जशपुर

भुइयां साफ्टवेयर बदलाव से पटवारी परेशान, किसान चिंतित

भुइयां साफ्टवेयर बदलाव से पटवारी परेशान, किसान चिंतित

क़ादिर रज़वी

जशपुर : भुइयां सॉफ्टवेयर का नया वर्जन पटवारियों के लिए इन दिनों सिरदर्द बना हुआ है इस सॉफ्टवेयर से पूरे प्रदेश भर के पटवारी परेशान है इसकी वजह से किसानो के जरुरी काम भी नहीं हो पा रहे हैं किसान मई की तपती धूप में पटवारी और तहसील ऑफिस के चक्कर काट रहे हैं जशपुर के किसान भी इसी परेशानी का सामना कर रहे हैं यहाँ बीते 20 दिनों से पटवारी काम नही कर पा रहे है। जिसकी वजह से किसानो के काम भी रुके पड़े हैं।

बता दें कि भुइयां सॉफ्टवेयर के माध्यम से ही भूमि संबंधी अभिलेख, राजस्व अभिलेख के समस्त नामांतरण संसोधन, बंटाकन व अन्य कार्य पटवारी अपने आईडी से लॉग इन करके करते हैं भुइयां सॉफ्टवेयर बदलने की वजह से ये सभी अटक गए हैं बता दें कि अगर किसी भी भू-स्वामी को जमीन संबंधी काम कराने के लिए पहले तहसीलदार को आवेदन देना होगा। इसके बाद पटवारी संबंधित काम करेंगे। इस प्रक्रिया से भूस्वामियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

पूर्व सरकार के समय भी कई दफा भुइयां सॉफ्यवेयर में कुछ न कुछ बदलाव होते रहे और वर्तमान में तो इस सॉफ्टवेयर में ऐसा बदलाव हुआ है कि पटवारियों के ये पल्ले ही नहीं पड़  रहा है राजधानी रायपुर से सॉफ्टवेयर को अपडेट तो कर दिया जा रहा है लेकिन इस नए साफ्टवेयर का प्रशिक्षण पटवारियों को अभी नही दिया गया.

बताया जा रहा है कि नए साफ्टवेयर में नए खसरा नम्बर जोड़ने हेतु संकलन हटा दिया गया है,जबकि विलोपन विकल्प तो पूर्व ही हटा दिया गया है साथ ही नए सॉप्टवेयर में किसान का नाम,पिता,पति का नाम जाति, लिंग जैसे सामान्य त्रुटि सुधारने हेतु संशोधन को हटा दिया गया है,इस सॉफ्टवेयर में खसरा संशोधन भी हटा दिया गया है इसी तरह नामांतरण,फौती, बटवारा ऑप्शन भी वर्तमान भुइयां साफ्टवेयर में नही दिख रहा है जिसके कारण रिकॉर्ड दुरुस्तीकरण नामांतरण की प्रक्रिया रुकी हुई है जिससे अभिलेख दृष्टि संबंदी का काम नही हो रहा है।

खाद-बीज के लिए पड़ती है दस्तावेजो की जरूरत:-

   वर्तमान समय मे किसानों को सोसायटी से खाद बीज लेने हेतु ऑनलाइन बी-1,खसरा,मांगा जा रहा है इसके अलावा किसान बंधुओ को बी-1,खसरा,नक्सा, केसीसी लोन लेने हेतु जरूरत पड़ती है मानसून आने को अब महज़ अब 15-20 दिन रह गए है ऐसे में किसान खाद बीज कैसे जुटा पायेगा ये उनकी लिए चिंता बनी हुई है । 

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