जशपुर

पहाड़ी कोरवा करमू जुड़ा मछली पालन व्यवसाय से, लोकसेवा गारंटी से मिला तालाब का पट्टा

पहाड़ी कोरवा करमू जुड़ा मछली पालन व्यवसाय से, लोकसेवा गारंटी से मिला तालाब का पट्टा

जशपुर : जशपुर जिले की पिरई गांव का रहवासी विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा युवा करमू राम स्वावलंबन की राह पर चल पड़ा है। फौजी मछुआ स्व-सहायता समूह  से जुड़कर पहाड़ी कोरवा करमू अब मछली पालन का व्यवसाय करने लगा है। पिरई गांव बगीचा ब्लॉक के महादेवड़ाड के करीब बसा आदिवासी बाहुल्य गांव है। यहां के युवा आमोद एक्का ने मछली पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाने का मन बनाया और गांव के दस युवाओं को जोड़कर फौजी नामक मछुआ स्व सहायता समूह का गठन किया। इस समूह ने गांव के जोड़ा तालाब को मछली पालन के लिए लोक सेवा गारंटी अधिनियम के लिए पट्टे पर हासिल करने के लिए आवेदन दिया। मत्स्य विभाग द्वारा इस समूह को गांव के जोड़ा तालाब को 10 वर्ष के लिए पट्टे पर दे दिया है। जोड़ा तालाब गांव के किनारे स्थित पहाड़ी की तलहटी में है।  इस तालाब का कैचमेंट एरिया काफी बड़ा है। इसमें साल भर पानी रहता है। 

समूह के अध्यक्ष आमोद एक्का ने बताया कि जोड़ा तालाब का जल क्षेत्र सवा तीन एकड़ है। इसमें समूह द्वारा मत्स्य पालन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मछली पालन विभाग द्वारा समूह के सदस्यों को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन देने के साथ ही मत्स्य पालन के लिए बीज तथा मत्सयाखेट के लिए जाल उपलब्ध कराया गया है। श्री एक्का बताते हैं कि उनके समूह से जुड़ा पहाड़ी कोरवा करमू राम मछली पालन में पूरे मनोयोग से जुटा रहता है। समूह को मछली पालन से लगभग डेढ़ लाख रुपए की अतिरिक्त आमदनी होने लगी है। सहायक संचालक मत्स्योद्योग श्री डी.के.इजारदार ने बताया कि लोकसेवा गारंटी अधिनियम के तहत् इस साल अब तक 31 तालाबों के पट्टे मछली पालन के लिए दिए जा चुके हैं। जिसमें 17 तालाबों के पट्टे समूह को तथा 13 पट्टे व्यक्तिगत हैं। सोगड़ा और सिटोंगा के समूह में शत् प्रतिशत् आदिवासी समुदाय की महिलाएं हैं। सभी समूहों एवं व्यक्गित पट्टेधारियों को विभाग द्वारा मत्स्य पालन के लिए आवश्यक सहायता एवं मार्गदर्शन दिया जा रहा है। 
 नसीम अहमद  खान                           

 

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