विशेष रिपोर्ट

स्वाधीनता का अमृत महोत्सव: घर-घर तिरंगा से बढ़ेगी देशप्रेम की भावना

स्वाधीनता का अमृत महोत्सव: घर-घर तिरंगा से बढ़ेगी देशप्रेम की भावना
तेज़ सिंह भुवाल 
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इस वर्ष हम भारत की स्वाधीनता की 75वीं वर्षगांठ को ‘‘आजादी का अमृत महोत्सव’’ के रूप में मना रहे हैं। यह स्वाधीनता के लिए हमें जिन कठिनाईयों और मुश्किलों का सामना करना पड़ा, उसे भुलाया नहीं जा सकता। इस आजादी के लिए हमारे पूर्वजों ने कितनी वेदना, दण्ड, भूख और जुल्म सहे होंगे। हम गुजरे हुए वक्त की कल्पना भी ठीक से नहीं कर सकते हैं। प्रत्यक्षदर्शी व इतिहासकारों के द्वारा लिखी गई बातों को ही हम अनुसरण कर सकते हैं। इस विकट दुखभरी बातों को पढ़कर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। इस पर बनी कई फिल्मों, नाटकों को देखकर मन बहुत व्याकुल हो उठता है। आजादी की लड़ाई में किसी का परिवार, किसी का घर, किसी का पूरा साम्राज्य ही चला गया। 
             भारत देश में अनेक वीर योद्धा हुए जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ अनेक लड़ाई लड़ी और अपने प्राणों की आहुति तक दे दी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आजादी की लड़ाई में महान स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाई, जहां एक ओर महात्मा गांधी जी ने शांति और अहिंसा का मार्ग अपनाया था तो दूसरी ओर भगत सिंह, आजाद जैसे बहादुर वीर क्रांतिकारी नेता हुए। अलग-अलग विचारधारा के लोग एकजुट होकर देश की आजादी के अभियान में शामिल हुए। किसी ने अंग्रेजों के खिलाफ अखबार में लिखना शुरू किया तो किसी ने हथियार उठाये, किसी ने अपने ओजपूर्ण भाषणों से लोगों को जगाया, कइयों ने लोगों को जोड़ने का कार्य किया तो कई सीधे अंग्रेजों से भीड़ गए। गांधीजी ने अपने अहिंसा और सत्याग्रह के बल पर अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाई। गांधी जी ने सभी लोगों को भी शांति व अहिंसा के मार्ग पर चलने की सीख दी और आखिरकार उन्हें सफलता मिली। उन सभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की बदौलत अंग्रेजों को हमारे भारत देश को छोड़कर जाना पड़ा।
           स्वाधीनता के लिए हमारे पूर्वजों, वीर योद्धाओं, देशभक्तों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने भारत देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। देश की आजादी के लिए हमारे महापुरूषों ने जो लड़ाई लड़ी वह कोई साधारण नहीं थी, वे पूरे जीवन अंग्रेजों के खिलाफ देश की जनता के साथ हो रहे शोषण, बेरोजगारी, भुखमरी, लाचारी व अत्याचार को दूर करने का प्रयास किया। 
            इसी प्रकार पूरे भारत वर्ष के सभी क्षेत्रों के स्वतंत्रता सेनानियों ने इस पुनीत कार्य में हिस्सा लिया। इसी लड़ाई में छत्तीसगढ़ के वीर नारायण सिंह, गेंद सिंह, ठाकुर प्यारेलाल, पंडित माधव राव सप्रे, पंडित सुन्दर लाल शर्मा, डॉ. खूबचंद बघेल जैसे कई स्वतंत्रता सेनानियों ने भी आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों का डटकर सामना किया और अपने जीवन के अंत तक भारत की आजादी के लिये कड़ा संघर्ष किया। 
             आजादी का दिन इतिहास के पन्नों पर स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो चुका है। आजादी के पश्चात् हमारा भारत देश सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश बना। हमारा देश अनेक, जाति, धर्म विविधता में एकता के लिये प्रसिद्ध है। स्वतंत्रता दिवस की वर्षगांठ में हम प्रत्येक वर्ष पूरे भारत देश में 15 अगस्त को बड़ी धूमधाम से मनाते हैं और साथ ही साथ उन सभी महान लोगों याद करते हैं, जिनके कठिन संघर्षों की वजह से हम देश की आजादी से भारत देश में रहने के लायक बने हैं और अपनी इच्छा से खुली हवा में साँस ले सकते हैं, यह सब हमारे पूर्वजों की देन है। इस वर्ष का स्वतंत्रता दिवस बहुत खास है, क्योंकि हम इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर ‘‘आजादी का अमृत महोत्सव’’ मना रहे हैं।
यह आजादी हमें कई वर्षों के संघर्षों के बाद लाखों लोगों के बलिदान से मिली हैं। इसे हमें संजोकर रखना चाहिए। हमें हमारी मातृभूमि का सदैव स्मरण रखना चाहिए। हमारे देश की धरती में जन्में उन सभी वीर योद्धाओं, समाज-सेवियों एवं संग्राम सेनानियों को नमन करना चाहिए और अपनी मातृभूमि के लिए सदा समर्पण की भावना रखना चाहिए। देशवासियों को अपने देश पर गर्व होना चाहिए एवं राष्ट्रध्वज का सदा सम्मान करना चाहिए।
            हम सभी जानते थे कि पहले भारतीयों को राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराने की इजाजत केवल 15 अगस्त व 26 जनवरी को ही थी। लेकिन अब उद्योगपति श्री नवीन जिंदल ने भारतीयों को इसे हर दिन फहराने का अधिकार दिलाया है। श्री जिंदल ने करीब दस वर्षों तक इसके लिए लड़ाई लड़ी और आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने 23 जनवरी 2004 को महत्वपूर्ण फैसले में भारतीयों को इसे पूरे सम्मान के साथ किसी भी दिन फहराने का अधिकार दिया। इस फैसले के बाद संविधान में संशोधन किया गया है। हमारे देश के प्रधानमंत्री जी ने इस वर्ष 75वीं वर्षगांठ पर आजादी का अमृत महोत्सव के रूप में भारत देश को ‘हर घर तिरंगा’ फहराने का आग्रह किया है। इस अभियान में पूरे देश में घरो-घरों तिरंगा लहरा रहा है, इस अमृत महोत्सव ने लोगों के दिलों में एक नई खुशी, उल्लास और देश प्रेम को बढ़ा दिया है। हर व्यक्ति के मन में देश प्रेम और तिरंगे के प्रति सम्मान बढ़ता की जा रहा है। हमारा राष्ट्रीय ध्वज न केवल प्रत्येक भारतीय को एकजुट करता है बल्कि राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को भी मजबूत करता है। 
तिरंगे झंडे फहराने के कुछ नियम बताए गए है, जिसके अनुसार इसका पालन करना अनिवार्य है-
          फ्लैग कोड के मुताबिक तिरंगे को पूरे सम्मान के साथ सभी अवसरों पर किसी भी स्थान पर फहराया जा सकता है। तिरंगा किसी भी आकार का हो सकता है यानी कितना भी छोटा या बड़ा लेकिन हर ध्वज में इसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3रू2 होना चाहिए। तिरंगा का केसरिया रंग हमेशा ऊपर रहना चाहिए। तिरंगा कटा-फटा नहीं होना चाहिए। इसके अलावा यह जमीन और पानी को नहीं छूना चाहिए। तिरंगा के साथ कोई और झंडा उसके बराबर नहीं फहराना चाहिए। पहले राष्ट्रीय ध्वज को केवल सूर्वोदय से सूर्यास्त तक फहराया जाता था। अब रात में भी तिरंगा फहराया जा सकता है, लेकिन इसक
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