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महाराष्ट्र: शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी की राज्यपाल के साथ प्रस्तावित बैठक टली

महाराष्ट्र: शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी की राज्यपाल के साथ प्रस्तावित बैठक टली

एजेंसी 

महाराष्ट्र : महाराष्ट्र में सरकार गठन की कोशिशों की बीच राज्यपाल के साथ होने वाली शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी नेताओं की साझा बैठक को टाल दिया गया है. तीनों दलों के नेता शाम 4 बजे के करीब राज्यपाल से मिलने वाले थे लेकिन अब यह बैठक फिलहाल नहीं होगी. तीनों दलों के नेता राज्य में प्रशासनिक दिक्कतों और किसानों की समस्याओं को लेकर आज राज्यपाल से मिलने वाले थे. अब आगे यह बैठक कब होगी, इसका वक्त अभी तय नहीं किया गया है.

चुनावी खर्च का ब्यौरा देने में बिजी नेता

जानकारी के मुताबिक सभी नेता तय वक्त पर राज्यपाल के पास नहीं जा पाएंगे, जिसकी वजह है कि ज्यादातर नेता फिलहाल चुनावी खर्च का ब्यौरा देने में व्यस्त हैं क्योंकि शनिवार को उसकी समयसीमा खत्म हो रही है. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से होने वाली मुलाकात के मुद्दा भले ही किसान हों लेकिन माना जा रहा था कि इस मुलाकात के जरिए तीनों दलों के नेता सरकार गठन पर चर्चा कर सकते हैं.

चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी बीजेपी ने संख्याबल न होने की वजह से पहले सरकार बनाने से इनकार कर दिया है. इसके बाद दूसरी बड़ी पार्टी शिवसेना ने अन्य दल कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने का फैसला किया है. हालांकि इस पर अभी कुछ भी पुख्ता एजेंडा तय नहीं हुआ है और तीनों दल कॉमन मिनिमम एजेंडा पर काम कर रहे हैं और मंत्री पदों के बंटवारे पर भी बातचीत जारी है. इन सभी बिंदुओं पर चर्चा के बाद सरकार बनाने का दावा राज्यपाल के समक्ष पेश किया जाएगा.

सरकार गठन पर सबके अपने दावे

किसी भी दल की ओर से सरकार बनाने का दावा पेश न करने की वजह से राज्यपाल ने फिलहाल महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगा दिया है जिसके अवधि 6 माह की होती है. इस बीच अगर तीनों दल मिलकर राज्यपाल को विधायकों के समर्थन वाला पत्र सौंपते हैं तो उन्हें सरकार बनाने का मौका मिल सकता है. उधर, सत्ता की दौड़ से दूर हो चुकी बीजेपी के भीतर भी फिर से सरकार बनाने की इच्छा जाग गई है और पार्टी के नेताओं ने दावा किया है कि सूबे में उन्हीं की पार्टी सरकार बनाएगी. 

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में सत्ताधारी बीजेपी और शिवसेना ने साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा था. चुनाव नतीजों में बीजेपी 105 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, वहीं शिवसेना 56 सीटें पाकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी. चुनाव नतीजे आने के बाद शिवसेना और बीजेपी के बीच मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर खींचतान शुरू हो गई. शिवसेना 50-50 फॉर्मूले पर अड़ गई और बीजेपी के सीएम की कुर्सी देने को तैयार नहीं थी. इसके बाद 30 साल पुराना गठबंधन टूट गया और अब शिवसेना तीसरे और चौथे स्थान की पार्टी एनसीपी-कांग्रेस के साथ सरकार बनाने की कोशिश में जुटी है.

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