बस्तर

बस्तर की शार्क -बोध मछली, कभी पायी जाती थी बहुतायत में, अब विलुप्ति के कगार पर

बस्तर की शार्क -बोध मछली, कभी पायी जाती थी बहुतायत में, अब विलुप्ति के कगार पर

Bastar Bhushan के फेसबुक वाल से  

बस्तर की इंद्रावती नदी में एक समय बस्तर की शार्क कही जाने वाली बोध मछली बहुतायत में पायी जाती थी किन्तु अत्यधिक शिकार के कारण यह अब विलुप्ती की कगार पर पहुंच गई है। यह मछली वजन में 150 किलो तक हो जाती है। इस मछली को पकड़ने के लिये लोहे की जाल का इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि सामान्य जाल को यह अपने दांतों से काट देती है इसलिये इसे बस्तर की शार्क कहा जाता है।

बोध मछली असल में कैटफिश है जिसका वैज्ञानिक नाम बोमारियस बोमारियम है। इंद्रावती नदी के किनारे रहने वाले कुडूक जाति के लोग इस मछली की पूजा करते है। बारसूर का बोधघाट गांव बोध मछली के नाम पर ही पड़ा है। मछली के अधिक वजनी होने के कारण मछुआरे इसका अत्यधिक शिकार करते है। यह मछली बाजार में दो हजार रूपये तक की कीमत में बिकती है। पानी से 24 घंटे तक बाहर रहने के बावजूद भी यह मछली जिंदा रहती है। बस्तर में इंद्रावती के अलावा कोटरी नदी में भी बोध मछलियां पायी जाती थी किन्तु अब वहां यह मछली यदा कदा ही दिखती है।

इसके अतिरिक्त देश की ब्रहमपुत्र व गोदावरी के अलावा बस्तर की इंद्रावती नदी में चित्रकोट जलप्रपात के नीचे से लेकर इंद्रावती.गोदावरी नदी के संगम तक यह बोध  मछली पाई जाती है। मछली का संरक्षण समय रहते हुये आवश्यक है, नहीं तो, कोटरी नदी की तरह इंद्रावती से भी यह मछली विलुप्त हो जायेगी।

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