ज्योतिष और हेल्थ

दुनिया में दूसरी बार HIV मरीज का हुआ सफल इलाज

दुनिया में दूसरी बार HIV मरीज का हुआ सफल इलाज

एजेंसी 

लंदन के डॉक्टरों ने एक एड्स मरीज को पूरी तरह ठीक करने में सफलता हासिल की है। डॉक्टरों ने दावा किया है कि एचआईवी प्रतिरोधी क्षमता रखने वाले व्यक्ति का 'बोन मैरो' संक्रमित व्यक्ति को ट्रांसप्लांट करने के बाद वह शख्स ठीक हो गया। डॉक्टरों ने उसे एड्स मुक्त घोषित कर दिया है। एड्स महामारी के इतिहास में यह दूसरी बार है कि कोई मरीज इस जानलेवा वायरस से ठीक हुआ है। 

तीन साल पहले प्रतिरोपित किए स्टेम सेल : 
'लंदन पेशेंट' नाम के इस मरीज को करीब तीन साल पहले एचआईवी प्रतिरोधी स्टेम सेल प्रतिरोपित किया गया था। डॉक्टरों ने करीब 19 महीने पहले इस युवक को दी जा रही एंटी-रेट्रोवायरल दवाएं बंद कर दीं। इसके बाद से रोगी में एचआईवी वायरस के कोई लक्षण दिखाई नहीं दिए हैं। 

खास जीन ने बचाई जान : 
एचआईवी बायोलॉजिस्ट की टीम के सह-प्रमुख और कैंब्रिज विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रविंद्र गुप्ता ने बताया कि रोगी को 2003 में एचआईवी पीड़ित होने का पता चला था। वर्ष 2012 में उसने संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए दवाएं लेनी शुरू कीं। इसके कुछ समय बाद उसमें हॉजकिंस लिम्फोमा नाम का ब्लड कैंसर विकसित हो गया। वर्ष 2016 में उसे हेमाटोपोएटिक नाम का स्टेम सेल प्रतिरोपित किया गया। यह सीसीआर5 नाम के एचआईवी प्रतिरोधक जीन वाले व्यक्ति से लिया गया था। डॉक्टर गुप्ता ने बताया कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट के बाद करीब 16 माह तक एंटी-रेट्रोवायरल दवाएं दी गईं। इसके बाद से शरीर में कोई भी वायरस नहीं दिखा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह मामला इस बात का सबूत है कि वैज्ञानिक एक दिन एड्स का पूरी दुनिया से सफाया कर सकेंगे। 

क्या है सीसीआर5 जीन : 
सीसीआर5 नाम का जीन दुनिया की आबादी के केवल 1 फीसदी लोगों के शरीर में ही पाया जाता है। यह जीन एचआईवी-1 वायरस को पूरी तरह रोगी के शरीर से खत्म कर सकता है। कैंसर की तरह कीमोथैरेपी एचआईवी को बढ़ाने वाले सेल को काफी हद तक रोक देता है, लेकिन इम्यून सेल को सीसीआर5 नाम का जीन एड्स रोगियों के जीवन में नई उम्मीद बनकर सामने आया है। 

सबसे पहले 2007 में बर्लिन के रोगी का सफल इलाज हुआ
इस व्यक्ति को द लंदन पेशेंट (लंदन का रोगी) कहा जा रहा है। इस रोगी का मामला भी एचआईवी वायरस से औपचारिक तौर पर निजात पा चुके पहले अमेरिकी आदमी की तरह ही है। टिमोथी ब्राउन नाम का यह शख्स जिसे बर्लिन पेशेंट (बर्लिन का रोगी) नाम से जाना जाता था, उसे भी वर्ष 2007 में इसी तरह का इलाज किया गया था। ब्राउन पहले बर्लिन में रह रहे थे। इलाज के बाद वह अमेरिका चले गए और वे आज पूरी तरह स्वस्थ हैं।

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