कोरबा

पहाड़ी कोरवा और बिरहोर परिवारों को नहीं होगा भोजन का संकट

पहाड़ी कोरवा और बिरहोर परिवारों को नहीं होगा भोजन का संकट

विशेष पिछड़ी जनजातियों के ग्यारह सौ से अधिक परिवारों को निःशुल्क राशन किट वितरित
लॅाक डाउन जारी रहने तक राशन खत्म होने पर जिला प्रशासन को सूचित करने की भी अपील  TNIS

कोरबा 03 कोरबा 2020/कोरोना संक्रमण के नियंत्रण के मद्देनजर पूरे प्रदेश में जारी लॅाक डाउन से जिले के पहाड़ी कोरवाओं और बिरहोर परिवारों के समक्ष खड़ी हुई भोजन की समस्या का समाधान जिला प्रशासन द्वारा कर दिया गया है। कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल के निर्देश पर जिले के दूरस्थ वनांचलों में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजातियों के एक हजार 150 परिवारों को सूखे राशन की एक खेप पहुंचा दी गई है। खेप के रूप में हर परिवार को राशन सामाग्री की एक-एक किट निःशुल्क दी गई है। इस किट में पांच किलो चावल, आधा किलो तुअर दाल, एक किलो आलू और 50-50 ग्राम धनिया, मिर्ची तथा हल्दी के पैकेट सहित दो पैकेट बिस्किट भी दिए गये हैं। जिले में निवासरत 643 पहाड़ी कोरवा परिवारों और 507 बिरहोर परिवारों को यह राशन किट उपलब्ध कराये गये हैं।
      पहाड़ी कोरवाओं और बिरहोर विशेष पिछड़ी जनजातियों के जिले में एक हजार 150 परिवार निवासरत हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण घोषित हाई अलर्ट और लॅाक डाउन से ये लोग अपने घरों से नहीं निकल पा रहे हैं। रोजी-मजदूरी सहित वनोपज संग्रहण का काम भी इस लॅाक डाउन से प्रभावित हो रहा है। ऐसे में इन पहाड़ी कोरवा और बिरहोर परिवारों तक भोजन के लिए जरूरी राशन किट बनााकर पहुंचाया गया है। कोरबा विकासखंड में 610 पहाड़ी कोरवा और 145 बिरहोर परिवारों को मिलाकर 755 परिवारों को ऐसे राशन किट निःशुल्क उपलब्ध कराये गये हैं। पोंड़ीउपरोड़ा विकासखंड में रहने वाले 33 पहाड़ी कोरवा परिवारों और 188 बिरहोर परिवारों को राशन सामाग्री निःशुल्क दी गई है। इसके साथ ही पाली विकासखंड में 159 और करतला विकासखंड में 15 बिरहोर परिवारों को ऐसे किट उपलब्ध कराये गये हैं। कलेक्टर श्रीमती  किरण कौशल ने लॅाक डाउन के कारण किसी भी विशेष पिछड़ी जनजाति परिवार को राशन की कमी नहीं होने देने और समय पर पर्याप्त मात्रा में उन्हे राशन उपलब्ध कराने के निर्देश खाद्य विभाग के अधिकारियों को दिए हैं। कलेक्टर ने यह भी कहा है कि यदि लॅाक डाउन अवधि 14 अपे्रल से पहले अभी दी गई राशन किट का सामान खत्म होने पर जिला प्रशासन को सूचित करें ताकि विशेष पिछड़ी जनजाति के इन परिवारों के लिए राशन सामाग्री समय पर उपलब्ध कराई जा सके।

 

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