संवाददाता: प्रभात मोहंती
महासमुन्द : महासमुंद जिले में सामाजिक समावेशन कार्यक्रम के अंतर्गत दिव्यांगजनों के सामाजिक सुरक्षा एवं आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने की दिशा में उल्लेखनीय पहल की जा रही है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को आजीविका आधारित गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना तथा समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक सहभागिता सुनिश्चित करना है। यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG) विशेष रूप से SDG-1 (गरीबी उन्मूलन), SDG-8 (सम्मानजनक रोजगार एवं आर्थिक वृद्धि) और SDG-10 (असमानताओं में कमी) के अनुरूप है ।
आजीविका के क्षेत्र में जिले में कार्य कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. सुरेश शुक्ला ने जानकारी दी कि महासमुंद जिले में दिव्यांगजनों को कृषि, पशुपालन एवं गैर-कृषि गतिविधियों में आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान कर सफलतापूर्वक जोड़ा गया है। प्रशिक्षण के पश्चात अनेक दिव्यांगजन स्वरोजगार एवं आय सृजन से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इसके साथ ही तकनीकी क्षेत्र में भी प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर ग्राम एवं कस्बा स्तर पर ग्राहक सेवा केंद्र, फोटो कॉपी सेंटर एवं अन्य सेवा आधारित कार्यों से दिव्यांग युवाओं को जोड़ा गया है।
उपरोक्त क्रम में बसना एवं सरायपाली विकासखंड के आजीविका ग्राही दिव्यांग युवाओं का चिन्हांकन कर उन्हें संगठनों से जोड़ा गया। उनकी सुविधा, क्षमता एवं रुचि के अनुरूप रोजगार मूलक कार्यों का चयन कर विधिवत प्रमाणिकरण भी किया गया है, जिससे दीर्घकालिक आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
यह कार्यक्रम भारत सरकार एवं छत्तीसगढ़ सरकार की समावेशी विकास नीति, सबका साथ–सबका विकास और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक सशक्त कदम है। सामाजिक समावेशन के माध्यम से दिव्यांगजनों को सम्मानजनक रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता प्रदान कर जिले में सतत एवं समावेशी विकास की मजबूत नींव रखी जा रही है । उपरोक्त अवसर पर दिव्यांगो के कल्याण हेतु समर्पित संस्था उन्नति दिव्यांग कल्याण संघ के पदाधिकारी सहित जिले के सभी विकासखंड के सदस्य सहित आजीविका के चिन्हांकित युवा उपस्थित थे I















.jpg)














