संवाददाता: प्रभात मोहंती
महासमुंद : अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ एवं गायत्री माता प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के प्रथम दिवस गायत्री चेतना केंद्र सिरपुर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई। यह कलश यात्रा चेतना केंद्र से प्रारंभ होकर संपूर्ण पुरातत्व नगरी सिरपुर का भ्रमण करते हुए महामाया तालाब पहुंची।

महामाया तालाब में विधि-विधान से कलश पूजन एवं वरुण देवता का आव्हान कर जल भरा गया। इसके पश्चात नारी शक्ति ने सिर पर जल कलश धारण कर वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के साथ पुनः यज्ञशाला तक यात्रा पूर्ण की। यज्ञशाला में पूजन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर शांतिकुंज प्रतिनिधि परमेश्वर साहू ने अपने उद्बोधन में कहा कि कलश विश्व ब्रह्मांड का प्रतीक है, जिसमें सभी देवी-देवताओं का वास माना गया है।
इतनी शक्तिशाली ऊर्जा को धारण करने के लिए विशेष शक्ति की आवश्यकता होती है, जो केवल नारी शक्ति में निहित है। इसलिए कलश धारण करने का कार्य नारी शक्ति ही करती है। भगवान ने नारी को विशेष शक्ति प्रदान की है। उन्होंने कहा कि समुद्र मंथन के समय प्राप्त अमृत कलश को धारण करने के लिए भगवान विष्णु को भी नारी रूप धारण कर अवतार लेना पड़ा था। उन्होंने उपस्थित सभी नारी शक्तियों का अभिनंदन करते हुए पुष्प वर्षा कर आरती उतारकर सम्मान किया।
भोजन उपरांत पावन प्रज्ञा पुराण कथा का आयोजन किया गया। इस दौरान श्री साहू ने परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित प्रज्ञा पुराण की महत्ता बताते हुए कहा कि गुरुदेव 24 दिनों की सूक्ष्मीकरण साधना के पश्चात जब बाहर आए, तब वे एक हस्तलिखित पुस्तिका लेकर आए, जिसमें सभी ग्रंथों का सार समाहित था। यह ग्रंथ भारत के ज्ञान, विज्ञान और अध्यात्म को सरल एवं सहज भाषा में जन-सामान्य तक पहुंचाने का माध्यम है। आज यह विचार क्रांति का सशक्त माध्यम बन चुका है।
उन्होंने बताया कि सभी धर्म ग्रंथों का मुख्य संदेश दो ही हैं—पहला, मन-वचन-कर्म से किसी को दुःख न देना और दूसरा, स्वयं को जानकर जीवन लक्ष्य को प्राप्त करना। इसलिए हमें परोपकार, सेवा और दूसरों को सुखी बनाने जैसे कार्यों को जीवन में अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज का व्यक्ति अत्यधिक स्वार्थी होता जा रहा है और एकाकी जीवन जी रहा है। परिवार व्यवस्था भी बिखरती जा रही है। आज व्यक्ति के मन और मस्तिष्क में केवल धन ही प्रमुख स्थान ले चुका है। जीवन में धन आवश्यक है, लेकिन केवल धन ही जीवन का लक्ष्य नहीं होना चाहिए।
कार्यक्रम का समापन आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ। कार्यक्रम के दूसरे दिन 14 मार्च को प्रातः 5 बजे ब्रह्म मुहूर्त में गायत्री माता की प्राण प्रतिष्ठा होगी। प्रातः 10 बजे से नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ के साथ विभिन्न संस्कार सम्पन्न कराए जाएंगे। संध्या काल में युगऋषि का संदेश, पावन प्रज्ञा पुराण कथा तथा भव्य दीप यज्ञ के साथ कार्यक्रम का समापन होगा। गायत्री परिवार द्वारा सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर यज्ञ में भाग लेने का निवेदन किया गया है।
















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