अनिल बेदाग
मिसकैरेज के बाद महिलाओं की मुश्किलें आईं सामने
मिसकैरेज पर रिपोर्ट ने झकझोरा कॉर्पोरेट जगत
मुंबई : भारतीय कॉर्पोरेट जगत में एक ऐसा विषय है, जिस पर अक्सर चुप्पी साध ली जाती है, लेकिन जिसकी कीमत लाखों महिलाएं अपने करियर, आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य से चुकाती हैं। गर्भावस्था हानि (मिसकैरेज) को लेकर क्वेस्ट ग्लोबल और यूगॉव की ‘कॉस्ट ऑफ साइलेंस’ रिपोर्ट ने चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार करीब 7.8 करोड़ कामकाजी महिलाओं को डर है कि यदि वे अपनी गर्भावस्था हानि के बारे में बताएंगी तो उनके करियर या नौकरी पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, जबकि 7 करोड़ महिलाएं पर्याप्त सहयोग न मिलने पर नौकरी छोड़ने तक पर विचार कर सकती हैं।
क्वेस्ट ग्लोबल के सह-संस्थापक एवं सीईओ अजीत प्रभु कहते हैं, “गर्भावस्था हानि केवल वेलबीइंग का नहीं, बल्कि कार्यबल और उत्पादकता का भी मुद्दा है। अब समय आ गया है कि कार्यस्थल इस वास्तविकता को स्वीकार करें।” यही सोच ‘ब्रेक द साइलेंस’ अभियान की नींव बनी है, जिसका उद्देश्य इस संवेदनशील विषय को कॉर्पोरेट संवाद का हिस्सा बनाना है।
कंपनी ने ‘योर दोस्त’ के साथ मिलकर 24x7 हेल्पलाइन, गोपनीय काउंसलिंग और सपोर्ट सर्कल जैसी सुविधाएं भी शुरू की हैं। क्वेस्ट ग्लोबल की मुख्य रणनीति अधिकारी युमी क्लेवेंजर-ली के शब्दों में, “हर आंकड़े के पीछे एक ऐसी महिला है जो अपने दर्द को छिपाकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है। सही समय पर मिला सहयोग उसके भविष्य को बदल सकता है।” यह पहल केवल एक कॉर्पोरेट कार्यक्रम नहीं, बल्कि कार्यस्थलों को अधिक संवेदनशील, समावेशी और मानवीय बनाने की दिशा में शुरू हुआ एक महत्वपूर्ण सामाजिक आंदोलन बनती नजर आ रही है।




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