोदी ने कहा, कि स्थिति को देखते हुए, सीबीएसई ने खाड़ी देशों के स्कूलों में कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। इसके साथ ही बोर्ड द्वारा छात्रों की शिक्षा बिना किसी बाधा के जारी रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने संसद से अपील की कि इस संकट पर देश की एकजुट आवाज दुनिया तक जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार संवेदनशील, सतर्क और हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।(एजेंसी)

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पीएम किसान सम्मान निधि की 22वीं किश्त जारी: छत्तीसगढ़ के 24 लाख किसानों के खातों में पहुंचे 498.83 करोड़

Posted on :14-Mar-2026
पीएम किसान सम्मान निधि की 22वीं किश्त जारी: छत्तीसगढ़ के 24 लाख किसानों के खातों में पहुंचे 498.83 करोड़

द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार

अन्नदाताओं के खातों में पहुंची सम्मान की राशि: किसानों की समृद्धि के लिए निरंतर कार्यरत है डबल इंजन सरकार : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

रायपुर : प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने असम की राजधानी गुवाहाटी से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किश्त जारी की। इस दौरान देशभर के 9 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में लगभग 18 हजार 640 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की गई। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के 24 लाख 71 हजार किसानों के खातों में 498.83 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की गई।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित प्रधानमंत्री किसान निधि सम्मान योजना राशि अंतरण एवं पीएम किसान उत्सव दिवस कार्यक्रम में किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन प्रदेश के किसान भाइयों और बहनों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से किसानों को हर वर्ष तीन किश्तों में कुल 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जो किसानों के परिश्रम और उनके योगदान के सम्मान का प्रतीक है।

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मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसानों को अब तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 11 हजार 283 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। सरकार बनने के बाद सबसे पहले किसानों को बोनस राशि प्रदान की गई और 13 लाख किसानों के खातों में 3 हजार 716 करोड़ रुपये अंतरित किए गए।

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मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जहां प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी और 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के 48 घंटे के भीतर किसानों के खातों में भुगतान सुनिश्चित किया गया। इसके साथ ही कृषक उन्नति योजना के तहत 25 लाख से अधिक किसानों के खातों में 10 हजार 324 करोड़ रुपये की राशि होली से पहले अंतरित की गई।

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मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो-कुटकी, रागी और कपास जैसी फसलों की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। सिंचाई के लिए कृषि पंपों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, जिसके लिए इस वर्ष के बजट में 5 हजार 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के उद्देश्य से दो वर्षों में 10 हजार करोड़ रुपये की सिंचाई 
परियोजना भी शुरू की गई है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों के लिए बड़ी मदद साबित हो रही है। उन्होंने किसानों से धान के साथ-साथ अन्य फसलों की खेती की ओर भी ध्यान देने की अपील की, जिससे पानी की बचत होगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। धरसीवां विधायक श्री अनुज शर्मा ने भी किसानों को संबोधित करते हुए बधाई दी।

इस अवसर पर विधायक श्री अनुज शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष श्री चंद्रहास चंद्राकर, कृषि विभाग के संचालक श्री राहुल देव,  छत्तीसगढ़ बीज विकास निगम के एमडी श्री अजय अग्रवाल, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।

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एलपीजी की कमी का फायदा उठाकर ठगी! वायरल हो रहे फर्जी ऐड और मैसेज से रहें सतर्क

Posted on :13-Mar-2026
एलपीजी की कमी का फायदा उठाकर ठगी! वायरल हो रहे फर्जी ऐड और मैसेज से रहें सतर्क

Beware of Viral Messages Amidst Gas Shortage : दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे युद्ध की वजह से भारत में सिलेंडर की कमी हो गई है। अब इस परेशानी का फायदा साइबर धोखाधड़ी करने वाले ने उठाना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया और इंटरनेट पर एक नया साइबर फ्रॉड तेजी से फैल रहा है, जो LPG सिलेंडर यूजर्स को निशाना बना रहा है। कई लोगों को ऐसे ऐड और मैसेज मिल रहे हैं जिनमें दावा किया जा रहा है कि अभी पैसे देने पर अगले ही दिन गैस सिलेंडर घर पहुंच जाएगा। दरअसल, गैस सिलेंडर की सप्लाई और बुकिंग को लेकर बढ़ती चिंता का फायदा साइबर ठग उठा रहे हैं।

सोशल मीडिया, WhatsApp और SMS के जरिए फर्जी लिंक भेजकर लोगों को जल्दी गैस डिलीवरी का लालच देते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक पर क्लिक करता है और पेमेंट करता है, उसका पैसा ठगों के खाते में चला जाता है। पुलिस और साइबर एक्सपर्ट्स ने लोगों को चेतावनी दी है कि ऐसे किसी भी ऐड या लिंक पर भरोसा न करें। असली गैस कंपनियां जैसे Indane, BharatGas और HP Gas कभी भी अनजान लिंक के जरिए पेमेंट करने को नहीं कहतीं। ऐसे में जरूरी है कि आप इस नए LPG स्कैम के बारे में जानें और सावधान रहें।

कैसे काम कर रहा नया LPG स्कैम

इस तरह की ठगी आमतौर पर तीन स्टेप्स में होती है। फर्जी ऐड Facebook, Instagram या Google पर फर्जी ऐड दिखते हैं जिनमें तुरंत गैस डिलीवरी का वादा किया जाता है। जब लोग उस ऐड पर क्लिक करते हैं तो वे एक नकली वेबसाइट पर पहुंच जाते हैं जो असली गैस कंपनी की साइट जैसी दिखती है। यह वेबसाइट लोगों से ऑनलाइन पेमेंट, बैंक डिटेल या UPI जानकारी मांगती है। जैसे ही पेमेंट होता है, ठग पैसे लेकर गायब हो जाते हैं।

WhatsApp और SMS से भी भेजे जा रहे लिंक

कई मामलों में लोगों को सीधे WhatsApp या SMS पर भी मैसेज भेजे जा रहे हैं। इन मैसेज में लिखा होता है कि अगर तुरंत लिंक पर क्लिक नहीं किया तो सिलेंडर किसी और को दे दिया जाएगा। दिल्ली पुलिस ने भी ऐसे मैसेज से सावधान रहने की चेतावनी जारी की है।

जारी हुआ साइबर अलर्ट

साइबर पुलिस का कहना है कि गैस सिलेंडर बुकिंग के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का ही इस्तेमाल करें। अगर कोई अनजान लिंक या ऑफर दिखाई दे तो उस पर क्लिक न करें। साथ ही किसी भी व्यक्ति को OTP, UPI PIN, बैंक डिटेल जैसी जानकारी साझा न करें। अगर किसी व्यक्ति के साथ ऐसा फ्रॉड हो जाता है तो तुरंत कार्रवाई करना जरूरी है। तुरंत 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर कॉल करें। cybercrime.gov.in वेबसाइट पर शिकायत दर्ज करें। इसके अलावा बैंक को तुरंत जानकारी दें। समय पर शिकायत करने से पैसे वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।(एजेंसी)

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रूस से कच्चा तेल आयात पर भारत को राहत, राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रतिबंध अस्थायी रूप से हटाए

Posted on :13-Mar-2026
रूस से कच्चा तेल आयात पर भारत को राहत, राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रतिबंध अस्थायी रूप से हटाए

वॉशिंगटन : ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध और अंतरराष्ट्रीय बाजार में आसमान छूती तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली अमेरिकी सरकार ने एक चौंकाने वाला और रणनीतिक फैसला लिया है। अमेरिका ने गुरुवार को समुद्र में फंसे हुए रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों पर लगे प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटाने की घोषणा की है। यह कदम वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ाने और 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी कीमतों को नीचे लाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय द्वारा जारी नए जनरल लाइसेंस के तहत यह छूट केवल 11 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी। हालांकि, यह अनुमति केवल उसी रूसी तेल के लिए दी गई है जो 12 मार्च की मध्यरात्रि से पहले जहाजों पर लोड किया जा चुका था और वर्तमान में समुद्र में ट्रांजिट में है। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट के अनुसार, इस निर्णय से बाजार में करोड़ों बैरल कच्चा तेल तत्काल उपलब्ध हो सकेगा, जिससे ईरान संकट के कारण उत्पन्न हुई तेल की किल्लत और बढ़ती कीमतों पर लगाम लगेगी।वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने स्पष्ट किया कि यह एक अल्पकालिक उपाय है और इससे रूसी सरकार को कोई दीर्घकालिक या सार्थक वित्तीय लाभ नहीं होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप का प्राथमिक लक्ष्य वैश्विक ऊर्जा बाजारों में स्थिरता लाना और अमेरिकी उपभोक्ताओं के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी से बचाना है।

दूसरी ओर, अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने स्वीकार किया है कि अमेरिकी नौसेना वर्तमान में हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों को पूर्ण सुरक्षा (एस्कॉर्ट) देने के लिए तत्काल तैयार नहीं है, जिसके कारण रूसी तेल की इस आपूर्ति को वैकल्पिक मार्ग के रूप में मंजूरी देना आवश्यक हो गया था।अमेरिका के इस फैसले से भारत और चीन जैसे बड़े तेल आयातक देशों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। ये देश अब समुद्र में फंसे हुए रूसी कार्गो को बिना किसी कानूनी बाधा या प्रतिबंधों के डर के खरीद सकेंगे। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि 11 अप्रैल तक की यह छोटी अवधि की छूट वैश्विक अर्थव्यवस्था को कितनी मजबूती दे पाएगी, यह आने वाले हफ्तों में आपूर्ति श्रृंखला की स्थिति पर निर्भर करेगा।

गौरतलब है कि साल 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद अमेरिका और जी7 देशों ने रूसी तेल पर कड़ा प्राइस कैप और कई प्रतिबंध लगाए थे। लेकिन वर्तमान में मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने के खतरों ने अमेरिका को अपनी प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। हॉर्मुज मार्ग के बाधित होने से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति ठप होने का खतरा पैदा हो गया है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता का माहौल है।(एजेंसी)

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वाराणसी जिला न्यायालय में बम धमकी से हड़कंप, तमिलनाडु लिंक की जांच में जुटी पुलिस

Posted on :13-Feb-2026
वाराणसी जिला न्यायालय में बम धमकी से हड़कंप, तमिलनाडु लिंक की जांच में जुटी पुलिस

वाराणसी : वाराणसी में शुक्रवार की सुबह उस वक्त दहशत फैल गई, जब जिला जज को एक धमकी भरा ईमेल प्राप्त हुआ। ईमेल में वाराणसी कचहरी, इलाहाबाद हाईकोर्ट और प्रदेश के कई जनपदों के न्यायालय परिसरों को बम से उड़ाने की चेतावनी दी गई थी। धमकी देने वाले ने दोपहर 1 बजे का समय निर्धारित करते हुए सिलसिलेवार 18 धमाके करने की बात कही थी। सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया और आनन-फानन में कचहरी परिसर को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इसी दौरान एक लावारिस अटैची मिलने से सनसनी बढ़ गई। बम डिस्पोजल दस्ते की टीम उसकी जांच में जुटी है। कचहरी के साथ ही कलक्ट्रेट के सभी कार्यालय और रजिस्ट्री दफ्तर भी खाली कराया जा रहा है। वहीं, अयोध्या कचहरी का भी नाम होने से वहां भी कचहरी खाली कराकर चेकिंग की जा रही है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह ईमेल तमिलनाडु के रहने वाले सुनिया डासन नामक व्यक्ति की ओर से भेजा गया है। ईमेल में केवल धमाके की धमकी ही नहीं दी गई है, बल्कि तमिलनाडु सरकार और मीडिया के गठजोड़ को लेकर बेहद चौंकाने वाले और गंभीर दावे किए गए हैं। ईमेल में कहा गया है कि तमिलनाडु सरकार 2021 तक मीडिया को खत्म करना चाहती थी और इसके लिए वह बड़े पत्रकारों (जर्नलिस्टों) को 'हायर' कर अपने पक्ष में इस्तेमाल कर रही है।

पत्रकारों और नाबालिग लड़कियों का सनसनीखेज जिक्र

धमकी भरे मेल में मीडिया मैनेजमेंट को लेकर गहरी नाराजगी जताई गई है। सुनिया डासन ने आरोप लगाया है कि प्रमुख जर्नलिस्टों को सरकार के पक्ष में करने के लिए उन्हें निजी हाथों में बेचा जा रहा है। सबसे अधिक चौंकाने वाला दावा यह है कि इन पत्रकारों के लिए नाबालिग बच्चियों और लड़कियों को उपलब्ध कराया जा रहा है।

ईमेल में एक विश्वविद्यालय की प्रोफेसर और कुछ स्थानीय बदमाशों की मिलीभगत का भी जिक्र है। मेल भेजने वाले ने बकायदा आठ चर्चित जर्नलिस्टों और उनके पास भेजी गई लड़कियों के नाम और उनकी उम्र का भी उल्लेख किया है। आरोपी का दावा है कि व्यवस्था के खिलाफ उसके इस आक्रोश का परिणाम इन बम धमाकों के रूप में सामने आएगा।

सुरक्षा एजेंसियां चौकन्नी, चप्पे-चप्पे पर तलाशी

जिला जज को धमकी भरा मेल मिलते ही पुलिस कमिश्नरेट और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं। कचहरी परिसर में भारी पुलिस बल, डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्ता (BDDS) तैनात कर दिया गया है। वादकारियों और अधिवक्ताओं को सुरक्षित बाहर निकालकर हर संदिग्ध वस्तु की सघन चेकिंग की जा रही है। वाराणसी के साथ-साथ प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट और अन्य संवेदनशील जिलों में भी सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया गया है।

एक्शन में अधिकारी

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक तौर पर यह किसी विक्षिप्त या शरारती तत्व की हरकत लग रही है, लेकिन आरोपों की गंभीरता और '18 ब्लास्ट' की धमकी को देखते हुए किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जा रही है। साइबर सेल की मदद से ईमेल के मूल स्रोत और सुनिया डासन की लोकेशन को ट्रेस किया जा रहा है। तमिलनाडु पुलिस से भी इस संबंध में संपर्क साधा गया है ताकि आरोपी की सच्चाई और उसके इरादों का पता लगाया जा सके।(एजेंसी)

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रक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम: 114 राफेल और 6 P-8I विमानों की खरीद को हरी झंडी

Posted on :12-Feb-2026
रक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम: 114 राफेल और 6 P-8I विमानों की खरीद को हरी झंडी

Rafale Deal : भारत की ताकत में और इजाफा होने जा रहा है. इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में राफेल जेट की संख्या बढ़ने जा रही है. जी हां, जिसका इंतजार था, वह घड़ी आ गई है. रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की एक बड़ी डील को मंजूरी दे दी है. इतना ही नहीं, अमेरिकी टोही एयरक्राफ्ट P-8I डील को भी हरी झंडी मिल गई है. रक्षा मंत्रालय की डीएसी यानी रक्षा खरीद परिषद की बैठक में यह फैसला हुआ. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन की भारत यात्रा से ठीक पहले यह फैसला आया है, जिससे दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होंगे.

रक्षा मंत्रालय की डीएसी यानी रक्षा खरीद परिषद ने फाइटर जेट राफेल की खरीद को आज यानी गुरुवार को मंजूरी दी. इतना ही नहीं, भारतीय नौसेना के लिए 6 अतिरिक्त P-8I विमानों की खरीद को भी मंज़ूरी मिली है.  राफेल डील करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की है, जो भारत की अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदे बन जाएगा. डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) की मीटिंग में इस पर फैसला लिया गया, जो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई. इसके बाद इस सौदे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी से भी मंजूरी लेनी होगी.

एयरफोर्स के लिए बेहद अहम है यह डील

यह डील इंडियन एयर फोर्स के बेड़े में फाइटर जेट्स की कमी को दूर करने के लिए बहुत जरूरी थी. अभी भारतीय वायुसेना के पास सिर्फ 29 स्क्वाड्रन हैं, जबकि जरूरत 42 की है. पुराने एयरक्राफ्ट रिटायर हो रहे हैं, इसलिए नए और आधुनिक फाइटर जेट्स की जरूरत थी. राफेल जेट्स फ्रांस की कंपनी दासो एविएशन से लिए जाएंगे.  इनमें से 18 जेट्स तैयार हालत में (फ्लाई-अवे कंडीशन) आएंगे, जबकि बाकी 96 भारत में ही बनाए जाएंगे. इससे ‘मेक इन इंडिया’ को बड़ा बूस्ट मिलेगा और हजारों नौकरियां पैदा होंगी.

अब जानते हैं कि राफेल जेट्स की खासियत क्या है?

राफेल मल्टी-रोल फाइटर हैं. यानी हवा से हवा, हवा से जमीन और समुद्री हमलों में इस्तेमाल हो सकते हैं. पाकिस्तान इसकी ताकत देख चुका है. राफेल फाइटर जेट्स पहले ही ऑपरेशन सिंदूर में अपना दमखम दिखा चुके हैं. वायुसेना के वाइस चीफ एयर मार्शल नागेश कपूर ने कहा है कि राफेल जैसे नए जेट्स से एयर फोर्स की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी. ये जेट्स लंबी दूरी तक उड़ सकते हैं, तेज रफ्तार और आधुनिक हथियारों से लैस हैं. इससे चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से खतरे का मुकाबला करना आसान होगा.

पी-8आई पॉसिडॉन एयरक्राफ्ट

अब बात पी-8आई पॉसिडॉन एयरक्राफ्ट की. ये 6 अतिरिक्त एयरक्राफ्ट इंडियन नेवी के लिए हैं. पी-8आई बोइंग कंपनी का बनाया हुआ है और समुद्री निगरानी के लिए इस्तेमाल होता है. ये दुश्मन की सबमरीन, जहाजों और एयरक्राफ्ट को दूर से ही पकड़ सकता है. भारत के पास पहले से 12 पी-8आई हैं, और ये नए 6 और ताकत बढ़ाएंगे. समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए ये बहुत महत्वपूर्ण हैं, खासकर हिंद महासागर में जहां चीन की गतिविधियां बढ़ रही हैं.

यह डील क्यों इतनी बड़ी है?

फ्रांस से गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट डील है, इसलिए पारदर्शिता ज्यादा है. पहले 36 राफेल की डील में भी ऐसा ही हुआ था, जो 2016 में साइन हुई. अब 114 की डील से IAF की स्क्वाड्रन संख्या बढ़कर 35-36 के करीब पहुंच जाएगी.

राफेल डील की खास बातें

  • इस डील के अनुसार, भारत फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन से 18 राफेल विमान सीधे खरीदेगा. बाकी 96 विमान भारत में ही बनाए जाएंगे. इनमें से कुछ विमान दो सीट वाले होंगे, जिनका उपयोग पायलटों को ट्रेनिंग देने के लिए किया जाएगा. इस डील में आधुनिक तकनीक भारत को देने और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने की बात भी शामिल है.
  • भारतीय वायुसेना के के बेड़े में पहले से ही दो स्क्वाड्रनों में 36 राफेल विमान शामिल हैं, जिनमें से ‘सी’ वेरिएंट की अंतिम डिलीवरी दिसंबर 2024 में हुई थी
  • राफेल विमानों का इस्तेमाल भारत ने पिछले साल मई में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में किया था, जिसमें पाकिस्तान के ठिकानों पर सटीक हमले किए गए थे.
  • राफेल विमानों का इस्तेमाल स्कैल्प (एससीएएलपी) मिसाइल को लॉन्च करने के लिए किया गया था, जो 250 किलोमीटर से ज्यादा दूर तक बहुत सटीक हमला कर सकती है. इसके अलावा यह मेटियोर हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, हैमर हथियार, स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और आधुनिक रडार से भी लैस है.
  • पिछले साल जून में भारत और फ्रांस ने डसॉल्ट एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के बीच चार बड़े समझौतों की घोषणा की थी, जिससे भारत को राफेल विमानों की डिलीवरी तेजी से मिलने में मदद मिलेगी.(एजेंसी)
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भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती, सरकारी कंपनियों ने वेनेजुएला से खरीदा 20 लाख बैरल कच्चा तेल

Posted on :10-Feb-2026
भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती, सरकारी कंपनियों ने वेनेजुएला से खरीदा 20 लाख बैरल कच्चा तेल

नई दिल्ली : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई वैश्विक तेल रणनीति का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। वेनेजुएला में हालिया अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप और वहां के तेल संसाधनों पर नियंत्रण के दावों के बीच, भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने वेनेजुएला के साथ एक बड़ी ऑयल डील को अंजाम दिया है। भारतीय रिफाइनरियों ने अप्रैल तक आपूर्ति के लिए 20 लाख बैरल कच्चे तेल का सौदा किया है, जिसे वैश्विक बाजार में ट्रंप प्रशासन के बढ़ते प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, भारत की दो प्रमुख सरकारी रिफाइनरियों—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने अपनी आपूर्ति रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए वेनेजुएला की ओर रुख किया है। इस संयुक्त सौदे के तहत कुल 20 लाख बैरल क्रूड खरीदा गया है। इसमें इंडियन ऑयल का हिस्सा करीब 15 लाख बैरल है, जबकि शेष 5 लाख बैरल तेल हिंदुस्तान पेट्रोलियम को मिलेगा। तेल की यह पूरी खेप एक विशाल कच्चे तेल वाहक पोत के जरिए अप्रैल महीने तक भारत के पूर्वी तट पर पहुंचने की संभावना है।

यह सौदा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हिंदुस्तान पेट्रोलियम के लिए यह वेनेजुएला से कच्चे तेल की पहली खरीद है। हालांकि, इंडियन ऑयल इससे पहले 2024 में भी वहां के तेल का प्रसंस्करण कर चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिफाइनरियों का यह कदम कच्चे तेल के आयात में विविधता लाने के प्रयासों का हिस्सा है। भारत अब अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूसी तेल पर निर्भरता को कम करने की कोशिश कर रहा है, जो पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और व्यापारिक जटिलताओं के कारण चर्चा में रहा है।

इस तेल समझौते को भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापक व्यापार समझौते के समर्थन के रूप में भी देखा जा रहा है। गौरतलब है कि वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन और अमेरिकी सैन्य अभियान के बाद, ट्रंप प्रशासन ने कमोडिटी व्यापारियों को वहां का तेल बेचने के लिए विशेष लाइसेंस जारी किए हैं। वर्तमान डील में विक्रेता के रूप में व्यापारी ट्रैफिगुरा का नाम सामने आया है। इस तेल की कीमत दुबई बेंचमार्क के आधार पर तय की गई है, जो लगभग उन्हीं दरों पर है जिस पर हाल ही में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी वेनेजुएला से तेल खरीदा था। रिलायंस ने ब्रेंट क्रूड की तुलना में करीब 6.50 से 7 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर यह सौदा किया था।

यह खरीदारी एक ऐसे नाजुक समय पर हो रही है जब भारत और अमेरिका अपने आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं। दोनों देशों ने टैरिफ कटौती और निवेश बढ़ाने के उद्देश्य से एक व्यापारिक फ्रेमवर्क की घोषणा की है। हालांकि आधिकारिक बयानों में रूसी तेल का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ने पूर्व में संकेत दिया था कि भारत द्वारा रूसी तेल के आयात को सीमित करने की सहमति के बदले भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को हटाया जा सकता है। ऐसे में वेनेजुएला से तेल की यह खरीद भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन के लिहाज से मास्टरस्ट्रोक मानी जा रही है।(एजेंसी)

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दिल्ली में स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी से अफरा-तफरी, जांच एजेंसियां सक्रिय

Posted on :09-Feb-2026
दिल्ली में स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी से अफरा-तफरी, जांच एजेंसियां सक्रिय

नई दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली में सोमवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया जब शहर के नौ बड़े और प्रतिष्ठित स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली। सुबह लगभग 8:30 से 9:00 बजे के बीच मिली इन कॉल के बाद शिक्षण संस्थानों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। धमकी की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और बम निरोधक दस्ते तुरंत मौके पर पहुंचे। एहतियात के तौर पर स्कूलों को खाली कराकर सभी छात्रों और स्टाफ को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

धमकी पाने वाले स्कूलों में दिल्ली कैंट का लॉरेटो कॉन्वेंट, श्रीनिवासपुरी और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के केम्ब्रिज स्कूल, सादिक नगर का इंडियन स्कूल, न्यू राजेंद्र नगर का वनस्थली स्कूल, आईएनए का डीटीए स्कूल तथा रोहिणी के वेंकटेश्वर, सीएम श्री और बाल भारती स्कूल शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय यह है कि सभी कॉल लगभग एक ही समय अंतराल पर की गईं।

पुलिस और बम निरोधक दस्ते ने सभी परिसरों की गहन तलाशी ली है। हालांकि, शुरुआती जांच में अब तक कुछ भी संदिग्ध बरामद नहीं हुआ है। एजेंसियां तकनीकी जांच के जरिए कॉल करने वाले की पहचान और लोकेशन का पता लगाने में जुटी हैं। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए फिलहाल सभी संबंधित स्कूलों में सतर्कता बढ़ा दी गई है और अभिभावकों को घबराने की जरूरत नहीं है।(एजेंसी)

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-जलवायु परिवर्तन के चलते शीतकालीन बारिश और बर्फबारी में भारी कमी आई

Posted on :09-Feb-2026
-जलवायु परिवर्तन के चलते शीतकालीन बारिश और बर्फबारी में भारी कमी आई

पिथौरागढ़ : उत्तराखंड में जंगल धधकते नजर आए। हालात इतने बिगड़ गए है कि नवंबर से जनवरी के बीच प्रदेश में 1900 से ज्यादा जंगल फॉरेस्ट फायर अलर्ट जारी हुए, जो देश में सबसे ज्यादा हैं। इस दौरान फूलों की घाटी से लेकर नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान तक जलते दिखे। पिछले दो दशकों में बदले मौसम चक्र ने उत्तराखंड के जंगलों को नई चुनौती में डाल दिया है। शीतकाल में सूखे जैसे हालात, बढ़ता तापमान और मानवीय लापरवाही ने आग की घटनाओं को सामान्य बना दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वन विभाग के लिए यह संकट इसलिए भी गंभीर है क्योंकि पारंपरिक फायर सीजन शुरू होने से पहले ही फायर वॉचर समेत जरूरी संसाधन झोंकने पड़ रहे हैं। वन विभाग का आधिकारिक फायर सीजन 15 फरवरी से 15 जून तक होता है। पहले मार्च-अप्रैल के बाद ही जंगल सुलगते थे, लेकिन अब नवंबर से ही आग बुझाने की नौबत आने लगी है। ज्यादातर आग सड़क किनारे फेंकी गई माचिस, बीड़ी-सिगरेट या जानबूझकर लगाई गई आग से फैलती है। कंट्रोल बर्निंग में वन विभाग पहले ही सूखी घास, पिरूल और पत्तियां जला देता है, ताकि फायर लाइन बन सके और आग आगे न बढ़े।

जलवायु परिवर्तन के चलते शीतकालीन बारिश और बर्फबारी में भारी कमी आई है। 2012, 2016, 2018 और 2021-23 के बाद 2025 के नवंबर-दिसंबर भी पूरी तरह सूखे रहे। नतीजतन, नवंबर 2025 से ही वनाग्नि की घटनाएं शुरू हो गईं। सैटेलाइट जंगल के ऊपर नजर रखते हैं। जहां तापमान अचानक बढ़ा या धुआं दिखा, वहां तुरंत चेतावनी भेजी जाती है ताकि आग फैलने से पहले कार्रवाई हो सके। इस बार आग ने दुर्गम और सुरक्षित क्षेत्रों को भी नहीं बख्शा। जनवरी 2026 में नंदा देवी नेशनल पार्क की फूलों की घाटी और गोविंद घाट रेंज के जंगल करीब एक सप्ताह तक जलते रहे। खड़ी चट्टानें और दुर्गम इलाका होने के कारण वन कर्मियों को आग बुझाने में भारी परेशानी उठानी पड़ी। वहीं, पिथौरागढ़ के नैनीसैनी और जमतड़ी गांव के जंगलों में आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड और एसएसबी के जवानों को मोर्चा संभालना पड़ा।

पंचाचूली क्षेत्र कस्तूरी मृग का निवास स्थान है। स्थानीय जानकारों का मानना है कि जब बर्फबारी न होने से वन्य जीव निचले इलाकों की ओर आते हैं, तो शिकारी उन्हें फंसाने के लिए झाड़ियों में आग लगा देते हैं। पिथौरागढ़ के डीएफओ आशुतोष सिंह का कहना है कि शिकारियों के पुख्ता सबूत तो नहीं मिले हैं, लेकिन रिजर्व फॉरेस्ट में निगरानी बढ़ा दी गई है। वन्य जीव शिकार पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। पद्मश्री डॉ. शेखर पाठक के मुताबिक समय पर बारिश न होना और बढ़ता तापमान मानव जनित कारणों से भी है। वनों की आग केवल पेड़ों को ही नहीं जलाती, बल्कि पारिस्थितिक तंत्र और मानव स्वास्थ्य को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रही है। 23-24 जनवरी की बारिश ने कुछ राहत जरूर दी है, लेकिन यदि दोबारा लंबा सूखा पड़ा तो खतरा फिर बढ़ सकता है।

नवंबर से जनवरी तक विंटर फायर अलर्ट
राज्य फायर अलर्ट

  • उत्तराखंड 1900
  • मध्य प्रदेश 940
  • महाराष्ट्र 883
  • छत्तीसगढ़ 822
  • कर्नाटक 544(एजेंसी)
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चंद्रयान-4 की राह आसान, वैज्ञानिकों ने खोजी सुरक्षित लैंडिंग जगह

Posted on :09-Feb-2026
चंद्रयान-4 की राह आसान, वैज्ञानिकों ने खोजी सुरक्षित लैंडिंग जगह

श्रीहरिकोटा : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने अगले और अब तक के सबसे चुनौतीपूर्ण चंद्र मिशन चंद्रयान-4 की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की है। इसरो के स्पेस ऐप्लिकेशन सेंटर (एसएसी) ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उस सटीक स्थान की पहचान कर ली है, जहां चंद्रयान-4 को उतारा जाएगा। यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चंद्रयान-4 भारत का पहला रिटर्न मिशन होगा, जिसका लक्ष्य न केवल चांद पर उतरना है, बल्कि वहां से नमूने लेकर सुरक्षित धरती पर वापस लौटना भी है।

वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर द्वारा भेजी गई हाई-रिजोल्यूशन तस्वीरों का गहन विश्लेषण करने के बाद चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लगभग 1 वर्ग किलोमीटर के एक सुरक्षित क्षेत्र का चयन किया है। इस अध्ययन को वैज्ञानिकों की एक विशेष टीम ने अंजाम दिया है, जिन्होंने लैंडिंग के लिए चार संभावित स्थलों की समीक्षा की थी। जांच के बाद एमएम-4 नामक स्थान को सबसे उपयुक्त पाया गया है। मिशन की चुनौतियां और विशेषताएं चंद्रयान-4 मिशन तकनीक और जटिलता के मामले में पिछले मिशनों से काफी आगे है।

इस मिशन में प्रोपल्सन मॉड्यूल के साथ-साथ डिसेंटर और असेंडर मॉड्यूल शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त, पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए ट्रांसफर मॉड्यूल और रीएंट्री मॉड्यूल भी इस मिशन का हिस्सा होंगे। मिशन का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की सतह से मिट्टी और पत्थरों के नमूने एकत्र करना और उन्हें सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लाना है। यदि भारत इस मिशन में सफल रहता है, तो यह भविष्य के मानवयुक्त चंद्र मिशनों (गगनयान के अगले चरण) के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

लैंडिंग साइट की खासियत चुनी गई लैंडिंग साइट नॉविस माउंटेन पहाड़ी के पास स्थित है। पहाड़ी क्षेत्र के करीब होने के बावजूद, यह पैच काफी समतल है, जिससे लैंडर को नुकसान पहुंचने का खतरा न्यूनतम है। इस जगह की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां सूर्य की रोशनी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहती है, जो सौर ऊर्जा से चलने वाले उपकरणों के लिए अनिवार्य है। साथ ही, यहां बड़े गड्ढों का अभाव है, जिससे रोवर को सतह पर चलने में आसानी होगी। यह क्षेत्र चंद्रयान-3 के लैंडिंग स्थल शिव-शक्ति पॉइंट से अधिक दूर नहीं है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस इलाके के गहरे गड्ढों में बर्फ या पानी के अवशेष मिल सकते हैं। यहां से लाए गए सैंपल्स से चंद्रमा के निर्माण और वहां मौजूद प्राकृतिक संसाधनों को समझने में वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय को नई दिशा मिलेगी। चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता के बाद, अब पूरी दुनिया की नजरें इसरो के इस महत्वाकांक्षी रिटर्न मिशन पर टिकी हैं।(एजेंसी)

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जो बस्तर कभी आकांक्षी जिला माना जाता था, आज वह पूरे देश में “बस्तर ओलंपिक” के नाम से जाना जा रहा है - प्रधानमंत्री

Posted on :06-Feb-2026
जो बस्तर कभी आकांक्षी जिला माना जाता था, आज वह पूरे देश में “बस्तर ओलंपिक” के नाम से जाना जा रहा है - प्रधानमंत्री

द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार

प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री के संकल्प से बस्तर में बदलाव की नई इबारत लिखी जा रही है: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

नीति, नीयत और नेतृत्व सही हो, तो दशकों की उपेक्षा को भी बदला जा सकता है - मुख्यमंत्री

बस्तर अब भय और पिछड़ेपन की पहचान नहीं, बल्कि विश्वास, विकास और संभावनाओं का  बन रहा प्रतीक: मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर : प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज संसद में अपने उद्बोधन के दौरान विशेष रूप से बस्तर का उल्लेख करते हुए कहा कि जो बस्तर कभी आकांक्षी जिला माना जाता था, आज वह पूरे देश में “बस्तर ओलंपिक” के नाम से जाना जा रहा है। विकास की धारा अब बस्तर के गांव-गांव तक पहुंच रही है। कई ऐसे गांव हैं जहां पहली बार बस सेवा शुरू हुई और पूरे गांव ने इसे उत्सव की तरह मनाया। उन्होंने  कहा कि एक समय ऐसा भी था, जब कुछ जिलों को पिछड़ा मानकर छोड़ दिया गया था।

वहां रहने वाले करोड़ों लोगों की मौलिक आवश्यकताओं तक को नकार दिया गया था और उन्हें उसी अवस्था में जीने के लिए मजबूर कर दिया गया। इन क्षेत्रों में विकास के अभाव ने हालात को और बदतर बना दिया था। स्थिति यहां तक पहुंच गई थी कि ऐसे जिलों को पनिशमेंट पोस्टिंग के लिए उपयुक्त माना जाने लगा था, जिससे वहां की व्यवस्था और अधिक बिगड़ती चली गई। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस सोच और संस्कृति को बदला गया। यह निर्णय लिया गया कि पिछड़े क्षेत्रों में योग्य, युवा और होनहार अधिकारियों को तैनात किया जाएगा और उन्हें पूरे तीन वर्ष का समय दिया जाएगा, ताकि वे स्वतंत्र रूप से काम कर सकें। एक के बाद एक ठोस निर्णय लिए गए और आज उनके परिणाम देश देख रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज संसद में प्रधानमंत्री के बस्तर में हुए विकास पर दिए गए वक्तव्य पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बस्तर क्षेत्र छत्तीसगढ़ का सौभाग्य है। यह क्षेत्र प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है, जिसे धरती का स्वर्ग कहा जा सकता है। यहां अनेक सुंदर जलप्रपात हैं, कुटुमसर जैसी विश्वविख्यात गुफा है, विशाल अबूझमाड़ का जंगल है और धुड़मारास गांव को विश्व पर्यटन संस्था द्वारा चयनित 20 सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्रामों में स्थान मिला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग चार दशकों तक नक्सलवाद के कारण विकास इस पूरे क्षेत्र को छू नहीं पाया, जबकि बस्तर का क्षेत्रफल केरल राज्य से भी बड़ा है। अब स्थिति तेजी से बदल रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प, स्पष्ट नीति और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस के कारण बस्तर में नक्सलवाद समाप्ति की ओर है और विकास ने नई गति पकड़ी है। उन्होंने कहा कि इसी विश्वास और उत्साह का परिणाम है कि बस्तर ओलंपिक का आयोजन पिछले वर्ष से किया जा रहा है। पिछले वर्ष इसमें 1 करोड़ 65 लाख युवाओं की भागीदारी रही, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 3 करोड़ 91 लाख तक पहुंच गई है। इसी तरह बस्तर पंडुम का आयोजन भी पिछले वर्ष किया गया और इस वर्ष भी किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम का शुभारंभ 7 तारीख को महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के करकमलों से होगा, जबकि समापन 9 तारीख को केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मुख्य आतिथ्य में होगा। उन्होंने कहा कि  प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी कई बार बस्तर और बस्तर ओलंपिक का उल्लेख किया जाना पूरे छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र के लिए गर्व और सौभाग्य का विषय है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर अब भय और पिछड़ेपन की पहचान नहीं, बल्कि विश्वास, विकास और संभावनाओं का प्रतीक बन रहा है। यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि नीति, नीयत और नेतृत्व सही हो, तो दशकों की उपेक्षा को भी बदला जा सकता है।

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बीच वाली बेटी बनी ‘कमांडर’: गाजियाबाद कांड में पिता का चौंकाने वाला बयान

Posted on :04-Feb-2026
बीच वाली बेटी बनी ‘कमांडर’: गाजियाबाद कांड में पिता का चौंकाने वाला बयान

दिल्ली : दिल्ली के करीब यूपी के गाजियाबाद की एक घटना ने पूरे देश को सन्न कर दिया है। ऑनलाइन गेमिंग की लत में फंसीं 3 नाबालिग बहनों ने देर रात 9वें मंजिल पर मौजूद अपने फ्लैट से कूदकर जान दे दी। 15, 14 और 12 साल की इन बच्चियों के पिता ने बताया कि तीनों एक कोरियन गेम खेलती थीं, जिसमें 50 दिन में 50 टास्क पूरे करने के लिए दिए जाते हैं। 50वें टास्क में तीनों ने देर रात करीब 2 बजे फ्लैट से कूदकर जान दे दी।

बच्चियों के पिता ने मीडिया से बातचीत में रोते हुए कहा, 'फोन देखने के बाद हमें बाद में पता चला कि तीनों कोरियन गेम खेलती थीं। उन्होंने लिखा है कि आईएम सॉरी, हम कोरियन गेम नहीं छोड़ सकते हैं। हम मर रहे हैं। हम जा रहे हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि बीच वाली बेटी गेम में कमांडर की भूमिका में थी। बड़ी और छोटी बेटी उसके कहे मुताबिक रही थीं। पिता ने कहा कि बीच वाली बेटी की कहने पर ही तीनों ने यह कदम उठाया है।

रात को हुए घटनाक्रम को लेकर उन्होंने बताया कि एक बार रात में एक लड़की ने आकर मां को किस किया था। इसके बाद रात करीब 2 बजे तीनों ने बालकनी से छलांग लगा दी। पिता का कहना है कि उन्हें यह तो पता था कि बेटियां दूसरे बच्चों की तरह ऑनलाइन गेम खेलती हैं। लेकिन यह नहीं जानते थे कि कोई ऐसा खतरनाक गेम खेल रही हैं और जिसमें उनकी जान ही चली जाएगी। उन्होंने कहा कि बेटियों के मरने के बाद उन्हें पता चला है कि उस गे में 50 टास्क दिए जाते हैं और अंतिम में यह खौफनाक कदम उठाना था।

कहती थीं कि कोरिया जाना है

पिता ने कहा, 'फॉरेंसिक टीम ने हमें फोन की जांच के बाद बताया कि गेमिंग की वजह से खुदखुशी की है। ढाई तीन साल से गेम खेलती थीं। कभी-कभी कहती थीं कि हमें कोरिया जाना है। हम कहते थे कि कोरिया क्यों जाएंगे। मैं उस वक्त बाहर वाले रूम में सो रही था। वाइफ अंदर वाले रूम में थी। उन्होंने यहां से आकर पानी पीने के बहाने कूदकर जान दे दी। उनके पास उस वक्त फोन था। उन्होंने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया था।'

हमेशा साथ रहती थी तीनों, माता-पिता से बनाती थीं दूरी

बच्चियो के पिता ने कहा कि उन्हें यह नहीं पता था कि इस गेम में कूदने का टास्क था। इतने कहते ही वह रोने लगे और कहा, टकौन बाप अपने बच्चे को मरने देगा? कौन बाप बच्चों को ऐसा गेम खेलने देगा। हमें तो आज पता चला सब।' पिता ने बताया कि तीनों बेटियों में बहुत मिलाप था और हमेशा एक साथ रहती थीं। पढ़ाई छोड़ चुकी बच्चियां एक साथ गेम खेलती थीं। उन्होंने कहा, 'बीच वाली बेटी खुद को बॉस कहती थी। बाकी दोनों उसके ऑर्डर को फॉलो करती थी। उसके बिना खाना भी नहीं खाती थीं। टॉयलेट भी तीनों साथ में जाती थीं। एक सातवीं में, दूसरी पांचवीं और तीसरी चौथी में थीं। 2 साल से स्कूल नहीं जा रही थीं। फेल हो जाने के बाद शर्म की वजह से उन्होंने स्कूल जाना बंद कर दिया था। कमरे में तीनों अकेले रहती थीं। हम कमरे में जाते थे तो वे निकल जाती थीं।'(एजेंसी)

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भारत–अमेरिका व्यापार समझौते पर मुहर, ट्रंप ने टैरिफ 50% से घटाकर 18% किया

Posted on :03-Feb-2026
भारत–अमेरिका व्यापार समझौते पर मुहर, ट्रंप ने टैरिफ 50% से घटाकर 18% किया

नई दिल्ली : भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चली आ रही व्यापारिक तनातनी और टैरिफ युद्ध पर आखिरकार विराम लग गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई सफल वार्ता के बाद एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते की घोषणा की गई। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वयं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस बड़ी उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी गहरी मित्रता और आपसी सम्मान के चलते दोनों देश तत्काल प्रभाव से एक व्यापक व्यापार समझौते पर सहमत हो गए हैं।

इस समझौते का सबसे बड़ा और तात्कालिक लाभ भारत को टैरिफ में बड़ी कटौती के रूप में मिला है। राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर लागू अमेरिकी टैरिफ को घटाकर अब मात्र 18 प्रतिशत करने का ऐलान किया है। टैरिफ के आंकड़ों को लेकर बने असमंजस को दूर करते हुए भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने स्पष्ट किया कि यद्यपि पूर्व में भारत पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की चर्चा थी, लेकिन अब अंतिम निर्णय के अनुसार यह केवल 18 प्रतिशत ही रहेगा।

उन्होंने बताया कि कागजी कार्रवाई और तकनीकी प्रक्रियाओं में थोड़ा समय लग सकता है, परंतु भारत के लिए अंतिम नंबर 18 प्रतिशत ही तय किया गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी पोस्ट में संकेत दिया कि इस कटौती के बदले भारत भी अमेरिकी वस्तुओं पर अपने टैरिफ को शून्य करने की दिशा में तेजी से कदम उठाएगा। इस कदम से दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है और बाय अमेरिकन पॉलिसी के विस्तार के तहत भारत आने वाले समय में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर की ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि उत्पाद और कोयला खरीदने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

इस समझौते का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू ऊर्जा और वैश्विक सुरक्षा से जुड़ा है। राष्ट्रपति ट्रंप और राजदूत गोर दोनों ने रूसी तेल की खरीद का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। राष्ट्रपति ने दावा किया कि समझौते के ट्रिगर पॉइंट के रूप में भारत रूस से अपने तेल आयात को कम करेगा और इसके विकल्प के रूप में अमेरिका तथा संभवतः वेनेजुएला से अधिक तेल और गैस की खरीद करेगा। उल्लेखनीय है कि ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में वेनेजुएला के तेल क्षेत्र पर अपना नियंत्रण बढ़ाया है, जिसे वे अब भारत जैसे बड़े बाजार की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं। यह बदलाव न केवल व्यापारिक है, बल्कि भू-राजनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे भारत की 140 करोड़ जनता की जीत बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर राष्ट्रपति ट्रंप का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मेड इन इंडिया उत्पादों पर टैरिफ कम होने से भारतीय उद्यमियों और निर्यातकों के लिए अपार अवसर खुलेंगे। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि जब दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और सबसे बड़े लोकतंत्र एक साथ मिलकर काम करते हैं, तो इसके परिणाम वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए लाभकारी होते हैं। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि यह साझेदारी भविष्य में नई ऊंचाइयों को छुएगी। यह समझौता न केवल आर्थिक हितों की रक्षा करता है, बल्कि उभरती वैश्विक परिस्थितियों में भारत और अमेरिका के रणनीतिक संबंधों को एक नए और मजबूत धरातल पर ले जाने का कार्य करेगा।(एजेंसी)

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