राष्ट्रीय

अब बुजुर्ग माता-पिता की सेवा नहीं की तो जाना पड़ेगा जेल, सरकार ने कानून को दी मंजूरी

अब बुजुर्ग माता-पिता की सेवा नहीं की तो जाना पड़ेगा जेल, सरकार ने कानून को दी मंजूरी

मीडिया रिपोर्ट 

पटना : बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी करने वाले या उन्हें भगवान भरोसे छोड़कर ठाठ की जिंदगी जीने वाले बेटे-बेटियों को अब अपने व्यवहार में बदलाव लाना पड़ेगा. वरना उन्हें जेल की सजा भुगतनी पड़ सकती है. जी हां, बिहार सरकार ने अपने एक कानून में संशोधन करते हुए बुजुर्ग माता-पिता की सेवा न करने वाले ऐसी संतानों पर कार्रवाई करने का फैसला किया है. नए कानून के तहत बूढ़े माता-पिता की सेवा नहीं करने वाले बेटे-बेटियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा. आपको बता दें कि बिहार में माता-पिता के भरण-पोषण के लिए पहले से एक कानून था, सरकार ने उसमें संशोधन करते हुए यह नया फैसला किया है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला किया गया. संशोधित कानून के तहत माता-पिता की सेवा न करने वाली संतानों को अब न सिर्फ जेल की सजा हो सकती है, बल्कि उन्हें संपत्ति से भी हाथ धोना पड़ सकता है. इस फैसले में कहा गया है कि अगर किसी माता-पिता ने अपने बेटे-बेटियों को लेकर ऐसी शिकायत की, तो उन पर कार्रवाई की जाएगी. पटना से प्रकाशित प्रमुख अखबार हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 के मामले में अब जिले के कलेक्टर यानी डीएम ऐसी अपील सुनेंगे. अभी तक फैमिली कोर्ट के जज ऐसी अपीलों पर सुनवाई करते थे.

हिंदुस्तान में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, सीएम नीतीश कुमार की कैबिनेट मीटिंग के बारे में बताते हुए प्रधान सचिव संजय कुमार ने कहा कि यह कानून 2007 में ही बना. इसके तहत अब तक एसडीओ ऐसे मामलों की सुनवाई करते रहे हैं. लेकिन अब इसमें डीएम को भी शामिल किया गया है. अगर कोई बेटा या बेटी अपने बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी करता है, उनकी सेवा नहीं करता है या उनकी संपत्ति पर कब्जा करता है तो ऐसी संतानों के खिलाफ इस कानून के तहत सजा का प्रावधान है. कैबिनेट फैसले के बारे में बताते हुए बिहार के समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अतुल प्रसाद ने कहा कि डीएम ऐसे मामलों में बेटे द्वारा संपत्ति के हस्तांतरण (ट्रांसफर) या निबंधन (रजिस्ट्री) पर पूरी तरह से रोक लगा सकते हैं.

अधिकारियों ने बताया कि बुजुर्ग माता-पिता अपनी शिकायत लेकर विभिन्न अदालतों तक नहीं पहुंच पाते हैं. इसे देखते हुए ही राज्य सरकार ने यह फैसला किया है. बैठक में राज्य के वृद्घजन पेंशन योजना को भी बिहार लोक सेवाओं के अधिकार अधिनियम 2011 के दायरे में लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई. अब किसी भी बुजुर्ग द्वारा दिए गए आवेदन का निपटारा प्रखंड विकास पदाधिकारी को 21 दिनों के अंदर करना होगा.

More Photo

    Record Not Found!


More Video

    Record Not Found!


Related Post

Leave a Comments

Name

Contact No.

Email