ज्योतिष और हेल्थ
Previous123456789...2223Next
सेब खाने से पहले जरूर बरतें यह सावधानी, लापरवाही बन सकती है जानलेवा

नई दिल्ली: कहा जाता है कि जो रोज एक सेब खाता है उसके घर कभी डॉक्टर नहीं आता. डॉक्टर भी कहते हैं कि सेब जरूर खाना चाहिए. बुखार के बाद आई कमजोरी को दूर करने के लिए भी सेब ही खाने की सलाह दी जाती है. लेकिन इस फल को लेकर एक चौंकाने वाली बात सामने आई है. बताया जा रहा है कि सेब खाने से पहले उसके बीज को सावधानी जरूर हटा देना चाहिए क्योंकि यह पेट के अंदर जाते ही जहरीला हो जाता है और इससे जान जा सकती है.

सेब के लिए चित्र परिणाम

विशेषज्ञों का कहना है कि बीज में अमिगडलिन नाम का एक तत्व होता है जो पेट के अंदर पाए जाने वाले एंन्जाइम के संपर्क में आते ही सायनाइड बनाने लगता है. हालांकि जरूरी नहीं है कि ऐसा हो. लेकिन अगर कभी साइनाइड बन जाता है तो यह इंसान की बीमार बना सकता है यहां तक कि उसकी मौत हो सकती है. 

आपको बता दें कि सायनाइड अब तक सबसे घातक जहर माना जाता है. पोटेशियम सायनाइड का तो आज तक कोई स्वाद ही नहीं बता पाया है. कई फलों के बीजों में अमिगडलिन पाया जाता है हालांकि इसके जानलेवा बनने के आशंका कम रहती है. फिर भी हमें किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए. अब आप कभी भी सेब या ऐसा कोई फल जिसमें छोटे-छोटे बीज पाए जाते हैं तो उनको ठीक से जरूर हटा लें. 

... और पढ़ें

भारत में 50 फीसदी लोग नहीं करते टूथब्रश, 95 फीसदी हैं मसूड़ों की बीमारी से ग्रस्त...

आईएएनएस की खबर NDTV के माध्यम से 

भारत में दांतों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता है. हाल ही में किए गए एक अध्ययन से संकेत मिलता है कि लगभग 95 फीसदी भारतीयों में मसूड़ों की बीमारी है, 50 फीसदी लोग टूथब्रश का उपयोग नहीं करते और 15 साल से कम उम्र के 70 फीसदी बच्चों के दांत खराब हो चुके हैं. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अनुसार, भारतीय लोग नियमित रूप से दंत चिकित्सक के पास जाने की बजाय, कुछ खाद्य और पेय पदार्थो का परहेज करके स्वयं-उपचार को प्राथमिकता देते हैं. दांतों की सेंस्टिविटी एक और बड़ी समस्या है, क्योंकि इस समस्या वाले मुश्किल से चार फीसदी लोग ही दंत चिकित्सक के पास परामर्श के लिए जाते हैं. 

ब्रश करना के लिए चित्र परिणाम

आईएमए के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, "तनाव का दांतों की सेहत पर बुरा असर होता है. तनाव के चलते कई लोग मदिरापान और धूम्रपान शुरू कर देते हैं, जिसका आगे चलकर दांतों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. ज्ञान की कमी के कारण ग्रामीण इलाकों में दांतों की समस्या अधिक मिलती है. शहरों में जंक फूड और जीवनशैली की अन्य कुछ गलत आदतों के कारण दांतों में समस्याएं पैदा हो जाती हैं. प्रसंस्कृत भोजन में चीनी अधिक होने से भी नई पीढ़ी में विशेष रूप से दांत प्रभावित हो रहे हैं." 

उन्होंने कहा, "दांतों में थोड़ी सी भी परेशानी को अनदेखी नहीं करनी चाहिए और जितनी जल्दी हो सके, दंत चिकित्सक से मिलना चाहिए. दांत दर्द, मसूड़ों से रक्तस्राव और दांतों में सेंस्टिविटी को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. वयस्कों के अलावा, दांतों की समस्याएं बच्चों में भी आम होती है. दूध की बोतल का प्रयोग करने वाले शिशुओं के आगे के चार दूध के दांत अक्सर खराब हो जाते हैं."

डॉ. अग्रवाल ने बताया, "दूध की बोतल से बच्चों के दांत खराब हो सकते हैं. माताओं को हर फीड के बाद एक साफ कपड़े से शिशुओं के मसूड़े और दांत पोंछने चाहिए. अगर अनदेखा छोड़ दिया जाए तो दंत संक्रमण से हृदय संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं." 

दांतों की देखभाल के उपाय : 

* दिन में दो बार ब्रश करें. 

* फ्लॉसिंग उन दरारों को साफ करने में मदद करता है जहां ब्रश नहीं पहुंच पाता है.

* बहुत अधिक चीनी खाने से बचें. स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थ भी दांतों के क्षय का कारण बन सकते हैं, क्योंकि चीनी लार में जीवाणुओं के साथ प्रतिक्रिया करके एसिड बनाती है जो दांतों के इनेमल को नष्ट कर देता है.

* जीभ को भी नियमित रूप से साफ करें. 

* किसी भी असामान्य संकेत की उपेक्षा न करें. यदि मसूड़ों में सूजन हो या खून आ जाए तो दंत चिकित्सक से परामर्श करें. 

* दांतों की जांच हर छह महीने में कराएं. दांतों की सफाई और एक वर्ष में दो बार जांच-पड़ताल आवश्यक है.

... और पढ़ें

क्या आप को शुगर है ! तो ऐसे करे शुगर की जाँच, आपका कितना शुगर बढ़ा है

शरीर में शुगर बढ़ना सेहत के लिए नुकसानदेह है। इससे मस्तिष्क, आंख, दिल, लीवर, किडनी, अग्न्याशय, पाचन तंत्र आदि पर असर पड़ता है। रक्त में शुगर की अधिकता से कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है, जिससे दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। रक्त में शुगर के उच्च स्तर से कैंसर का भी खतरा रहता है। ऐसे में शरीर में शुगर के स्तर को नियंत्रित रखना जरूरी है। पोषण विशेषज्ञों ने कुछ आसान उपाय सुझाए हैं, जिनके जरिये शरीर में शुगर के बढ़े स्तर को पहचाना जा सकता है। इससे आहार में शुगर को नियंत्रित करने में आसानी होगी। 

                                                                   डायबिटीज के लिए चित्र परिणाम
 
त्वचा में झुर्रियां
- शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ने पर चेहरे पर मुंहासे निकलने लगते हैं 
- साथ ही चेहरे पर झुर्रियां और बुढ़ापे की लकीरें भी पड़ सकती हैं 
 
मीठे की लत  
- अगर बार- बार मीठा खाने का मन करता है, तो इससे संभल जाएं। 
- इसका मतलब है कि मस्तिष्क को ज्यादा शुगर की लत लग गई है।
- दरअसल शरीर मीठे के प्रति किसी ड्रग की तरह व्यवहार करता है।
 
ऊर्जा की कमी  
- शुगर शरीर की ऊर्जा को सोख लेती है, जिससे थकान महसूस होने लगती है।
- सामान्य खानपान के बावजूद ऊर्जा की कमी महसूस होने पर सचेत हो जाएं।
- रक्त में शुगर बढ़ने पर अग्न्याशय को कोशिकाओं को उन्हें ग्लूकोज में बदलने के लिए ज्यादा इंसुलिन का स्राव करना पड़ता है। लगातार ऐसा होने से इंसुलिन के स्राव पर असर पड़ता है। 
 
रोग प्रतिरोधक क्षमता
- रक्त में ज्यादा शुगर होने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है।
- बार-बार बीमार पड़ने, पाचन तंत्र ठीक नहीं रहने के पीछे भी शुगर की अधिकता हो सकती है।
 
बढ़ा हुआ वजन 
- वजन बढ़ना रक्त में शुगर के बढ़ने का सबसे बड़ा संकेत है।
- रक्त में शुगर बढ़ने पर वह ऊर्जा में बदलने के लिए शरीर में एकत्र होने लगती है।
- शुगर अगर ऊर्जा में नहीं बदल पाती है तो यह पेट पर एकत्र हो जाती है ।
 
अनिद्रा की समस्या
- अनिद्रा की समस्या शरीर में शुगर का स्तर बढ़ने का अहम संकेत है।
- सोने से तुरंत पहले मीठा खाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह नींद को  बाधित कर सकता है।

 

... और पढ़ें

नाइट शिफ्ट में काम करने से बुरी तरह प्रभावित होता है लीवर

लंदन : रात के वक्त यानी नाइट शिफ्ट में काम करना आपके स्वास्थय के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो सकता है. एक शोध में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि नाइट शिफ्ट में जिगर यानी लीवर बुरी तरह प्रभावित होता है. लिवर 24 घंटों में दिन और रात के हिसाब से भोजन और भूख के चक्र का आदी हो जाता है. रात की ड्यूटी यानी नाइट शिफ्ट के चलते आप समय पर भोजन नहीं कर पाते, जिसका सीधा असर आपके लिवर पर पड़ता है. शोधकर्ताओं ने चूहों पर प्रयोग कर पाया कि लिवर का आकार रात में बढ़ता है और वह खुद को ज्यादा खुराक के लिए तैयार करता है, लेकिन उसे समय पर उतनी खुराक नहीं मिल पाती. सेल नामक पत्रिका में प्रकाशित एक रिसर्च आधारित लेख में शोधकर्ताओं ने बताया है कि जब सामान्य जैविक क्रिया की लय उलट जाती है तो लिवर के घटने-बढ़ने की प्रक्रिया प्रभावित होती है.

Image result for night shift work

शोधकर्ताओं का कहना है कि व्यावसायिक बाधाओं या निजी आदतों के चलते हमारी जैविक घड़ी यानी बायोलॉजिकल क्लॉक और दिनचर्या बिगड़ती है. जिसका सीधा असर लिवर के महत्वपूर्ण कामकाज पर पड़ता है. प्रयोग के दौरान चूहों को रात में चारा दिया गया, जबकि दिन में आराम करने दिया गया.

इस मामले में जिनेवा यूनिवर्सिटी के शोध प्रमुख फ्लोर सिंटूरल ने कहा कि हमने देखा कि रात में सक्रिय चरण यानी एक्टिव फेज़ के दौरान लिवर 40 प्रतिशत से अधिक बढ़ता है और दिन के दौरान यह शुरुआती आकार में वापस आ जाता है. बायोलॉजिकल क्लॉक में बदलाव से यह प्रक्रिया प्रभावित होती है.

 

... और पढ़ें

क्या आपको मालूम है लीची खाने के ये 7 फायदे

लीची गर्मियों का एक प्रमुख फल है. स्वाद में मीठा और रसीला होने के साथ ही ये सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है. लीची में कार्बोहाइड्रेट, विटामिन सी, विटामिन ए और बी कॉम्प्लेक्स भरपूर मात्रा में पाया जाता है. इसके अलावा इसमें पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और आयरन जैसे मिनरल्स भी पाए जाते हैं.

Image result for लीची

रोजाना लीची खाने से चेहरे पर निखार आता है और बढ़ती उम्र के लक्षण कम नजर आते हैं. इसके अलावा ये शारीरिक विकास को भी प्रोत्साहित करने का काम करता है. हालांकि लीची खाते समय ध्यान रखें कि इसे बहुत अधिक मात्रा में खाना नुकसानदेह हो सकता है. बहुत अधिक लीची खाने से खुजली, सूजन और सांस लेने में कठिनाई हो सकती है.

लीची खाने के फायदे:

1. बीटा कैरोटीन और ओलीगोनोल से भरपूर लीची दिल को स्वस्थ रखने में मददगार है.

2. लीची कैंसर कोशि‍काओं को बढ़ने से रोकने में मददगार है.

3. अगर आपको ठंड लग गई है तो लीची के सेवन तुरंत फायदा मिलेगा.

4. अस्‍थमा से बचाव के लिए भी लीची का इस्तेमाल किया जाता है.

5. लीची का इस्तेमाल कब्ज से राहत के लिए भी किया जाता है.

6. मोटापा घटाने के लिए भी लीची का इस्तेमाल करना फायदेमंद है. इसके साथ ही ये इम्यून सिस्टम को भी बूस्ट करने का काम करती है.

7. सेक्स लाइफ को स्मूद बनाने के लिए भी लीची खाना फायदेमंद रहेगा. 

... और पढ़ें

आधुनिक दवाओं के कारण एचआईवी प्रभावित लोगों की जीवन प्रत्याशा लगभग सामान्य

लंदन{agency} एक नए अध्ययन में कहा गया है कि उपचार में सुधार आने के कारण अब एचआईवी से प्रभावित युवा लोग सामान्य जीवन प्रत्याशा के साथ जी सकते हैं। यह अध्ययन द लांसेट जनरल में प्रकाशित हुआ है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि वर्ष 2008 में एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी शुरू करने वाला कोई 20 साल का व्यक्ति , जिसमें उपचार के एक साल बार वायरल का प्रकोप कम रहा हो, उसकी जीवन प्रत्याशा सामान्य जनसंख्या के स्तर तक यानी 78 साल तक जा सकती है।

उन्होंने कहा कि यह वृद्धि उन लोगों में है, जिन्होंने उपचार कराया है। यह वृद्धि 1990 के दशक के मध्य में लाई गई एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी के बाद जीवन प्रत्याशा में आए सुधार से इतर है।

ये निष्कर्ष एचआईवी से ग्रस्त लोगों से जुड़े कलंक को कम कर सकते हैं और उन्हें रोजगार, चिकित्सा बीमा दिलाने में मददगार साबित हो सकते हैं। इसके साथ-साथ यह उन लोगों को जल्द उपचार शुरू करने और उसे जारी रखने के लिए प्रेरित कर सकते हैं, जिनमें एचआईवी पाया गया है।

... और पढ़ें

Previous123456789...2223Next