बलरामपुर

मनरेगा से स्वीकृत निर्माण कार्यों में मशीनीकरण, राज्य शासन के आदेशों का खुलकर उड़ाई गई धज्जियां

मनरेगा से स्वीकृत निर्माण कार्यों में मशीनीकरण, राज्य शासन के आदेशों का खुलकर उड़ाई गई धज्जियां

वसीम बारी की रिपोर्ट     

 

                     मनरेगा से स्वीकृत निर्माण कार्यों में मशीनी कारण, राज्य शासन के आदेशों का खुलकर उड़ाई गई धज्जियां...

                                हितग्राहीमूलक कार्यों में प्रतिबंध, ठेकेदारी प्रथा प्रारम्भ, ग्रामीणों ने उठाए सवाल.

                     उच्चाधिकारियों द्वारा मोटी कमीशन के लालच में राज्यशासन के आदेशों का उलंघन किए जाने का आरोप..

कार्य के दौरान जनपद सदस श्रीमती यशोदा देवी के द्वारा पत्र लिखकर जब कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ को अवगत कराया गया था कि इस कार्य मे अनियमितता की जा रही है तो फिर आज तक उस संबंध कोई कार्यवाही क्यों नहीं हुई, प्रशसन के द्वारा उक्त मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया, जांच कर कार्य को रोकने के बजाए चुपके से भुगतान कर दिया जाना इस बात का साक्ष्य है कि अवश्य ही इस अनियमितता में उच्चाधिकारी भी संलिप्त हैं:- इरफान अंसारी, मीडिया प्रभारी, भाजपा मंडल रामानुजगंज...

जनपद पंचायत रामचंद्रपुर अंतर्गत ग्रामपंचायत महावीरगंज में चल रहे फील्ड समतलीकरण कार्य में घोर अनियमितता का आरोप लगा है, बताया जा रहा है कि राज्य शासन के आदेशों का उलंघन करते हुए अधिकारियों एवं नेताओं के आपसी सांठगांठ से लगभग 32 लाख रु का अनियमितता की गई है ज्ञात हो कि वर्तमान में शा.हाई. स्कूल महावीरगंज में नरेगा से फील्ड समतलीकरण का कार्य प्रारंभ था जिसमें पूर्ण रूप से मशीनीकरण किया गया है, जबकि  महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद विभागाध्यक्ष , कार्यालय इंद्रावती भवन नया रायपुर छ.ग. द्वारा जारी आदेश क्रमांक 3378/वि-7/MGNREGA/2017 दिनांक:- 30/08/2017  के माध्यम से राज्य शासन द्वारा राज्य के समस्त कलेक्टर/कार्यक्रम समन्यवक अधिकारी को ये अवगत कराया गया था कि आगामी आदेश तक मनरेगा से तकनीकी स्वीकृति वाले निर्माण कार्य को स्थगित किया जाए, एवं जो कार्य अतिआवश्यक हो उसके लिए राज्यशासन से अनुमति प्राप्त कर ही कार्य प्रारंभ करें, लेकिन उस आदेश को जिला एवं जनपद स्तर के अधिकारियों द्वारा अवहेलना की गई और बिना कार्यादेश लिए (जैसा कि राज्यशासन के पत्र में उल्लेख है) तुरंत कार्य प्रारंभ करा दिया गया और तकनीकी स्वीकृत वाले महावीरगंज स्कूल की फील्ड समतलीकरण में खुलेआम जेसीबी, ट्रैक्टर का उपयोग किया गया

मीडिया प्रभारी ने आरोप लगाते हुए बताया कि उक्त कार्य को प्रारंभ करने की स्वीकृति कब और कहां से कैसे मिली ये तो संदेहास्पद है ही परंतु उससे भी ज्यादा संदेहास्पद ये है कि आखिर किसके मिलीभगत से इन्हें तत्काल भुगतान भी करा दिया गया है मीडिया प्रभारी के कथनानुसार तकनीकी स्वीकृत वाले पंचायत में और भी कई ऐसे कार्य स्वीकृत हैं परंतु हितग्राहियों को राज्य शासन का आदेश दिखाया जाता है और कहा जाता है कि अभी रोक लगी है, तो फिर ये रोक सिर्फ हितग्राहीमूलक कार्यों के लिए ही या सभी के लिए है,  उन्होंने प्रश्न उठाते हुए कहा कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है कि हितग्राही को राज्यशासन का आदेश दिखाकर उनकी कार्यों को रोका जा रहा है और अधिकारियों द्वारा ठेकेदारों से मोटी रकम वसूल कर राज्यशासन के आदेशों का धज्जियां उड़ाते हुए मनरेगा में ठेकेदारी प्रथा को पुनः जीवित किया जा रहा है..?

 उक्त पंचायत में आज तक किसी भी हितग्राहीमूलक कार्य (जो तकनीकी स्वीकृत वाले हों) को प्रारंभ नही किया गया है, ग्रामीणों ने सीधा सवाल उठाया है कि जब फील्ड समतलीकरण में मशीनीकरण का आदेश मिल गया है तो हितग्राहीमूलक कार्यो के लिए आदेश क्यों नहीं...बता दूं कि क्षेत्रीय विधायक महोदय जी के द्वारा भी लगातार ये आवाज उठाया जाता रहा है कि इस क्षेत्र में अधिकारियों एवं नेताओं की मिलीभगत से करोड़ो का घोटाला हो रहा है, ऐसे में अब एक बृहद आंदोलन की भी तैयारी प्रारम्भ है आंदोलन के माध्यम से जिला एवं जनपद के अधिकारियों से सिर्फ इतना ही जानना है कि उक्त समतलीकरण के लिए कार्यादेश कब और कहां से मिली इन्हें भुगतान किसके आदेश हुआ है..?
एक तरफ राज्यशासन का आदेश और दूसरे तरफ उस आदेश का उलंघन कई सवालों को जन्म देती है

इंजिनीयर के मूल्यांकन के आधार पर भुगतान किया गया है, 12-13 लाख रुपये का भाग 1 और भाग 2 करके। हमारे यहां वर्तमान में कुल 13 इंजिनीयर है पहले 7 थें अभी 6 और आये हैं। उक्त संबंध में मेरे पास कोई लिखित शिकायत नहीं आया है, जब शिकायत आएगा तब मैं जवाब दूंगा, फिर भी संतुष्ट नहीं हुऐ तो उनके अनुसार उचित कार्यवाही किया जाएगा। सभी इंजीनियरों का साइड एवं कार्यों का विभाजन नये तरीके से किया गया है इसलिए कुलदीप नेताम इंजिनीयर को वहां से हटा कर नया साइड दिया गया है। 
’जयपाल एक्का, कार्यक्रम अधिकारी, जनपद पंचायत रामचन्द्रपुर’’

मेरा दूसरा जगह कर दिया गया है। पहले हम वहां काम किये थे, भुगतान के लिए हम रोक लगा दिये थें, मुमताज द्वारा बार बार हम पर दबाव बनाया जा रहा था, हम उनकी बात नहीं माने इसलिए हमको वहां से हटा दिया गया है। उनके अनुसार हम चलते तो हम वहां रहते, गलत कार्य मैं करता तो बाद में मेरे उपर पड़ता ये सोच कर मैंने मना कर दिया, इसलिए मुझे हटा कर दूसरे को रखा गया और मिलीभगत कर भुगतान करा लिया गया है।


‘’कुलदीप नेताम, इंजिनीयर, जनपद पंचायत रामचन्द्रपुर’’

उस कार्य का स्वीकृति ही मशीनी करण का हुआ है, स्वीकृति के आधार पर पूरा कार्य मशीन से किया गया है, मस्टररोल में कम राशि का था, मैं मजदूरों का मूल्यांकन नहीं किया हूँ, स्टीमेट के अनुसार पूरा कार्य मशीन से किया गया है और मैंने मूल्यांकन केवल मशीन का ही किया हूँ । राज्य शासन के आदेश के संबंध में पूछे जाने पर  उन्होंने कोई स्पष्ट नहीं किया।
‘’गोकुल जायसवाल, वर्तमान इंजिनीयर जनपद पंचायत रामचन्द्रपुर’’

 

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