महासमुन्द

महासमुंद में श्रीमद भागवत कथा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, तृतीय व चतुर्थ दिवस की कथाओं ने किया भाव-विभोर

महासमुंद में श्रीमद भागवत कथा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, तृतीय व चतुर्थ दिवस की कथाओं ने किया भाव-विभोर

संवाददाता: प्रभात मोहंती

महासमुंद : शहर के पंजाबी पारा स्थित वार्ड क्रमांक 23 में आयोजित श्रीमद भागवत महापुराण कथा ज्ञान सप्ताह में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की बढ़ती उपस्थिति के साथ भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। कथा के तृतीय एवं चतुर्थ दिवस पर प्रस्तुत प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को गहरे आध्यात्मिक भाव में डुबो दिया।

तृतीय दिवस: ध्रुव, जड़ भरत और अजामिल चरित का भावपूर्ण वर्णन

कथा के तृतीय दिवस आचार्य श्री नारायण दास वैष्णव जी ने ध्रुव चरित्र, जड़ भरत चरित एवं अजामिल चरित का अत्यंत रोचक, मार्मिक और शिक्षाप्रद वर्णन किया। उन्होंने बताया कि अटूट भक्ति और दृढ़ संकल्प से बालक ध्रुव ने परम धाम को प्राप्त किया, वहीं जड़ भरत की कथा से वैराग्य और आत्मज्ञान का संदेश मिलता है। अजामिल चरित के माध्यम से उन्होंने नाम-स्मरण की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि अंत समय में भी प्रभु का स्मरण जीवन को पावन बना देता है।

चतुर्थ दिवस: प्रह्लाद भक्ति, वामन अवतार और श्री राम-कृष्ण प्राकट्य की जीवंत झांकी

चतुर्थ दिवस पर प्रह्लाद चरित्र, वामन अवतार एवं श्री राम-कृष्ण प्राकट्य उत्सव का अत्यंत सुंदर और जीवंत चित्रण किया गया। कथा के दौरान वामन अवतार की मनोहारी झांकी प्रस्तुत की गई, जिसे देखकर श्रद्धालु गण भाव-विभोर हो उठे। वातावरण “हरि बोल” और “जय श्रीराम” के जयघोष से गुंजायमान हो गया।

आचार्य श्री नारायण दास वैष्णव जी ने अपने मुखारविंद से अत्यंत मार्मिक, रोचक एवं सरस वाणी में इन दिव्य प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने विशेष रूप से मां की महिमा का भी बड़े ही सुरुचिपूर्ण और भावपूर्ण ढंग से वर्णन करते हुए बताया कि मां का स्थान संसार में सर्वोच्च है, जिनकी कृपा से ही जीवन में संस्कार और सद्गुणों का विकास होता है।

कथा में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। हर वर्ग और धर्म के लोग कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। पंजाबी पारा मोहल्ला सहित शहर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर कथा का आनंद ले रहे हैं। ज्ञात हो कि कथा का आयोजन भीषण गर्मी को देखते हुए प्रतिदिन शाम 4 बजे से किया जा रहा है। आयोजन में परायणकर्ता पं. हेमन्त दास वैष्णव (महासमुंद) एवं पं. सूरज दास वैष्णव (चिंगरौद) की विशेष भूमिका रही।

अंत में पूजा के अवसर पर शहर के महाकाल आरती ग्रुप द्वारा महाकाल आरती डमरू के माध्यम से किया जिससे दर्शकों में एक नया उत्साह और रोमांच पैदा हुआ। आगामी दिवस में रुक्मिणी विवाह का पावन प्रसंग सम्पन्न होगा, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। आयोजनकर्ता श्रीमती प्रेमशीला -पोषण साहू द्वारा एवं  समस्त क्षेत्रवासियों के सहयोग से यह आध्यात्मिक आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो रहा है।

More Photo

    Record Not Found!


More Video

    Record Not Found!


Related Post

Leave a Comments

Name

Contact No.

Email