विशेष रिपोर्ट

अंगदान धरती में सबसे बड़ा दान है इससे बडा और श्रेष्ठ दान कुछ हो ही नहीं सकता - एचपी जोशी

अंगदान धरती में सबसे बड़ा दान है इससे बडा और श्रेष्ठ दान कुछ हो ही नहीं सकता - एचपी जोशी

एचपी जोशी नया रायपुर छत्तीसगढ़

मृत शरीर को जलाने या दफनाने से न मोक्ष मिलती है, न आत्मा को शांति मिलती है और न अमरता की प्राप्ति होती है, मृतशरीर को जलाना/दफनाया जाना केवल रूढ़िवादी परम्परा, अब इसे समाप्त करने की जरूरत है आओ मरणोपरांत अंगदान का संकल्प लें और दूसरों को भी प्रेरित करें

रायपुर : अंगदान सबसे बड़ा जीवन दान है इससे बडा और श्रेष्ठ दान कुछ हो ही नहीं सकता। आपके अंगदान करने से 5 से 10 लोगों को जीवन/बेहतर जीवन मिल सकता है। इसलिए आपसे अनुरोध है कि आज ही National Organs and Tissues Transplant Organization [Ministry of Health and Family Welfare] Govt.of India के वेबसाइट http://notto.nic.in में जाकर मृत्यु पश्चात अंगदान का संकल्प लें।

यहां यह उल्लेखनीय है कि अंगदान करने से मरणोपरंत आपके मृत शरीर में से उपयोगी Organs एवम Tissues को NOTTO (Govt. of India)  उपयोग में ले लेता है अर्थात आपके मृत शरीर निकालकर किसी जरूरतमंद व्यक्ति के शरीर में प्रतिस्थापित कर देता है और उसके बाद शेष शरीर को आपके परिजन को लौटा देती है। जिसका आपके परिजन द्वारा धार्मिक/समाजिक रितिरिवाज एवं परम्परा के अनुसार कार्यवाही की जा सकती है।

चाहे आप अंगदान के पक्ष में हों या फिर विपक्ष में मगर एक बार लेखक के तर्क को जरूर पढ़िए, जरूर एक बार स्वयं से प्रश्न करके देखें कि आप क्यों अंगदान नही कर सकते? अंगदान करने से क्या हानि है? एक बार जरूर सोचें आपके मृत शरीर को यदि जलाया या दफनाया जाएगा तो आपको या आपके परिवार को क्या मिलेगा? एक बार इसपर जरूर विचार करें, एक बार जरूर सोचें? आखिर क्यों?

चलो अब प्रश्न से आगे बढ़कर, मृत शरीर को जलाने और दफनाने के पीछे के राज से पर्दा उठाने का प्रयास करते हैं, चलो एक सकारात्मक तर्क को पढ़ने और समझने का प्रयास करते हैं। बिते दिनों की बता हो या चाहे वर्तमान की बात हो यदि मृत शरीर को आबादी क्षेत्र मे, खुले स्थान में छोड़ दिया जाएगा तो उसमें कीडे लग जाएंगे और आसपास बदबु फैलेगी, इससे महामारी फैलने की भी पूरी गारंटी रहती। इसलिए हमारे पुर्वजों ने इससे बचने के लिए बडे चालाकी के साथ इसे आस्था, विश्वास और धर्म से जोड़ते हुए मृत शरीर को जलाने अथवा दफनाने के लिए प्रेरित किया, जो सर्वथा उचित और सर्वोत्तम उपाय है हालांकि मृत शरीर को जलाने और दफनाने की परंपरा आज भी उचित परम्परा है। मृत शरीर के जलाने और दफनाने के पीछे एक मात्र उद्देश्य मृत शरीर को खुला छोडने के बाद फैलने वाले महामारी/हैजा को रोकना और मनुष्य के मन में भी अपने भविष्य में होने वाले मृत्यु के बाद दुर्गति और घृणा के भावना को रोकना ही था। मृत शरीर को जलाने या दफनाने से न तो आत्मा को शांति मिलती है, न मोक्ष मिलता है और न तो पुनः अमरता को प्राप्त होता है, ऐसा दावा करना केवल कोरी कल्पना मात्र है। इसलिए मरणोपरांत अंगदान के संकल्प से केवल लाभ ही होगा, मानवता की रक्षा ही होगी, ऐसा करके आप किसी दूसरे जरूरतमंद मनुष्य को अच्छे जीवन का वरदान ही देंगे। यह भी तर्क है कि यदि आप किसी मनुष्य अथवा जीव को जीवन दे सकते हैं या खुसी दे सकते हैं तो यह आपकी महानता ही होगी ऐसे ही वरदान देने वाले ऐसे ही दूसरे को खुसी देने वाले लोग आज पूजे जाते हैं।

यह बात उन दिनों की है जब मै (लेखक-हुलेश्वर जोशी) वर्ष 2003-04 में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, डिण्डौरी, तहसील लोरमी, जिला बिलासपुर में कक्षा-12वीं का छात्र था, किसी बात पर मुझे मेरे कुछ सहपाठी हस रहे थे, जिसके कारण मैं उनसे नाराज था। ठीक मेरे नाराज होने के समय ही हमारे अर्थशास्त्र के गुरुजी श्री महेन्द्र सिंह मार्को जी कक्षा में प्रवेश किये और उन्होने मेरा चेहरा देखकर नाराजगी का कारण जाना और समझाते हुए कहा कि ‘‘कोई मनुष्य यदि किसी को खुशी दे सकता है, मुस्कराने का अवसर दे सकता है, किसी के कष्ट को हर सकता है तो वह उनके लिए ईश्वर से, माता पिता से अथवा किसी अन्य आराध्य से कम नहीं हो सकता है।’’ 

ज्ञातव्य हो, कि मैंने दिनांक 24/01/2018 को मृत्यु उपरांत अपने शरीर के समस्त Organs एवम Tissues को दान करने का संकल्प लिया है। मैंने अपने मृतशरीर को व्यर्थ जलने/दफन होने से बचाने का प्रयास किया है, मेरे द्वारा ऐसा करना एक रूढ़िवादी परंपरा को समाप्त करने के लिए छोटा सा प्रयास है। यदि मेरे मृत शरीर को जलाया जाएगा तो पर्यावरण प्रदुषित होगा और किसी नदी के पवित्र जल को मेरे हड्डी दुषित करेंगे और यदि मेरे शरीर को दफनाया जाएगा तो धरती के भीतर उसे सड़-गल जाना ही तो है। यदि मेरे मरने के बाद भी मेरा कोई अंग किसी व्यक्ति को बेहतर जीवन देने में सक्षम है तो इसे व्यर्थ जलने/दफनाने के लिए आखिर क्यों छोड दूं? मैंने अंगदान किया, इसे शेयर करना अच्छी बात है। यह बहुत अच्छा होता कि आप स्वयं अंगदान कर लें। मेरे अंगदान की सूचना देते हुए ज्ञात हुआ कि मुझसे पहले लगभग देशभर के 1लाख से अधिक लोगों ने अंगदान का संकल्प लिया है। - 

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