विशेष रिपोर्ट

चारों धाम तथा सभी देवी देवता घर में ही स्थित होते हैं - डॉ एमपी सिंह

चारों धाम तथा सभी देवी देवता घर में ही स्थित होते हैं - डॉ एमपी सिंह

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अखिल भारतीय मानव कल्याण ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष व देश के सुप्रसिद्ध शिक्षाविद समाजशास्त्री दार्शनिक प्रोफेसर एमपी सिंह का कहना है कि देश और दुनिया के सभी देवी देवता तथा ज्योतिर्लिंग घर में ही स्थित होते हैं

 डॉ एमपी सिंह का कहना है कि जो माता 9 महीने अपनी कोख में बच्चे को रखकर उसकी देखरेख करती है और इस भौतिकवादी दुनिया में लेकर आती है वह जननी माता किसी देवी से कम नहीं है जो पिता परवरिश करते हैं दिन रात मेहनत मजदूरी करके बच्चे की हर खुशी देते हैं वह पिता किसी देवता से कम नहीं है देवता का मतलब देना होता है और देवी देवता से हम मांगने के लिए ही तीर्थ स्थानों पर जाते हैं हमें बच्चा दे देना परिवार को सुखी रखना बच्चों को आईएएस आईपीएस बना देना अगैरा बगैरा जो भी हमारे दुख तकलीफ होते हैं उन्हीं को दूर करने की मांग करते हैं और इसीलिए चढ़ावा चढ़ाते हैं

 डॉ एमपी सिंह का कहना है कि दुख तकलीफ परेशानी के कारण ही हम देवी देवता मौलवी पंडित तांत्रिक आदि के चक्कर लगाते हैं हम भूल जाते हैं कि हमारे घर में भी देवी देवता बैठे हैं उनसे भी हम सलाह मशवरा करले उनके अनुभव का फायदा ले ले उनकी बातों पर चलकर अपना जीवन सफल बना लें लेकिन हम ऐसा करते नहीं है 

डॉ एमपी सिंह का कहना है कि माता-पिता सास ससुर सभी पूजनीय वंदनीय और प्रार्थनीय होते हैं हमें सभी का यथा योग्य सम्मान करना चाहिए और उनकी देखरेख करके अपने आपको गौरवान्वित महसूस करना चाहिए उनकी चरण वंदना करना, उनको भाव से भोजन कराना, उनकी चारपाई लगाना, उनका बिस्तर लगाना ,उनको स्नान कराना ,उनको घुमाना उनकी हारी बीमारी का ध्यान रखना समय पर दवाई गोली दिलाना इन कार्यों को करने से ही सभी तीर्थ हो जाते हैं  जो व्यक्ति इन मान्यताओं पर चलता है उसे कभी आधी व्याधि दुख तकलीफ परेशानी नहीं आती है |

ट्रस्ट के संस्थापक डॉ हृदयेश कुमार का कहना है कि  जो मां का दिल  दुखाता है पिता के सम्मुख लड़ाई झगड़े के लिए चौड़ा हो जाता है अमर्यादित शब्द बोल कर सभ्यता को खत्म कर देता है सब कुछ होते हुए भी वृद्ध आश्रम में पहुंचा देता है या माता-पिता ओं को बेटियों के पास रहना पड़ जाता है |

वह कभी सुखी नहीं रह सकता है उसको तंत्र मंत्र की दुनिया में जाना ही होगा और अपनी बर्बादी को अपनी आंखों से देखना होगा
और  सभी से निवेदन करते हैं कि जीती जागती मूर्तियों अर्थात माता-पिता और सास-ससुर की सेवा कर लो मरने के बाद कुछ भी करने की जरूरत नहीं है जो लोग जीवित आत्मा को तो दुख देते हैं और मरने के बाद ब्रह्मभोज कराते हैं गंगा स्नान करते हैं दुनिया दिखावे के लिए दुनिया दिखावा करते हैं उसके परिणाम कभी बेहतर नहीं होते यदि आपको अपना जीवन सफल करना है धन्य करना है तो अपने माता-पिता और सास ससुर की पूजा करें अपनी पत्नी को हर हाल में खुश रखें अपने बच्चों को संस्कार प्रदान करें झूठ बोलने से बचें चुगली करने से बचें किसी को दुख पहुंचाने की कोशिश ना करें

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