बस्तर

डुमराबाडा को बचेने के फिराक में था ऑपरेटर रविराज, पोल खुली तो टूट पड़े वार्डवासी-योजना हुई फेल

डुमराबाडा को बचेने के फिराक में था ऑपरेटर रविराज, पोल खुली तो टूट पड़े वार्डवासी-योजना हुई फेल

TNIS

एक अधिवक्ता, पटवारी और ऑपरेटर बन बैठे हैं जमीन दलाल

जगदलपुर : चित्तर सिंह के जमीन हड़पने और कूटरचना कर फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाला कम्प्यूटर ऑपरेटर श्वेता कॉलनी में 2 और नजूल भूमि को कब्जा जमाने की फिराख में था.ऑपरेटर से जमीन दलाल बने रविराज पटनायक एक वकील और क्षेत्र के पटवारी प्रदीप पांडे के साथ मिलकर नजूल भूमि को कब्जा जमा कर बेचने का काम करता है.चित्तर सिंह के मकान पर कब्जा जमाने का मकशद भी बेचना ही था और लगभग 12 लाख में सौदा कर भी लिया गया था.मगर चित्तर सिंह ने साहस दिखाते हुये इस ऑपरेटर के खिलाफ लड़ा जिसके चलते अब वह न्याय के करीब है.इसी वार्ड मे मंदिर के पास डुमरबाड़ा नाम से 3 हजार स्क्वायर फीट जमीन है जो जोगेंद्र नागे पिता मंगल नागे की पैतृक कब्जे वाली भूमि है.इसे भी ऑपरेटर रविराज पटनायक,अधिवक्ता और पटवारी के साथ मिलकर कब्जा जमाने की बड़ी योजना बनाई थी। पहले तो इन्होंने इसका फर्जी दस्तावेज तैयार कराया और अपने नाम करवा कर बेचने के प्लान किया गया।मगर इसकी जानकारी जोगेंद्र नागे के परिवार को लग गई और ऑपरेटर तथा अधिवक्ता के साथ इनकी जमकर लड़ाई हुई। लगभग 6 माह पूर्व कम्प्यूटर ऑपरेटर ने बोधघाट थाने में अपना रसूख दिखाते हुए जोगेंद्र और मानसिंह सोनी  के परिवार को गिरफ्तार करवा लिया और तत्काल पटवारी को बुलाकर भूमि की नाप जोक कर दीवार तुड़वा दिया तथा मौके पर ही 17 लाख में सौदा किया जा रहा था.मगर जोगेंद्र नागे के भाई उगेंद्र ने हिम्मत दिखाते हुये ऑपरेटर से जमीन दलाल बने  रविराज पटनायक और अन्य को खदेड़ दिया.नागे परिवार के समर्थन में पूरा का पूरा गांव आ गया जमकर बहस बाजी हुई और गांव वालों के दबाव के बाद ऑपरेटर रविराज पटनायक तथा अधिवक्ता ने मामले को छोड़ना ही उचित समझा और इस भूमि को बेचने से वंचित रह गए। अधिवक्ता, कम्प्यूटर ऑपरेटर रविराज पटनायक और  पटवारी प्रदीप पांडे की तिकड़ी वार्ड के कई भूमि पर कब्जा जमाने के फिराक में रहते हैं और उसे बेचने के लिए ग्राहक की तलाश करते रहते हैं।सूत्र बताते हैं कि अब तक इन्होंने तीन से चार नजूल भूमि पर कब्जा जमा कर सरकारी भूमि बेच डाली है।जांच कराए जाने पर एक बड़ा मामला सामने आ सकता है अब इस तिकड़ी का टारगेट चित्तर सिंह का मकान बेचना है।इन्होंने  चित्तर सिह के ऑरिजनल दस्तावेज का हूबहू नकली दस्तावेज तैयार कर लिया है।मगर वे इसमें में भी कामयाब नही हो पायेंगे-क्योंकि चित्तर सिह के समस्त दस्तावेज चीख चीख कर कह रहा है कि उक्त भूमि का मालिकाना हक चित्तर रखता है।कूटरचना कर तैयार की गई दस्तवेज अब कोई काम नही आने वाला है, कम्प्यूटर ऑपरेटर और अधिवक्ता ने दस्तवेज अदला बदली में तो कमाल कर दिया है.खैरागढ़ के रहने वाले एक युवक के लीगल आईडी को बदल दिया और उसमें चित्तर का नाम डलवा दिया.इसी तरह कई ऐसे दस्तावेज है जिसमे ऑपरेटर ने छेड़छाड़ की है जो सबसे बड़ा गुनाह है.इसके लिये ऑपरेटर को जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है.अधिवक्ता पटवारी और ऑपरेटर द्वारा जगदलपुर के कई अन्य नजूल भूमि पर कब्जा कर बेचे जाने का खुलासा अगली कड़ी में की जाएगी जिसमे एक भाईजान की जमीन भी शामिल है.

साभार - मो. 7987214969

More Photo

    Record Not Found!


More Video

    Record Not Found!


Related Post

Leave a Comments

Name

Contact No.

Email