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अस्पताल के CEO पर लगा किडनी रैकेट में शामिल होने का आरोप, SIT ने किया गिरफ्तार

अस्पताल के CEO पर लगा किडनी रैकेट में शामिल होने का आरोप, SIT ने किया गिरफ्तार

एजेंसी 

नई दिल्ली: कानपुर के चर्चित किडनी रैकेट (Kidney Racket) मामले में यूपी पुलिस की SIT ने दक्षिणी दिल्ली के पुष्पावती सिंघानिया रिसर्च इंस्टीट्यूट (पीएसआरआई)  के सीईओ को हिरासत में लिया है. पुलिस ने आरोपी सीईओ की पहचान डॉक्टर दीपक शुक्ला के रूप में की है. पुलिस आरोपी से इस मामले (Kidney Racket) को लेकर कानपुर में पूछताछ करेगी. वहीं, कानपुर एसपी क्राइम ने बताया कि  इस पूरे मामले (Kidney Racket) की जांच के दौरान डॉक्टर दीपक शुक्ला का नाम सामने आया था. इसलिए उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है. हमनें इस पूरे मामले (Kidney Racket) की जानकारी दिल्ली पुलिस को भी दी है. याद हो कि इस साल में 17 फरवरी को किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह के सदस्यों को दबोचा गया था.

उसी समय दक्षिणी दिल्ली के पीएसआरआई के डॉक्टर दीपक शुक्ला का नाम सामने आया था. ध्यान हो कि इस पूरे मामले (Kidney Racket) में अभी तक कानपुर, दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता से दस आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. जिनसे पूरे मामले को लेकर पूछताछ की जा रही है. यूपी पुलिस से जुड़े सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले मं किडनी रैकेट के सरगना की अस्पताल से मिलीभगत के कई सूबते मिलें हैं. जिनकी पुलिस जांच कर रही है.

इस पूरे मामले (Kidney Racket) को लेकर एनडीटीवी ने पीएसआरआई के चीफ ऑफ ऑपरेशन्स, डॉक्टर संजीव गुप्ता से बात की. उन्होंने बताया कि अस्पताल की तरफ से कोई चीज़ गलत नहीं हुई है,कुछ गलत नहीं हुआ है, मामले की जांच चल रही है, जांच के चलते ही डॉक्टर शुक्ला को कानपुर पुलिस पूछताछ के लिए ले गई है. कल पुलिस आयी थी और जांच चल रही है. इस मामले में कॉर्डिनेटर सुनीता से भी पूछताछ हुई है, वो भी पुलिस की जांच में सहयोग कर रही हैं. गौरतलब है कि इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले 

दिल्ली पुलिस ने 2017 में किडनी की खरीद-फरोख्त में शामिल एक महिला सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया था. इनकी गिरफ्तारी में राजस्थान के एक बाशिंदे ने मदद की जो अपने लापता दोस्त की तलाश कर रहा था. पुलिस ने दावा किया था कि गिरफ्तार लोग दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों के कई अस्पतालों में काम करने वाले गिरोह का हिस्सा थे.

दिल्ली के एक प्रमुख निजी अस्पताल में इस गिरोह के संचालित होने का खुलासा होने के बाद आप सरकार ने अस्पताल से एक रिपोर्ट मांगी थी. हालांकि अस्पताल ने एक बयान में कहा था कि उसके यहां सभी किडनी प्रतिरोपण सही तरीके से किए जाते हैं और कुछ गड़बड़ी नहीं हुई थी. अस्पताल के अधिकारियों ने कहा था कि वो जांच में पुलिस को पूरा सहयोग देंगे.

संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) प्रवीर रंजन ने बताया था कि राजस्थान निवासी के जरिए बिछाए गए एक जाल के बाद यह गिरफ्तारी की गई थी. उन्होंने बताया था कि राजस्थान के सीकर निवासी 23 वर्षीय जयदीप शर्मा के सामने जब उनके दोस्त राजेश ने किडनी बेचकर पैसा कमाने का जिक्र किया था तो जयदीप ने इस बारे में छानबीन की.जयदीप को पिछले साल सितंबर में एक फोन आया था, जिसमें इम्तियाज नाम के आदमी ने उसे फोन किया. कुछ दिन बाद राजेश लापता हो गया था और जयदीप ने अपने दोस्त का पता लगाने का फैसला किया. उसने एक न्यूज चैनल के रिपोर्टर के साथ अप्रैल में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा के अधिकारियों से मुलाकात की थी.

जयदीप के लिए जाली आधार कार्ड और वोटर कार्ड बनाया गया था. उसे दिल्ली के बत्रा अस्पताल ले जाया गया था जहां उसके दस्तावेज जमा किए गए थे और छानबीन के लिए एक आंतरिक कमेटी के समक्ष पेश किया गया था. समूची प्रक्रिया के बाद किडनी ट्रांसप्लांट गुरुवार को होना था. इस गिरोह ने जयदीप से चार लाख में किडनी का सौदा तय किया था और उसे आगे 30 लाख में बेचने की बात हुई थी. लेकिन पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था और यह प्रतिरोपण रद्द हो गया था.

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