विशेष रिपोर्ट

नशा नाश की जड़, फल बड़ा दुखदाई

नशा नाश की जड़, फल बड़ा दुखदाई

लेख- नवीन दुबे 

सूरजपुर : मादक द्रव्य व्यसन या साधारण बोलचाल में कहें तो नशा। यह स्वयं एक गम्भीर समस्या होने के साथ साथ कई समस्याओं की जननी भी है। नशे की लत व्यक्ति को स्वयं शारीरिक और मानसिक रूप से नुकसान तो पहुँचाती ही है साथ ही साथ उसके परिवार के लिए भी समस्या का कारण बन जाती है। नशे की लत के कारण व्यक्ति पारिवारिक जिम्मेदारियों से दूर होता जाता है, उन्हें पूरा करने में असमर्थ हो जाता है। अपितु स्थिति यहाँ तक पहुँच जाती है कि वो अपने नशे की पूर्ति के लिए परिवार वालो पर जोर डालने लगता है , अपनी पत्नी, बच्चो, माता-पिता पर बोझ बन जाता है। आये दिन ग्रामीण तथा शहरी हर इलाके में शराब के नशे में आपराधिक कृत्य किये जाते हैं नशे का अपराध से चोली दामन का साथ है घरेलू हिंसा, महिलाओं को छेड़ना यहाँ तक कि बलात्कार और हत्या जैसे संगीन अपराध भी नशे की हालत में अंजाम दिये जाते हैं।

एक छोटा सा सूरजपुर जिला जहाँ आए दिन नशे के कारण कोई न कोई कृत्य हो रहा है युवा पीढ़ी नशे में लिप्त होके आवेश में आके ऐसा कर्म कर बैठता है, कई ऐसी घटनाएं देखने को मिली हैं जिनमे हाल में ही  नशे की हालत में व्यक्ति में अपने ही सगे संबंधियों भाइयों की हत्या मामूली से विवादों के लिए भी कर दी।

पत्थलगांव की घटना भी उल्लेखनीय और गम्भीर है जिसमें मादक द्रव्य से भरे एक चारपहिया वाहन को नशे में धुत्त वाहन  चालक ने दुर्गा विसर्जन हेतु जाती भीड़ पर चढ़ा दिया जिसमें कई मासूम लोग मारे गए और घायल हुए।
नशे की समस्या को गम्भीरता से लेते हुए सीएम भूपेश बघेल के निर्देश पर राजधानी रायपुर की पुलिस ने जिले के सभी हुक्काबारों पर दबिश देकर हुक्का को पूर्णतः प्रतिबंधित करने की ओर कदम उठाया है।
किंतु ये प्रयास भी पर्याप्त नही हैं। 

नशा एक बड़ी और विकराल समस्या बन गई है जिसपर लगाम कसना बहुत जरूरी है ताकि नई पीढ़ी के लिए एक बेहतर समाज का निर्माण हो सके। नशे पर लगाम लगाने के लिए प्रयास करना पुलिस प्रशासन की नही प्रत्येक आम नागरिक कि भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

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