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लव जिहाद के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसता भाजपा शासित राज्य सरकारें...

लव जिहाद के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसता भाजपा शासित राज्य सरकारें...

एजेंसी 

नई दिल्ली : देशभर में लंबे समय से विवादों का सबब बन रहे 'लव जिहाद' पर अब भाजपा शासित राज्यों में कानूनी शिकंजा कसने वाला है। दरअसल, दूसरे धर्मों की युवतियों खासकर हिंदू युवतियों से मुस्लिम युवकों द्वारा जबरिया, प्रलोभन देकर या धोखाधड़ीपूर्वक किए जाने वाले विवाहों के मामले सामने आते रहे हैं। इसके अलावा युवतियों द्वारा इंकार करने पर उनकी जघन्य हत्याएं भी हुई हैं। हरियाणा के बल्लभगढ़ में कथित लव जिहाद की आड़ में हुई युवती की हत्या इसका ताजा उदाहरण है, जिसके बाद से ही कई राज्यों में लव जिहाद कानून बनाने की तैयारी की जा रही है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश और कर्नाटक ने इस संबंध में कानून बनाने का ऐलान कर दिया है। वहीं, मप्र व यूपी ने तो कदम बढ़ा दिए हैं, लेकिन अभी सिर्फ उत्तराखंड में लव जिहाद विरोधी कानून लागू है। जानते हैं, किस राज्य में क्या है तैयारी?

उत्तर प्रदेश : हरकत करने वालों का होगा 'राम नाम सत्य'
यूपी की योगी सरकार लव जिहाद पर सख्त कानून बनाने की तैयारी कर रही है। इस संबंध में उप्र के गृह विभाग ने न्याय व विधि विभाग को प्रस्ताव भेजा है। अब विधि विभाग प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है। कानून कितना सख्त होगा यह तो अभी नहीं कहा जा सकता, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीतों दिनों दिए बयान से उसकी झलक मिल सकती है। योगी ने कहा था 'प्रदेश सरकार इस बाबत सख्त प्रावधानों वाला कानून लाएगी और फिर ऐसी हरकत करने वालों का 'राम नाम सत्य' होगा।' 

मध्यप्रदेश: पांच साल की होगी जेल, फैमिली कोर्ट रद्द कर सकेगी विवाह
मध्यप्रदेश यह कानून बनाने वाला दूसरा राज्य होगा। मध्यप्रदेश सरकार एक नया एक्ट, 'मध्यप्रदेश फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट-2020' ला रही है। इसका ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। इस कानून के तहत लव जिहाद का ताजा मामला पकड़े जाने पर पांच साल की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा ऐसे विवाह जो पहले हो चुके हैं, उन्हें रद्द करने का अधिकार फैमिली कोर्ट को दिया जाएगा। फैमिली कोर्ट के फैसले को उच्च अदालत में चुनौती दी जा सकेगी। मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में संबंधित विधेयक पेश किया जाएगा। एक्ट में प्रलोभन, बलपूर्वक, धोखाधड़ी, बहकावे के जरिए शादी करने का भी उल्लेख होगा। यदि लव जिहाद का मामला सामने आता है और यह साबित हो जाता है कि कोई मददगार या किसी ने उकसाया है तो वह भी उतना ही दोषी माना जाएगा, जितना मुख्य आरोपी। इसकी सजा भी पांच साल तक है।

हरियाणा : कानून बनाने की तैयारी
लव जिहाद के खिलाफ हरियाणा में भी कानून बनाने पर विचार चल रहा है। राज्य के गृह मंत्री अनिल विज ने इसी माह ट्वीट कर यह जानकारी दी थी। बता दें कि फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में हुए निकिता तोमर हत्याकांड के बाद लव जिहाद का मामला नए सिरे से गरमाया है। विज ने यह भी कहा था कि इस मामले की धर्म-परिवर्तन और लव जिहाद की दृष्टि से भी जांच करवाई जाएगी। राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने निकिता हत्याकांड पर पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा था कि यह बेहद गंभीर मामला है। इसे धर्मांतरण से जोड़कर देखा जा रहा है। केंद्र सरकार और राज्य सरकारें ऐसे प्रावधान करने पर विचार कर रही हैं, ताकि ऐसा मामलों की पुनरावृत्ति न हो।

कर्नाटक : लव जिहाद पर लगेगी लगाम

मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने भी कहा है कि राज्य सरकार 'लव जिहाद' के नाम पर धर्मांतरण पर लगाम के लिए कड़े कदम उठाएगी। पांच नवंबर को दिए बयान में उन्होंने कहा 'हाल ही में कर्नाटक में लव जिहाद के नाम पर धर्मांतरण की खबरें आई हैं। मैंने इस बारे में अधिकारियों से बात की है। दूसरे राज्य क्या कर रहे हैं या क्या नहीं कर रहे, यह अलग बात है। लेकिन कर्नाटक में इस पर लगाम लगाई जाएगी। जब ‘जिहादी’ राज्य में महिलाओं की इज्जत से खिलवाड़ कर रहे हैं तो सरकार चुप नहीं बैठेगी।' येदियुरप्पा ने कहा कि राज्य की युवा लड़कियों का प्यार और पैसे के नाम पर बहला-फुसलाकर धर्मातंरण किया जा रहा है। 

शाइस्ता अंबर बोलीं, यह संविधान की आत्मा के खिलाफ
उधर लव जिहाद रोधी प्रस्तावित कानून पर आल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष एवं समाजसेवी शाइस्ता अंबर ने सख्त नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे संविधान की मूल आत्मा के खिलाफ बताया। शााइस्ता ने बयान जारी सवाल किया कि लव जिहाद कानून बनाकर सरकारें क्या साबित करना चाहती है?

क्या नेताओं के विवाह लव जिहाद माने जाएंगे
शाइस्ता अंबर ने कहा कि जो हमारे देश के नेता और बाकी लोग दूसरे धर्मों में शादी करते हैं तो क्या वह लव जिहाद माना जाएगा। अंबर ने कहा कि किसी धर्म के नाम पर लव जिहाद कानून लाना संविधान की मूल आत्मा के खिलाफ होने के साथ देश की साझी संस्कृति पर भी एक बड़ा हमला है, जो निंदनीय है।

सुप्रीम कोर्ट तक गया था केरल का मामला
बता दें, लव जिहाद विरोधी कानून का मामला सिर्फ भाजपा शासित राज्यों का नहीं है। केरल से लेकर राजस्थान तक गैर भाजपा शासित राज्यों में इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। केरल की हदिया का मामला तो सुप्रीम कोर्ट तक गया था। देश के कई राज्यों में इसके खिलाफ कानून की मांग उठ रही है। 

साभार amarujala

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