विशेष रिपोर्ट

SOCIAL AWARENESS : वाहन दुर्घटनाएं रोकने जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बने

SOCIAL AWARENESS : वाहन दुर्घटनाएं रोकने जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बने

लेख:- तेजबहादुर सिंह भुवाल

यह आम बात हो गयी है कि सड़क दुर्घटना हुई, जिसमें कईयों की जान चली गयी और कई लोग घायल हो गये प्रायः यह घटना देखने और सुनने को मिलती है। दिन-प्रतिदिन वाहनों की बिक्री से उनकी संख्या बढ़ती जा रही है, जितने तो लोग नहीं उनसे अधिक वाहन हो गयी है। एक व्यक्ति के पीछे 2 गाडियां। इसके साथ ही गाडियों की रफ्तार भी बढ़ती ही जा रही है। सुविधा की दृष्टि से शासन द्वारा यातायात का दबाव कम करने के लिए कई हाईवे, फोरलेन, सिक्सलेन और ना जाने कितने बाईपास सड़क निर्माण कर रही है, ताकि लोगों को सुविधा मिल सके। पर लोग अपनी जान जोखिम में डालकर बड़ी रफ्तार से वाहन चलाते हैं। जितनी सुविधा और व्यवस्था शासन द्वारा दी जाती है उतना ही लोग बेखौफ और लापरवाही से वाहन का संचालन करते हैं। अपनी जान की परवाह करें बिना दूसरों की जिन्दगी को भी खतरा पहुंचाते है।

वाहन चलाने से पहले जरा सोचिए-

कोई भी व्यक्ति यदि घर से बाहर किसी कार्य के लिए वाहन लेकर निकलता है तो वह निश्चित नहीं होता कि वह ससुरक्षित घर वापस पहुंच जाए। समय सबके लिए कीमती होती है, किसी को समय पर आॅफिस पहुंचना है, किसी को स्कूल, काॅलेज या फिर किसी मीटिंग के लिए समय पर उपस्थित होना अनिवार्य होता है। लेकिन व्यक्ति समय और जोखिम को समझकर चले तो समय पर एवं सुरक्षित पहुंच सकता है। इसके लिए यातायात के नियमों का पालन करते हुए निर्धारित समय के पूर्व निकले और वाहन की रफ्तार नियत्रित मानक गति पर चलाये। कभी सोचा है कि आप कहीं जा रहे है और खुदा-न-खास्ता आपकी सड़क हादसे में अप्रिय घटना घटित हो जाए जिसमें अपूर्णीय क्षति हो जाए या आप जीन्दगी भर के लिए निशक्त हो जाए तो क्या होगा? घर वालो पर क्या बितेगी। आपके बिना आपके परिवार वालों की स्थिति बिना जान के शरीर के बराबर होगी। आपके बिना घर की जीविकापार्जन कैसे मुमकिन होगा। आपने तो कईयों के घरों में देखा होगा कि मुखिया लोग तो चले जाते है पर उसके पीछे घर की क्या स्थिति होती है। उनका पल-पल समय काटना मुश्किल हो जाता है। सही कहा जाए तो घर वालों का जीना दूभर हो जाता है। हम तो केवल उनके प्रति संवेदनाएं व्यक्त कर सकते हैं। इसलिए कहा जाता है कि जान है तो जहान है। अब तो सम्भल कर चले।

यातायात के नियमों का उलंघन करना-

लोग यातायात के नियमों का बिल्कुल भी पालन नहीं करते जैसे-लालबत्ती में धड़ल्ले से सड़क पार करना, दाएं-बाएं किसी भी तरफ से ओवर टेक करना, हेलमेट व शीट बेल्ट का उपयोग न करना आदि। इसी प्रकार युवा अपने हीरोपंति दिखाने के लिए बड़ी शान से वाहन रफ्तार में कट मार-मार कर चलाते है। 

लेकिन लोगों की आंखें तब खुलती हैं जब बड़ा हादसा हो जाता है। अब तक हुए हादसों से भी सीख नहीं लेते लोग। नियमों का उल्लंघन करना जैसे आम बात हो गयी हो। यातायात के नियमों का पालन करना अपने एवं दूसरों के लिए हितकर होता। लोगों को खुद इसके लिए जागरूक होना पड़ेगा। उन्हें जबावदार और जिम्मेदार बनना होगा। नियम लोगों की सुरक्षा के लिए ही बनाये जाते है, ताकि लोग सही सलीके एवं सही मार्गदर्शन और दिशा-निर्देशों का पालन कर अपना जीवन सुरक्षित रखे।

वाहनों का अनियंत्रित रफ्तार का होना-

राज्य हाईवे हो या नेशनल हाईवे शहर के बाहर निकलते ही सड़कों पर अधिक रफ्तार के कारण हादसे होते है। इन सड़को पर ब्रेकर नहीं होते और यातायात पुलिस इन सभी सड़को पर मुस्तैद नहीं रह सकती इसलिए यहां आए दिन वाहन दुर्घटनाएं होती रहती है, जिससे बड़ी संख्या में जनधन की हानि होती है। 

हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग करना-

आमतौर पर देखा जाता है कि लोग हेलमेट दुर्घटनाओं से बचने के बजाए जुर्माना से बचने पहनते हैं। वहीं शीट बेल्ट आमतौर पर कोई चारपहिया वाहन चालक नहीं लगाता। लोगों को सड़क सुरक्षा संबंधी नियम की जानकारी होना आवश्यक है। सड़क हादसे में बढ़ते आंकड़ों में देखा गया कि अधिकतर मौत बिना हेलमेट पहनने के कारण हुई है। उसके बाद शासन हेलमेट पहनना अनिवार्य कर दिया है। यातायात विभाग हेलमेट पहनने के लिए कई जागरूकता कार्यक्रम के साथ ही चालान करती है। उसके बाद भी लोग बिना हेलमेट के सफर करते है।

नाबालिक बच्चों का वाहन चलाना-

यातायात नियमों का उल्लंघन व उसका पालन नहीं करना सड़क हादसे का मुख्य कारण है, जिस वजह से आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं, जिसमें लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। उसके बाद भी लोगों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता नहीं आ रही है। आजकल लोगों के लिए दो व चार पहिया वाहन फैशन बन गया है। कई लोगों के पास ड्राइविंग लायसेंस भी नहीं होता। आजकल नाबालिग युवा-युवतियां सड़क पर फर्राटे मारकर वाहन चला रहे हैं। ऐसे में सामने वाला चालक सही चला रहा होगा, लेकिन नाबालिगों को नियमों की जानकारी नहीं होने से कई बार सामने वालों से भिड़ जाते हैं। ऐसे में उनके साथ-साथ सामने वाले की भी जान खतरे में पड़ जाता हैं। पालकों चाहिए कि वे नाबालिक बच्चों को जो 18 साल से कम उम्र के है उन्हें गाड़ी चलाने ना दें।

पशुओ के कारण दुर्घटनाएं-


प्रायः देखा गया कि सड़क पर बैठे गाय, भैंस के कारण वाहन दुर्घटनाएं होती रहती है, किसी को पता नहीं होता कि किस समय जानवर दौड़ने लग जाए या फिर अचानक वाहन के सामने आ जाते है, वाहन नियंत्रित रफ्तार में हो तो वाहन को संभाला जा सकता है अन्यथा दुघर्टना होना स्वभाविक है। ऐसे में सड़क पर चले तो आराम से लेकिन चैकन्ना होकर चले।

नशे की हालत में वाहन चलाना-

अधिकांश लोग नशे की हालत में वाहन चलाते हैं, जिसके कारण 60 प्रतिशत सड़क हादसे होते हैं। बड़े वाहनों में सीट बेल्ड के ना लगाने से दुर्घटना होने पर लोग वाहन से सीधे बाहर गिर जाते है, जिससे उनकी मौत हो जाती है। कई बार देखा गया है कि सड़क पर गलत तरीके से वाहन खड़ा करने से भी सड़क हादसे होते हैं। 

बड़े-बड़े शहरों में यातायात विभाग द्वारा कैमरे से निगरानी की जा रही है और नियम का उल्लघंन करने वालों का ई-चालान के माध्यम से कार्यवाही कर रही है, उसके बावजूद भी लोग नहीं सुधर रहे हैं। लोगों को अब सम्भल कर चलना जरूरी हो गया है, अपने एवं अपने परिवार के लिए खुद की जिम्मेदारी लेते हुए यातायात का नियमों का पालन करें। वाहन नियंत्रित और कम रफ्तार पर ही चलाये। हम सुधरेंगे तो युग सुधरेगा इन्ही आशा के साथ यातायात करें और सुरक्षित रहे। जिन्दगी आपकी है फर्क आपको ही पड़ेगा। 

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