बस्तर

चार सौ साल पुराने दलपत सागर को बचाने में जुटे अभियान के सदस्य, कचरों और खरपतवारों की जा रही है सफाई

चार सौ साल पुराने दलपत सागर को बचाने में जुटे अभियान के सदस्य, कचरों और खरपतवारों की जा रही है सफाई

निःश्वार्थ जुड़ रहे प्रकृति प्रेमी और नगरवासी

जगदलपुर : नगर के ऐतिहासिक दलपत सागर की सफाई प्रतिदिन इंद्रावाती बचाओ जनजगरण अभियान से जुड़े सदस्य करने में जुटे है.अभियान के सदस्य सुबह 6 बजे सागर किनारे पहुँच कर सफाई अभियान में जुट जाते है और 8 बजे तक सफाई करते है,महिला,पुरुष,वृद्ध,युवा सहित हर क्षेत्र के लोग इस महाअभियान में अपनी सहभागिता निभा रहे है.संभागीय मुख्यालय जगदलपुर में स्तिथ दलपत सागर पिछले कई सालों से उपेक्षित है और इसे सहजने के उदेश्य को लेकर इंद्रावती बचाओ जनजागरण अभियान के सदस्य सामने आये है.पिछले चार दिनों से अभियान के सदस्य हाथों में फावड़ा,घमेला हसिया लेकर खरपतवारों और फेंकें गये कचरों को सागर से निकाल बहार जमा कर रहे है.अभियान के सदस्य अपने स्वयं की व्यवस्था के साथ सफाई अभियान में शामिल होते है.

प्रतिदिन यहाँ सुबह टहलने आने वाले नगरवासियों का भी सहयोग महाभियान को मिल रहा है, उल्लेखनीय है कि दलपत सागर लगभग 400 वर्ष से भी अधिक पुराना है.जो साफ सफाई के अभाव में बदतर हो चुका है.वर्षों से तालाब में सफाई नहीं हुई. हर साल तालाब में मूर्ति विजर्सन,नगर के नाली का गंदा पानी आने के चलते यह तालाब अब पूरी तहर से दूषित और इसका पानी अप्रयोगी हो चूका है.बीते 5 साल से इसका उपयोग भी दैनिक जीवन में बंद हो गया है मगर अब कुछ जागरूक लोगों ने इसे बचाने बड़े अभियान की शुरुवात की है.

लगभग 400 साल पहले बस्तर रियासत के महाराजा दलपतदेव ने इस तलाब का निर्माण सिंचाई और निस्तारी के लिये किया था.ग्राम मधोता से 1772 में राजधानी जगदलपुर शहर में स्थान्तरित्र किया गया था उसी दौरान राजा ने इस विशाल तालाब का निर्माण करवाया आगे जाकर यह तालाब दलपत सागर के नाम से प्रसिद्ध हुआ,प्रदेश में यह सबसे बड़े तालाबों में गिना जाता है.बताया जाता है कि रियासतकालीन दौर में 50 से अधिक तालाब जल संग्रहण के लिये बनाये गये.उस दौर में जल संचय के लिये बेहतर कार्य किये जाते थे परंतु वक्त के साथ साथ तालाबों की स्थिति दयनीय होती चली गई और आज यह स्थिति है कि आधे से ज्यादा तालाब और कुएँ विलुप्त हो चुकी है या उनमे कब्जा कर क्रंकीट का जंगल बना दिया गया है.अब कुछ ऐसे तलाब ही बचे है जो बस्तर की धरोहर है उन्ही में से एक बड़े तलाब को सरंक्षित करने का जिम्मा उठाया है 

इंद्रावाती बचाओ जनजगरण अभियान के सदस्यों ने.अभियान से जुड़े सदस्यों की माने तो तालाब को पूरी तरह सफाई करने का काम आसान नही है जब तक शासन प्रशासन का सहयोग प्राप्त ना हो मगर अभियान के माध्यम से साफ सफाई लगातार करने से कम से कम तलाब के किनारे फेंके गये कचरों को तो बाहर निकाला ही जा सकता है और अभियान इसी ओर आगे बढ़ रही है.अभियान के सदस्यों ने कहा की उनका मकशद नगर के अन्य तालाबों को भी संरक्षित करने का भी है.प्रतिदिन सुबह अभियान जुड़े सदस्य,उर्मिला आचार्य,सुरजीत कौर,अरुणा जोबनपुत्र,गाजिया अंजुम,लक्ष्मी कश्यप,गीता आचार्य,सीमा आचार्य,सुषमा झा,लक्ष्मी सिंह,मालती सोढ़ी,अनिल लुंकड,सुरेश चंद्र दास,हिड़मा पोयाम,अजय पाल सिंह,संपत झा,रोहित आर्य,प्रमेश राजा,दिनेश सर्राफ,कल्वेन्द्र सिंह(राजू) सजंय बरले,बादशाह खान,शिवरतन खत्री,प्रतीक सोनी,गीतेश कुमार,धर्मेंद्र महापात्र सहित अन्य सदस्य श्रमदान कर रहें है.दलपत सागर सफाई अभियान सतत जारी रहेगा।

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