संवाददाता: सुभाष गुप्ता
सूरजपुर : जिले में प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली अब एक बड़े घोटाले और मिलीभगत की बू दे रही है। जिस सड़क को खाली कराने के लिए जनता ने तीन साल तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटे, वहां राजस्व विभाग ने न्याय करने के बजाय 'अवैध वसूली और संरक्षण' का नया खेल खेल दिया। नाप-जोख के नाम पर पहुंचे अमले ने अतिक्रमण हटाने के बजाय उसी अवैध दुकान का ताला खुलवाकर संचालन शुरू करा दिया, जिसके खिलाफ जनता तीन साल से चीख रही थी।
भ्रष्टाचार की खुली दास्तान...
कागजों में नाप-जोख, जमीन पर संरक्षण
सूरजपुर प्रशासन की यह कार्रवाई न्याय का मजाक उड़ाने जैसी है। स्थानीय लोगों ने जब सड़क पर अवैध कब्जे और निर्माण की शिकायत दर्ज कराई थी, तो उन्हें उम्मीद थी कि कानून का हंटर चलेगा और सड़क अतिक्रमण मुक्त होगी। लेकिन तीन साल की लंबी लीपापोती और टालमटोल के बाद जब राजस्व अमला मौके पर पहुंचा, तो उसने जो किया उसने प्रशासन के इकबाल को तार-तार कर दिया। शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि अमले ने सांठगांठ के तहत न सिर्फ अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाने से इनकार कर दिया, बल्कि उसी विवादित दुकान को बाकायदा संरक्षण देकर खुलवा दिया।
तीन साल की सुस्ती क्यों? क्या फाइलों को दबाए रखना किसी बड़ी साजिश का हिस्सा था?
किसके इशारे पर खुली दुकान? क्या राजस्व अधिकारियों की जेबें गर्म होने के बाद अतिक्रमण हटाने का फैसला बदल गया?
जनता त्रस्त, दबंग मस्त:
क्या सूरजपुर में प्रशासनिक तंत्र चंद रसूखदारों के हाथों की कठपुतली बन चुका है?
प्रशासन पर बढ़ा दबाव
इस शर्मनाक कृत्य के बाद आम जनता का धैर्य जवाब दे चुका है। नागरिकों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि इस खेल में शामिल भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल बर्खास्तगी या निलंबन की कार्रवाई नहीं हुई, और बुलडोजर चलाकर सड़क को अतिक्रमण मुक्त नहीं किया गया, तो जनता सड़क पर उतरकर प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ेगी।






























