संवाददाता: सुभाष गुप्ता
सूरजपुर : प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) योजना की सूरजपुर जिले में कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जिले में पदस्थ चार वरिष्ठ संविदा अधिकारी लंबे समय से अन्य जिलों में सेवाएं दे रहे हैं, जबकि उनका मानदेय अब भी सूरजपुर जिला पंचायत से जारी किया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब जिले के महत्वपूर्ण पदों पर नियमित अधिकारी उपलब्ध नहीं हैं, तो योजना का संचालन किस व्यवस्था के तहत किया जा रहा है।
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार जिला कार्यक्रम प्रबंधक (वित्तीय प्रबंधन) विनीत कुमार दुबे मूल पदस्थापना सूरजपुर होने के बावजूद वर्तमान में गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में कार्यरत हैं। इसी प्रकार जिला कार्यक्रम प्रबंधक (वित्तीय समावेशन) सत्य प्रकाश मिश्रा कोरिया जिले में सेवाएं दे रहे हैं। जिला मिशन प्रबंधक ज्ञानेन्द्र सिंह बलरामपुर जिले में कार्यरत हैं, जबकि सुनील शर्मा दुर्ग जिले में पदस्थ हैं। चारों अधिकारियों का मानदेय सूरजपुर से ही भुगतान किया जा रहा है।
प्रभारी अधिकारियों के भरोसे जिला कार्यालय
चार वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति में जिला कार्यालय की जिम्मेदारी प्रभारी अधिकारियों के भरोसे संचालित की जा रही है। हाल ही में जारी आदेश के अनुसार दिलीप कुमार एक्का को प्रभारी जिला मिशन प्रबंधक एवं प्रभारी जिला कार्यक्रम प्रबंधक तथा मो. नसीम को प्रभारी जिला कार्यक्रम प्रबंधक का दायित्व सौंपा गया है। इससे जिला स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था और योजना संचालन की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गांव-गांव समूह बनाने वाले छोटे पद के कर्मचारियों के भरोसे व्यवस्था
स्थिति यह है कि जिला स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां उन कर्मचारियों पर आ गई हैं, जिनकी मूल जिम्मेदारी गांव-गांव जाकर स्व-सहायता समूहों का गठन, प्रशिक्षण और समूहों के साथ समन्वय स्थापित करना है। ऐसे छोटे पद के कर्मचारियों के भरोसे जिला स्तर की व्यवस्था संचालित होने से योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं।
योजना की रफ्तार पर असर
बिहान योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। किंतु नियमित अधिकारियों के अभाव में समूह गठन, बैंक लिंकेज, ऋण स्वीकृति, आजीविका गतिविधियों तथा अन्य योजनागत कार्यों में विलंब की शिकायतें सामने आ रही हैं। हितग्राहियों का कहना है कि कई मामलों में फाइलों के निराकरण में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है।
उठ रहे हैं महत्वपूर्ण सवाल
- यदि अधिकारी दूसरे जिलों में कार्यरत हैं, तो सूरजपुर में स्वीकृत पदों का कार्य कौन देख रहा है?
- जब मानदेय सूरजपुर से दिया जा रहा है, तो सेवाएं दूसरे जिलों को क्यों मिल रही हैं?
- क्या इस व्यवस्था को सक्षम स्तर से विधिवत स्वीकृति प्राप्त है?
- वर्षों से चली आ रही इस व्यवस्था की समीक्षा अब तक क्यों नहीं की गई?
- क्या इससे जिले के हितग्राहियों और योजना के क्रियान्वयन पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ रहा?
इन सवालों के बीच जिला पंचायत की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पक्ष जानने का प्रयास रहा अधूरा
इस पूरे मामले की जानकारी और विभाग का पक्ष जानने के लिए जिला पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी से मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क स्थापित नहीं हो सका। अधिकारी से बात नहीं हो पाने के कारण इस संबंध में उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।






























