विशेष रिपोर्ट

केन्द्र सरकार, राज्य सरकार व जिला प्रशासन के नियम आखिर किसके लिये.......

केन्द्र  सरकार, राज्य सरकार व जिला प्रशासन के नियम आखिर किसके लिये.......

लक्ष्मी  कान्त  दुबे  

धारा 144 , 188 सोशल डिस्टेन्स, मास्क आदि नियम क्या केवल गरीबों के लिये .....  

साहब ये सब आप लोगों को दिखता नही या देखकर भी अनदेखा करते हैं ....     

वर्तमान समय में पूरा देश कोरोना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण व रोकथाम के लिये लगा है । केन्द्र सरकार, राज्य सरकार व जिला प्रशासन द्वारा समय  समय  पर नियम कानून बनाये जा रहे हैं आदेश/ निर्देश जारी किये जा रहे हैं लेकिन क्या ये नियम कानून गरीब, निम्न मध्यम वर्गीय व मध्यम वर्गीय परिवार के लिये है।     विगत कुछ दिनों से अन्तिम संस्कार, शादी विवाह , जन्मदिवस, राजनैतिक कार्यक्रम व अन्य कार्यक्रम आयोजित हो रहे है उक्त कार्यक्रम आयोजित करने के लिये निम्न व मध्यम वर्गीय परिवार के लोग शासकीय दफ्तरों के कई चक्कर लगाते हैं और इसके बाद नियम व शर्तों का पालन करने की शर्त  पर अनुमति पाते हैं लेकिन वहीं कई कार्यक्रम ऐसे भी आयोजित हो रहे हैं जिसमे सोशल डिस्टेसिंग का पालन न होना, मास्क का उपयोग न होना, धारा 144 व 188 के लागू होने के बावजूद सैकडों की संख्या मे लोगों का एकत्र होना वर्तमान  नियमों की धज्जियां उड़ाना ही होगा। 

                 राजनैतिक कार्यक्रम, अन्तिम संस्कार , शादी समारोह , जन्म दिवस व अन्य उत्सव में इतने लोगों को एकत्र होने की अनुमति आखिर इन पहुँच वालों को मिल कैसे जाती है और आखिर दे कौन देता है। जिला स्तर पर भी इस तरह के राजनैतिक व सामाजिक कार्यक्रम नियमों को ताक में रखकर किये जा रहे हैं लेकिन इन पर किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नही होती l कार्यवाही न होना कहना भी गलत होगा , समय- समय पर कार्यवाही की भी जा रही है हां यह है कि यह कार्यवाही केवल निम्न व मध्यम वर्गीय लोगों के ऊपर ही होती है। ऐसे में सोशल मीडिया मे टिप्पणी होना भी स्वाभाविक है कि नियम कानून केवल आम इंसान के लिये हैं l   इलेक्ट्रानिक व प्रिंट मीडिया से जुड़े लोग भी बड़े पहुँच वाले व राजनीतिक पकड़ वाले लोगों द्वारा नियमों का पालन न करने के समाचार को प्रकाशित नही करते ऐसा भी नही है कि ये  कार्यक्रम चोरी छिपे होते हैं इन कार्यक्रमों में मीडिया कर्मी समाचार कवरेज के  लिये भी जाते हैं कुछ मीडिया कर्मी समय समय पर इन मुद्दों को उठाते भी हैं और कार्यवाही होती भी है ऐसे लोग बधाई के पात्र भी हैं लेकिन अधिकांश लोग इसे नजर अंदाज भी कर देते हैं जबकि  आम इंसान की कोई गलती हो व प्रशासनिक कार्यवाही हो तो उसे  प्रमुखता से उठाते हैं । 

                   जिले में आयोजित हो रहे सामूहिक व राजनैतिक कार्यक्रम भी धारा 144, 188 लागू होने के बाद भी ऐसे आयोजन की अनुमति आखिर कैसे मिल जाती है या यह कार्यक्रम इस दायरे में नही आता। लेकिन  लोगों के मुंह अक्सर यह सुना जाता है कि "साहब क्या नियम कानून केवल आम इंसान व गरीबों के लिये है" ।   

                वैसे  रायगढ़ जिले के कलेक्टर व नगर निगम आयुक्त अभी नये हैं ऐसे मे स्थानीय लोगों को आस व विश्वास तो हैं और अपेक्षा भी है कि नियम कानून  सबके लिये बराबर हो और सबके लिये समान रूप से  लागू कराया जाये।      
                

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