पत्रकार : सनंत सिंह

नोएडा : प्रसिद्ध शिक्षाविद प्रो.योगेश कुमार ने कहा है, कि भिक्षाटन से जीवन में उपेक्षा एवं उपहास सहने की क्षमता का विकास होता है।इसी वजह से प्राचीन काल में गुरुकूल में भिक्षाटन की दीक्षा दी जाती थी।

प्रो.कुमार ने गत दिनों अपने संस्थान जेआईटीएम के कुछ सहकर्मियों के साथ भिक्षाटन से लौटने के बाद यह बात कही।उन्होंने कहा कि इस दौरान भीख देने में कमजोर लोग काफी आगे रहे,जबकि अमीरों ने उदासीनता दिखाई।

उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में भिक्षाटन की शिक्षा विद्यार्थियों को शारीरिक एवं मानसिक तौर पर मजबूत बनाने के लिए दी जाती थी,लेकिन अब यह परंपरा समाप्त हो गयी है।

भौतिक शास्त्री प्रो.कुमार ने यह भी कहा कि पैसा साधन हो सकता है,साधक नहीं।पैसा बहता पानी की तरह है।इसलिये यह सदा एक व्यक्ति के पास नहीं रह सकता है।लोगों को इस भाव को समझना चाहिए।एल.एस।

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