संवाददाता: प्रभात मोहंती
गरीब हितग्राहियों के हिस्से के चावल का किया जा रहा कालाबाजारी
महासमुंद : पूर्व संसदीय सचिव छ.ग. शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने कहा कि महासमुंद सहित पूरे प्रदेश में साफ्टवेयर अपडेट तथा सर्वर मेंटेनेंस के नाम पर 5 दिनों तक राशन वितरण बंद कर दिया गया है। इससे पहले केवायसी के नाम पर गरीब हितग्राहियों को राशन वितरण प्रभावित किया गया था। महीनों तक केवायसी अपडेट नहीं हो पाने के कारण हितग्राहियों को 2-2 माह का चावल नहीं मिल पाया।
किसी तरह हितग्राहियों ने केवायसी पूर्ण कराया तो साफ्टवेयर अपडेट तथा सर्वर मेंटेनेंस के नाम पर पुन: राशन वितरण प्रणाली को बाधित कर दिया गया। बार-बार इस तरह से बहानेबाजी कर राशन वितरण प्रभावित किया जाना चावल की कालाबाजारी व कमीशनखोरी को इंगित कर रहा है। क्योंकि, इससे पूर्व केवायसी के नाम पर हितग्राहियों को चावल नहीं दिया गया था। केवायसी कराने के बाद जितने माह का चावल हितग्राहियों को नहीं मिल पाया था, उन्हें एकमुश्त दिया जाना था। जबकि, केवायसी कराने के बाद केवल चालू माह का ही चावल हितग्राहियों को दिया गया।
पूर्व संसदीय सचिव ने कहा कि बार-बार विभागीय लापरवाही, सर्वर की समस्या, साफ्टवेयर मेंटेनेंस जैसे कार्य गरीब परिवारों को भारी संकट में डाल दिया है। इससे पहले जिन राशन कार्डों में चार या उससे अधिक सदस्य दर्ज हैं, और उनमें से एक की भी केवाईसी अपडेट नहीं था तो उनका पूरा चावल आवंटन रोक दिया गया। जबकि, सरकारी नियमों के अनुसार, जिस सदस्य की केवाईसी अपडेट नहीं है, केवल उसी सदस्य का खाद्यान्न रोका जाना चाहिए। इसके बावजूद विभाग ने नियमों को दरकिनार करते हुए पूरे परिवार का राशन बंद कर दिया। केवायसी कराने के बाद भी उनका नाम साफ्टवेयर से गायब कर दिया गया।
ऐसे हजारों हितग्राहियों को केवायसी अपडेट कराने तथा सर्वर की समस्या के कारण राशन का वितरण नहीं किया गया। ऐसे में उन हितग्राहियों के हिस्से के चावल जब उन्हें मिला ही नहीं, तो वह गया कहां। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीबों के हक के चावल की कालाबाजारी हो रही है। केवाईसी और साफ्टवेयर अपडेट करने के नाम पर राशन रोककर इस कालाबाजारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। केवाईसी आैर साफ्टवेयर अपडेट जैसी तकनीकी प्रक्रिया को आधार बनाकर राशन वितरण रोकना न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि खाद्य सुरक्षा कानून की मूल भावना के भी खिलाफ है। जरूरतमंदों को राहत देने के बजाय विभागीय मनमानी ने संकट और बढ़ा दिया है। पूरे प्रदेश के अलावा अकेले महासमुंद जिले के 3.60 लाख से अधिक उपभोक्ता सरकारी मनमानी का शिकार होकर परेशान हाे रहे हैं।
















.jpg)













