बस्तर

जगदलपुर : फिर से बह गया करोड़ो का आमागूड़ा एनीकट, सिंचाई विभाग के काले कारनामों की प्रकृति खोल रही पोल

जगदलपुर : फिर से बह गया करोड़ो का आमागूड़ा एनीकट, सिंचाई विभाग के काले कारनामों की प्रकृति खोल रही पोल

जयप्रकाश बस्तर      

जगदलपुर । बस्तर अंचल में पिछले कुछ वर्षो से जलसंसाधन विभाग के अधिकारी एंव ठेकेदारों की सांठगांठ का आलम यह रहा कि सरकार की नौकरी करने वाले अधिकारी सरकार के धन का संरक्षण करने की बजाया ठेकेदारों की पाकेट गर्म करने में लगे रहे है। जिसके चलते बस्तर जिले का जलसंसाधन विभाग सुर्खियों रहा है और यहां पदस्थ अधिक्षण यंत्री सिर्फ कठपुतली बन कर रह गये है। केंद्र सरकार ने पिछले कई बर्षो में सैकड़ो करोड़ की राशि सिर्फ बस्तर अंचल में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए उपलब्ध करवाई है जिसका लाभ ग्रामीणों को मिलने की बजाय भ्रष्टाचार में समा रहा है। बस्तर जिले में इस वर्ष बारिश बेहद कम होने से सूखे के हालात है इसके बाद भी जल संसाधन विभाग के अंर्तगत नारंगी नदी पर निर्माणाधीन आमागुड़ा एनीकट वर्ष २०१५ में बह गया इस बात को लेकर विधानसभा में मंत्री श्री अग्रवाल ने ठेकेदार के खर्च पर फिर से बनाने बनाने की बात कही थी लेकिन  विभाग के उच्चाधिकारी संबधित अधिकारीयों व ठेकेदार पर कार्यवाही करने की बजाय मामले की लीपापोती कर मामले को दबा दिया था।

 जिसका नतीजा यह हुआ कि सितम्बर माह की २५ से ३० तारीख के बीच बारिश नहीं होने के बाद भी एनीकट का मुख्य स्ट्रक्चर फिर से बह गया है और विभाग के उच्चाधिकारी इस घटना को लेकर सिर्फ सुनने की बात कह रहे हैं एनीकट बहे लगभग एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी विभाग के उच्चाधिकारी ने निर्माण स्थल तक पहुँचने की जहमत उठाने भी जरूरी नहीं समझा

बस्तर जैसे आदिवासी अंचल में सरकारी कामकाज की स्थिति की समीक्षा के लिए सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी तथा कर्मचारीयों द्वारा सरकारी धन की जिस तरह बंदरबांट की जा रही है उसका उदाहरण जलसंसाधन में देखने का मिलता है इस विभाग में बाढ़ के दौरान नदी में हजारों घनमीटर कांक्रीट करवाने वाले एसडीओ और उपयंत्री को निलंबित कर दिया जाता है वहीं कार्यपालन यंत्री को बेदाग घोषित कर दिया जाता है। साथ ही बरसात में करोड़ो के एनीकट कार्यो का सर्वे करवाकर कर प्राक्लन तैयार करवाने के कारण ही बस्तर में नदीयों में बनने वाले एनीकट धराशायी हो रहे हैं। यहां तक की बस्तर के बहुचर्चित भोंड एनीकट के मामले में हो हल्ला होने के बाद ९ करोड़ का एनीकट ५ करोड़ से भी कम में निर्मित हो गया जो विभाग में चल रहे भ्रष्टाचार के उद्योग को प्रमाणित करता है। 

 बस्तर जनपद में ही नारंगी नदी पर जलसंसाधन विभाग के द्वारा आमागुड़ा एनीकट का निर्माण करवाया जा रहा है जिसकी प्रशासकीय स्वीकृति आदेश क्रमांक ७०३३ दिनांक ३ अक्टूबर २०१३ को प्राप्त हुई थी एंव तकनिकी स्वीकृति अधीक्षण यंत्री इंद्रावती मंडल जगदलपुर के द्वारा १० जनवरी २०१४ को दी गई थी। कार्य का निर्माण हेतु आर्या कंशट्रक्शन रायगढ़ द्वारा अनुबंध क्रमांक ५९/डी/एल/२०१३-१४ दिनांक १०/१/१४ को किया गया तथा इसी दिन कार्य प्रारंभ भी कर दिया कार्य निर्माण की अवधि ११ माह बर्षा ऋतु सहित तथा कार्य की लागत १६६ लाख थी।  कार्य के निर्माण की जिम्मेदारी कार्यपालन यंत्री आरके पंजाबी एंव एसडीओ एपी कुर्रे तथा उपयंत्री एम के साहु को सौंपी गई थी। श्री पंजाबी का लगभग ७ माह बाद तबादला हो गया था। लेकिन काफी कार्य उनके मार्गदर्शन में हुआ था। 

 लेकिन इस वर्ष बस्तर अंचल में वर्ष २०१५ में सरकारी आंकड़ो के अनुसार मात्र ५३० एमएम बारिश हुई है जो बेहद कम होने के बाद भी आमागुड़ा में बना स्तरहीन एनीकट पानी में भी बह गया था। वहीं पानी के प्रवाह को नहीं सह पाने वाला स्ट्रक्चचर नदी में ही समा गया और मेन स्ट्रक्चर भी कई स्थान से ध्वस्त हो गया था इस कार्य को लेकर विभाग के मंत्री ने ठेकेदार से स्ट्रक्चर ठीक करवा लेने की बात कही थी। विभाग के अधिकारीयों ने इस एनीकट के मरम्मत की खानापूर्ति कर ठेकेदार को समूची राशि का भुगतान कर दिया। वहीं इस वर्ष २५ से ३० सितम्बर के बीच बस्तर अंचल में बारिश कम होने के बाद भी नारंगी नदी पर बने सिवनी आमागूड़ा एनीकट कट का मुख्य स्ट्रक्चर फिर से बह गया है। विभाग के अधिकारी किसी पर कार्यवाही करें ऐसा प्रतीत नहीं होता है लेकिन सरकार बदल गई है रायगढ के उन ठेकेदारों का आंतक भी विभाग में कुछ कम हुआ है जो पिछली सरकार में अपने को मंत्री का रिश्तेदार होने का रौब छाड़ते थे लेकिन आने वाला समय बतायेगा की इस घटिया निर्माण जिम्मेदारी और सरकार के नुकसान के लिए किसी पर कार्यवाही होगी या इस सरकार में भी घटिया निर्माण करने वाले ठेकेदारों और अफसरों को राजनैतिक संरक्षण मिलता रहेगा।

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