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मरने के बाद मरीज का करा दिया एक्सरे, 11 डॉक्टरों को नोटिस!

मरने के बाद मरीज का करा दिया एक्सरे, 11 डॉक्टरों को नोटिस!

एजेंसी 

यूपी : मेडिकल अस्पताल में भर्ती एक मरीज की हालत में सुधार आने के बाद अचानक दम तोड़ जाने पर मौत के कारण जानने के लिए लाश का एक्सरे कराना ईएमओ और 10 डॉक्टरों को भारी पड़ गया। मामला जब प्रिंसिपल के संज्ञान में आया तो उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए सभी डाक्टरों से जवाब तलब करते हुए नोटिस जारी कर दिया। अभी तक किसी भी डाक्टर ने जवाब नहीं दिया है। डाक्टरों को नोटिस जारी होने के बाद मेडिकल में खलबली मची है। मेडिकल के आला अधिकारी डाक्टरों का जवाब आने के बाद इस मामले में बड़ी कार्रवाई करने की तैयारी में हैं। 

जागृति विहार सेक्टर-सात में पिछले दिनों एक कार ने कोहराम मचा दिया था। कार चालक ने कार से कई लोगों को टक्कर मारी थी। रिक्शे पर गद्दे लेकर जा रहे रिक्शा चालक अख्तर (45) निवासी फतेउल्लापुर, लिसाड़ी गेट को रौंद दिया था। घायल अख्तर को मेडिकल इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उसी दिन अख्तर की मौत हो गई थी। उपचार के दौरान अख्तर की हालत में सुधार आने लगा था, लेकिन अचानक उन्होंने दम तोड़ दिया। मौत का कारण जानने के लिए इमरजेंसी में ड्यूटी पर तैनात सर्जरी और आथ्रो के जूनियर रेजीडेंट डाक्टर्स और ईएमओ ने बॉडी का एक्सरे करा दिया। 

इस मामले के सामने आने पर सभी डाक्टरों को फटकार लगाई गई, जिस पर जूनियर डाक्टर ने मौखिक तौर पर मेडिकल के अधिकारियों को बताया कि अख्तर की हालत ठीक हो गई थी, लेकिन कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। मौत का कारण जानने के लिए जहां-जहां अख्तर को चोट लगी थी वहां का एक्सरे किया था। 

इस पर मेडिकल के अधिकारियों ने डाक्टरों को फटकार लगाते हुए कहा कि मौत का कारण जानने के लिए पोस्टमार्टम ही पर्याप्त था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही मौत का कारण स्पष्ट हो जाता। इस पर जूनियर डाक्टर जवाब नहीं दे सके। 

इसके बाद प्रिंसिपल ने इस मामले में सर्जरी और आर्थो विभाग के दस डाक्टरों को नोटिस जारी किया है। एक ईएमओ से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। नोटिस जारी होने के बाद से डाक्टरों में खलबली मच गई है। मेडिकल प्राचार्य डा. आरसी गुप्ता ने बताया कि 11 डाक्टरों से जवाब तलब किया है। अभी तक किसी ने जवाब नहीं दिया है। जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। किसी भी मृत का एक्सरे इस तरह करना सही नहीं है। यदि एक्सरे करना ही था तो पहले अनुमति लेनी चाहिए थी।

नहीं है कोई रेडियोलाजिस्ट

इस चूक की बड़ी वजह मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजिस्ट का नहीं होना है। अगर कोई रेडियोलॉजिस्ट होता तो बिना कॉलेज प्रशासन के एक्सरे की अनुमति ही नहीं मिलती। रेडियोलॉजिस्ट के नहीं होने अस्पताल की एक्सरे, एमआरआई, सीटी स्कैन समेत अन्य जांचें प्रभावित हो रही हैं।

livehindustan की खबर 

 

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