सुभाष गुप्ता
सूरजपुर : जिले के घुई वन परिक्षेत्र अंतर्गत भैसामुण्डा क्षेत्र में बाघ की संदिग्ध मौत के मामले में वन विभाग ने बड़ी कारर्वाई करते हुए महिला सरपंच सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले में लापरवाही बरतने पर बीट गार्ड को निलंबित कर दिया गया है, वहीं रेंजर और वनपाल को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।

तीन दिन पूर्व भैसामुण्डा क्षेत्र में बाघ का शव मिलने से पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पीसीसीएफ से जवाब मांगा है। न्यायालय ने वन्य जीवों की सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने को लेकर वन विभाग से ठोस
काययोजना की जानकारी भी मांगी है।
वन विभाग के अनुसार 15 दिसंबर को मृत पाए गए बाघ की मौत करंट लगने से हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में करंट से झुलसने के स्पष्ट संकेत मिले हैं। विभागीय निगरानी में पोस्टमार्टम के बाद बाघ का अंतिम संस्कार किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि बाघ के दांत, नाखून और जबड़ा निकाले गए थे, जिससे शिकार किए जाने की पुष्टि हुई है। घटना के बाद वन विभाग ने अलग-अलग टीमें गठित कर सघन जांच शुरू की। जांच के दौरान कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया गया, जिनके पास से बाघ से जुड़े अहम साक्ष्य बरामद किए गए। इसी क्रम में भैसामुण्डा की महिला सरपंच सिस्का कुजूर को पूर्व में गिरफ्तार किया गया था, जिसके घर से जांच से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य भी

जब्त किए गए थे। अब तक की कारर्वाई में महिला सरपंच सिस्का कुजूर के अलावा भैसामुण्डा निवासी दिलीप कुजूर, अभिषेक रोशन, कैलासपुर के मिथलेश सिंह, रामनाथ सिंह और भोला प्रसाद को गिरफ्तार किया गया है। सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है, वहीं अन्य संलिप्त लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
इस घटना के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। वन्य जीवों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर निगरानी व्यवस्था पर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं। वन विभाग ने दावा किया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कारर्वाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
















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