ज्योतिष और हेल्थ

विश्व तम्बाकू निषेध दिवस (31 मई) पर विशेष- धूम्रपान न करने वालों को भी धुँआ करता है प्रभावित

विश्व तम्बाकू निषेध दिवस (31 मई) पर विशेष- धूम्रपान न करने वालों को भी धुँआ करता है प्रभावित

तम्बाकू से 40 तरह के कैंसर, 25 अन्य बीमारियों का खतरा : डॉ. कमलेश जैन

धूम्रपान न करने वालों को भी धुँआ करता है प्रभावित

छीनता है रोग प्रतिरोधक क्षमता, घेर लेती हैं संक्रामक बीमारियां

रायपुर:  बीड़ी-सिगरेट व अन्य तम्बाकू उत्पादों का सेवन करने वाले लोग न केवल अपने जीवन से खिलवाड़ करते हैं बल्कि घर-परिवार की जमा पूँजी को भी इलाज पर फूंक देते हैं। इस पर काबू पाने के लिए सरकार के साथ ही बहुत सी समाज सेवी संस्थाएं भी लोगों को जागरूक करने के काम में लगी हुई हैं।

इसी को ध्यान में रखते हुए हर साल 31 मई को विश्व तम्बाकू निषेध दिवस मनाया जाता है जिसके जरिये लोगों को तम्बाकू के खतरों के प्रति सचेत किया जाता है। इस बार कोरोना के संक्रमण को देखते हुए जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन संभव नहीं है, इसलिए तम्बाकू के सेवन के दुष्प्रभावों के प्रति जागरुकता लाने एवं सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम 2003 के प्रावधानों के क्रियान्वयन हेतु सोशल मीडिया, फेसबुक लाइव, रेडियो/वीडियो प्रसारण व विज्ञापनों के जरिये धूम्रपान के खतरों के बारे में लोगों को जागरूक किया जाएगा।इस बार कार्यक्रम की थीम युवाओं पर आधारित है- "Protecting youth from industry manipulation and preventing them from tobacco and nicotine use" यानि युवाओं को उद्योगों की छलयोजनाओं सेसुरक्षित रखनाऔर उन्हें तम्बाकू के सेवन से बचाना।

राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ, छत्तीसगढ़ के नोडल अधिकारी डॉ.कमलेश जैन का कहना है बीड़ी-सिगरेट व अन्य तम्बाकू उत्पादों के सेवन से देश में हर साल करीब 12 लाख लोग यानि करीब तीन हजार लोग हर रोज दम तोड़ देते हैं ।

डॉ. जैन का कहना है:``हमें धुम्रपान एवं तम्बाकू उत्पाद के सेवन तथा उनसे होने वाली बीमारी पर लगाम लगाना हैताकि हर व्यक्ति स्वस्थ नागरिक बन सकें, जो राष्ट्र के विकास में सहायक हो । तंबाकू के नियंत्रण में केवल आधिकारिक तौर पर नहीं बल्कि सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी आगे आने की जरूरत है|।साथ ही कोविड-19 के संक्रमण समय में तंबाकू एवं तंबाकू से संबंधित पदार्थों का सेवन और घातक हो सकता है ।‘’

डॉ. जैन का कहना है युवा शुरू-शुरू में शान के चक्कर में सिगरेट व अन्य तम्बाकू उत्पादों की गिरफ्त में आता है जो उसे इस कदर जकड़ लेती है कि उससे छुटकारा पाना उसके लिए बड़ा कठिन हो जाता है।  उनका कहना है धूम्रपान करने या अन्य किसी भी रूप में तम्बाकू का सेवन करने वालों को करीब 40 तरह के कैंसर और 25 अन्य गंभीर बीमारियों की चपेट में आने की पूरी सम्भावना रहती है।‘’

डॉ.जैन का कहना है की राज्य के 21 ज़िलों में तम्बाकू नशा मुक्ति केंद्र भी स्थापित है जहॉ से तम्बाकू नशा मुक्ति के लिये परामर्श एवं उपचार भी किया है । बिलासपुर देश पहला ज़िला है जहॉ इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का निषेध (उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन) अध्यादेश, 2019 (The Prohibition of Electronic Cigarettes (Production, Manufacture, Import, Export, Transport, Sale, Distribution, Storage and Advertisement) Ordinance, 2019) लागू होने के बाद ई-सिगरेट पर सबसे पहली कार्यवाही की गयी है ।बिलासपुर राज्य का पहला ज़िला है जहॉ कलेक्टर द्वारा शहरी क्षेत्र को तंबाकू मुक्त ज़िला बनाने की पहल की गई है । 26 जनवरी 2020 को जशपुर शहर राज्य का प्रथम धुम्रपान मुक्त शहर बना ।

क्या कहते हैं आंकड़े :

ग्लोबल एडल्ट टोबाको सर्वे – 2016-17 के अनुसारछत्तीसगढ़ में 39.1 प्रतिशत लोग किसी न किसी प्रकार के तम्बाकू का सेवन करते हैं। यह देश की औसत 28.4 % से अधिक है। इनमें से 7.3% तम्बाकू का सेवन करने वालों में 15 वर्ष की उम्र से पहले सेवन शुरू किया था,29% ने 15-17 वर्ष की उम्र से और 35.4% ने 18-19 वर्ष में सेवन शुरू किया था यानि औसतन 18.5 वर्ष की आयु में तम्बाकू का सेवन शुरू किया गया था।

नेशनल हेल्थ एंड फॅमिली सर्वे – 4 के अनुसार छत्तीसगढ़ में 15-49 वर्ष के55 प्रतिशत पुरुषऔर 22 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू का सेवन करती हैं। पुरीषतम्बाकू वाला गुटखा, पान मसाला आदि का सेवन ज्यादा करते हैं (28 प्रतिशत)।गाँव-देहात में महिलाएं और पुरुष, दोनों ही तम्बाकू का सेवन शहरी लोगों से ज्यादा करते हैं।

क्या कहता है सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा)

धारा-4 :

इसके तहत सार्वजनिक स्थलों जैसे-बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, रेलवे प्रतीक्षालय, न्यायालय परिसर, शैक्षणिक संस्थान, कैंटीन, कैफे, क्लब, होटल, रेस्टोरेंट आदि पर धूम्रपान पर पूरी तरह से रोक है । इस धारा के उल्लंघन करने पर 200 रूपये जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है ।

धारा-5 :

इसके तहत सिगरेट व अन्य तम्बाकू उत्पादों के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से विज्ञापन पर प्रतिबंध । इसका उल्लंघन करने पर एक हजार रूपये का जुर्माना या दो साल की कारावास या दोनों का दण्ड मिल सकता है ।

धारा-6 ए :

इसके तहत सिगरेट व अन्य तम्बाकू उत्पादों को 18 साल से कम उम्र के बच्चों द्वारा बेचे जाने पर पूरी तरह रोक का प्रावधान किया गया है ।

धारा-6 बी :

शैक्षणिक संस्थाओं से 100 गज की दूरी में सिगरेट व अन्य तम्बाकू उत्पादों की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगायी गयी है, इस दायरे में कोई भी इस तरह के उत्पाद नहीं बेच सकता ।इसका उल्लंघन करने पर 200 रूपये का जुर्माना लगाया जा सकता है ।

धारा-7 :

इसके तहत सिगरेट-गुटखा व अन्य तम्बाकू उत्पादों के पैकेटों पर 85 प्रतिशत हिस्से में आवश्यक चित्रात्मक चेतावनी होना अनिवार्य किया गया है ।

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