बेमेतरा

कृषि विभाग द्वारा फसल का उत्पादन बढ़ाने के लिए दी गई श्री पद्वति की सलाह

कृषि विभाग द्वारा फसल का उत्पादन बढ़ाने के लिए दी गई श्री पद्वति की सलाह

बेमेतरा 13 मई 2019:- कृषि विभाग द्वारा फसल का उत्पादन बढ़ाने के लिए श्री पद्वति से कृषि का उत्पादन बढ़ाने की सलाह दी गई है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जहां छिड़का पद्वति से बोनी करने पर प्रति एकड़ 16 से 18 क्विंटल रोपा विधि से 25 से 28 क्विंटल एवं श्री पद्वति से बुआई करने पर 35 से 40 क्विंटल प्रति एकड़ धान का उत्पादन किया जा सकता है। इसमें धान का पौधा 10 बाॅय 10 ईंच के अंतराल में उगाया जा सकता है। इस विधि से खेत में पानी भरकर नहीं रखना साथ ही इसमें खरपतवार नियंत्रण आसान हो जाता है। कलेक्टर महादेव कावरे ने आज कृषि विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर श्री पद्वति के बारे में जानकारी ली।

बेमेतरा जिला में लगभग 120000 हे. में धान की खेती खरीफ मौसम में की जाती है धान की उत्पादकता को बढ़ाने के लिये धान लगाने की एस.आर.आइ  ैत्प्  पध्दति बेहतरीन विकल्प है।

एस.आर्र.आइ. पद्वति कम श्रम कम जल तथा कम लागत से सिंचित धान के उत्पादन की पध्दति है। सामान्यतः धान उत्पादन हेतु जितने पानी का प्रयोग किया जाता है उससे आधे पानी में ही अपेक्षाकृत अधिक धान उत्पादन लिया जा सकता है। इस प्रकार सिंचित क्षेत्र में दोगुनी वृध्दि की जा सकती है।

मेडागास्कर पध्दति की क्रियाएं:-
1.    खेत का चुनाव - इस पध्दति में पूर्णतः समतल खेत का चुनाव करना चाहिये जिससे कम पानी का भी सम्पूर्ण क्षेत्र में फैलाव हो सके तथा जल निकासी भी आसानी से किया जा सके।
2.    बीज का चुनाव एवं बीज दर - इस विधि में धान की उच्च गुणवत्ता वाली विपुल उत्पादन की किस्मों या हायब्रीड किस्मों का चयन करना उचित रहता है। मेडागास्कर पध्दति में 10-12 कि.ग्रा. प्रति हे. बीज की आवश्यकता होती है। अनुशंसित फफूंद नाशी ट्रायकोडरमा 5 ग्रा. प्रति किलो बीज या बाविस्टिन/थायरम 2.5 ग्राम दवा प्रति किलो की दर से बीज उपचार करना आवश्यक है।

3.    नर्सरी तैयार करना - खेतों की 2-3 बार जुताई पश्चात पाटा चलाकर मिट्टी को भुरभुरी कर 1 मी. चैड़ी 10मी. लम्बी तथा 15 सेमी. उंची क्यारियां बनावे तथा क्यारियों के दोनो ओर सिंचाई नालियां बनाई जाये। तैयार क्यारियों में नाडेप कम्पोस्ट की खाद मिलाकर समतल करें तत्पस्चात 12 ग्राम प्रतिवर्ग मी. की दर से उपचारित बीज का प्रयोग करें बीज डालने के पश्चात पुनः नाडेप कम्पोस्ट से बीजों को ढक देना चाहिये नर्सरी तैयार करते समय यह सावधानी बरतें की पौधे पानी में न डूबने पाये।

4.    रोपाई - अच्छी तरह से जुताई मचाई की गई खेतों में सामान्यतः 10-12 दिन के पौध को 25ग्25 सेमी. की दूरी पर मात्र एक पौधा रोपित किया जाना चाहिये। पौधों को नर्सरी से उखाड़ने के 15-20 मिनट के अन्दर रोपाई कर देना अच्छा रहता है, रोपाई करते समय यह आवश्यक है कि पौधे 1-2 सेमी. गहराई में सीधे रोपीत किये जाये ताकि जड़े सीधी रहे। यह ध्यान रहें कि खेतों में पानी न भरा हो।

5.    उर्वरक जल एवं खरपतवार प्रबंधन - मिट्टी परीक्षण परिणाम को ध्यान में रखकर जैविक खाद 10-15 टन तथा 2 किलो पी.एस.बी. कल्चर प्रति हे. की दर से प्रयोग करना चाहिए। रासायनिक खाद का प्रयोग नत्रजन, स्फूर ,पोटाश ;80ः50ः30द्ध के अनुपात में किया जाना चाहिए। सुपर फाॅस्फेट तथा पोटाश की पूर्ण मात्रा का प्रयोग आधार खाद के रूप में तथा युरिया का छिड़काव तीन किस्तों में किया जाना चाहिए। प्रथम छिड़काव 20ः युरिया रोपाई के एक सप्ताह बाद , द्वितीय छिड़काव कंसे फूटने के समय तथा शेष युरिया गभोट अवस्था के प्रारम्भ काल में दिया जाना चाहिए। इस पध्दति में खेतों लगातार पानी भरकर नहीं रखा जाता केवल आर्द्र रखा जाता है। फूल आने के समय खेत को 3-4 सेमी. पानी से भर दिया जाता है तथा कटाई से 25 दिन पूर्व खेतों से पानी निकाल लेतें हैं। रोपाई के पश्चात 1-2 निंदाई आवश्यकता पड़ने पर की जाती है।
6.    उपज - रोपाई विधि की तुलना में 15-25ः उपज में वृध्दि तथा 15-20ः उत्पादन लागत में कमी आती है।

क्र.    विवरण    ईकाई    रोपाई विधि    श्री विधि
1    बीजदर      कि.ग्रा./हे.    50 किग्रा.    12-15 किग्रा.
2    रोपा अवधि    दिन    20-30    10-12 दिन
3    पौध संख्या    संख्या    7-8 लाख पौधे    160000 पौधे/हे.
4    दूरी    सेमी.    20 ग्15 सेमी.    25 ग्25 सेमी.
5    प्रति हिल पौध संख्या    संख्या    2-3     1
6    कंसो की संख्या    संख्या    3-7    20-25
7    सिंचाई पानी की आवश्यकता    संख्या    -    रोपाई विधि से आधी

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