सूरजपुर

राज्य के सबसे भ्रष्ट तहसीलदार संजय राठौर ने निजी भूमि का अनुचित नामांतरण कर कराया बिक्री , 100 पन्ने के दस्तावेज में हुई शिकायत

राज्य के सबसे भ्रष्ट तहसीलदार संजय राठौर ने निजी भूमि का अनुचित नामांतरण  कर कराया बिक्री , 100 पन्ने के दस्तावेज में हुई शिकायत

सूरजपुर : छत्तीसगढ़ के सर्वाधिक बहुचर्चित व भ्रष्ट तहसीलदार संजय राठौर का एक भ्रष्टाचार का प्रकरण प्रकाश में आया है जिसमें संजय राठौर ने भैयाथान में तहसीलदार रहते हुए एक निजी स्वामित्व की भूमि को विधि विरूद्ध प्रक्रिया अपनाते हुए  बिना भूमि स्वामी को सूचना और बिना सहमति लिए गरीब कृषक की भूमि को अपने प्रिय भू माफियाओं और उसके परिजनों को सभी नियम कानून को ताक में रखकर नामान्तरित कर दिया और  विधि विरुद्ध  प्रक्रिया से तैयार दस्तावेजों से उक्त भूमि को विक्रय भी करवा दिया ।जिसकी शिकायत 100 पेज    में  दस्तावेजों के साथ कलेक्टर जनदर्शन में  कृषक दीपेश दुबे ने की है ।

प्रकरण यह है कि दिनांक 25-06-83 को  आदिम जाति सेवा सहकारी मर्यादित केवरा द्वारा  म.प्र. सहकारी संस्था अधिनियम 1960 ( क्र. 1701961 ) की धारा -85 के खण्ड के साथ पढ़े गये म.प्र. सहकारी संस्था अधिनियम 1962 के नियम 62 के अधीन दिये गये नियमों के अन्तर्गत  की गई सार्वजनिक नीलामी में आवेदक  दीपेश दुबे को खरीददार घोषित करते हुवे  ग्राम कोयलारी , तहसील - भैयाथान ,जिला- सूरजपुर (छ.ग.) की भूमि जिनका खसरा नं  104,184,185, 192 रकबा कमश:  0.644 हे. ,0.324 हे., 0.121 हे. ,0.117 हे. है का भू-  स्वामी घोषित किया था जिसकी  पुष्टि दिनांक  31-10-1985  को  माननीय वसूली अधिकारी एवं अतिरिक्त तहसीलदार समितियां , अम्बिकापुर द्वारा की गई और उसी आधार पर राजस्व अभिलेख की नामान्तरण पंजी में आवेदक दीपेश दुबे का नाम  विधिवत रूप से दिनांक  21-01-1987 को पंजीबद्ध हुआ और तब से लेकर आज पर्यन्त तक आवेदक उन भूमि पर काबिज व काश्तकार है ।जिससे संबंधित नामान्तरण पंजी, वर्ष  1988-89,1992- 93, ,1993-94, 1994-95,1995-96,1987-98 ,2000-2001 , 2016-17,2017-18,2019-20 ,2021-23 ,2024-25  तक के बी -1 की छाया प्रति प्रस्तुत की है कि उनके खसरा क्र. 104,184,185, 192  से रिनम्बरिंग होकर खसरा क्र.   154,157,169,177  हो गये तब भी राजस्व अभिलेख में लगातार आवेदक का नाम भू- स्वामी के रूप में दर्ज रहा ।

 भूमाफियाओं का दलाल और निजी हित में विधिक प्रावधानों की धज्जियां उड़ाने के लिए छत्तीसगढ़ के सर्वाधिक भ्रष्ट तहसीलदार के रूप में कुख्यात संजय राठौर ने सूरजपुर,भैयाथान, ओडगी सहित अन्य स्थानों पर जो भ्रष्टाचार का कीर्तिमान स्थापित किया , उसी को ऊंचाई देते हुए तहसीलदार संजय राठौर ने कृषक दीपेश दुबे की निजी स्वामित्व वाली भूमि को बिना उन्हें सूचना दिये चोरी छुपे समस्त विधिक प्रावधानों को ठेंगा दिखाते हुए सड़क किनारे की भूमि को  अपने प्रिय भूमाफिया शिवम दुबे और  उसके परिजनों को विधि विरुद्ध नामान्तरित करते हुए उसे  तीन सप्ताह में शिवम ,विवेका, पूजा ,आशीष,पूजा व शिवम के दादा चन्द्र देव से विक्रय करवा दिया और अन्य भूमि को शिवम दुबे के  ताऊ विरेन्द्र व दूसरे दादा देवी प्रसाद को नामान्तरित रहने दिया।

ज्ञात हो कि इन्हीं तहसीलदार संजय राठौर ने इन्हीं  भूमाफियाओं के साथ मिलकर जीवित शैल कुमारी को मृत बताकर 1976 में उनकी क्रय की भूमि को 1967 के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के द्वारा विरेन्द्र दुबे को नामान्तरण कर  उसे तीसरे दिन ही विक्रय कराने और विक्रय के दिन ही विधि विरुद्ध नामांतरण कर दिया था जिस पर कार्यवाही करते हुए माननीय संभागायुक्त सरगुजा नरेंद्र दुग्गा ने संजय राठौर को निलम्बित कर दिया था। 

वहीं दूसरे मामले में महेन्द्र दुबे वगै. की सम्मिलात खाता की भूमि को बिना उन्हें सूचित किये और समस्त विधिक प्रावधानों को नकारते हुए महेन्द्र दुबे आदि को भूमिहीन करते हुए संजय राठौर ने अपने प्रिय भूमि दलाल  शिवम दुबे , चन्द्र देव, विरेन्द्र दुबे व देवीप्रसाद व अन्य को बंदरबांट करते हुए सम्मिलात खाता की पूरी भूमि सौप दी जिसकी विभागीय जांच और पुलिस विवेचना चल रही।

वहीं  तहसीलदार संजय राठौर का सौरभ सिंह से रिश्वत  लेने का आडियो तो पूरे देश में वायरल है तथा विभागीय जांच जारी है ।

ऐसे रंगीन भ्रष्टाचार का  खिलाड़ी संजय राठौर ने शिवम दुबे ,विवेका , विरेन्द्र, चन्द्र देव, देवीप्रसाद व अन्य के साथ मिलकर षणयन्त्र पूर्वक भूमि भ्रष्टाचार का ऐसा ही खेल करते हुए आवेदक दीपेश दुबे की निजी स्वामित्व की भूमि को इन्हीं भूमि दलालों को समर्पित कर दिया।

संजय राठौर ने इन्हीं दलालों के साथ 2024- 25  में भैयाथान में तहसीलदार रहते भ्रष्टाचार का जो अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया उसे देखकर उसके उच्चाधिकारी भी सन्न हैं और साधारण जन भी सोच रहे हैं कि  तहसीलदार जैसे न्यायिक पद पर बैठा कोई व्यक्ति  निजी लाभ के लिए किस हद तक जा सकता है ?

आइए मामले को विस्तृत रूप से समझते है :

कृषक दीपेश दुबे की भूमि को हड़पने के लिए संजय राठौर और उसके दलाल गैंग ने 2024-25  में दिनांक 26-11-2024  को शिवम के प्रिय दादा देवीप्रसाद व दूसरे दादा चन्द्र देव, माता विवेका ,ताऊ विरेन्द्र के साथ अपने अन्य परिजनों को सम्मिलित करते हुए सम्मिलात खाता की भूमि को निजी स्वामित्व व आधिपत्य की भूमि बताते हुए आपसी समझौते के आधार पर  छत्तीसगढ़ भू . राज्स्व संहिता की 178  ( क ) के अन्तर्गत सहमति के आधार पर बंटवारा का आवेदन प्रस्तुत करने का खेल खेला । भ्रष्टाचार में अन्धा हो चुके  तत्कालीन तहसीलदार संजय राठौर को यह बोध नहीं रहा कि छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता की यह धारा तब उपयोग में लायी जाती है जब कोई जीवित व्यक्ति अपने विधिक उत्तराधिकारियों के मध्य अपनी सम्पत्ति का बंटवारा करता है और संजय राठौर ने इस तथ्य की भी जानबूझकर उपेक्षा की साथ ही सम्मिलात खाता की भूमि पर बंटवारा विषयक दो द्वितीय अपील माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और माननीय न्यायालय ने इन भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्णय लेने हेतु निचली न्यायालयों को उच्च न्यायालय के आदेश तक स्थगनादेश जारी किया हुआ है जिसकी प्रतिलिपि भी तहसीलदार राठौर को दी गई किंतु भ्रष्टाचार में आकण्ठ डूब चुके राठौर को जब गोपेश दुबे ने माननीय उच्च न्यायालय का स्थगनादेश दिया तो उसने स्पष्ट शब्दों में कहा कि  बंटवारा करने का उसका विधिक अधिकार है और स्थगन आदेश नहीं लिया  जिस पर माननीय उच्च न्यायालय ने संजय राठौर सहित उसके पूरे गैंग के विरूद्ध अवमानना का नोटिस जारी किया हुआ है ।

संजय राठौर ने सम्मिलात खाते के कथित बंटवारे में आवेदक दीपेश दुबे की निजी स्वामित्व की भूमि को भी सम्मिलित कर लिया किंतु उसके गैंग द्वारा जो आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया था उसमें एक भी खसरा नं का उल्लेख नहीं था बस भू-स्वामियों के नाम भर थे तो संजय राठौर को आवेदक की निजी स्वामित्व को की भूमि का खसरा नं सहित सम्मिलित खाता की भूमि का खसरा नं कैसे पता और  किस पिशाच की प्रेरणा से दीपेश दुबे की निजी स्वामित्व की भूमि को अपने गैंग को वितरित कर दिया ‌? ऐसा प्रश्न आवेदक ने अपने आवेदन में उठाया है।

दिनांक 26-11-2024 को संजय राठौर के तहसील न्यायालय में संजय राठौर गैंग द्वारा प्रस्तुत आवेदन पत्र पर अतिसक्रियता दिखाते हुए संजय राठौर ने मात्र तीन पेशी में दिनांक 01-01-2025 को नस्तीबद्ध कर दिया।पर प्रकरण नस्तीबद्ध करने के पश्चात भी संजय राठौर अपने दलाल गैंग के लिए प्रकरण को विधि विरुद्ध प्रक्रिया से चलाते हुए दिनांक 07-03-2025  को हल्का पटवारी को अभिलेख दुरूस्त करने का ज्ञापन दिया । किन्तु  आधिकारिक विधि से अभिलेख दुरूस्त संजय राठौर के ही आदेश दुरुस्त करने के ज्ञापन दिनांक 07-03-2025  पश्चात होता किन्तु भ्रष्टाचार के  खिलाड़ी संजय राठौर ने उससे पूर्व ही समझ लिया कि क्या पता उसे भ्रष्टाचार करने का प्रतिफल उसका दलाल गैंग दे या न दे? इसीलिए उसने अभिलेख दुरूस्त करने के अपने ही आधिकारिक ज्ञापन से पूर्व ही अनधिकृत रूप से स्वयं अभिलेख मनमाने रूप से दुरुस्त करते हुए उसमें  देवी प्रसाद दुबे के प्राप्त अंश में पटना रोड से लगी बहुमूल्य तीस डिसमिल भूमि दिनांक 05-02-2025 को अपनी पत्नी शारदा राठौर ने नाम से रजिस्टर्ड बैनामा के माध्यम से प्रतिफल के रूप में प्राप्त कर ली।

तहसीलदार ने बंटवारा से पूर्व ही करा ली अपनी पत्नी के नाम जमीन:

इतिहास में भ्रष्टाचार का अपना अनुपम कीर्तिमान संजय राठौर ने बनाया कि जिस भूमि का  बंटवारा प्रकरण उसकी न्यायालय में आया उसी प्रकरण पर निर्णय करते हुए स्वयं के द्वारा आधिकारिक रूप से अभिलेख दुरूस्त करने के ज्ञापन जारी करने के दिनांक 07-03-2025 के पूर्व ही उसी भूमि में से बहुमूल्य तीस डिसमिल भूमि दिनांक 05-02-2025  को अपनी पत्नी शारदा राठौर के नाम रजिस्ट्री करा ली ।

इस समूचे कथित बंटवारा प्रकरण क्रमांक 201501261000027/ अ - 27 में संजय राठौर ने न्यायालय को मानो शबनम रूपी  भ्रष्टाचार का मुजरा शो बना दिया हो । दिनांक 01-01-2025 को आधिकारिक रूप से प्रकरण को नस्तीबद्ध करने के पश्चात संजय राठौर दिनांक 08-01-2025  को हल्का पटवारी की राजस्व आईडी का दुरूपयोग करते हुए दीपेश दुबे की नीलामी में चालीस वर्ष पूर्व खरीदी निजी स्वामित्व की भूमि को सम्मिलित खाता में बिना आवेदक की सूचना दिये ,उसका कथन ,सहमति लिए ही मनमाने रूप से जैसे संजय राठौर का मुजरा शो हो उसने सम्मिलित कर लिया है और अभिलेख दुरूस्त करने के स्वयं के ही आधिकारिक ज्ञापन आदेश दिनांक 070-03-2025 के पूर्व ही  दिनांक  31-01-2025  को आवेदक की भूमि में से खसरा क्र 154 को   शिवम दुबे  विवेका  तथा चन्द्र देव  द्वारा बेचवाने के लिए नक्शा , चौहद्दी तथा मौका जांच हल्का पटवारी के संग मिलकर तैयार करके यह ही  दिन में रजिस्टर्ड बैनामा के माध्यम से शिवम दुबे व चंद्रदेव के रिश्तेदारों तपेश तिवारी व विष्णु दुबे को विक्रय करवा दी ।

आवेदक दीपेश दुबे ने आरोप लगाया है की संजय राठौर और शिवम ने इस प्रकरण में इतना गन्दा,घृणित व निन्दनीय कार्य किया कि एक ने एक ही पेन से आवेदक सहित वन्दना तिवारी, गोपेश दुबे, मातेश्वरी तिवारी व सिद्धेश दुबे के हस्ताक्षर स्वयं किये और भ्रष्टाचार कर भूमि हड़पने की ऐसी हड़बड़ी थी कि कहीं दिपेश कुमार लिखे तो कहीं दिपेश प्रसाद।जबकि आवेदक का आधिकारिक नाम जो सभी आधार कार्ड,पेन कार्ड,बैंक खाता में है वह दीपेश दुबे के नाम से ही है ।

जीवित व्यक्तियों के नाम रिकॉर्ड से गायब ,मृत व्यक्तियों में किया बंटवारा 

वहीं विरेन्द्र दुबे,शिवम दुबे, चन्द्र देव दुबे, देवीप्रसाद व इनके परिजनों को अन्य खातेदारों की भूमि लूटने की हड़बड़ी थी कि संजय राठौर ने इसके लिए खातेदारों शैल कुमारी, महेन्द्र दुबे,शैल दुबे सतीश दुबे, रविशंकर दूबे, राजेश दुबे का नाम राजस्व अभिलेख में नहीं रहने दिया जबकि यह लोग माननीय उच्च न्यायालय में भी इस सम्मिलित खाता की भूमि के अंशधारक होकर पक्षधर हैं। वहीं सहखातेदार राम किशुन दुबे व ओंकार नाथ दुबे की मृत्यु कब की हो चुकी है और माननीय न्यायालय में उनके उत्तराधिकारियों का नाम रिकार्ड में चल रहा है पर इस बंटवारा प्रकरण में संजय राठौर ने उनके उत्तराधिकारियों के नाम को विधिवत जोड़े बिना मृत व्यक्तियों को जीवित बताते हुए बिना उनके हस्ताक्षर, सहमति के बन्दर बांट बंटवारा कर दिया जिससे यह परिलक्षित होता है कि
मृत व्यक्तियों को भूमि बंटवारा सिर्फ संजय राठौर जैसा तहसीलदार ही कर सकता है।

इसी प्रकार अन्यान्य विधि विरुद्ध और गम्भीर अक्षम्य दोषों सहित संजय राठौर ने दीपेश दुबे की निजी स्वामित्व की भूमि को बिना उन्हें किसी जानकारी के  फर्जी हस्ताक्षर करवाकर दीपेश दुबे की भूमि शिवम विवेका, पूजा,सुधा, आशीष चन्द्र देव, देवीप्रसाद और विरेन्द्र दुबे को देते हुए शिवम विवेका पूजा सुधा आशीष तथा चन्द्र देव से उसे बेचवा भी दिया जिसकी नब्बे पेज के दस्तावेजों सहित दीपेश दुबे ने कलेक्टर सूरजपुर से शिकायत करते हुए भूमि वापसी की मांग और दोषियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करवाने की मांग की है।अब देखना है कि जिला प्रशासन आवेदक को उनकी भूमि वापिस दिलाने  और छत्तीसगढ़ के सर्वाधिक भ्रष्ट तहसीलदार के रुप में कुख्यात संजय राठौर व उसके गैंग के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करवाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाकर एक स्वच्छ प्रशासन की छवि प्रस्तुत करता है या नहीं?

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