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    149 दिन बाद खुले बद्रीनाथ के द्वार, पहले ही दिन हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

    149 दिन बाद खुले बद्रीनाथ के द्वार, पहले ही दिन हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

    सुप्रसिद्ध समाजसेविका शांति पाठक का निधन

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    रनवे पर टक्कर से मचा हड़कंप, अकासा और स्पाइसजेट विमानों में भिड़ंत

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    तीर्थयात्रियों से भरी बोलेरो ट्रक से टकराई, 8 लोगों की दर्दनाक मौत

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    स्वर्णरेखा नदी में मिला संदिग्ध मिसाइल बम, इलाके में दहशत का माहौल

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    महासमुंद में खुशियों के पांच दिन: चतुर्थ दिवस पर योग शक्ति आस्था दीदी ने बताया आकर्षण और गुरुत्वाकर्षण का जीवन सूत्र

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    संस्कार समर कैंप में दूरबीन से आकाशगंगा को देखने के लिए बच्चों की उमड़ी भीड़

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    दुर्ग शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल के नेतृत्व में आज जिला कलेक्ट्रेट में जिलाधीश को दुर्ग शहर की जनसमस्यओ को लेकर ज्ञापन सौपा गया

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149 दिन बाद खुले बद्रीनाथ के द्वार, पहले ही दिन हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

Posted on :23-Apr-2026
149 दिन बाद खुले बद्रीनाथ के द्वार, पहले ही दिन हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

-सीएम धामी और शंकराचार्य ने किए प्रथम दर्शन

चमोली : उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा के तहत चमोली जिले स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट गुरुवार सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर विधिवत रूप से खोल दिए गए। करीब 149 दिनों बाद मंदिर के द्वार खुलने के साथ ही श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला।

कपाट खुलने के बाद सबसे पहले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भगवान बद्रीविशाल के दर्शन किए। उनके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में कपाट खुलने के समय लगभग 2 हजार श्रद्धालु मौजूद थे। परंपरा के अनुसार, सबसे पहले पिछले छह महीनों से जल रही अखंड ज्योति के दर्शन कराए जा रहे हैं। कपाट बंद होने के दौरान भगवान बद्रीविशाल की प्रतिमा को ढकने के लिए चढ़ाया गया घृत कंबल भी हटाया गया। बद्रीनाथ धाम के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल के अनुसार इस वर्ष कंबल घी से पूरी तरह लबालब मिला, जिसे आने वाले समय में अनुकूल मौसम और समृद्धि का संकेत माना जा रहा है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह घृत कंबल माणा गांव की कुंवारी कन्याओं द्वारा उपवास रखकर एक ही दिन में तैयार किया जाता है। ऊन से बने इस कंबल को शुद्ध घी में डुबोकर भगवान को अर्पित किया जाता है। छह माह तक बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के बावजूद कंबल की स्थिति को भविष्य के संकेत के रूप में देखा जाता है।

अब सभी चारों धाम के कपाट खुले

बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही अब उत्तराखंड के सभी चारों धाम—गंगोत्री धाम, यमुनोत्री धाम, केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ—श्रद्धालुओं के लिए खुल चुके हैं। इससे पहले अक्षय तृतीया के अवसर पर 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खोले गए थे, जबकि 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के द्वार खोले गए। राज्य सरकार के अनुसार इस वर्ष चारधाम यात्रा को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। वर्ष 2025 में लगभग 51 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने चारधाम यात्रा की थी, जबकि इस साल अब तक 21 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके हैं, जिससे इस बार रिकॉर्ड संख्या में यात्रियों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।(एजेंसी)

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सुप्रसिद्ध समाजसेविका शांति पाठक का निधन

Posted on :23-Apr-2026
सुप्रसिद्ध समाजसेविका शांति पाठक का निधन

सुबीर सेन

वरिष्ठ पत्रकार

नई दिल्ली : सुप्रसिद्ध समाज सेविका एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ.समरेंद्र पाठक की माता श्रीमती शांति पाठक (मोती देवी)का आज सुबह निधन हो गया।वह 85 वर्ष की थीं।उनके निधन पर देशभर से शोक संदेश मिल रहे है

श्रीमती पाठक ने सुबह 7 बजे एनसीआर के वसुंधरा में यूएनआई अपार्टमेंट स्थित आवास पर अंतिम सांस ली।वह वर्षों से अपने पुत्र के साथ रह रहीं थीं।पति जाने माने साहित्यकार उदय कांत पाठक "मुन्न बाबू"का वर्ष 2020 निधन हो गया था।

श्रीमती पाठक के परिवार में तीन पुत्रों अमरेंद्र कांत पाठक, डॉ.समरेंद्र पाठक एवं अरविंद पाठक के अलावा एक पुत्री नीलम झा है।इसके अलावा नाती मुकेश कुमार एवं पोता नवेश कुमार है।पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास पर रखा गया है।

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रनवे पर टक्कर से मचा हड़कंप, अकासा और स्पाइसजेट विमानों में भिड़ंत

Posted on :17-Apr-2026
रनवे पर टक्कर से मचा हड़कंप, अकासा और स्पाइसजेट विमानों में भिड़ंत

-सभी यात्री सुरक्षित लेकिन विमानों को हुआ नुक्सान

नई दिल्ली : इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर गुरुवार दोपहर एक बड़ा हादसा टल गया, जब अकासा एयर और स्पाइसजेट के विमान आपस में टकरा गए। यह घटना 16 अप्रैल को करीब दोपहर 2 बजे एयरपोर्ट के पार्किंग एरिया में हुई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अकासा एयर की दिल्ली से हैदराबाद जाने वाली फ्लाइट क्यूपी-1406 पुशबैक के दौरान पार्किंग बे से बाहर निकल रही थी। उसी समय लेह से दिल्ली पहुंचा स्पाइसजेट का बोइंग बी-737-700 विमान टैक्सी वे से गेट की ओर बढ़ रहा था, तभी दोनों विमानों की टक्कर हो गई।

हादसे में स्पाइसजेट विमान का राइट विंगलेट क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि अकासा एयर के विमान के लेफ्ट होरिजोंटल स्टेबलाइजर को नुकसान पहुंचा है। टक्कर के बाद मौके पर मौजूद ग्राउंड स्टाफ ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों विमानों में सवार सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। एयरपोर्ट अधिकारियों के मुताबिक, घटना के बाद दोनों विमानों को एहतियातन ग्राउंड कर दिया गया है और उन्हें अगली उड़ानों के लिए उपयोग में नहीं लाया जाएगा।

इस संबंध में अकासा एयर के प्रवक्ता ने बताया कि फ्लाइट क्यूपी-1406 को वापस पार्किंग बे में लाया गया और यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। फिलहाल, इस घटना की जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती तौर पर इसे ग्राउंड मूवमेंट के दौरान हुई तकनीकी या समन्वय की चूक माना जा रहा है। हालांकि, विस्तृत जांच के बाद ही हादसे के सटीक कारणों का पता चल सकेगा।(एजेंसी)

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तीर्थयात्रियों से भरी बोलेरो ट्रक से टकराई, 8 लोगों की दर्दनाक मौत

Posted on :16-Apr-2026
तीर्थयात्रियों से भरी बोलेरो ट्रक से टकराई, 8 लोगों की दर्दनाक मौत

कुरनूल : आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में गुरुवार की सुबह एक हृदयविदारक सड़क दुर्घटना घटित हुई, जिसमें कम से कम 8 लोगों की जान चली गई। यह हादसा चिलकलाडोना के पास उस समय हुआ जब तीर्थयात्रियों से भरी एक बोलेरो गाड़ी की टक्कर एक लॉरी से हो गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

पुलिस प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, इस हादसे में पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। मृतकों की पहचान कर्नाटक के चिक्कमगलुरु क्षेत्र के रहने वाले तीर्थयात्रियों के रूप में हुई है, जो दर्शन के लिए निकले थे। इस सड़क हादसे में लगभग 10 से 12 अन्य लोग भी घायल हुए हैं, जिन्हें तत्काल नजदीकी एम्मिगनूर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।

वहीं पीएम मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री ने इस कठिन समय में सहायता का हाथ बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मुआवजे की भी घोषणा की है। घोषणा के अनुसार, प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी, जबकि दुर्घटना में घायल हुए लोगों को 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। इस घटना के बाद इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है और तीर्थयात्रियों के परिजनों को सूचित कर दिया गया है। स्थानीय प्रशासन घायलों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में जुटा हुआ है।(एजेंसी)

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स्वर्णरेखा नदी में मिला संदिग्ध मिसाइल बम, इलाके में दहशत का माहौल

Posted on :16-Apr-2026
स्वर्णरेखा नदी में मिला संदिग्ध मिसाइल बम, इलाके में दहशत का माहौल

नदी के आसपास के क्षेत्र को खाली कराया गया, डिफ्यूज करने सेना की टीम बुलाई

जमशेदपुर : झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले की स्वर्णरेखा नदी में एक बार फिर भारी भरकम मिसाइल बम मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। गुरुवार को पानीपोडा क्षेत्र के पानीपोडा में मछली पकड़ने गए ग्रामीणों ने नदी के बीच संदिग्ध धातु की बड़ी वस्तु देखी। जहां पास जाकर जांच करने पर उन्हें आशंका हुई कि यह कोई विस्फोटक सामग्री हो सकती है। ग्रामीणों ने तुरंत बहरागोड़ा थाने को इस मामले की सूचना दी। पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर इलाके के लोगों को सावधान रहने की सलाह दी। इसके साथ ही मामले की जांच शुरु कर दी।

मीडिया रिपोर्ट में ग्रामीणों के मुताबिक नदी में मिला यह मिसाइल बम 200 किलो से ज्यादा हो सकता है। वहीं, इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक जैसी वस्तु मिलने की खबर गांव में हड़कंप मच गया, जिसके बाद लोगों में भय और अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने किसी भी अनहोनी से बचने के लिए तुरंत दूरी बना ली। वहीं, पुलिस ने इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी है। ग्रामीणों के मुताबिक इस क्षेत्र में बम मिलने की यह तीसरी घटना है। इससे पहले भी स्वर्णरेखा नदी के किनारे 2 मिसाइल बम मिल चुके हैं, जिन्हें भारतीय सेना की बम निरोधक टीम ने सफलतापूर्वक डिफ्यूज कर दिया था।

वहीं स्थानीय लोग बताते हैं कि नदी किनारे रेत खोदते समय अक्सर ऐसे पुराने बम निकल आते हैं। जहां बार-बार इस तरह की घटनाएं सामने आने से क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि सुरक्षा के मद्देनजर नदी के आसपास के क्षेत्र को खाली कराया जा रहा है। ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। इस पूरे मामले में प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सेना और बम निरोधक दस्ते को सूचना दे दी है, साथ ही विशेषज्ञों के पहुंचने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह मिसाइल बम किस स्थिति में है और इसे कैसे निष्क्रिय किया जाएगा। 

बता दें पहला बम 17-18 मार्च को स्वर्णरेखा नदी किनारे रेत खोदते समय मिला था। इसे सेना ने सफलतापूर्वक डिफ्यूज कर दिया था। दूसरा बम मार्च 2026 में ही कुछ दिनों बाद मिला। इसे भी भारतीय सेना और बम निरोधक टीम ने नियंत्रित विस्फोट से निष्क्रिय किया गया था। तीसरा बम 16 अप्रैल को बहरागोड़ा थाना क्षेत्र के पानीपोडा में मछली पकड़ने गए ग्रामीणों को मिला। यह करीब 200-227 किलो वजनी बताया जा रहा है। हालांकि इसे भी डिफ्यूज करने के लिए सेना की टीम बुलाई गई है।(एजेंसी)

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आम जनता पर असर: चुनाव बाद ईंधन कीमतों में भारी वृद्धि की चर्चा तेज

Posted on :15-Apr-2026
आम जनता पर असर: चुनाव बाद ईंधन कीमतों में भारी वृद्धि की चर्चा तेज

- तेल कंपनियों का दबाव बढ़ा, उपभोक्ताओं पर पड़ेगा असर

- एक्साइज कटौती के बाद भी राहत नहीं, कंपनियों का घाटा जारी

नई दिल्ली : कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों के चलते देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी की एक रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोल करीब 18 रुपए प्रति लीटर और डीजल 35 रुपए प्रति लीटर तक महंगा हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होने के बावजूद भारत में फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे गए हैं, जिससे तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। 

अनुमान है कि पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं। मौजूदा स्थिति में तेल कंपनियों को प्रति लीटर पेट्रोल पर लगभग 18 रुपए और डीजल पर 35 रुपए तक का नुकसान हो रहा है। पिछले महीने जब कच्चे तेल की कीमतें अपने उच्च स्तर पर थीं, तब तीनों प्रमुख तेल कंपनियों को प्रतिदिन करीब 2,400 करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ा। 

हालांकि केंद्र सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए की कटौती के बाद यह घाटा घटकर करीब 1,600 करोड़ रुपए प्रतिदिन रह गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से कंपनियों का नुकसान करीब 6 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ जाता है। ऐसे में आने वाले समय में उपभोक्ताओं पर ईंधन महंगाई का सीधा असर पड़ सकता है।

- तेल कंपनियों ने कमाए हजारों करोड़

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का फायदा भारतीय तेल कंपनियों को बड़े पैमाने पर हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब-जब क्रूड ऑयल सस्ता हुआ, तब सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने पेट्रोल और डीजल के दामों में उसी अनुपात में कटौती नहीं की, जिससे उन्हें उल्लेखनीय मुनाफा हुआ।

जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई मौके आए जब कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई, लेकिन घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर रखी गईं। इस अंतर से तेल कंपनियों के मार्जिन में वृद्धि हुई और उन्होंने हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ अर्जित किया। हालांकि, तेल कंपनियों का तर्क है कि यह मुनाफा अस्थायी होता है और उन्हें वैश्विक बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव, सब्सिडी के बोझ और सरकार के कर ढांचे के कारण कई बार घाटा भी उठाना पड़ता है।(एजेंसी)

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अंडमान सागर में बड़ा हादसा: मलेशिया जा रही नाव पलटी, 250 यात्री लापता

Posted on :15-Apr-2026
अंडमान सागर में बड़ा हादसा: मलेशिया जा रही नाव पलटी, 250 यात्री लापता

नाव में म्यांमार के रोहिंग्या शरणार्थी और बांग्लादेशी नागरिक सवार थे

श्री विजयपुरम : अंडमान सागर में मलेशिया जा रही एक नाव के समुद्र में पलटने से कम से कम 250 लोग लापता हो गए हैं। लापता लोगों में म्यांमार के रोहिंग्या शरणार्थी और बांग्लादेशी नागरिक हैं। यह घटना एक बार फिर उन जोखिमों को उजागर करती है, जिन्हें बेहतर भविष्य की तलाश में मजबूर लोग हर साल उठाते हैं। इस घटना के बाद किसी खोज अभियान की स्थिति बुधवार तक स्पष्ट नहीं हो सकी और न ही यह पता है कि नौका कब डूबी। यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी और प्रवासन एजेंसियों ने दी है ।

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि यह नाव टेकनाफ से रवाना हुई थी, जो बांग्लादेश के दक्षिणी जिले कॉक्स बाजार में स्थित है और इसमें बड़ी संख्या में यात्री सवार थे जो मलेशिया जा रहे थे। एजेंसियों के मुताबिक ज्यादा भीड़, तेज हवाओं और उफनते समुद्र के कारण नाव का नियंत्रण बिगड़ गया और वह डूब गई। यूएनएचसीआर और आईओएम ने कहा कि यह घटना रोहिंग्या लोगों के लंबे समय से चले आ रहे विस्थापन और स्थायी समाधान के अभाव को दर्शाती है।

उन्होंने बताया कि म्यांमार के रखाइन प्रांत में जारी हिंसा के कारण रोहिंग्या शरणार्थियों की देश में सुरक्षित वापसी अनिश्चित बनी हुई है। साथ ही शरणार्थी शिविरों में सीमित मानवीय सहायता, शिक्षा और रोजगार तक सीमित पहुंच उन्हें जोखिम भरी समुद्री यात्राएं करने के लिए मजबूर कर रही है, जो अक्सर बेहतर वेतन और अवसरों के झूठे वादों पर आधारित होती है। यूएनएचसीआर और आईओएम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि बांग्लादेश में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए जीवन रक्षक सहायता तय करने के लिए वित्तीय सहयोग और एकजुटता को मजबूत किया जाए। बांग्लादेश ने म्यांमार से आए 10 लाख से ज्यादा रोहिंग्या शरणार्थियों को शरण दी है।(एजेंसी)

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हीटवेव का खतरा बढ़ा, कई राज्यों में तापमान उछाल का अलर्ट

Posted on :14-Apr-2026
हीटवेव का खतरा बढ़ा, कई राज्यों में तापमान उछाल का अलर्ट

सबसे ज्यादा तापमान 43.1 डिग्री अकोला (महाराष्ट्र) में किया दर्ज

नई दिल्ली : अप्रैल का महीना जैसे-जैसे बीत रहा है, वैसे-वैसे तापमान में भी बढ़ रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 4 से 5 दिनों में उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में अधिकतम तापमान में 3 से 6 डिग्री सेल्सियस हो सकता है। दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत के तापमान में बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है। अप्रैल के मध्य में ही कई शहरों का तापमान 40 डिग्री तक पहुंच गया है। उत्तर-पश्चिम भारत में 14 से 18 अप्रैल के बीच तापमान में 4 से 6 डिग्री तक बढ़ोतरी हो सकती है।

वहीं दिल्ली-एनसीआर में 17 अप्रैल तक अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है आने वाले दिनों में उत्तर भारत के लोगों को चिलचिलाती धूप और बढ़ती गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। पिछले 14 घंटे में देश में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 43.1 डिग्री अकोला (महाराष्ट्र) में दर्ज किया गया। मौसम विभाग के मुताबिक पूरे भारत में तापमान लगातार बढ़ रहा है। उत्तरी मैदानों, पश्चिमी क्षेत्रों और मध्य भारत में समय से पहले ही लू जैसी स्थितियां देखने को मिल रही हैं। 14,15,16 अप्रैल को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, झारखंड, गुजरात, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है।

भीषण गर्मी और हीटवेव से बचने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने आउटडोर श्रमिकों, विशेषकर निर्माण और अन्य असंगठित क्षेत्रों के लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया जारी की है। इस एसपीओ के तहत ऑरेंज और रेड अलर्ट के दौरान दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक काम बंद रखने, काम के घंटे सुबह-शाम करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कार्यस्थलों पर छाया और पानी की व्यवस्था करने को कहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मौसम की दोहरी मार देखने को मिल रही है। एक ओर जहां उत्तर भारत में गर्मी का कहर जारी है। वहीं, मौसम विभाग ने 14 से 17 अप्रैल तक पूर्वोत्तर भारत के बड़े हिस्से में बारिश होने की संभावना जताई है। 14 से 17 अप्रैल तक असम और मेघालय के साथ-साथ नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा जैसे अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में हल्की बारिश हो सकती है। वहीं अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय के कुछ हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना है।(एजेंसी)

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नारी शक्ति वंदन अधिनियम: नारी शक्ति वंदन अधिनियम से बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी

Posted on :14-Apr-2026
नारी शक्ति वंदन अधिनियम: नारी शक्ति वंदन अधिनियम से बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी

-पीएम मोदी ने अधिनियम के समर्थन पर विपक्ष की तारीफ भी की

नई दिल्ली : पीएम मोदी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को 21वीं सदी के सबसे अहम फैसलों में से एक बताया है। सोमवार को उन्होंने कहा कि हमारे देश की संसद एक नया इतिहास रचने वाला है। भारत में महिलाओं ने अपनी अलग ही विरासत स्थापित की है। इस दौरान उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उदाहरण दिया। उन्होंने अधिनियम के समर्थन पर विपक्ष की तारीफ भी की।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में पहुंचे पीएम मोदी ने कहा कि मैं यहां किसी को उपदेश देने या किसी को जगाने नहीं आया हूं। मैं यहां सिर्फ इस देश की महिलाओं का आशीर्वाद लेने आया हूं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संरचना में महिलाओं को आरक्षण देने की जरूरत दशकों से हर कोई महसूस कर रहा था। इस विमर्श को करीब 4 दशक बीत गए। इसमें सभी पार्टियों के और कितनी ही पीढ़ियों के प्रयास शामिल हैं। हर दल ने इस विचार को अपने-अपने ढंग से आगे बढ़ाया है।

पीएम मोदी ने इस एक्ट पर समर्थन के लिए विपक्ष की तारीफ की। उन्होंने कहा कि 2023 में जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम आया था, तब भी सभी दलों ने सर्वसम्मति से इसे पास कराया था। हमारे विपक्ष के सभी साथियों ने मुखर होकर इस बात पर जोर दिया था कि 2029 में ये लागू हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास और प्राथमिकता है कि इस बार भी ये काम संवाद, सहयोग और सहभागिता से हो। मुझे पूरा यकीन है कि जिस प्रकार से इस अधिनियम को पारित किया गया था और संसद का गौरव बढ़ा था। इस बार भी सबके सामूहिक प्रयास से संसद की गरीमा और नई ऊंचाइयों को छुएगी।(एजेंसी)

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गैस संकट गहराया! एलपीजी के बाद सीएनजी और पीएनजी सप्लाई पर भी मंडराया खतरा

Posted on :08-Apr-2026
गैस संकट गहराया! एलपीजी के बाद सीएनजी और पीएनजी सप्लाई पर भी मंडराया खतरा

-रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज के पास कतर के दो एलएनजी टैंकरों को रोका

नई दिल्ली : एलपीजी सिलेंडर की किल्लत और कीमतों में उछाल के बाद अब देशभर के घरों-वाहनों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी और पीएनजी पर भी संकट मंडरा रहा हैं। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर रखा है, जहां से भारत के ज्यादातर एलएनजी आयात होते हैं। नेचुरल गैस लिक्विफाइड फॉर्म (एलएनजी) में ही आयात किया जाता है। इसे टैंकरों से भारत लाया जाता है, फिर रिगैसीफाई करके पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) और सीएनजी (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) में बदला जाता है। दरअसल ये आशंका ईरान की ताजा कार्रवाई के बाद बढ़ी है।

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के समुद्री रास्ते की ओर जा रहे कतर के दो एलएनजी टैंकरों को रोक दिया है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई बुरी तरह प्रभावित है। सूत्र के मुताबिक ईरान ने पिछले सप्ताह पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका के साथ हुए एक समझौते के तहत इन जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी थी। नाम न छापने की शर्त पर सूत्र ने बताया कि यह कदम उसी बातचीत का हिस्सा था।

हालांकि, शिप-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक सोमवार तक दोनों जहाज संयुक्त अरब अमीरात के तट पर तैनात थे और उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार नहीं किया था। यदि ये जहाज सफलतापूर्वक इस जलमार्ग को पार कर लेते, तो युद्ध के बाद से इस मार्ग से गुजरने वाला यह पहला एलएनजी कार्गो होता। बता दें 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के साथ इस युद्ध की शुरुआत हुई थी। इस संघर्ष में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा है।

ईरान युद्ध शुरू होने के बाद कतर ने मार्च 2026 से एक्सपोर्ट रोक दिया है। होर्मुज से गुजरने वाले एलएनजी टैंकरों की बीमा कवरेज तक मुश्किल हो गई है। नतीजा? भारत के एलएनजी टर्मिनल्स पर स्टॉक खत्म हो सकते हैं। एलपीजी की तरह अब पीएनजी और सीएनजी भी कीमतों के चक्रव्यूह में फंस सकते हैं। हालांकि एक राहत की बात ये है कि ईरान ने भारत को मित्र देशों की लिस्ट में रखा है। जिसका मतलब है कि भारत के जहाजों को होर्मुज से गुजरने की इजाजत है। लेकिन कलर से होने वाली सप्लाई अभी भी मेन बाधा बनी हुई है।

पिछले दिनों भारत सरकार ने पीएनजी और सीएनजी को प्राथमिकता दी है। घरों और पेट्रोल पंपों को 100फीसदी सप्लाई का वादा है, जबकि इंडस्ट्री और कमर्शियल यूजर्स को 20-70फीसदी कटौती झेलनी पड़ रही है। गुजरात गैस और जीएसपीसी जैसी कंपनियां पहले से ही इंडस्ट्रियल कस्टमर्स को आधा या उससे कम गैस दे रही हैं। लेकिन एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि अगर युद्ध लंबा चला तो प्राथमिकता वाले सेक्टर भी प्रभावित होंगे। एनालिस्ट बताते हैं कि अभी सप्लाई पूरी तरह ठप नहीं हुई है, लेकिन होर्मुज पर निर्भरता भारत की कमजोरी है। स्टोरेज की कमी के कारण रातोंरात संकट आ सकता है।(एजेंसी)

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बस्तर 2.0 की शुरुआत : मुख्यमंत्री साय ने पीएम मोदी को दिया आमंत्रण, विकास का ब्लूप्रिंट सौंपा

Posted on :07-Apr-2026
बस्तर 2.0 की शुरुआत : मुख्यमंत्री साय ने पीएम मोदी को दिया आमंत्रण, विकास का ब्लूप्रिंट सौंपा

द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार

बस्तर के लिए 360° प्लान-टूरिज्म, स्टार्टअप, इंफ्रा और इनोवेशन पर फोकस

पीएम का बस्तर दौरा बनेगा टर्निंग पॉइंट, बड़े प्रोजेक्ट्स की सौगात

रायपुर : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर बस्तर के भविष्य की एक नई तस्वीर पेश की। इस मुलाकात में मुख्यमंत्री ने न केवल नक्सलवाद के अंत के बाद प्रदेश में आई शांति के लिए प्रधानमंत्री का आभार जताया, बल्कि बस्तर के समग्र विकास का एक विस्तृत और दूरदर्शी ब्लूप्रिंट भी सौंपा। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री को मानसून के बाद बस्तर आने का आमंत्रण दिया, जहां उनकी मौजूदगी में कई बड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण प्रस्तावित है।

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उन्होंने बताया कि बस्तर समेत पूरे राज्य में नक्सलवाद समाप्त हो चुका है और अब शांति स्थापित है। शिक्षा व स्वास्थ्य सुधार के तहत नए एजुकेशन सिटी, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज बनाए जा रहे हैं, जबकि इंद्रावती नदी पर बैराज, रेल लाइन और एयरपोर्ट विस्तार से कनेक्टिविटी मजबूत हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ब्लूप्रिंट के जरिए बस्तर में अब विकास, रोजगार और बेहतर सुविधाओं का नया दौर शुरू होगा।

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मुख्यमंत्री ने अपने विकास दस्तावेज़ में उल्लेख किया कि एक दशक पहले प्रधानमंत्री द्वारा बस्तर के लिए देखा गया शांति और विकास का सपना अब जमीन पर साकार हो रहा है। नक्सलवाद खत्म होने के बाद अब लोगों में डर नहीं, बल्कि उम्मीद और विकास की नई चमक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन से बस्तर को नई दिशा और गति मिलेगी, जिससे क्षेत्र में विश्वास और उत्साह बढ़ेगा।

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मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत विकास ब्लूप्रिंट ‘सैचुरेशन, कनेक्ट, फैसिलिटेट, एम्पावर और एंगेज’ रणनीति पर आधारित है। इसके तहत बस्तर में बुनियादी सुविधाओं को तेजी से विस्तार देने का लक्ष्य रखा गया है। सड़कों के व्यापक जाल के माध्यम से दूर-दराज के गांवों को जोड़ा जाएगा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधूरे कार्यों को 2027 तक पूरा करने के साथ-साथ नई 228 सड़कों और 267 पुलों का निर्माण प्रस्तावित है। इसके अलावा 61 नई परियोजनाओं के लिए विशेष केंद्रीय सहायता की मांग भी की गई है।

ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव की योजना है। हर घर तक बिजली पहुंचाने के कार्य तेज होंगे। शिक्षा के क्षेत्र में 45 पोटा केबिन स्कूलों को स्थायी भवनों में बदला जाएगा। युवाओं के लिए 15 स्टेडियम और 2 मल्टीपर्पज हॉल बनाए जाएंगे, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार और डॉक्टरों के लिए ट्रांजिट हॉस्टल बनाए जा रहे हैं।

कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में इंद्रावती नदी पर दो बड़े प्रोजेक्ट देउरगांव और मटनार में स्वीकृत किए गए हैं, जिनसे 31,840 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। यह परियोजनाएं बस्तर की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

आजीविका और आय बढ़ाने के लिए सरकार ने तीन वर्षीय योजना तैयार की है, जिसका लक्ष्य 2029 तक 85% परिवारों की मासिक आय 15,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करना है। ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ योजना के तहत अब अधिक जिलों को जोड़ा जा रहा है, जिससे विकास का लाभ व्यापक स्तर पर पहुंचेगा। 10 जिलों में शुरू की गई यह योजना अब 7 जिलों और 3 नए जिलों (गरियाबंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई) तक विस्तारित हो रही है।

 ‘अंजोर विजन 2047’ और ‘विकसित भारत@2047’ के तहत स्टार्टअप नीति भी लागू की गई है, जिसमें 2030 तक 5,000 स्टार्टअप तैयार करने का लक्ष्य है।

पर्यटन के क्षेत्र में बस्तर की पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में भी तेजी से काम हो रहा है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी नेशनल पार्क, एडवेंचर टूरिज्म, कैनोपी वॉक और ग्लास ब्रिज जैसी परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन क्षेत्र को नई पहचान दे रहे हैं। वहीं, एक लाख से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें से 40 हजार को रोजगार भी मिल चुका है।

नक्सलवाद से मुक्त बस्तर के विकास के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज प्रधानमंत्री के सामने जो कार्ययोजना प्रस्तुत की, उसमें ‘बस्तर मुन्ने’ (अग्रणी बस्तर) कार्यक्रम एक अहम पहल है। इस कार्यक्रम के तहत हर ग्राम पंचायत में शिविर लगाए जाएंगे, जहाँ अधिकारियों की मौजूदगी में लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे दिया जाएगा, जरूरी दस्तावेज वहीं बनाए जाएंगे और उनकी समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया जाएगा। इसका उद्देश्य है कि हर व्यक्ति तक सरकार की योजनाएँ आसानी से पहुँचें और बस्तर तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़े।

प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौरे के दौरान जिन प्रमुख परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण की योजना है, उनमें रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन, जगदलपुर एयरपोर्ट का विस्तार, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, दंतेवाड़ा में मेडिकल कॉलेज, जगरगुंडा और ओरछा में एजुकेशन सिटी जैसी महत्वपूर्ण पहल शामिल हैं। ये परियोजनाएं बस्तर को शिक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी।

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तालीमी पसमांदगी को खत्म करने के लिए सर सैयद के मिशन को अपनाना ज़रूरी: एम. डब्ल्यू. अंसारी- आई.पी.एस (रिटायर्ड डी.जी.)

Posted on :04-Apr-2026
तालीमी पसमांदगी को खत्म करने के लिए सर सैयद के मिशन को अपनाना ज़रूरी: एम. डब्ल्यू. अंसारी- आई.पी.एस (रिटायर्ड  डी.जी.)

सर सैयद अहमद ख़ान बरसगीर के उन अज़ीम मिमारों में से हैं जिन्होंने एक ज़वाल पज़ीर क़ौम को न सिर्फ जगाया बल्कि उसे इल्म, शऊर और ख़ुद एतमादी की नई राह दिखाई। वो महज़ एक मुस्लिह या मुअल्लिम नहीं थे बल्कि एक ऐसी तहरीक के बानी थे जिसने मुसलमानों की तक़दीर बदलने की बुनियाद रखी। हर साल 17 अक्टूबर को उनकी पैदाइश की तक़रीबात बड़े एहतेमाम से मनाई जाती हैं, अलीग बिरादरी अपने असलाफ पर फ़न का इज़हार करती है, सेमिनार्स और तक़ारीब का इनक़ाद होता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या हमने सर सैयद के मिशन को भी उसी संजीदगी से अपनाया है? 

ज़रूरत इस बात की है कि जिस तरह यौम-ए-पैदाइश पर अलीग बिरादरी एक प्लेटफ़ॉर्म पर जमा होती है, उसी तरह यौम-ए-वफ़ात के मौक़े पर भी इज्तिमाई तौर पर उनके लिए ईसाल - ए - सवाब किया जाए और इससे बढ़कर उनके मिशन को आगे बढ़ाने के लिए एक अमली और मोअस्सिर लायह-ए-अमल तैयार किया जाए। आज के हालात इस बात के तकाज़ी हैं कि सर सैयद को सिर्फ याद न किया जाए बल्कि उनकी तालीमी अफ़कार/ तालीमी तहरीक को ज़िंदा रखा जाए।

किसी भी मुल्क की तरक़्क़ी उस वक़्त मुमकिन होती है जब उसके तमाम तबक़ों को यकसां मौक़े फ़राहम किए जाएँ । लेकिन जब किसी मख़सूस तबके को मुसलसल नज़र अंदाज़ किया जाए तो वो समाजी, तालीमी और मआशी मैदान में पीछे रह जाता है। हमारे मुल्क में ख़ास तौर पर मुसलमानों और दूसरे पसमांदा तबक़ों को पिछले कुछ बरसों में मुख़्तलिफ़ शोबों में दरपेश चैलेंजों ने उनकी तरक़्क़ी की रफ़्तार को मुतास्सिर किया है।

मुसलमानों की पसमांदगी का सबसे बड़ा सबब तालीमी अदम मुसावात है। यह कहना कि मुसलमान तालीम हासिल नहीं करना चाहते, हक़ीक़त के बरअक्स है। असल मसला यह है कि मयारी तालीमी इदारों की कमी, सरकारी स्कूलों की अबतर हालत और मआशी दुश्वारियों के सबब उनके लिए तालीम के मौक़े महदूद हो गए हैं। रोज़गार के मैदान में भी उन्हें ख़ातिरख़्वाह मौक़े मयस्सर नहीं, जिसकी वजह से माली इस्तेहकाम एक ख़्वाब बन कर रह गया है। कारोबारी दुनिया में सरमाया और सहूलियात की कमी भी एक बड़ी रुकावट है।

सियासी मैदान में कमज़ोर नुमाइंदगी ने भी उनके मसाइल को मज़ीद पेचीदा बना दिया है। पॉलिसी साज़ी में मुनासिब हिस्सेदारी न होने के सबब उनके मसाइल अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिए जाते हैं। इसके साथ-साथ मीडिया के एक तबके की जानिब से मुसलमानों की मनफ़ी तस्वीरकशी ने समाज में ग़लतफ़हमियाँ और तअस्सुबात को जन्म दिया है, जिसका बराह-ए-रास्त असर उनके हक़ूक़ और मौक़ों पर पड़ रहा है।

अगर हम तारीख़ के दरीचों से झांकें तो मालूम होगा कि सर सैयद अहमद ख़ान ने किस तरह अपनी पूरी जिंदगी क़ौम की तालीमी और समाजी इस्लाह के लिए वक़्फ़ कर दी। अलीगढ़ तहरीक दरअसल एक ज़ेहनी इनक़लाब था, जिसने मुसलमानों को जदीद तालीम की तरफ़ राग़िब किया और उन्हें नए दौर के तक़ाज़ों से हमआहंग किया। वो एक ऐसा विज़न रखते थे जिसमें इल्म, तहक़ीक़ और वुसअत-ए-नज़र बुनियादी स्तंभ थे।

मगर अफ़सोस कि हमने सर सैयद को महज़ तक़रीबात और नारों तक महदूद कर दिया है। क्या हमने कभी उनके यौम-ए-वफ़ात (27 मार्च) को उसी अकीदत और संजीदगी से मनाने की कोशिश की जिस तरह यौम-ए-पैदाइश को मनाते हैं? यह मौक़ा महज़ ताज़ियती अल्फ़ाज़ का नहीं बल्कि एहतेसाब और अज़्म-ए-नौ का होना चाहिए। यह सोचने का कि हमने सर सैयद के मिशन के साथ कितना इंसाफ़ किया है और आइंदा क्या करना है और उनके तालीमी मिशन को कैसे आगे बढ़ाया जाए। आज भी हम तालीमी मैदान में बहुत ही पीछे हैं इसलिए उनके अफ़कार, मिशन और तहरीक को आगे बढ़ाना हमारा अव्वलीन फ़र्ज़ है।

आज जब दुनिया तेज़ी से बदल रही है, नए मसाइल जन्म ले रहे हैं, आलमी सतह पर ईरान जैसे ख़ितों में कशिदगी, मुल्क के अंदर कुछ फ़िल्मों और बयानियों के ज़रिए मख़सूस तबक़ों को निशाना बनाने की कोशिशें, और अदलिया व दूसरे इदारों के हवाले से उठते सवालात एक संजीदा फ़िक्र के मुतकाज़ी हैं। ऐसे माहौल में सर सैयद की एतदाल पसंद, इल्मी और हक़ीक़त पसंदाना सोच की अहमियत और भी बढ़ जाती है।

मज़ीद यह कि ज़बान व साक़ाफ़त के मैदान में भी चैलेंज कम नहीं हैं। उर्दू, अरबी और फ़ारसी जैसी ज़बानों के फ़रोग़ के लिए क़ायम इदारे माली बुहरान का शिकार हैं, उस्तादों की तकर्रुरियाँ न के बराबर हैं और कई इदारे बंद होने के दहाने पर हैं बल्कि बंद हो चुके हैं। यह सूरत-ए-हाल न सिर्फ तहज़ीबी नुक़सान का सबब है बल्कि तालीमी पसमांदगी को भी बढ़ा रही है।

ऐसे हालात में अलीग बिरादरी की ज़िम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। सर सैयद की तालीमी तहरीक को आगे बढ़ाना, नए तालीमी इदारे क़ायम करना, नौजवानों को जदीद उलूम और हुनर से आरास्ता करना वक़्त की सबसे बड़ी ज़रूरत है। हमें सिर्फ हुकूमतों से शिकवा करने के बजाय ख़ुद अपनी ज़िम्मेदारियों का एहसास करना होगा।

सर सैयद की ज़िंदगी का ख़ुलासा यही था कि क़ौम को तालीमयाफ़्ता, ख़ुद कफ़ील और बाक़ार बनाया जाए। आज उनके यौम-ए-वफ़ात के मौक़े पर हमें यह अहद करना चाहिए कि हम तालीम, तिजारत, हुनर और बाहमी तआवुन के मैदान में संजीदा कोशिशें करेंगे। हर सूबे में अलीगढ़ तर्ज़ के तालीमी इदारों के क़ायम करने की जद्दोजहद की जाए, ताकि इल्म का चिराग हर घर तक पहुँच सके।

आख़िर में यही कहा जा सकता है कि सर सैयद अहमद ख़ान को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करने का सबसे मोअस्सिर तरीका यही है कि हम उनके मिशन को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएं। तालीम को आम करें, शऊर को बेदार करें और एक ऐसे समाज की तश्कील करें जो इल्म, इंसाफ़ और मुसावात पर क़ायम हो और इसके लिए ज़रूरी है कि सर सैयद के अफ़कार, मिशन और तहरीक को आगे बढ़ाया जाए बल्कि पूरी कुव्वत के साथ यह काम किया जाए जिससे क़ौम का खोया हुआ वक़ार हासिल हो । यही सर सैयद के ख़्वाब की ताबीर है और यही हमारे रौशन मुस्तक़बिल की ज़मानत भी।

 

 

 

 

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पांच नाम सुर्खियों में : बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन?

Posted on :02-Apr-2026
पांच नाम सुर्खियों में : बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन?

डॉ.समरेंद्र पाठक

वरिष्ठ पत्रकार

बिहार : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार किसी भी समय अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप सकते हैं। इसके साथ ही राज्य में पहली बार भाजपा सरकार बनने का रास्ता साफ हो जाएगा।भाजपा आलाकमान ने नए मुख्यमंत्री के लिए नामों पर गंभीरता से विचार करना भी शुरू कर दिया है।

पार्टी के शीर्ष सूत्रों की माने तो मुख्यमंत्री पद के लिए पांच नेताओं के नामों पर मंथन जारी है।इनमें केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय,उपमुख्यमंत्रियों सर्वश्री सम्राट चौधरी,विजय कुमार सिन्हा,नीतीश मिश्रा एवं सैयद शाहनवाज हुसैन शामिल हैं। 

हालांकि मोदी शासनकाल में भाजपा के इतिहास को देखा जाय तो इससे इतर गुमनामी में रह रहे नेता को ही कमान मिलता रहा है। कभी सोचा भी नहीं गया होगा,कि श्री नितिन नवीन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हो सकते हैं। ऐसे कई उदाहरण है। जिन हस्तियों का नाम सुर्खियों में है,उनका परिचय इस प्रकार है:-

श्री नित्यानंद राय

श्री नित्यानंद राय का जन्म 1 जनवरी 1966 को हुआ।वह भारत सरकार में गृह राज्य मंत्री हैं और बिहार के एक प्रमुख भाजपा नेता हैं। उन्होंने 2014 और 2019 में बिहार के उजियारपुर लोकसभा सीट से जीत हासिल की। वह लंबे समय तक हाजीपुर से विधायक रहे और बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 

यादव जाति के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे श्री राय को बिहार की राजनीति में राजद सुप्रीमों लालू यादव की काट के लिए ने भाजपा ने उन्हें प्रदेश प्रमुख भी बनाया था।राज्य में यादवों की अच्छी खासी आबादी है। श्री राय ने वर्ष 1981 मेंअखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से राजनीति की शुरुआत की थी एवं वर्ष 2000 में हाजीपुर से पहली बार विधायक बने और लगातार 2000-2014 तक चार बार विधायक रहे।

श्री सम्राट चौधरी

बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को हुआ।वह राज्य के एक प्रमुख भाजपा नेता हैं। मुंगेर के रहने वाले श्री चौधरी ने राजद से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी और वर्ष 1999 में कृषि मंत्री बने। वह परबत्ता से विधायक और विधान पार्षद रह चुके हैं और राज्य में ओबीसी के एक प्रमुख चेहरा के रूप में सुमार हैं। श्री चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है।उनके पिता  शकुनी चौधरी एक दिग्गज नेता और मां पार्वती देवी तारापुर से विधायक रही हैं।

श्री चौधरी वर्ष1990 में सक्रिय राजनीति में आए और वर्ष 1999 में राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री बने।उसके बाद वह जनता दल यूनाइटेड होते हुए
भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। वह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके है।उन्हें शीर्ष नेतृत्व का पसंदीदा भी कहा जाता है।

विजय कुमार सिन्हा

सवर्ण जाति से आने वाले श्री विजय कुमार सिन्हा का जन्म 5 जून 1967 को हुआ।वह बिहार के एक प्रमुख भाजपा नेता और वर्तमान में उपमुख्यमंत्री हैं।लखीसराय से 5 बार के विधायक श्री सिन्हा पूर्व में बिहार विधानसभा के अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं,जो अपने कड़े फैसलों के लिए अलग पहचान रखते  हैं। 

श्री सिन्हा सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कोर्स किए हुए है। उन्होंने राजनीतिक की शुरुआत छात्र राजनीति से की। वर्ष 2005 में पहली बार लखीसराय से विधानसभा चुनाव जीते। इसके बाद से वे लगातार इस सीट से विधायक हैं।

श्री सिन्हा को भाजपा के तेजतर्रार नेता के रूप में देखा जाता है, जो जमीनी स्तर से जुड़े है। वह सवर्ण जाति के प्रमुख नेताओं में एक हैं।अगर राज्य में सवर्ण जाति का कोई मुख्यमंत्री बनाया जाता है,तो उन्हें प्रबल उम्मीदवार माना जाता है।

श्री नीतीश मिश्रा

बिहार के एक प्रमुख राजनीतिक घराने से आने वाले श्री नीतीश मिश्रा का जन्म 9 जुलाई 1973 को हुआ।इनके पिता डॉ. जगन्नाथ मिश्र अखंड बिहार के तीन बार मुख्यमंत्री रहे हैं।चाचा ललित नारायण मिश्र सत्तर के दशक में रेल मंत्री थे।दर्शकों तक बिहार की राजनीति पर पकड़ रखने वाले परिवार के श्री मिश्रा झंझारपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं,जो इनके पिता का पारंपरिक क्षेत्र रहा है।

मिथिला में व्यापक जनाधार वाले उच्च शिक्षित श्री नीतीश मिश्रा 13वीं, 14वीं और 15वीं बिहार विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं। वह पूर्व में बिहार सरकार में उद्योग और पर्यटन मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।श्री मिश्रा बिहार की राजनीति में एक युवा और सक्रिय नेता के रूप में पहचाने जाते हैं। मिथिला के नंबर वन नेता में सुमार हैं।

सैयद शाहनवाज हुसैन

सैयद शाहनवाज हुसैन एक प्रमुख भारतीय राजनेता और भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं।इनका जन्म 12 दिसंबर 1968 को बिहार के सुपौल में हुआ। वह 32 वर्ष की आयु में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सबसे कम उम्र के कैबिनेट मंत्री  बने थे। वे तीन बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और वर्तमान में बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं। 

श्री हुसैन ने इलेक्ट्रॉनिक्स में डिप्लोमा किया है।उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। वह वर्ष 1999, 2006 उपचुनाव और 2009 मे लोकसभा के लिए चुने गए और केंद्र में सबसे कम उम्र के मंत्री बने।वह बेहतरीन पार्टी प्रवक्ता भी हैं।

कहा जाता है, कि उन्हें खास विकल्प के रूप में बिहार की राजनीति में सक्रिय किया गया है,क्योंकि वे अल्पसंख्यक समुदाय से आते है। हाल में उन्होंने एससीएसटी कानून पर अपनी बेबाकी राय जताकर राज्य में सवर्ण मुस्लिम को पुराने ढर्रे पर करीब लाने की कोशिश की।

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दिल्ली विधानसभा : सदन का बहिष्कार एवं व्यवधान लोकतंत्र में ठीक नहीं: गुप्ता

Posted on :02-Apr-2026
दिल्ली विधानसभा : सदन का बहिष्कार एवं व्यवधान लोकतंत्र में ठीक नहीं: गुप्ता

डॉ.समरेंद्र पाठक

वरिष्ठ पत्रकार

नई दिल्ली : दिल्ली विधान सभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आज कहा कि सदन की कार्यवाही में व्यवधान एवं बहिष्कार  लोकतंत्र में ठीक नहीं है। श्री गुप्ता ने यह बात यहां पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही।उन्होंने कहा कि सत्र के दौरान विपक्ष ने पूरी तरह से नकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया। यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने बिना किसी ठोस मुद्दे के विरोध के नाम पर सदन की कार्यवाही से अनुपस्थित रहने का विकल्प चुना,जो देश के विधायी इतिहास में अभूतपूर्व है।

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विधानसभा अध्यक्ष ने आठवीं विधान सभा के चौथे सत्र के दूसरे भाग के समापन पर कहा कि 23 से 27 मार्च तक चले इस सत्र में कुल चार बैठकें हुईं। सदन में कुल 15 घंटे और 16 मिनट तक काम काज हुआ। श्री गुप्ता ने कहा कि इस सत्र के दौरान देखा गया कि आचरण संसदीय कामकाज के लिए गंभीर चिंता पैदा करता है। उन्होंने उल्लेख किया कि कार्यवाही में जानबूझकर व्यवधान डालना, सदन को चलने से रोकना, उसकी गरिमा की उपेक्षा करना और बाद में भ्रामक विमर्श बनाने का प्रयास करना अनुशासनहीनता का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष को कोई शिकायत थी, तो वे सदन में आकर अपना पक्ष रख सकते थे और उन्हें चर्चा के लिए समय दिया जाता, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने शामिल न होने का फैसला किया। विधानसभा अध्यक्ष ने निलंबन के मामले पर स्पष्ट किया कि इस बारे में 21 मार्च को विपक्ष के नेता के साथ हुई बैठक में विस्तार से बताया गया था। श्री गुप्ता ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैग की सभी 7 लंबित रिपोर्टों को सदन के पटल पर रख दिया गया है और अब कोई भी रिपोर्ट लंबित नहीं है।एल.एस.

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चाय बागान में दिखा पीएम मोदी का अलग अंदाज, श्रमिक महिलाओं के साथ किया काम

Posted on :01-Apr-2026
चाय बागान में दिखा पीएम मोदी का अलग अंदाज, श्रमिक महिलाओं के साथ किया काम

-चुनावी दौरे के बीच चाय उद्योग से जुड़े कामगारों से संवाद

डिब्रूगढ़ : असम में विधानसभा चुनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चाय बागान दौरा चर्चा का केंद्र बन गया है। डिब्रूगढ़ पहुंचने के बाद बुधवार को प्रधानमंत्री ने दिन की शुरुआत एक चाय बागान के दौरे से की, जहां उन्होंने महिला कामगारों के साथ चाय की पत्तियां तोड़ीं, उनसे बातचीत की और सेल्फी भी खिंचवाई।

चाय बागान में काम करने वाली महिलाओं से मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा, कि हमें चाय बागान के हर एक परिवार की कोशिशों पर बहुत गर्व है। उनकी कड़ी मेहनत और लगन ने असम का मान बढ़ाया है। उन्होंने इस अनुभव को यादगार बताते हुए असम की चाय को राज्य की “आत्मा” करार दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस दौरे से जुड़ी तस्वीरें और अनुभव साझा किए। उन्होंने लिखा कि असम की चाय ने पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। इस दौरान महिलाओं ने अपनी संस्कृति के बारे में भी बताया और प्रधानमंत्री के साथ आत्मीय बातचीत की। यह दौरा केवल औपचारिक नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पीएम मोदी अक्सर अपने शुरुआती जीवन का उल्लेख करते हैं, जब वे अपने पिता के साथ रेलवे स्टेशन पर चाय बेचते थे। ऐसे में चाय बागान में कामगारों के साथ उनका संवाद उनके व्यक्तिगत जीवन से जुड़ाव को भी दर्शाता है।

असम दुनिया के प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्रों में से एक है और भारत के चाय निर्यात में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। डिब्रूगढ़, तिनसुकिया और जोरहाट जैसे जिलों के चाय बागानों में लाखों लोग कार्यरत हैं, जिनमें महिलाओं की संख्या विशेष रूप से अधिक है। यह उद्योग राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।

राजनीतिक दृष्टि से भी पीएम मोदी का यह दौरा अहम माना जा रहा है। चुनावी माहौल में चाय बागान के कामगारों से सीधा संवाद स्थापित करना एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इस क्षेत्र से जुड़े मतदाता बड़ी संख्या में चुनाव परिणामों को प्रभावित करते हैं।(एजेंसी)

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बीजेपी का बड़ा दांव : ‘जमीन जिहाद’ पर सख्ती का वादा, घोषणापत्र में कई बड़े फैसले

Posted on :31-Mar-2026
 बीजेपी का बड़ा दांव : ‘जमीन जिहाद’ पर सख्ती का वादा, घोषणापत्र में कई बड़े फैसले

-वित्त मंत्री सीतारमण ने यूसीसी लागू करने, 2 लाख नौकरियां देने और बाढ़मुक्त असम बनाने का संकल्प पत्र किया विमोचित

गुवाहाटी : असम विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मंगलवार को अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुवाहाटी स्थित पार्टी कार्यालय में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया की मौजूदगी में ‘संकल्प पत्र’ का विमोचन किया।

जारी घोषणापत्र में बीजेपी ने राज्य में पुनः सत्ता में आने पर 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का वादा किया है। इसके साथ ही ‘जमीन जिहाद’ पर सख्त रोक लगाने और भूमि से जुड़े अवैध कब्जों पर कार्रवाई की बात कही गई है। पार्टी ने ‘सुरक्षित असम, विकसित असम’ के लक्ष्य को दोहराते हुए कई बड़े विकासात्मक वादे किए हैं। घोषणापत्र जारी करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में असम की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने दावा किया कि राज्य की जीडीपी करीब तीन गुना बढ़ी है और प्रति व्यक्ति आय 2020-21 के 1.03 लाख रुपये से बढ़कर 2024-25 में 1.59 लाख रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जो बदलाव पिछले दशक में हुए, वे दशकों के शासन में संभव नहीं हो पाए थे।

बीजेपी ने युवाओं को ध्यान में रखते हुए अगले पांच वर्षों में 2 लाख रोजगार देने का वादा किया है। साथ ही ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज, वन यूनिवर्सिटी और वन इंजीनियरिंग कॉलेज’ की योजना को भी प्रमुखता दी गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि सरकार युवाओं के लिए वैश्विक स्तर का इकोसिस्टम तैयार कर रही है, जिससे बाहर गए असमिया प्रतिभाएं वापस लौटें। इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी पार्टी ने बड़े दावे किए हैं। घोषणापत्र के अनुसार, ब्रह्मपुत्र नदी पर पिछले 10 वर्षों में 9 पुल बनाए गए हैं, जबकि 5 और पुल निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा, असम को बाढ़मुक्त बनाने के लिए सरकार बनने के बाद पहले दो वर्षों में 18 हजार करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है।

बीजेपी ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने का वादा भी किया है, हालांकि छठी अनुसूची और अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों को इससे बाहर रखने की बात कही गई है। साथ ही ‘लव जिहाद’ के खिलाफ सख्त कदम उठाने का भी आश्वासन दिया गया है।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह संकल्प पत्र असम की जनता के सुझावों पर आधारित है। प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया के अनुसार, करीब 2.45 लाख सुझावों को शामिल कर यह दस्तावेज तैयार किया गया है। गौरतलब है कि असम विधानसभा की 126 सीटों के लिए एक चरण में 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।(एजेंसी)

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LPG बुकिंग में बड़ा बदलाव: 45 दिन का इंतजार बना मजबूरी

Posted on :25-Mar-2026
LPG बुकिंग में बड़ा बदलाव: 45 दिन का इंतजार बना मजबूरी

Big News on LPG Booking : घरेलू गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले करोड़ों परिवारों के लिए जरूरी खबर है. इंडियन ऑयल (IndianOil) ने LPG रिफिल बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव कर दिया है. अब पूरे देश में शहर, गांव और दूरदराज के इलाकों में रिफिल बुकिंग के लिए अनिवार्य गैप तय कर दिए गए है. इनका मुख्य फोकस है कि बिना जरूरत के जल्दी-जल्दी बुकिंग न हो और गैस की सप्लाई व्यवस्था बेहतर बने.

उज्ज्वला योजना (PMUY) के ग्राहक सभी उज्ज्वला कनेक्शन वाले परिवारों के लिए अब रिफिल बुकिंग का अनिवार्य गैप 45 दिन है. यानी पिछले सिलेंडर की डिलीवरी के 45 दिन बाद ही नया सिलेंडर बुक किया जा सकेगा. आपको बता दें कि भारत सरकार ने साल 2016 में देश की महिलाओं को फ्री गैस सिलेंडर देने के लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू की थी और इस योजना के जरिए देश की करोड़ों महिलाओं को फ्री सिलेंडर की सुविधा मिल रही है. कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जून 2025 तक, पेट्रोलियम मंत्री ने 10.33 करोड़ से अधिक कनेक्शन दिए हैं.

गांव और शहर के लोगों के लिए गैस बुकिंग का नियम

सामान्य (Non-PMUY) उपभोक्ताओं के लिए अलग नियम है. इसमें SBC (Single Bottle Connection) यानी एक सिलेंडर वाला कनेक्शन वालों के लिए अनिवार्य गैप 25 दिन का है. DBC (Double Bottle Connection) यानी दो सिलेंडर वाला कनेक्शन वालों के लिए अनिवार्य गैप 35 दिन और छोटे सिलेंडर (5 KG और 10 KG) के लिए अलग नियम है.

5 KG घरेलू सिलेंडर शहर या उपनगर क्षेत्र में 9 दिन का गैप पर मिलेगा. गांव या दूरदराज क्षेत्र में 16 दिन का गैप पर मिल जाएगा. वहीं, 10 KG कंपोजिट सिलेंडरशहर या उपनगर क्षेत्र में 18 दिन का गैप पर और गांव या दूरदराज क्षेत्र में 32 दिन का गैप पर मिलेगा. ये नियम पूरे देश में एक समान लागू होंगे.
गैस बुकिंग के समय इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप समय से पहले बुकिंग करने की कोशिश करेंगे तो सिस्टम खुद बुकिंग को ब्लॉक कर देगा. नया गैप पिछले सिलेंडर की सफल डिलीवरी की तारीख से गिना जाएगा.  सभी क्षेत्रों में एक ही नियम लागू हैं. इंडियन ऑयल ने कहा है कि यह बदलाव सभी ग्राहकों के लिए ट्रांसपरेंसी और एक जैसी व्यवस्था बनाने के लिए किया गया है. इससे अनावश्यक बुकिंग रुकेगी और जरूरतमंद लोगों को समय पर सिलेंडर मिल सकेगा.

ग्राहकों को क्या करना चाहिए?

  • अपने पिछले सिलेंडर की डिलीवरी की तारीख याद रखें.
  • उसी के हिसाब से 25, 35 या 45 दिन बाद ही नया सिलेंडर बुक करें.
  • बुकिंग के लिए mLPG ऐप, MyLPG.in वेबसाइट या अपने लोकल डिस्ट्रीब्यूटर से संपर्क करें.
  • अगर कोई समस्या हो तो अपने LPG डिस्ट्रीब्यूटर या इंडियन ऑयल के आधिकारिक चैनल पर मदद लें.

ये नए नियम उन परिवारों के लिए थोड़ी असुविधा पैदा कर सकते हैं जो पहले जल्दी-जल्दी बुकिंग कर लेते थे, लेकिन लंबे समय में यह गैस की बचत और बेहतर गैस डिस्ट्रीब्यूशन के लिए फायदेमंद साबित होगा.

सरकार और इंडियन ऑयल का लक्ष्य है कि एलपीजी की सप्लाई व्यवस्था और मजबूत बने. आम उपभोक्ताओं से अपील है कि वे नए नियमों का पालन करें ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो. नए नियमों से पहले जिन लोगों ने जल्दी बुकिंग की थी, उन्हें अब नया गैप पूरा होने तक इंतजार करना होगा. इंडियन ऑयल ने सभी डिस्ट्रीब्यूटर्स को भी इन नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं. यह बदलाव घरेलू एलपीजी उपयोगकर्ताओं के लिए अनुशासन लाने वाला कदम है. अगर आप भी एलपीजी सिलेंडर इस्तेमाल करते हैं तो अपने पिछले बुकिंग की डेट चेक करें और इन नए नियम के अनुसार प्लानिंग करें.(एजेंसी)

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युद्ध का सीधा असर: किसानों पर बढ़ेगा बोझ, कीटनाशक 30% तक महंगे

Posted on :24-Mar-2026
युद्ध का सीधा असर: किसानों पर बढ़ेगा बोझ, कीटनाशक 30% तक महंगे

चीन ने बढ़ाई कीमतें और निर्यात में भी की कटौती, ग्लोबल सप्लाई चेन पर बढ़ा दबाव

नई दिल्ली : अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब सीधे भारतीय किसानों पर पड़ रहा है। एग्रोकेमिकल इंडस्ट्री के मुताबिक आने वाले दिनों में कीटनाशकों की कीमतों में 25 से 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में होने जा रही है जब खरीफ सीजन शुरू होने वाला है और किसानों को कीटनाशकों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इससे खेती की लागत में सीधा इजाफा होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक एग्रोकेमिकल कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण नए प्रोडक्ट अब महंगे दामों पर मिलेंगे। एक बड़ी कंपनी के अधिकारी के हवाले से बताया कि अप्रैल से कीमतों में बढ़ोतरी दिखनी शुरू हो जाएगी। साथ ही घरेलू बाजार में उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है और निर्यात पर भी असर पड़ने की आशंका है। युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिसका सीधा असर पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर पड़ा है। पेट्रोकेमिकल्स के दाम 25–30फीसदी तक बढ़े हैं।

पैकेजिंग लागत भी 15–30फीसदी बढ़ी है। सल्फर और पेट्रोकेमिकल्स कीटनाशक बनाने में प्रमुख कच्चा माल हैं, इसलिए कंपनियों के लिए लागत बढ़ना तय है। कीटनाशकों में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश केमिकल्स चीन से आते हैं, लेकिन चीन ने कीमतें बढ़ा दी हैं और निर्यात में भी कटौती कर दी है। इससे ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक चीन में चल रही अंतरराष्ट्रीय बैठक के बाद स्थिति और साफ हो सकती है।

भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 93 के पार पहुंच चुका है, जिससे आयात और महंगा हो गया है। इसके अलावा शिपिंग चार्ज बढ़ गए हैं। इंश्योरेंस प्रीमियम भी महंगे हो गए हैं। इन सभी कारणों से कंपनियों के पास कीमत बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। अगर युद्ध लंबा चलता है, तो सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एग्रोकेमिकल निर्यातक है और हर साल 5.5 अरब डॉलर से ज्यादा का निर्यात करता है। ऐसे में यह संकट सिर्फ घरेलू ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार पर भी असर डाल सकता है।(एजेंसी)

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संसद में गूंजा पश्चिम एशिया मुद्दा, पीएम मोदी ने देश से मांगी एकजुटता

Posted on :24-Mar-2026
संसद में गूंजा पश्चिम एशिया मुद्दा, पीएम मोदी ने देश से मांगी एकजुटता

यह केवल क्षेत्रीय नहीं वैश्विक संकट, तेल-गैस आपूर्ति, अर्थव्यवस्था और भारतीयों की सुरक्षा पर सरकार सतर्क, वैकल्पिक स्रोतों पर भी तेज प्रयास

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच आज सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में स्थिति पर विस्तृत बयान देते हुए कहा कि देश को कोरोना काल की तरह धैर्य और एकजुटता के साथ हर चुनौती का सामना करना होगा। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के वैश्विक असर को देखते हुए उनका यह संबोधन बेहद अहम माना जा रहा है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, कि मौजूदा संकट का प्रभाव केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक है और इससे अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा तथा व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि भारत सरकार हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और विभिन्न स्तरों पर तैयारियां की जा रही हैं। हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठक में तेल आयात, खाद आपूर्ति और व्यापार पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की समीक्षा की गई।

पीएम मोदी ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के लिए कच्चा तेल, गैस और उर्वरकों की बड़ी आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। मौजूदा संघर्ष के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो गई है। इसके बावजूद सरकार का प्रयास है कि देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति बाधित न हो। पीएम मोदी ने बताया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसमें एलपीजी का लगभग 60 प्रतिशत शामिल है। इस स्थिति को देखते हुए सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ वैकल्पिक सप्लायर्स से संपर्क में है, ताकि आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित न हो। साथ ही, उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों पर भी मंथन किया जा रहा है, जिससे किसानों को भविष्य में किसी तरह की कमी का सामना न करना पड़े।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस युद्ध ने भारत के सामने आर्थिक, सामरिक और मानवीय तीनों तरह की चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने प्रभावित देशों में मौजूद भारतीयों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। अब तक 3.75 लाख से अधिक भारतीयों कोसुरक्षित स्वदेश लाया जा चुका है। विदेशों में भारतीयों की मदद के लिए 24 घंटे सातों दिन कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन स्थापित की गई हैं तथा नियमित एडवाइजरी जारी की जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि उन्होंने पश्चिम एशिया के कई राष्ट्राध्यक्षों से बातचीत कर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

कोयले का पर्याप्त भंडार

पीएम मोदी ने कहा, कि गर्मी का सीजन शुरू होने से देश में बिजली की मांग बढ़ गई है। वैसे अभी देश के समस्त बिजली संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त भंडारण है। पीएम मोदी ने बताया कि लगातार दूसरे वर्ष 1 अरब टन से ज्यादा कोयले का प्रोडक्शन करके भारत ने एक रिकॉर्ड बनाया है।

सीबीएसई की परीक्षाएं खाड़ी देशों में रद्द कीं

यहां प्रधानमंत्री मोदी ने भारतियों की सुरक्षित वापसी के साथ ही सीबीएसई परीक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा, कि युद्ध शुरू होने के बाद से 3 लाख 75 हजार से ज्यादा भारतीय सुरक्षित रूप से भारत लौट चुके हैं। ईरान से अब तक लगभग एक हजार भारतीयों को सुरक्षित वापस देश लाया गया हैं, इनमें 700 से ज्यादा तो मेडिकल स्टूडेंट ही हैं। पीएम मोदी ने कहा, कि स्थिति को देखते हुए, सीबीएसई ने खाड़ी देशों के स्कूलों में कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। इसके साथ ही बोर्ड द्वारा छात्रों की शिक्षा बिना किसी बाधा के जारी रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने संसद से अपील की कि इस संकट पर देश की एकजुट आवाज दुनिया तक जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार संवेदनशील, सतर्क और हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।(एजेंसी)

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पीएम किसान सम्मान निधि की 22वीं किश्त जारी: छत्तीसगढ़ के 24 लाख किसानों के खातों में पहुंचे 498.83 करोड़

Posted on :14-Mar-2026
पीएम किसान सम्मान निधि की 22वीं किश्त जारी: छत्तीसगढ़ के 24 लाख किसानों के खातों में पहुंचे 498.83 करोड़

द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार

अन्नदाताओं के खातों में पहुंची सम्मान की राशि: किसानों की समृद्धि के लिए निरंतर कार्यरत है डबल इंजन सरकार : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

रायपुर : प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने असम की राजधानी गुवाहाटी से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किश्त जारी की। इस दौरान देशभर के 9 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में लगभग 18 हजार 640 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की गई। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के 24 लाख 71 हजार किसानों के खातों में 498.83 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की गई।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित प्रधानमंत्री किसान निधि सम्मान योजना राशि अंतरण एवं पीएम किसान उत्सव दिवस कार्यक्रम में किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन प्रदेश के किसान भाइयों और बहनों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से किसानों को हर वर्ष तीन किश्तों में कुल 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जो किसानों के परिश्रम और उनके योगदान के सम्मान का प्रतीक है।

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मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसानों को अब तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 11 हजार 283 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। सरकार बनने के बाद सबसे पहले किसानों को बोनस राशि प्रदान की गई और 13 लाख किसानों के खातों में 3 हजार 716 करोड़ रुपये अंतरित किए गए।

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मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जहां प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी और 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के 48 घंटे के भीतर किसानों के खातों में भुगतान सुनिश्चित किया गया। इसके साथ ही कृषक उन्नति योजना के तहत 25 लाख से अधिक किसानों के खातों में 10 हजार 324 करोड़ रुपये की राशि होली से पहले अंतरित की गई।

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मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो-कुटकी, रागी और कपास जैसी फसलों की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। सिंचाई के लिए कृषि पंपों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, जिसके लिए इस वर्ष के बजट में 5 हजार 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के उद्देश्य से दो वर्षों में 10 हजार करोड़ रुपये की सिंचाई 
परियोजना भी शुरू की गई है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों के लिए बड़ी मदद साबित हो रही है। उन्होंने किसानों से धान के साथ-साथ अन्य फसलों की खेती की ओर भी ध्यान देने की अपील की, जिससे पानी की बचत होगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। धरसीवां विधायक श्री अनुज शर्मा ने भी किसानों को संबोधित करते हुए बधाई दी।

इस अवसर पर विधायक श्री अनुज शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष श्री चंद्रहास चंद्राकर, कृषि विभाग के संचालक श्री राहुल देव,  छत्तीसगढ़ बीज विकास निगम के एमडी श्री अजय अग्रवाल, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।

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