बस्तर

जगदलपुर :इंद्रावती प्राधिकरण की घोषणा के बाद अब तक नहीं शूरू हुआ कोई काम नदी तट में बैठकर सरकार को याद दिलाया घोषित वादा

जगदलपुर :इंद्रावती प्राधिकरण की घोषणा के बाद अब तक नहीं शूरू हुआ कोई काम नदी तट में बैठकर सरकार को  याद दिलाया घोषित वादा

इंद्रावती बचाओ जनजागरण अभियान से सदस्यों ने किया ध्यानाकर्षण सत्याग्रह 


   इंद्रावती नदी में घुटनों तक पानी में खड़े होकर जल सत्याग्रह भी किया  

जगदलपुर - बस्तर की प्राणदायनी इंद्रावती नदी को बचाने के लिए राज्य स्थापना दिवस के दिन शुक्रवार को इंद्रावती बचाओ जनजागरण अभियान के द्वारा ध्यानाकर्षण सत्याग्रह किया गया.बस्तर की प्राणदायनी इंद्रावती नदी को बचाने के लिए शुरू की गई इंद्रावती जनजागरण अभियान ने गांधीगिरी तरीके से सुबह 7 से 9 बजे तक सांकेतिक ध्यानाकर्षण सत्याग्रह किया। 

सत्याग्रह के माध्यम से मंच के लोगों ने इंद्रावती नदी को बचाने के लिए सरकार को जगाने का प्रयास किया,आयोजित सत्याग्रह का यह तीसरा चरण है,अभियान के सदस्यों ने इंद्रावती नदी में घुटनों तक पानी में उतर कर जल सत्याग्रह करने से भी नही कतराये।अभियान से जुड़े सदस्यों ने कहा कि सत्याग्रह के माध्यम से शासन का ध्यानाकर्षण करना है की प्राधिकरण गठन की घोषणा के बाद अब तक जमीनी स्तर में नदी को बचाने कोई काम शुरू नही किया गया है.घोषणा को  6 महीने बीत जाने के बाद भी न ही किसी अधिकारी की नियुक्ति की गई है और ना ही प्राधिकरण का गठन किया गया है.सरकार का इस ओर ध्यानआकर्षण करने के उद्देश्य से इंद्रावती नदी तट पर सत्याग्रह किया गया. आगे की रणनीति में इंद्रावती को बचाने के लिए अलग अलग तरीके से सांकेतिक धरना आंदोलन किया जाएगा। 

अभियान से जुड़े सदस्यों का कहना था की शुरुआती आंदोलन के बाद प्रदेश सरकार ने तत्परता दिखाते हुए इंद्रावती विकास प्राधिकरण के गठन करने की घोषणा तो की लेकिन  अब तक किसी तरह की कोई पहल नहीं हुवा है। ऐसे में जल्द से जल्द सरकार कोई कारगर कदम उठाए।  ध्यानाकर्षण सत्याग्रह में पद्मश्री धर्मपाल सैनी ने संबोधित करते कहा की 'जिनका समय कीमती है जिनके शब्द कीमती हैं कीमती समय वाले जुड़ते हैं तो छोटी सी बात कीमती हो जाती है.इसीलिए यह अभियान कीमती हो गया है आज देश में 34% नदियां खत्म हो चुकी है जिसके चलते इको सिस्टम खराब हो चुका है.जंगल कट रहे हैं पॉलिथीन ने नदी नालों का सत्यानाश कर दिया। अब भी समय है कि हम अपने धरोहरों को संरक्षित करें ताकि आने वाला भविष्य उज्जवल हो सके.इंद्रावती नदी को बचाने के लिए बच्चों को जागरूक करना चाहिए स्कूल में 5 मिनट के लिए बच्चे तख्ती लेकर इंद्रावती नदी को बचाने के लिए खड़े हो जाएं तो इसका काफी असर पड़ेगा और सरकार को इस ओर ध्यान देने पर मजबूर होना पड़ेगा

 अभियान के वरिष्ठ सदस्य दशरथ कश्यप ने कहा कि लगातार 14 दिनों तक पदयात्रा और सत्याग्रह के बावजूद सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही इंद्रावती नदी बस्तर की जरूरत है.

इस नदी के चलते हजारों लाखों लोग जीवन यापन कर रहे हैं मगर इस ओर सरकार ध्यान नहीं दे रही हम केवल धरना आंदोलन,पदयात्रा कर सकते हैं.लेकिन सरकार का काम बस्तर की प्राणदायनी को सुरक्षित व संरक्षित करना है.नदी को बचाने इंद्रावती बचाओ अभियान जारी रहेगा जब तक इंद्रावती नदी को पूरी तरह सुरक्षित ना कर दिया जाए. वरिष्ठ नागरिक योगेंद्र पांडे ने कहा की बस्तर प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण है मगर दुखदाई स्थिति यह है कि इंद्रावती नदी अपना अस्तित्व खोने की कगार पर है.अभी नदी में पर्याप्त पानी तो है मगर ग्रीष्म काल में यह नदी वीरान सी लगती है.इस ओर प्रत्येक बस्तरवासियों को ध्यान देना होगा ताकि हम नदी को बचाकर उसका अस्तित्व बचाए रखें।जरूरत है कि लोग सामने आए और इंद्रावती मैया के लिए कुछ ऐसा करें कि यह नदी सालों सालों तक अनवरत बहती रहे.

इंद्रावती बचाओ अभियान के सदस्य आनंद मोहन मिश्रा ने ध्यानाकर्षण सत्याग्रह के अवसर पर कहा की किसी वाद विवाद के बगैर आंदोलन को इतना बड़ा बनाएं कि उनके समझ में आये की जनमत हमारे खिलाफ हो सकता है  तब कोई भी पार्टी हमारे साथ खड़ा मिलेगा। 

गांव-गांव में स्थाई समिति बनानी पड़ेगी धरातल पर काम करते रहेंगे तो ऊपर तक बात नहीं पहुंच पाएगी। इसलिए एक कमेटी जाकर सरकार से बात करें की इंद्रावती नदी को किस तरह संरक्षित रखा जा सके.बस्तर में पानी ठहरता नहीं है आगे  पानी समुद्र में जाकर मिल रहा है जो किसी काम का नहीं है.इंद्रावती में बहने वाले पानी को हमें इकट्ठा करना होगा। 

अभियान के किशोर पारेख ने कहां की इंद्रावती बचाओ समस्त बस्तरवासियों का अभियान है.आगे भी हम इसे जारी रखेंगे हमने जो कार्यक्रम की रीति नीति बनाई है उस पर अमल करते रहना चाहिए हमारे प्रेरणा से हर जगह इस तरह के आंदोलन  भी हो रही है.समस्या को लेकर सरकार भी चिंतित है राज्य सरकार ने इंद्रावती प्राधिकरण की घोषणा तो कर दी पर उस पर अमल अभी तक शुरू नहीं हुआ है.पानी है तो सब कुछ है इसी से व्यापार फल फूल रहा है.लोग इसमें जुड़े और अभियान को आगे बढ़ाएं  वरिष्ठ नागरिक प्रदीप पांडे ने कहा सरकार ने प्राधिकरण की घोषणा कर गाड़ी तो स्टार्ट कर दी है पर  वह आगे नहीं बढ़ रहा.पदयात्रा के दौरान हमने शपथ ली थी की पॉलिथीन का उपयोग नहीं करेंगे उस शपथ को याद रखने की आवश्यकता है.आंदोलन के दौरान वृक्षारोपण किया गया था उस भी हमें ध्यान देना होगा अगर हो सके तो अभियान के सदस्य प्रतिदिन अपने साथ 5 लीटर पानी जरूर लेकर निकले और उन पौधों को सिंचित करें। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में कई प्रकार के फल लोग खाते हैं उन फलों के बीज को इकट्ठा कर सुखा के रखें ताकि गर्मी के बाद उसका सीड बाल बना कर जगह-जगह फेंका जा सके ।

इस अवसर पर अभियान के वरिष्ठ सदस्य अनिल लुंकड़ ने कहा कि हाल ही के गर्मी के वक्त जिस तरह नदी सूखी और लोगों को बस्तर कि इस प्राणदायिनी को बचाने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा ऐसी स्थिति दोबारा ना हो इसके लिए सरकार को पहल करनी चाहिए बारिश और ठंड में नदी में पर्याप्त पानी होता है मगर ग्रीष्मकाल के आते ही पड़ोसी राज्य उड़ीसा में स्थित बाँध से पानी नहीं छोड़ा जाता और जितना पानी छोड़ा जाता है वह जोरा नाला  के माध्यम से उड़ीसा राज्य में ही बहने लगता है.छत्तीसगढ़ सरकार को ओडिसा राज्य से बात कर इस समस्या का भी समाधान निकालना चाहिए ताकि भरी गर्मी में इंद्रावती नदी का जलस्तर बना रहे.

पीएन सिंह ने कहा कि नए लोग शामिल हो जैसे समूह,जाति,समाज के ऐसे लोगों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है इन लोगों को जोड़ने से उनके पीछे जो लोग आएंगे तो अभियान को बल मिलेगा।हमे दूरगामी परिणाम के बारे में भी सोचना पड़ेगा।भविष्य में तीसरा विश्वयुद्ध जल को लेकर हो सकता है इसे रोकने के लिए सभी नागरिकों को सिपाहियों की तरह काम करने की जरूरत है.इंद्रावती नदी केवल नदी नहीं है वह बस्तर की प्राणदायनी है और इसके लिए जो भी करना पड़े किया जाना चाहिए 

अभियान से जुड़े सदस्य अजय पाल सिंह ने कहा कि समस्या का निराकरण हमें चाहिए सरकार कैसे करती है यह वह जाने मगर हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे सदस्यों को जोड़ने का काम करते रहेंगे हमारा ध्यान उन पौधों की तरफ भी होना चाहिए जिसे हमने लगाया है.उस प्रयास की सार्थकता तभी होगा जब हम उन पौधों को पेड़ बनाकर खड़ा कर देँगे।

अभियान की वरिष्ठ सदस्य उर्मिला आचार्य ने कहा की  राज्य को बने 20 वर्ष हो गए पर पता नहीं हम कितना आगे बढ़ पाए हम सरकार को दोष नहीं दे सकते और ना ही आने वाले से उम्मीद कर सकते हैं पर विश्वास तो है.विश्वास पर दुनिया टिकी है.इसी विश्वास को आधार बनाकर हम मुहिम से जुड़े हैं.बहुत से लोगों को भ्रांति हो जाती है की यह मुहिम किसी खास सदस्यों का है और वे सदस्यों में शामिल नहीं हो सकते ऐसा नहीं है हम जितने भी लोग यहां हैं किसी ने कोई फार्म नहीं भरा लोग स्वीस्फूर्त आंदोलन से जुड़े। इंदिरावती मैया ने हम सब को बुलाया है.देखते ही देखते कारवां बनता गया और यह काफी आगे जाने वाला है.हम बस विश्वास के साथ चलें।

सत्याग्रह में पहुंचे पी जयंत ने इस अवसर पर कहा 1 साल से चल रहा यह जनआंदोलन व्यापक रूप ले चुका है.हमें किसी को बुलाने की के लिए आह्वान करने की आवश्यकता नहीं। कोई भी इसमें शामिल हो सकता हैं.हमने जो आंदोलन किया अब तक इसका निराकरण हो जाना चाहिए था मगर सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है अभियान की महिला सदस्य नंदा कलकोटवार ने कहा कि इंद्रावती के लिए सभी के सहयोग की आवश्यकता है हमें बस्तर कि इस इंद्रावती को बचाना है.लगातार आंदोलन चलाने की आवश्यकता होगी तो जरुर चलाएंगे पर हमें समस्या का निराकरण चाहिए।

लक्ष्मी कश्यप ने कहा कि लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से हमें इंद्रावती बचाने के लिए प्रयास करते रहना चाहिए और सरकार को जगाने के लिए जो भी बेहतर कार्य किए जाना है उसे जरूर करेंगे ताकि हमारी नदी सही सलामत रह सके.सत्याग्रह आंदोलन में करमजीत कौर ने कहा कि सरकार किसी की भी रहे वह बहरी होती है जनप्रतिनिधियों को भी इस समस्या के बारे में जानकारी है.हम लोग समय निकालकर अभियान में शामिल होते हैं यह केवल हमारी समस्या नहीं पूरे बस्तरवासियों की समस्या है.इस ओर ध्यानाकर्षण करना बेहद जरूरी है.हमें अपनी बातें दमखम के साथ रखना पड़ेगा।

श्रीनिवास रथ ने इस अवसर पर कहा की  सरकार तक एक आवाज जानी चाहिए कि वह वन अधिकार पट्टा बांटना बंद करें तो जंगल कटना भी बंद हो जाएगा।जंगल पर कब्जा करने का काम बंद होना चाहिए वनों को संरक्षित करने से ही बस्तर में हरियाली रहेगी इसके अलावा वाटर लेवल बढ़ेगा,इससे हमारी नदियां हमेशा हरी भरी रहेगी इंद्रावती नदी को बचाने के लिए जो प्रयास अभियान के द्वारा किया जा रहा है वह सराहनीय है लेकिन सरकार को आगे आकर बस्तर कि इस वृहद हो चुकी समस्या पर विचार करना पड़ेगा

अभियान के सदस्य समीर खान ने कहा कि हम लोग निष्क्रिय नहीं हुए हैं एक अलग सी उर्जा अभियान के सदस्यों में आ गई है.हम आंदोलन इसलिए कर रहें हैं कि हमारी बस्तर की नदी तकलीफ में है और उसकी तकलीफ को हम अपनी आंखों से देख नहीं सकते,इसीलिए हमें तो सिर्फ नदी चाहिए। इंद्रावती नदी केवल शहरों तक ही सीमित नहीं है.यह नदी बीहड़,जंगली रास्तों से होकर अनेकों अनेक गांवों तक जाती है और इसके पानी से ही लोग अपना जीवन यापन करते हैं.एक तरह से कहा जाए तो यह बस्तरवासियों के लिए जीवनदायिनी है और इस पर आम बस्तरिया निर्भर है.हमें इसे बचाने के लिए कुछ भी करना पड़े तो हम अग्रिम पंक्ति में खड़े नजर आएंगे।

 वरिष्ठ सदस्य सुरेश चंद्र दास ने कहा कि हमें उम्मीद है कि सरकार हमारी बातों पर विचार करेगी और हमारी जीत निश्चित है इस अवसर पर रोहित आर्य ने कहा कि हम फिर से संगठित हैं.14 दिन की पदयात्रा ने बता दिया था कि वरिष्ठ से लेकर युवाओं में कितना दम है.सरकार ने जो वादा किया था उस पर कोई कार्य शुरू नहीं हुआ मगर हम अपने आंदोलन को जारी रखेंगे।अभियान से जुड़े प्रमुखजन व विचारक इस मुद्दे को लेकर कितना गंभीर है यह अभियान की सार्थकता का परिचय देती है.आज नहीं तो कल इंद्रावती नदी पर अच्छे परिणाम आने की संभावना है.

अभियान के सदस्य संपत झा ने कहा कि बस्तर में प्राकृतिक संसाधन इतने हैं कि अगर उसे सुरक्षित कर दें तो बस्तर में तापमान 25 डिग्री से आगे नहीं बढ़ेगा,जितना पानी बस्तर में होता है क्या उसे बैराज के माध्यम से संचय किया जा सकता है.इस पर भी सरकार विचार करें। पूर्व मुख्यमंत्री ने भी इंद्रावती नदी के लिए घोषणा की और अब के सीएम भी यहीं घोषणा कर चुके हैं पर धरातल पर अब तक कुछ नहीं हुआ हमारी समस्या का समाधान कैसे होगा यह सरकार तय करें। हम अपना अभियान सतत जारी रखेंगे ताकि नेताओं को भी  अपनी जिम्मेदारी याद आए कि जिसके लिए उन्हें चुना गया है कम से कम उस समस्या का समाधान तो करें।

इंद्रावती बचाओ जन जागरण अभियान के सदस्यों ने ध्यानाकर्षण सत्याग्रह के बाद इंद्रावती नदी में घुटनों तक पानी में खड़े होकर जल सत्याग्रह भी किया सदस्यों ने मांग रखी है कि सरकार ने इंद्रावती प्राधिकरण की घोषणा के बाद अब तक आगे की कार्यवाही शुरू नहीं कर पाई है जिसे लेकर सदस्यों में नाराजगी तो है मगर सरकार से जल्द से जल्द इस विषय पर गंभीर होने की बात कही है.नदी तट पर आयोजित  सत्याग्रह में बड़ी संख्या में अभियान से जुड़े सदस्य और नगर के गणमान्य नागरिक मौजूद थे.अंत मे अभियान के सदस्य धर्मेन्द्र महापात्र ने सत्याग्रह को सफल बनाने सभी का आभार व्यक्त किया.

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