बस्तर

कोबरा के जवानों ने किया दलपत सागर में श्रमदान - कहा स्थति देख हुआ बड़ा दुःख

कोबरा के जवानों ने किया दलपत सागर में श्रमदान - कहा स्थति देख हुआ बड़ा दुःख

TNIS

13 वें दिन रविवार को सफाई अभियान में बड़ी संख्या में लोगों ने भी किया श्रमदान, सागर की गहरारियों में दबी एक वोट को भी निकाला गया बाहर 

जगदलपुर : छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े तालाब की सफाई अभियान में रविवार को अपनी सहभागिता देने करणपुर स्थित सीआरपीएफ कोबरा बटालियन के जवान भी पहुंचे और जलकुंभीयों को निकालने श्रमदान किया।सुबह 6:00 बजे कोबरा बटालियन 201 के जवान दलपत सागर पहुंच गए और अभियान के सदस्यों के साथ जलकुंभीयों को निकालते हुए श्रमदान किया।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में शहर के लोगों ने भी श्रमदान किया।रविवार को लगभग 4 टन कचरा दलपत सागर से बाहर निकाला गया.जवानों के हौसले को देखते हुए आइलैंड में सुबह घूमने आए लोग भी अपने आप को रोक नहीं पाए और वे भी इस महाअभियान का हिस्सा बनते हुए जलकुंभीयों को तालाब से बाहर निकालने में जुट गए.रविवार होने की वजह से साफ सफाई अभियान 3 घंटे तक संचालित हुई और इन 3 घंटों में लगातार दलपत सागर से कचरे बाहर निकाल फेंका गया.इतना ही नहीं तालाब के अंदर फंसे एक वोट को भी जवानों की मदद से बाहर निकाला गया.

श्रमदान करने आए जवानों का कहना है कि वे जनता की सुरक्षा के साथ-साथ अपनी सामाजिक दायित्व का भी निर्वहन करते हैं.यही वजह है कि वे नक्सल मोर्चे में काम के साथ-साथ उन ग्रामीणों की भी मदद करते हैं जिनकी उन्हें जरुरत होती है.जवानों ने कहा की दलपत सागर विशाल है और उसकी स्थति देखकर काफी दुख हुआ अखबारों के माध्यम से महाअभियान की जानकारी मिली वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा उपरांत उन्होंने यहां श्रमदान करने की ठानी और वे सुबह सुबह तालाब किनारे पहुंच गये.जवानों ने कहा कि जब भी उन्हें समय मिलेगा वे सुबह जरूर आएंगे और इस अभियान के हिस्सेदार बनेंगे।

अभियान के सदस्य अनिल लुंकड ने श्रमदान करने आये सभी जवानों का स्वागत किया तथा उनका हौसला अफजाई किया .श्री लुंकड ने कहा की विशाल दलपत सागर को बचाना बस्तर वासियों का मूल कार्य है.धीरे धीरे ही सही अभियान अपने मुकाम पर पहुँच कर रहेगा।शासन प्रशासन तक महाअभियान  की गूंज पहुँच रही है.इन्तजार सागर को बचाने के लिये होने वाले प्रयाश का है.अभियान से जुड़े अन्य सदस्यों का भी कहना है की छत्तीसगढ़ के इस विशाल तालाब को संरक्षित करने तथा शासन प्रशासन का ध्यान आकर्षण हेतु अभियान की शुरुआत की गई है.भले ही साल 6 महीने लग जाए मगर तालाब को संरक्षित करने जलकुंभी और कचरो को जरूर निकालेंगे चाहे शासन का समर्थन मिले या ना मिले। मगर इस धरोहर को बचाने के लिए कुछ भी करना पड़े कर सकते हैं

                     गौरतलब है की  बस्तर की प्राणदायिनी इंद्रावती नदी को बचाने के लिए शुरू हुई मुहिम ने बस्तर मुख्यालय जगदलपुर में वृहद आंदोलन की शुरुवात कर दी.अभियान से जुड़े सदस्यों और नगरवासियों ने छतीसगढ़ के सबसे बड़े तालाब को सरंक्षित करने के बेडा उठाया है.इंद्रावती नदी के सूख जाने से बस्तर के लोगों ने शासन के प्रति काफी आक्रोश जताया था और 14 दिन तक पदयात्रा कर इंद्रावती बचाने के लिए बड़ा आंदोलन छेड़ा था - वर्षा ऋतु में अभियान के सदस्यों द्वारा  5 हजार पौधे रोपण करने के बाद छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े तालाब की दुर्दशा को देखते हुए एक नये अभियान की शुरुआत की है 5 नवंबर से शुरू हुए इस अभियान में लगातार लोग जुड़ते जा रहे हैं प्रतिदिन उत्साह के साथ लोगों का जमावड़ा दलपत सागर में देखने को मिल रहा है और यहीं से लोग पूरे जोश के साथ दलपत सागर में फैले कचरे और जल जलकुंभीयों को बाहर खींच रहे हैं.अब तक शासन प्रशासन का कोई सहयोग अभियान के सदस्यों  को नहीं मिला है फिर भी निस्वार्थ रूप से प्रतिदिन अभियान से जुड़े लोग अपना काम सतत जारी रखे हुए हैं.

ANI बस्तर 

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