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पिता का चले जाना एक ऐसी रिक्तता पैदा करता है जिसे कोई भी, किसी भी तरह से नहीं भर सकता... पत्रकार विनोद वर्मा

पिता का चले जाना एक ऐसी रिक्तता पैदा करता है जिसे कोई भी, किसी भी तरह से नहीं भर सकता... पत्रकार विनोद वर्मा

पत्रकार विनोद वर्मा के फेसबुक वाल से...

रायपुर : पिता का चले जाना एक ऐसी रिक्तता पैदा करता है जिसे कोई भी, किसी भी तरह से नहीं भर सकता. 13 जनवरी के बाद के दिन इसी रिक्तता के सन्नाटे में बीते हैं. मित्रों और रिश्तेदारों के जमघट के बीच भी एकाकीपन ने एक क्षण के लिए भी साथ न छोड़ा. लगता है कि अब यह साए का हिस्सा बन गया है और अनवरत साथ बना रहेगा.

दुनियावी नज़रों से देखें तो बाबूजी का जीवन एक साधारण जीवन था. हर विनम्र और अंतर्मुखी जीवन शायद इतना ही साधारण दिखता हो. लेकिन उनका संघर्ष और परिश्रम बेहद असाधारण था. उनके पास बहुत से सपने थे जिन्हें उन्होंने बहुत संयम से सहेजे रखा और अपने चारों बच्चों के जीवन में रोप दिया. हमारा व्यक्तित्व उन्हीं सपनों के साए में बनता संवरता रहा और अपनी स्मित मुस्कान के साथ वे इसके गवाह बने रहे.

हर जीवन का अकाट्य सत्य मृत्यु है. मृत्यु अपनी वजह ख़ुद तलाश लेती है. पर मेरे मन पर यह बोझ बना रहेगा कि उनके अंतिम दिनों में मेरे साथ जो घटा कहीं वह तो इसकी वजह नहीं बन गया.

बाबूजी ने मुझे संघर्ष करना सिखाया है और हर ऋण से मुक्त होने तक यह सीख याद रहेगी.

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