विशेष रिपोर्ट

क्यों बदले गये डी पुरंदेश्वरी, विवादों से रहा है नाता

क्यों बदले गये डी पुरंदेश्वरी, विवादों से रहा है नाता

GCN- प्रभाकर ग्वाल

छत्तीसगढ़ में 2023 विधानसभा चुनाव के पहले बीजेपी में बदलाव का सिलसिला जारी है. अब प्रदेश प्रभारी डी पुरंदेश्वरी को हटाया गया. छत्तीसगढ़ में बीजेपी के नए प्रदेश प्रभारी ओम माथुर को बनाया गया. 

इससे पहले बीजेपी ने प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय और नेता प्रतिपक्ष धर्मलाल कौशिक को हटाया था. बीजेपी ने शनिवार को एक नियुक्ति पत्र जारी किया. इसमें छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी डी पुरंदेश्वरी की छुट्टी कर दी गई और छत्तीसगढ़ के लिए बीजेपी के दिग्गज नेता ओम माथुर को जिम्मेदारी सौंपी गई. वहीं सह प्रभारी नितिन नबिन पर पार्टी ने भरोसा जताया है. 

क्यों बदले गये डी पुरंदेश्वरी?

डी पुरंदेश्वरी ने छत्तीसगढ़ में सक्रियता तो दिखाई है लेकिन हाल ही में दिए उनके कुछ बयानों ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया. साथ ही सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का कारण बना दिया था. बस्तर में बीजेपी के चिंतन शिवर में डी पुरंदेश्वरी ने कहा था कि उनकी थूक से कांग्रेस पार्टी बह जाएगी. इस बयान पर जमकर हंगामा हुआ था. इसके अलावा उन्होंने हाल ही में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को लेकर एक बड़ा विवादित बयान दिया था.

डी पुरंदेश्वरी ने कहा था कि भूपेश बघेल अगर सच बोलेंगे तो उनका सिर के हजार टुकड़े हो जाएंगे. वहीं पार्टी के अंदर की बात करें तो दबी जुबान में बीजेपी के लोग कह रहे थे कि डी पुरंदेश्वरी रमन सिंह के अलावा दूसरे गुट को बढ़ावा दे रही थी. इससे छत्तीसगढ़ बीजेपी दो फाड़ हो गई थी. इसके अलावा एक और बड़ी बात ये भी कही जा रही थी कि जब से डी पुरंदेश्वरी प्रदेश प्रभारी बने थे तब से कांग्रेस के खिलाफ कोई बड़ा मुद्दा बनाने में सफल नहीं हो पाए. 

शायद यही वजह है कि डी पुरंदेश्वरी की छुट्टी छत्तीसगढ़ से हो गई. ओम माथुर कौन का परिचय राजस्थान के दिग्गज नेता ओम माथुर को छत्तीसगढ़ का प्रभार सौंपा गया. ओम माथुर अमित शाह की टीम में बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष थे. 

इसके बाद ओम माथुर को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में प्रभारी बनाया गया था. इसके अलावा मध्य प्रदेश, झारखंड जैसे कई राज्यों में ओम माथुर को जिम्मेदारी सौंपी जा चुकी है. जहां उन्होंने बेहतर परफॉर्मेंस किया है. माथुर को संगठन में निचले तबके तक पकड़ बनाने में माहिर माना जाता है.

2018 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने 2017 में पीएल पूनिया को राज्य का प्रभारी नियुक्त किया था। 2018 में सत्ता की वापसी में इनकी रणनीति को अहम माना गया था। 2018 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए पीएल पूनिया ने बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को तैयार किया था। 2020 में छत्तीसगढ़ में प्रभारी के तौर पर उनका कार्यकाल पूरा हो गया था उसके बाद उन्हें दोबारा राज्य का प्रभारी बनाया गया था। लेकिन अब 2023 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए उन्हें हटा दिया गया है। पूनिया को हटाने के पीछे कारण बताया जा रहा है कि उनका कार्यकाल पूरा हो गया था इसलिए उन्हें छत्तीसगढ़ से हटा दिया गया।

कौन हैं कुमारी शैलजा?
कुमारी शैलजा हरियाणा कांग्रेस की सीनियर लीडर हैं। वो केन्द्र सरकार में मंत्री भी रह चुकी हैं। उन्हें खाटी समाज का प्रखर नेता माना जाता है। कुमारी शैलजा ने अपनी राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1990 में की थी। वो हरियाणा से 4 बार लोकसभा सांसद रहीं। दो बार वह सिरसा और दो बार अंबाला संसदीय सीट से सांसद रहीं। 2014 में चुनाव हारने के बाद वो राज्यसभा सांसद बनीं थी।

सत्ता के लिए दो प्रमुख राजनीतिक दल कैसे मोहरे बदल रहे हैं, दोनो कांग्रेस व भाजपा यदि कोई भी जनहित व देश हित कोई कार्य किये होते या अच्छा कार्य करने का इरादा भी रहता तो नए नए चेहरे नही लाते, खासकर कांग्रेस तो पी.एल. पुनिया को कभी नही बदलती।।

ध्यान रखें कि आरएसएस, भाजपा, कांग्रेस के लोग आपस में षड़यंत्र कर, बार बार आम नागरिकों को छल कर रहे हैं। 

आरएसएस, भाजपा के लोग हिन्दू मुस्लिम का विवाद कर, पाकिस्तान, राष्ट्र के नाम पर भय उत्पन्न कर चुनाव लड़ती हैं, कांग्रेस केवल भाजपा का विरोध कर चुनाव जीतना चाहती हैं। इस प्रकार दोनो दल नए नए व्यक्ति को लाकर खड़ा कर चुनाव जीतना चाहते हैं। 

क्या जो जो लोग व संगठन पीएल पुनिया जी से बातकर अच्छे संवैधानिक व्यवस्था लाने के एक राय होकर कांग्रेस को छत्तीसगढ़ में सत्ता दिलाये थे, आपस मे समस्या खत्म क्यों नहीं हुआ, पीएल पुनिया से बात करेंगे? या पीएल पुनिया जी आपसे बात करेंगे? 

दोनो दल आरएसएस, भाजपा, कांग्रेस हमारे वास्तविक मुद्दों पर जैसे निजीकरण, EVM, कोलेजियम, लेटरल एंट्री, आर्थिक आरक्षण को समाप्त करने के लिए तैयार नही हैं। 

ओबीसी वर्ग के जनसंख्या को बताना नही चाह रहे हैं, हर वर्ग को उनके जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देने के लिए तैयार नहीं है, निजी कंपनियों में आरक्षण लागू करने के लिए तैयार नहीं है, विभिन्न प्रतियोगिताओं में साक्षात्कार खत्म करने के लिए तैयार नहीं है। 

छत्तीसगढ़ के सबसे बड़ी समस्या नक्सली हिंसा को दोनो दल खत्म करने के लिए तैयार नहीं है, तो आप सबको सम्मान, न्याय व अवसर कैसे मिलेगा और कौन देगा? 

छोड़ेंगे जी आरएसएस, भाजपा, कांग्रेस को या पीढ़ी दर पीढ़ी ऐसे घुट घुट कर मरते रहेंगे? 

प्रभाकर ग्वाल
पूर्व सीबीआई मजिस्ट्रेट
छत्तीसगढ़, 9479270390

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