विशेष रिपोर्ट

सफलता की कहानी: मनरेगा से कूप बनवा किसान खेतों की सिंचाई कर उगा रहे रबी की फसल

सफलता की कहानी: मनरेगा से कूप बनवा किसान खेतों की सिंचाई कर उगा रहे रबी की फसल

TNIS
सूरजपुर : हमारी पीढ़ी के महानतम व्यक्ति की महत्वाकांक्षा हर आंख से हर आंसू पोछने की रही है या शायद हमारे लिए कर पाना मुश्किल हो परंतु जब तक आंसू और पीड़ा है तब तक हमारा कार्य समाप्त नहीं होगा देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का उक्त कथन नरेगा जिसे 2 अक्टूबर 2009 से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मनरेगा नाम दिया गया है की सार्थकता एवं सफलता को स्वयं सिद्ध कर रहा है महात्मा गांधी के सपनों का भारत बनाने में मनरेगा जैसी योजनाओं की ही आवश्यकता है।

सूरजपुर जिले के कई स्थानों में सब्जी उत्पादन कर किसान अपनी आजीविका चला रहे हैं मनरेगा योजना के तहत सिंचाई सुविधा मिलने से सब्जी उत्पादन से किसानों के लिए अच्छी आमदनी का जरिया बन गया है और किसानों की आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हुई है।

सूरजपुर जिले के असिंचित क्षेत्र जहां वर्षा के पानी पर निर्भर ग्रामीण जन आज महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मनरेगा की बदौलत व्यक्तिगत कूप निर्माण कर असिंचित क्षेत्र को सिंचित करने में लगे हुए हैं और कुओं का निर्माण कर अपने खेतों में कुओं के पानी से सिंचाई कर साग सब्जियों व फलों के बगीचे एवं मूंग दाल का उत्पादन कर आजीविका के स्रोत को बढ़ा रहे हैं।

नरेगा के तहत जिला सूरजपुर, जनपद सूरजपुर के ग्राम पंचायत छतरपुर के हितग्राही बंधु राम पिता नेतू राम ने निजी भूमि पर 4.5 लाख का कूप निर्माणके द्वारा 3 एकड़ में तरबूज की खेती किया गया एवं तरबूज की खेती में लगभग 500000 की आमदनी हुई । वे बताते हैं कि पहले वे अपनी भूमि पर सिर्फ धान की खेती कर पाते थे जिससे उन्हें 50000 तक की आमदनी होती थी किंतु वे अब इस कूप से रबी की फसल भी ले पा रहे हैं।

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