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फ्रांस के सुरक्षा विशेषज्ञ का दावा: मेड इन इंडिया 'कू एप' पर यूजर्स का डाटा सुरक्षित नहीं!

फ्रांस के सुरक्षा विशेषज्ञ का दावा: मेड इन इंडिया 'कू एप' पर यूजर्स का डाटा सुरक्षित नहीं!

एजेंसी 

नई दिल्ली : सोशल मीडिया यूजर्स के बीच मेड इन इंडिया 'कू एप' की चर्चा जोरों पर है। कई यूजर्स ने तो इसपर अकाउंट बनाने शुरू कर दिए हैं। इस एप को ट्विटर के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और रविशंकर प्रसाद ने भी कू एप पर अपना अकाउंट बना लिया है। Koo एप की चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन की बात कार्यक्रम में भी कर चुके हैं।

वहीं अब इन सब के बीच फ्रांस के सुरक्षा विशेषज्ञ ने 'कू एप' के यूजर्स को चेतावनी देते हुए कहा है कि इस एप पर जिनके भी अकाउंट हैं वे सुरक्षित नहीं हैं। उनके डाटा को लीक किया जा रहा है।

सुरक्षा विशेषज्ञ बैपटिस्ट ने कहा कि उन्होंने ट्विटर पर यूज़र्स के अनुरोध पर कू एप पर 30 मिनट बिताए और पाया कि भारतीय माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म अपने यूज़र्स की संवेदनशील जानकारी जैसे कि ईमेल एड्रेस, नाम और जन्मदिन के साथ-साथ कई अन्य जानकारियां लीक कर रहा है। उन्होंने कू एप के बारे में अपनी इस शोध को विस्तार से बताने के लिए कई ट्वीट किए।

बता दें कि भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को मार्च 2020 में लॉन्च किया गया था, लेकिन ट्विटर और सरकार के बीच चल रहे मतभेद के चलते पिछले कुछ दिनों में कू को अचानक काफी लोकप्रियता हासिल हो गई है। ट्विटर पर पोस्ट किए गए स्क्रीनशॉट का हवाला देते हुए बैपटिस्ट ने दावा किया है कि कू के यूजर्स की व्यक्तिगत जानकारी किसी भी तरह से सुरक्षित नहीं है और इसे लीक किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि हैकर ने एप को हैक कर यह साबित किया है कि कू में यूजर्स की ईमेल, जन्म तिथि, मैरिटल स्टेटस जैसी किसी भी तरह की निजी जानकारियां सुरक्षित नहीं है। कुछ अन्य स्क्रीनशॉट में, बैप्टिस्ट ने यह भी सुझाव दिया कि कू के डोमेन को चीन में स्थित रजिस्ट्रेंट के साथ अमेरिका में रजिस्टर किया गया है।

विस्तार से जानें क्या है 'कू एप'
वैसे तो आपमें से कई लोग कू एप के बारे में जानते होंगे लेकिन कई लोग अभी इससे अनजान हैं। कू एक भारतीय माइक्रोब्लॉगिंग साइट है जिसे ट्विटर की टक्कर में पेश किया गया है। सीधे शब्दों में कहें तो कू एक मेड इन इंडिया ट्विटर है। यह हिंदी, अंग्रेजी समेत आठ भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। कू को एप और वेबसाइट दोनों तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका भी इंटरफेस ट्विटर जैसा ही है। इसमें शब्दों की सीमा 350 है।

 

 

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