ज्योतिष और हेल्थ

अमेरिकी डॉक्टरों को बड़ी सफलता, धूम्रपान से खराब दोनों फेफड़ों का सफल ट्रांसप्लांट

अमेरिकी डॉक्टरों को बड़ी सफलता, धूम्रपान से खराब दोनों फेफड़ों का सफल ट्रांसप्लांट

एजेंसी 

वॉशिंगटन : अमेरिकी डॉक्टरों ने पहली बार किसी युवक के दोनों फेफड़ों के प्रत्यारोपण किए जाने का दावा किया है। मिशिगन के एक अस्पताल में डक्टरों ने करीब 6 घंटे की सर्जरी के बाद 17 साल के युवा एथलीट के छलनी हो चुके दोनों फेफड़ों का सफल प्रत्यारोपण का दावा किया है। युवक के दोनों फेफड़े वेपिंग के कारण पूरी तरह खराब हो गए थे, जिससे प्रत्यारोपण करना जरूरी हो गया था।

डॉक्टरों को मिली बड़ी कामयाबी दरअसल, ई-सिगरेट या किसी ऐसी चीज से भाप के रूप में निकोटिन लेना वेपिंग कहलाता है। एथलीट को सबसे पहले 5 सितंबर को सेंट जॉन अस्पताल में भर्ती किया गया था। हालांकि, कुछ दिनों के भीतर ही उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी थी। हालत बिगड़ने पर डॉक्टर्स ने उसे 12 सितंबर को वेंटिलेटर पर रखा था। इसके बाद मरीज की हालत में सुधार होने लगा तो उसे मिशिगन ले जाया गया। डॉक्टरों ने कहा कि मरीज की स्थिति अति गंभीर थी, इसलिए उसके दोनों फेफड़े ट्रांसप्लांट करने पड़े।

17 साल के एथलीट के दोनों फेफड़ों का सफल ट्रांसप्लांट अस्पताल के ऑर्गन ट्रांसप्लांट विभाग के डायरेक्टर हसन नेमह ने कहा, 'मैं 20 साल से फेफड़ों का प्रत्यारोपण कर रहा हूं, लेकिन एथलीट के फेफड़ों में जो देखा, ऐसा कभी नहीं देखा था। ये पहली बार ही सामने आया था। मृत ऊतको के अलावा मरीज के फेफड़ों में काफी सूजन और जख्म थे। फेफड़ों की हालत इतनी खराब थी कि सर्जरी कर उसे निकालने के अलावा कोई चारा ही नहीं था।'

वेपिंग के कारण खराब हुए थे दोनों फेफड़े एथलीट के फेफड़ों की स्थिति को लेकर डॉक्टर्स ने काफी लंबी जांच की। सीडीसी ने ई-सिगरेट के इस्तेमाल को इसके लिए संभावित तौर पर जिम्मेदार पाया। डॉक्टरों के मुताबिक, वेपिंग के चलते जान गंवाने वाले या बीमार मरीजों के फेफड़ों से लिए तरल पदार्थ के नमूनों में उन्हें ऐसा चिपचिपा पदार्थ मिला, जिसका उपयोग कई ब्लैक-मार्केट टीएचसी उत्पादों में एक गाढ़ा करने वाले एजेंट के रूप में होता है। सीडीसी के मुताबिक, इस सर्जरी ने अमेरिका में वेपिंग से पड़ने वाले बुरे प्रभाव की तरफ गंभीर इशारा किया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वेपिंग से जुड़ी बीमारियों की वजह से कम से कम 39 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 2 हजार से अधिक लोग अस्पताल में हैं।

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