विशेष रिपोर्ट

Opah fish की मौत के बाद वैज्ञानिकों की चेतावनी

Opah fish की मौत के बाद वैज्ञानिकों की चेतावनी

एजेंसी 

नई दिल्ली : बेहद दुर्लभ माने जाने वाली मून फिश की आखिरकार मौत हो गई। अमेरिका के ओरेगन सीसाइट में एक समुद्र तट पर यह विशालकाय और दुर्लभ कई रंगों वाली इस दुर्लभ मून फिश ने दम तोड़ दिया है। मून फिश की मौत के बाद वैज्ञानिकों ने दुनिया के लिए चेतावनी जारी की है और कहा है अगर इंसानों ने इस संकेत को जल्द समझना शुरू नहीं किया, तो इंसानों का भी कुछ ऐसा ही हाल होने वाला है। मूनफिश, जिसे ओपा भी कहा जाता है, वो करीब साढ़े तीन फीट लंबी थी और आमतौर पर उष्णकटिबंधीय और समशीतोष्ण पानी में पाई जाती है, लेकिन बताया जा रहा है कि समुद्र का पानी गर्म होकर उबलने लगा और इसीलिए इस दुर्लभ मछली की तड़प कर मौत हुई है।

समुद्र की स्थिति में परिवर्तन

बेहद दुर्लभ होती है मून फिश
बेहद दुर्लभ माने जाने वाली मून फिश करीब 6 फीट तक लंबी होती हैस लेकिन नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन यानि एनओएए के बॉयोलॉजिस्ट हेइडी देवर ने वाशिंगटन पोस्ट को बताया कि ''इस मछली का इतना कम आकार का होना अकल्पनीय है''। बॉयोलॉजिस्ट हेइडी देवर ने कहा कि ''मून फिश उबल गई थी और ये पानी में क्यों उबली है, इसको लेकर रिसर्च किया जाना बेहद जरूरी है''।

इंसानों के लिए चेतावनी

मछली पर रिसर्च बेहद जरूरी

उन्होंने ये भी कहा कि इस दुर्लभ मछली की मौत के बारे में गहन अध्ययन किया जाना जरूरी है और उसने पिछले दिनों क्या खाया था और उसके पेट में क्या सब है, उसका अध्ययन करने के बाद मछली की मौत के बारे में ज्यादा जानकारी हाथ लग सकेगी। उन्होंने ये भी कहा कि 'यह असाधारण मछली कहा रहती थी, इसका पता लगाना भी जरूरी है'। आपको बता दें कि सीसाइड एक्वेरियन ने सबसे पहले इस दुर्लभ मछली को समुद्र तट पर मृत देखा था और फिर मछली को लेकर तमाम जानकारियां साझा की गई हैं। आपको बता दें कि समुद्र में कई दुर्लभ मछलियां पाई जाती हैं और उनके आधार पर पृथ्वी के इतिहास से लेकर आने वाले भविष्य को लेकर भी कई सारी जानकारियां जुटाई जाती हैं। मछलियों पर अध्ययन से ये भी पता चलता है कि इंसानों पर भविष्य में क्या खतरे आ सकते हैं।

ध्रुव की तरफ पलायन

समुद्र की स्थिति में परिवर्तन

आपको बता दें कि इससे पहले साल 2009 में भी ओपाह मछली पाई गई थी, जिसका वजन करीब 42 किलो था और उसे कोलंबिया नदी में पकड़ा गया था। लेकिन, इस बार ओपाह मछली यानि मून फिश मृत पाई गई है, लिहाजा वैज्ञानिकों ने पारिस्थितिक तंत्र को लेकर गहरी चिंता जताई है। सबसे दिलचस्प बात ये है कि इसी मछली के बारे मे इसी साल अप्रैल में एक अध्ययन किया गया था, जिसमें कहा गया था कि ''समुद्र में पानी लगातार गर्म हो रही है, जिसकी वजह से मून फिश का गर्म समुद्र में रहना काफी मुश्किल होने वाला है और हो सकता है कि ये मून फिश गर्म पानी से जानबचाकर ठंडे पानी वाले हिस्सों की तरफ पलायन करे''।

ध्रुव की तरफ पलायन

वहीं पीएनएएस पत्रिका में प्रकाशित रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, ऑकलैंड विश्वविद्यालय के नेतृत्व में रिसर्चर्स ने पाया है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से समुद्र की स्थिति में लगातार परिवर्तन हो रहा है और समुद्र में रहने वाली मछलियों, मोलस्क, पक्षियों और कोरल की करीब 50 हजार प्रजातियां 1955 के बाद से ध्रुवों की तरफ चले गये हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह लगातार समुद्री पानी का गर्व होना बताया गया है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि समुद्र के अंदर जीवों की वो प्रजाति, जो चलायमान हैं, वो तेजी से ध्रुवों की तरफ पलायन कर रहे हैं, जो काफी चिंताजनक है और समुद्र की पारिस्थितिक तंत्र के लिए काफी खतरनाक है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि समुद्र का औसतन तापमान 20 डिग्री सेल्सियस तक जा चुका है, जो समुद्र में रहने वाली कई प्रजातियों के रहने के लिए अनुकूल नहीं है। ऐसे में ये प्रजातियां लुप्त हो सकती हैं।

इंसानों के लिए चेतावनी

वैज्ञानिकों ने कहा है कि समुद्र का बढ़ता तापमान स्थानीय प्रजातियों के लिए समुद्र में रहना काफी मुश्किल बना रहे हैं, लेकिन दिक्कत ये है कि ध्रुव की तरफ वाले समुद्र में भी पानी धीरे धीरे गर्म होना शुरू हो चुका है, जिसकी वजह से इन दुर्लभ प्रजातियों पर लुप्त होने का खतरा मंडराने लगा है। ऑकलैंड विश्वविद्यालय में समुद्री जीव विज्ञान के प्रोफेसर और वरिष्ठ लेखक मार्क कॉस्टेलो ने न्यूज एजेंसी एएफपी को कहा कि 'ग्लोबल वार्मिंग की वजह से कम से कम पिछले 60 सालों में समुद्री जीवन को काफी बदल चुका है'। उन्होंने कहा कि 'हमारे रिसर्च में पता चला है कि कम से कम 1500 प्रजातियां अब गायब हो चुकी हैं और अगर हम ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन को रोकने में कामयाब नहीं होते हैं तो आगे स्थिति और खतरनाक हो सकती है'

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