बालोद

शौर्य और समर्पण की मिसाल, देश सेवा के 21 वर्ष बाद नायक हीरा लाल साहू का भव्य स्वागत

शौर्य और समर्पण की मिसाल, देश सेवा के 21 वर्ष बाद नायक हीरा लाल साहू का भव्य स्वागत

बालोद (डौंडीलोहारा) : देश की आन-बान-शान के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले, भारत माता के वीर सपूत नायक हीरा लाल साहू का आज उनके पैतृक ग्राम मुड़खुसरा (भीमकन्हार) जिला बालोद,में भव्य और हर्षोल्लासपूर्ण स्वागत किया गया। भारतीय सेना में 21 वर्षों की निष्काम देश सेवा और अतुलनीय कर्तव्यनिष्ठा के पश्चात, सेवानिवृत्त होकर अपने गांव लौटे नायक हीरा लाल साहू के सम्मान में एक गरिमामयी 'सम्मान समारोह' का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर पूरा गांव देशभक्ति के रंग में सराबोर नज़र आया। फूलों से सजी गाड़ियों के साथ एक भव्य स्वागत जुलूस निकाला गया, जिसमें ढोल-नगाड़ों और देशभक्ति गीतों की गूंज थी। ग्रामवासियों ने तिलक लगाकर और फूल-मालाओं से लादकर अपने लाडले बेटे का स्वागत किया, जो उनके लिए गर्व और प्रेरणा का प्रतीक बन गया है।

अद्भुत जज्बा और देशभक्ति की मिसाल:

नायक हीरा लाल साहू ने अपनी 21 वर्ष की सेवा के दौरान विभिन्न दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती के दौरान अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। उनकी वीरता, समर्पण और जज्बा हर भारतीय के लिए एक मिसाल है। उन्होंने हमेशा देश की सुरक्षा और अखंडता को सर्वोपरि माना।

सैनिक का बयान:

भावुक स्वर में नायक हीरा लाल साहू ने कहा, "यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि उन सभी वीर सैनिकों का है जो देश के लिए लड़ते हैं और अपनी जान न्यौछावर करते हैं। मुझे गर्व है कि मैंने भारत माता की सेवा करने का अवसर पाया। ग्रामवासियों का यह असीम स्नेह और सम्मान मुझे हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।"

यह आयोजन न केवल नायक हीरा लाल साहू के सम्मान में था, बल्कि यह देश के लिए सेवा करने वाले सभी वीरों के प्रति आभार प्रकट करने का एक माध्यम भी था। उनके इस स्वागत ने पूरे क्षेत्र में देशभक्ति की लहर जगा दी और युवाओं को देश सेवा के लिए प्रेरित किया।

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