राजनीति
इंफोसिस छोड़ AAP में शामिल हुए बालकृष्णन, गुजरात में पूर्व BJP MLA कानू कलसारिया ने थामी झाड़ू

 

हाल ही में इंफोसिस से इस्तीफा देकर कॉरपोरेट जगत में तहलका मचाने वाले वी बालकृष्णन गुरुवार को आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए. वह देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी के बोर्ड सदस्यों में शामिल थे.

इस्तीफे के तीन हफ्ते बाद बालकृष्णन ने कहा, 'हां, मैं आम आदमी पार्टी का सदस्य बन गया हूं. आज मुझे सत्यापन मिला.' बालकृष्णन ने कहा, 'वह देश की राजनीति में क्रांति लेकर आए हैं. मैं उनसे आकर्षित हूं.' 20 दिसंबर को कंपनी के बोर्ड और सेवा से बालकृष्णन के हटने की सूचना देते हुए इंफोसिस ने बताया था कि उनका इस्तीफा 31 दिसंबर, 2013 से प्रभावी है. साल 1991 में इंफोसिस से जुड़ने और बाद में चीफ फाइनैंस ऑफिसर बनने वाले बालकृष्णन सीईओ की रेस में बताए जा रहे थे.

जब उनसे पूछा गया कि वह अपनी कारोबारी प्रतिबद्धता के साथ राजनीतिक करियर देख रहे हैं, उन्होंने कहा, 'मैं समझता हूं कि भविष्य में मैं दोनों संभाल पाउंगा. जब उनसे लोकसभा चुनाव लड़ने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, इस बारे में फिलहाल कुछ कहना जल्दबाजी होगी.'

गुजरात: पूर्व BJP विधायक AAP में शामिल नरेंद्र मोदी के गढ़ गुजरात में भी आम आदमी पार्टी ने पांव जमाने शुरू कर दिए हैं. बीजेपी के पूर्व विधायक कानू कलसरिया AAP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य दिनेश वाघेला की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हो गए. कलसरिया ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में निरमा के सीमेंट संयंत्र के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया था. वह पेशे से स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं.

उन्होंने सद्भावना मंच के बैनर तले गरियाधर विधानसभा सीट से साल 2012 का विधानसभा चुनाव लड़ा था. हालांकि, चुनाव में वह हार गए थे. यह पूछे जाने पर कि क्या वह आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी के खिलाफ लड़ेंगे तो कलसरिया ने कहा कि वह चुनाव लड़ेंगे या नहीं और किसके खिलाफ चुनाव लड़ेंगे इसका फैसला पार्टी करेगी और वह उसका पालन करेंगे.

समर्थकों के झाड़ू घुमाने और आम आदमी जिंदाबाद के नारे के बीच कलसरिया ने साफ तौर पर माना कि वह आप में शामिल होने से पहले कांग्रेस में शामिल होने वाले थे. उन्होंने कहा, 'मैं कांग्रेस पार्टी में शामिल होना चाहता था क्योंकि कोई और विकल्प नहीं था. अगर मैंने ऐसा किया होता तो मैंने गलती की होती. आप जनता की शक्ति का प्रतीक है और उन्होंने ऐसा दिल्ली में दिखाया.'

कलसारिया ने कहा, 'गुजरात को बीजेपी और कांग्रेस के अलावा कभी कोई तीसरा विकल्प नहीं मिला. तीसरे राजनैतिक विकल्प के तौर पर आप 2014 में भारतीय राजनीति में नया अध्याय जोड़ेगी.'

 

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जियो केजरीलाल!

मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की सरकार शायद पहली सरकार है जो विधानसभा का सामना करने से पहले दो प्रमुख चुनावी वायदों को पूरा करके दिखा दिया। अब सरकार रहे या जाए, जनता को इस फायदे से मरहूम करना मुश्किल होगा। दिल्ली की जनता को अब करीब सात सौ लीटर पानी मुफ्त मिलेगा और चार सौ यूनिट तक बिजली जलाने पर पहले की तुलना में आधी कीमत देनी होगी।

मुख्यमंत्री की ओर से इस बड़े ऐलान के साथ यह भी जताया गया कि वायदों को पूरा करने के लिए कोई हवा हवाई का तरीका नही अपनाया गया बल्कि उस पर विशेषज्ञों और अधिकारियों ने समुचित मसक्कत की है। बिजली आधी कीमत पर मुहैया कराने से दिल्ली की जनता को 31 मार्च तक चार सौ यूनिट बिजली आधी कीमत में देने से सरकारी खजाने पर महज 61 करोड़ रुपए का भार आएगा।

दिल्ली में व्यापारियों को लेकर कांग्रेस और बीजेपी में पारंपरिक होड़ रही है। इस होड़ में खुद को उतारते हुए "आप" ने व्यापारियों का दिल जीतने का भी काम कर दिखाया है। व्यापारियों को जरूरी वैट फॉर्म भरने के लिए एक महीने की अतिरिक्त राहत दे दी गई है। साथ ही वैट फॉर्म के सरलीकरण का संकेत देकर बताया है कि बगैर किसी भेदभाव के यह जनता की सुनने वाली सरकार है। दिल्ली विधानसभा का सत्र बुधवार पहली जनवरी से शुरू हो रहा है और सरकार के पास सदन की पटल पर बहुमत साबित करने के लिेए महज तीन जनवरी तक का वक्त है। ऐसे में सरकार रहे या जाए, जनता से किए दो प्रमुख वायदों को पूरा करके अरविन्द केजरीवाल ने अपना काम कर लिया है।

 

दिल्ली सचिवालय में अपने पहले कैबिनेट बैठक के फैसले की घोषणा के लिए बुलाए गए संवाददाता सम्मेलन में मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने बताया कि कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक चौधरी मतीन अहमद ने प्रोटेम स्पीकर बनना मंजूर कर लिया है। मुख्यमंत्री के इस ऐलान से साफ हो गया कि "आप" के अल्पमत की सरकार ने विधानसभा में बहुमत हासिल करने की दिशा में जरूरी कसरत करना शुरू कर दिया है।

गौरतलब है कि बीजेपी नेता जगदीश मुखी और जनता दल यू के विधायक शोएब इकबाल के प्रोटेम स्पीकर बनने से इंकार कर दिया। इसके बाद नए विधानसभा में विधायकों को शपथ दिलाने वाले का टोटा पड़ गया था। प्रोटेम स्पीकर का पेंच फंस जाने से केजरीवाल सरकार के इंजीनियरों के पसीने छूटने लगे थे। सबसे पहले सरकार की ओर से वरिष्ठतम विधायक होने के नाते बीजेपी के जगदीश मुखी को प्रोटेम स्पीकर बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था। जगदीश मुखी ने प्रोटेम स्पीकर बनने से इंकार कर केजरीवाल सरकार से बीजेपी के असहयोग की मंशा जता दी थी। मुखी ने स्पीकर बनने से सीधे इंकार करने के साथ खत लिखकर बताया है कि बीजेपी का कोई भी नेता प्रोटेम स्पीकर नहीं बनेगा।

जगदीश मुखी के इंकार के बाद केजरीवाल के लोग जनता दल (यू) की टिकट पर जीते शोएब इकबाल के पास प्रोटेम स्पीकर बनने का प्रस्ताव लेकर पहुंचे थे। बताते हैं कि आप की अल्पमत सरकार में शोएब इकबाल मंत्री बनना चाहते थे। मंत्री नहीं बनाने का खुन्नस निकालते हुए शोएब इकबाल ने भी प्रोटेम स्पीकर बनने से इंकार कर "आप" को अंगूठा दिखा दिया। इससे केजरीवाल की पार्टी सकते में थी। इसके संकेत केजरीवाल की ओर से अपनी सरकार को सिर्फ 48 घंटे की सरकार होने की बात से मिलने लगा था। शोएब इकबाल से इंकार की उम्मीद नहीं थी। खासकर जनता दल यू के नेता नीतिश कुमार के साथ शोएब इकबाल ने खुद केजरीवाल की सरकार को खुला समर्थन देने का ऐलान किया था।

प्रोटेम स्पीकर का पद अस्थायी स्पीकर यानी विधानसभा अध्यक्ष का पद होता है, जो नए सदन में विधायकों को शपथ दिलाने और स्थायी विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव होने तक सदन की कार्यवाही संचालित करता है। चौधरी मतीन अहमद की रजामंदी से हौसलामंद हुई केजरीवाल की पार्टी ने अब विधानसभा अध्यक्ष के लिए चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया है। पहले से ही सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते बीजेपी नए सदन में स्थायी विधानसभा अध्यक्ष का पद हासिल करने के फिराक में है। मगर "आप" की ओर से विधानसभा अध्यक्ष के तौर पर विधायक गिरी का नामांकन भरने के ऐलान ने सदन की शुरूआती कार्यवाही को भी बेहद दिलचस्प बना दिया है। आप के विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव में उतरने के फैसले से बिना शर्त समर्थन देने का उपराज्यपाल को चिट्ठी भेज चुकी कांग्रेस पार्टी को विधानसभा में "आप" के समर्थन में दो बार खुलकर प्रदर्शन करना पड़ सकता है। पहली बार विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव में प्रत्यक्ष मतदान से तो दो दूसरी बार सरकार के विश्वास प्रस्ताव पर ऐलान और मतदान के जरिए। "आप" के मौजूदा रुख को देखकर कहा जा सकता है कि दोनों ही बार सदन के अंदर "आप" के नेताओं के भाषण में कांग्रेस विधायकों को जलालत का सामना करना पड़े।   

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