बस्तर

खुद का मकान होते हुए मुफलिसी की जिंदगी जीने को मजबूर चित्तर सिंह और किरायेदार बन कर कब्जा जमाने वाला आपरेटर अपना रहा कई हथकंडे

खुद का मकान होते हुए मुफलिसी की जिंदगी जीने को मजबूर चित्तर सिंह और किरायेदार बन कर कब्जा जमाने वाला आपरेटर अपना रहा कई हथकंडे

वार्ड में घूम घूम कर लोगों से करवा रहा - सादे कागज से हतस्क्षार वार्डवासियों ने भी कह दिया - मकान तो चित्तर सिंह का है 

जगदलपुर : श्वेता कॉलोनी धरमपुरा इलाके में चित्तर सिंह पिता हरि सिंह के मकान में किरायेदार बन कर कब्जा करने वाला कम्प्यूटर ऑपरेटर रविराज अब प्रशासनिक व पुलिसिया दबाव के बाद तरह-तरह के हथकंडे अपना रहा है,एक ओर लगातार चित्तर सिंह और उसके परिवार को ऑपरेटर पटनायक डराने धमकाने में जुटा है तो दूसरी ओर वार्ड वासियों को अपने पक्ष में करने के लिए भरकस  प्रयास कर रहा है.लेकिन वार्ड वासी सच्चाई को जानते हैं. इसलिए ऑपरेटर के  झांसी में नहीं आ रहे.सुबह शाम ऑपरेटर रवि राज पटनायक धरमपुरा इलाके में देखा जा रहा हैं और हाथों में कागज कलम लेकर लोगों से अपने पक्ष में हस्ताक्षर करने विनती कर रहा हैं.ऑपरेटर का कहना है कि उक्त मकान मेरा है और यह मेरे पिताजी ने मुझे खरीद कर दिया है और मुझे 15 लोगों के हस्ताक्षर चाहिए ताकि इसके माध्यम से वह चल रहे कानूनी कार्यवाही से बच सकें। 

लेकिन वार्ड के लोग रविराज के पक्ष में किसी प्रकार का हस्ताक्षर या बयान नहीं देना चाहते क्योंकि उन्हें मालूम है कि उक्त मकान चित्तर सिंह का है और वह पिछले दस 11 सालों से उक्त मकान में रह रहा है. रवि राज पटनायक अपनी पत्नी के प्रेग्नेंसी का  हवाला देकर चित्तर  सिंह के घर में किराये पर  आया था और उसने फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसके  माध्यम से घर के मालिक को ही बाहर निकाल दिया तथा अन्य तीन ब्लाकों में किराए के मकान में रह रहे कालेज की छात्राओं को भी उसने मकान खरीदने की जानकारी देकर ब्लॉक खाली करवा दिया। इस बात की जानकारी कंगाली  के सभी निवासियों को है.वार्ड पार्षद संग्राम सिंह राणा ने भी इस बात की तस्दीक की है की मकान चित्तर सिंह का ही है और ऑपरेटर  रविराज पटनायक किराये पर था.

आसपास के लोग तो यह कहते हैं कि एक गरीब को घर से बाहर निकाल आपरेटर रवि राज पटनायक ने अच्छा नहीं किया इसकी उसे जरूर आह लगेगी। दरअसल कुनियाती दिमाग वाले कंप्यूटर ऑपरेटर रवि राज पटनायक फर्जी दस्तावेज तैयार करने में माहिर है.इससे पहले इसने एक अधिवक्ता और पटवारी के साथ मिलकर कंगोली के कई जमीन को बेच खाया है इसने ऑपरेटर दिमाग लगते अपने पक्ष में हस्ताक्षर करवा लिया है फिर भी पैंतरा सही नहीं बैठने से अब आसपास के पुराने रहवासियों के संपर्क में जुट गया है .पैसे की लालच में कम्यूटर ऑपरेटर किसी भी  हद तक जा सकता है. तिकड़ी का सॉफ्ट टारगेट वर्तमान में चित्तर  सिंह है.लेकिन चित्तर सिंह ने भी अब तक हार नहीं मानी है.मेहनत मजदूरी कर मकान बनाकर रहने वाले चित्तर  सिंह कानूनी लड़ाई लड़ रहा है. भले ही उसके जेब खाली हैं लेकिन हौसले बुलंद हैं.

चित्तर सिंह पत्नी व दो बच्चों के साथ दूसरे के घर में शरण लिए हुए हैं खुद का मकान होते हुए वह मुफलिसी की जिंदगी जीने को मजबूर है.मगर संतोषी वार्ड में आलीशान मकान होते हुए भी ऑपरेटर रविराज पटनायक चित्तर सिंह के मकान को बेचने के लिए जबरदस्ती कब्जा जमाए हुए हैं और कूटरचना कर फर्जी दस्तावेज तैयार करने के बाद रवि राज पटनायक संतोषी वार्ड स्थित अपने मूल घर में रहने लगा है और चित्तर सिंह के मकान का सौदा भी तय कर लिया है.वह चित्तर का मकान को नहीं बेच पा रहा क्युकी मामले में कानूनी पेच आ गया है और इसलिए लगातार ऑपरेटर रविराज पटनायक लोगों से हस्ताक्षर करने तथा अपने पक्ष में बयान दर्ज कराने प्रतिदिन वार्ड में घूम रहा है.मगर  श्वेता कॉलोनी के वार्ड वासी भली-भांति जानते हैं कि उक्त मकान चित्तर सिंह का है और रविराज केवल किरायेदार है

More Photo

    Record Not Found!


More Video

    Record Not Found!


Related Post

Leave a Comments

Name

Contact No.

Email